होम पर वापस जाएं
चुदाई की कहानी पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 245 बार

जन्मदिन का उपहार

sexandfun25

05 Dec 2009 को प्रकाशित

जन्मदिन का उपहार
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

प्रेषक : मुकेश कुमार

दोस्तो, आज मैं अपनी सच्ची कहानी आपके सामने रखने जा रहा हूँ।

यह बात उस समय की है जब मैं इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था और मेरी उम्र 19 साल थी। मैं एक कोचिंग क्लास में पढ़ता था, मेरा नंबर हमेशा क्लास में सबसे ऊपर रहता था और मेरा रहने का ढंग मुझे लोगों से अलग और थोड़ा बिंदास बना देता था। सो मुझे सारे लड़के और लड़कियाँ अच्छे से जानने लगे, इस तरह मैंने आसानी से सबको अपना दोस्त बना लिया।

कुछ लड़कियाँ भी मेरी दोस्त थी मगर वो सब बस मजे में रहने के लिए ! चूँकि मैं शांत मिजाज का लड़का था सो कोई भी मुझसे आराम से दोस्ती कर लेता था। मगर मेरा लण्ड शांत नहीं रहता था सो कभी कभी दिया को याद कर मुठ मार लिया करता था। दिया मेरे ही बीच की होने के कारण केवल मुझसे ही बातें किया करती थी। उसकी फिगर 32-28-32 थी। यह उसने खुद बताया था।

हम दोनों की बातचीत बस पढ़ाई तक ही सीमित रहती थी। मगर मुझे सबसे ज्यादा मजा उसी से आता था क्योंकि वो क्लास में सबसे सेक्सी थी और पढने में भी उसका नंबर मेरे बाद आता था।

अभी मैं इंजीनियरिंग में हूँ मगर उससे सेक्सी और सुलझी लड़की अभी तक नहीं मिली है।

एक दिन उसने अपने घर मुझे बुलाया अपने जन्मदिन पर ! चूंकि उसके मम्मी पापा की भी बात मुझसे हो गई थी सो मुझे उसके घर आने-जाने की समस्या ख़त्म हो गई। अब मैं उसके घर आसानी से जा सकता था। मैं अकेले रहने के कारण उनके काम भी आने लगा था, मगर मेरा काम भी इससे पूरा हो रहा था। कभी मैं उसका हाथ पकड़ लेता था तो वो शरमा जाती थी।

मुझे उसके चूचों के भी दर्शन हो रहे थे। उसके जन्मदिन में बहुत सारे लोग आए हुए थे मगर अधिकांश तो दोस्त ही थे।

काफ़ी सारे काम मेरे जिम्मे थे जिसके कारण मैं बार बार दिया के पास चला जाता। वो भी इस बात को समझती थी। इस तरह मैं रात को लेट हो गया। मैं जब अपने घर जाने लगा तो आंटी ने मुझे वहीं पर रुकने को बोल प्रिया। मैं भी यही चाह रहा था, कई दिनों से मैं दिया को चोदने के बारे में सोच रहा था, आज मैं इस मौके को हाथ से नहीं निकलने देना चाह रहा था।

आँगन में गेस्ट-रूम में मुझे सुलाया गया मगर मुझे तो बस उसे चोदने के लिए एक मौका चाहिए था। मेरे कमरे के बगल में ही बाथरूम था। कुछ देर बाद दिया वहाँ बाथरूम में नहाने के लिए आई। उसने बाथरूम को अंदर से बंद कर लिया। चारों तरफ अँधेरा था, सो मैं बाथरूम के पीछे जाकर एक छेद से देखने लगा।

उसने पहले तो अपने पहनने वाले सारे कपड़े रस्सी पर रख दिए, फिर पानी के लिए नल चला प्रिया। मुझसे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था। मेरा लण्ड पैंट से निकलने को बैचैन हो रहा था।

अब उसने अपनी टॉप जो पार्टी में उसने पहन रखी थी, उतार दी। अब वो बस जींस और ब्रा में थी। मैंने अपने लण्ड को बाहर निकाल लिया। अब उसने अपनी जींस को भी उतार प्रिया, उसके बदन पर मात्र एक चड्डी और ब्रा बची हुई थी। मेरी हालत खराब होने लगी थी।

अचानक उसने अपनी रति सदृश काया पर तौलिया लपेटा और बाहर चली आई। शायद वो कोई कपड़ा भूल गई थी। मैं जिस पल का इंतज़ार कर रहा था वो मुझे भगवान् ने दे प्रिया। उस समय मेरे दिमाग में न जाने क्या आया कि मैं उसी हालत में बाथरूम में घुस गया।

वो पुनः बाथरूम में आई और बाथरूम का दरवाज़ा बंद कर लिया। चूंकि बाथरूम की रोशनी कम थी सो वो मुझे शायद देख नहीं पाई होगी।

वो जैसे ही तौलिया खोलते हुए घूमी, मुझे देख कर उसकी चीख निकल गई। मैंने तुरंत उसके मुँह को अपने होठों से दबा प्रिया। मेरा लण्ड उसकी जाँघों के बीच फंस गया।

उसकी इस आवाज से उसकी मॉम आ गई।

उसकी मम्मी की आवाज सुनकर मेरी तो जान निकल गई थी। तो डर कर मैंने उसे और कस कर दबा लिया। शायद इस दबाव से उसे मजा आने लगा, उसकी मॉम के पूछने पर बिना दरवाज़ा खोले ही उसने काक्रोच का बहाना बता प्रिया।

मैं भी अब उसका इरादा समझ गया था, उसकी मम्मी के जाते ही उसने मुझे पकड़ लिया और बोली…..क्यों इतने दिनों के बाद मेरे बारे में सोचने की फ़ुरसत मिली?

मैं बोला- मैं तो हमेशा तेरे नाम पर मुठ मारता रहा हूँ।

इसी के साथ हम दोनों एक दूसरे को पकड़ कर चूम रहे थे।

दिया: अच्छा, तो कभी बताया क्यों नहीं?

मैं: क्या कहूँ? डर लगता था !

हम दोनों ने अब एक दूसरे के पूरे कपड़े उतार दिए थे।

मैं उसकी वस्ति-क्षेत्र व योनि पर हाथ घुमाने लगा जिससे उसे और भी मज़ा आने लगा। वो सिसकारी लेने लगी जो मुझे अच्छा लग रहा था।

मेरा एक हाथ उसकी चूत पर व दूसरा उसके वक्ष पर और मेरे होंठ उसके दूसरे दूध को खाने की कोशिश में थे।

उसने अपने दोनों हाथों से मेरे सर के बाल पकड़ लिए और जोर-जोर से सिसकारियाँ लेने लगी।

कुछ देर बाद उसने अपने एक हाथ से मेरा लण्ड को पकड़ा औरर आगे-पीछे करने लगी।

मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने उसकी कुँवारी बुर में अपना लण्ड डाल प्रिया। इसके लिए वो शायद तैयार नहीं थी और उसके मुँह से इस बार आवाज़ तो नहीं निकली मगर आँखों से आंसू जरूर निकल गए।

मगर मैं यह सब जनता था, यह मेरा भी पहला अनुभव था सो मुझे भी हल्का दर्द हुआ मगर मैं रूका नहीं और अपना लौड़ा दिया की फ़ुद्दी में अन्दर-बाहर करता रहा।

कुछ देर में वो झड़ गई और मैं भी झड़ने वाला था इसलिए मैंने अपना लण्ड बाहर निकाल लिया क्योंकि मैं किसी समस्या नहीं पड़ना चाहता था।

इस तरह हमने अपनी चुदाई को सावधानी से समाप्त कर प्रिया। मगर उसके बाद भी ऐसे ही कार्यक्रम कुछ महीनों तक चलत रहे। उसके बाद हम दोनों इंजीनियरिंग में पढ़ने चले गए मगर हम अब भी छुट्टियों में मिलकर चुदाई करते हैं !

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

जी भर के लुटाना चाहती हूँ जवानी-2
चुदाई की कहानी
5 मिनट 1,199
प्यार सेक्स या धोखा-1
चुदाई की कहानी

प्यार सेक्स या धोखा-1

हाय दोस्तो, मेरा नाम योगेन्दर शर्मा है, मेरे घरवाले मुझे योगी और दोस्त पंडित कहकर पुकारते हैं, मेरी लम्बाई 5.8 इंच है और कसरत करने से शरीर कसा हुआ है। भगवान ने चेहरा भी ठीक ही प्रिया है, न तो ज्यादा बुरा और न ही ज्यादा अच्छा। परन्तु मेरे शरीर को सूट...

8 मिनट 804
लंगोटिया यार का स्वागत बीवी की चूत से-1
चुदाई की कहानी

लंगोटिया यार का स्वागत बीवी की चूत से-1

दोस्तो,आपको मेरी पिछली कहानीमस्ती की एक रातऔरअदल बदल कर मस्तीकैसी लगी.इनको पढ़कर वड़ोदरा से दीपा ने अपनी कहानी भेजी. जिसे शब्दों में बांधकर आपको सुना रहा हूँ.

12 मिनट 1,267

पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

राजीव 84

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

संजीव चौधरी

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

अरमान लव 5

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।