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चुदाई की कहानी पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 516 बार

न बुर न चूची बातें करे ऊँची ऊँची

श्रेया आहूजा

02 Jul 2008 को प्रकाशित

न बुर न चूची बातें करे ऊँची ऊँची
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लेखिका : श्रेया अहूजा

हाय श्रेया मैं देव… डिग्री कॉलेज वाला देव भटनागर ! सोचा बहुत दिन हो गए, बात नहीं हुई !

आखरी बार जब बात हुई थी अब तुमने पूछा था- हाउ इस लाइफ??

आज सोचा तुम्हें बताऊँ मेरी ज़िन्दगी कैसी थी, और अब कैसी है…

तुम्हें तो याद होगा स्वाति… थोड़ी सांवली सी हमारे क्लास में थी… निताशा और विनोद, रमेश !

कॉलेज के दिनों में स्वाति मेरी अच्छी दोस्त बन गई… स्वाति उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से थी, न जाने स्वाति को कब मुझसे प्यार हो गया ! वो मुझसे बहुत प्यार करने लगी थी… हम अक्सर छुप छुप कर मिला करते थे !

मैंने भी काफी पंजाबन लड़कियों पर ट्राई मारी पर कोई हाथ न लगी तो सोचा हाथ से कब तक मुठ मारूँ… एक बार स्वाति की चुदाई की कोशिश करता हूँ !

मैंने स्वाति को मिलने होटल में बुलाया, बजट कम था इसीलिए हज़ार रुपये का कमरा लिया।

हाँ कोई खतरा नहीं था, होटल का कमरा अच्छा ही था, मैंने झट से ए.सी. चालू किया और इंतज़ार करने लगा स्वाति का !

तभी बेल बजी कमरे की, दरवाजा खोला, स्वाति ही थी.. नीले रंग की कसी हुई कुर्ती और सफ़ेद पजामा में सेक्सी लग रही थी..

मैंने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और स्वाति को करीब खींचा !

मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को रखा और चूसने लगा, चूसते चूसते मैंने अपने दोनों हाथों को स्वाति के दोनों कूल्हों पर रखा, दबाया और उसकी चूत को अपने लंड के करीब लाया।

स्वाति तभी अचानक पीछे हो गई…

स्वाति- यह सब ठीक नहीं है देव..

मैं- क्यूँ… क्या बुराई है? सभी करते हैं…

स्वाति- पर मैं वैसी नहीं हूँ देव… क्या तुम ये सब करने के बाद मुझसे शादी करोगे?

देव- हाँ इतना भी यकीन नहीं है…?

अन्दर ही अन्दर मैं जानता था कि मैं कभी स्वाति से शादी नहीं करूँगा… मुझे तो इससे भी अच्छी माल की तलाश है, ऐसी माल जिसे सब चोदना चाहें… जो देखे उसकी गांड और आँखें दोनों फट जाये… मालदार असामी भी हो और मालदार आइटम भी… स्वाति दोनों में से कुछ नहीं थी मेरे नज़रों में !

स्वाति को मैंने बिस्तर पर बैठाया, उसे पानी प्रिया !

मैं- क्या हुआ? डर रही हो?

स्वाति- हाँ शाम हो रही है… रात भर हॉस्टल से कभी बाहर नहीं रही।

मैं- रात ऐसी बीती भी तो नहीं… सब भूल जाओ, बस प्यार करो…

स्वाति मुझसे चिपक गई…. मैंने स्वाति को लिबास से बेलिबास कर प्रिया… वो अब केवल ब्रा पैंटी में थी !

मैंने आज तक किसी भी लड़की को ब्रा पैंटी में नहीं देखा था… यह भी नहीं सोचा था कि बीस साल की उम्र में चुदाई का मज़ा मुझे मिल जायेगा… चाचू ने बताया था कि चोदने के लिए उन्होंने 26 साल तक शादी का इंतज़ार किया था…

मैं इतना बेसब्र हूँ पता नहीं था.. या चोदने की कुछ ज्यादा ही जल्दी थी मुझे…

मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और अब बारी थी मेरी चड्डी उतरने की…

मैंने अपनी चड्डी जैसे उतारी स्वाति ने आँखें बंद कर ली…

मैं- क्या हुआ स्वाति… आँखें खोल और इसे चूस…

स्वाति ने आँखें तो नहीं खोली पर लंड चूसने लगी…

मैं- अहह अह और चूस..

मेरा लंड क़ुतुब मीनार की तरह खड़ा हो गया था… स्वाति के नरम होंठों ने उसे और कठोर बना प्रिया था।

स्वाति ने आँखें खोली !

स्वाति- ओह्ह ! कितना बड़ा है देव मैं इसी कैसे ले पाऊँगी अन्दर…?

मैं- कुछ नहीं होगा… बस लेट जाओ आराम से !

मैंने स्वाति को बिस्तर पर लिटाया और पैंटी नीचे खींच दी…

स्वाति की चूत और बगलों में एक भी बाल नहीं था… सफाचट…

उसके भूरे रंग की चूत और गुलाबी छिद्र मुझे आज भी याद है… एकदम कुंवारी चूत थी…

मैंने उसकी पतली पतली टांगों को फैलाया.. बदन के मुकाबले जांघें और कमर काफी भरी हुई थी…

ऐसे अवस्था में बीस साल की हर लड़की खूबसूरत ही लगती है… और वैसे भी मैं हर दूसरी लड़की को फैन्टेसाईज करता था।

मैंने स्वाति की टांगों को फैलाया और उसकी चूत चाटने लगा…

स्वाति- अहह ई मम्मी… बस देव छोड़ दो मुझे…

मैं- शश… धीरे बोलो !

स्वाति गरम हो रही थी… मुझसे भी अब रहा नहीं जा रहा था… बहुत उतावला हुए जा रहा था मैं चोदने को, मैंने अपना लाल लंड सुपारा उसकी भूरी चूत में रख प्रिया… और धीरे धीरे घुसाने लगा।

स्वाति कसमसा रही थी…

मैंने उसकी पतली कलाई पकड़ लिया और लंड घुसता चला गया…

स्वाति- अह… अह… बस… बस… देव… मैं मर जाऊँगी…

मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और मुँह बंद करने के लिए उसके मुँह में अपनी जीभ डाल दी…

मेरा लंड उसके अन्दर घुस चुका था… अब स्वाति को थोड़ा आराम मिल रहा था…

स्वाति भी घस्से मारने लगी… मैंने सोचा भी नहीं था कि स्वाति भी सेक्स करने के लिए उतावली थी।

स्वाति- अह देव.. करते रहो… बस अभी झड़ मत जाना… मारते रहो !

मैं भी कभी जोर कभी धीमे घस्से मार रहा था… बहुत मज़ा आ रहा था… पहली बार चुदाई गीली गीली चूत में मेरा लण्ड फिसला जा रहा था.. बार बार घुसाना पड़ रहा था…

मैं उसके मम्मों को चूस रहा था.. मम्मे छोटे लेकिन नुकीले थे… बड़ा भूरा निप्पल था…

उसके बदन में सबसे सेक्सी उसकी गांड लगी… एकदम मुलायम.. गोल मटोल…

मैंने अपनी आँखें बंद की और निताशा कौर के बारे सोचने लगा…

निताशा मुझे कॉलेज के शुरुवाती दिनों से पसंद थी… लेकिन उसे चोदना तो दूर उससे बातें करने का दम भी नहीं था मेरे टट्टों में !

निताशा नहीं स्वाति ही सही… कम से कम चुदाई करने को चूत तो मिली… कम से कम उस रात मैंने मुठ नहीं मारी थी !

मेरे झटके और तेज़ होते चले गए… स्वाति ने मुझे कस के पकड़ा और हम दोनों ही साथ में स्खलित हो गए…

मैं- अहह जान… मज़ा आ गया…

स्वाति- अहह बस मज़े के लिए किया?

स्वाति मुझसे चिपक गई।

मैं- नहीं पगली… प्यार के लिए…

स्वाति- तुम नहीं समझोगे… एक लड़की के लिए यह दिन सबसे बड़ा होता है।

मैं- मतलब?

स्वाति- मतलब कि बुद्धू, अब मैं कुंवारी रही नहीं… आज तुमने मुझे लड़की से औरत बनाया है।

मैं- कम ओन… कैसी बात कर रही हो… गंवारों वाली !

स्वाति- कहा न… तुम नहीं समझोगे !

स्वाति मुझसे चिपक के सोने लगी… मध्यरात्रि को वो फिर मुझे उठा कर चोदने को कहने लगी !

मैंने स्वाति को फिर से चोद प्रिया…

सुबह जब हम दोनों होटल से चेक आउट कर रहे थे मैंने देखा स्वाति की चाल बदल गई थी…

सुना था चुदने के बाद लड़कियाँ टाँगें फैला कर चलती हैं… आज देख भी रहा था…

कुछ दिन बाद स्वाति मेरे पास आई…

स्वाति- देव फिर कब चलोगे होटल? अब बस मन करता है हर वीक एंड हम दोनों होटल में बितायें…

मैं- हाँ हाँ बस चलो इस शनिवार…

मेरे तो निकल पड़ी थी… आने वाले कॉलेज के तीन साल चुदाई का मौका बना प्रिया था…

सुरेंश और विनोद मेरे दोस्त हुआ करते थे… रमेश ज्यादा क्लोज़ था सो मैंने ये बात उसे बताई…

रमेश- हा हा स्वाति को चोदा ! कोई और लड़की नहीं मिली? श्रेया आहूजा मिल जाती तो मज़ा आ जाता यार !

मैं- क्यूँ स्वाति में क्या बुराई है?

रमेश- स्वाति… कोई में है क्या .. न बुर न चूची बातें करे ऊँची ऊँची…

ये बात मेरे ज़हन में बस गई…

रात भर सोचा… न बुर न चूची…. मतलब लड़कों ने स्वाति को माप लिया है… उसके मम्मे छोटे है… और सेक्सी भी नहीं ! अगर लड़कों को पता चला कि मैंने स्वाति को चोदा है तो और मेरी रेटिंग कॉलेज में बढ़ेगी नहीं उल्टा घट जाएगी।

मुझे स्वाति से जयादा शायद अपनी ही रेटिंग की फ़िक्र थी… और बार बार याद आ रहा था रमेश का कहना ‘न बुर न चूचीबातें करें ऊँची ऊँची’

मैंने भी ठान लिया अब मैं निताशा कौर को चोद कर दिखाऊँगा।

निताशा कौर हमारे क्लास की सबसे सेक्सी लड़की थी… मैंने सोचा अगर किसी तरह इसी फंसा कर चोद दूँ तो मेरे भी रैंकिंग कॉलेज स्टड में आ जाएगी।

मैंने पूरे तन मन धन से निताशा के पीछे पड़ गया… स्वाति को इग्नोर करने लगा।

बात यहाँ तक आ पहुँची कि हम और निताशा डेट पर गए और कॉलेज कैंपस में एक सुनसान जगह में बैठ गए।

निताशा उस रात गुलाबी रंग का टॉप और केप्री पहनी हुई थी… बहुत सेक्सी लग रही थी…

मैंने उसे अपने करीब लाया… उसके गुलाबी होंठों में अपना होंठ रखा…

क्या बताऊँ बहुत ही रसेदार थे वो होंठ… ऐसा लग रहा था कि मैं रसगुल्ले चूस रहा था…

उसके मुँह और बदन से बहुत अच्छी खुशबू आ रही थी… इतना मज़ा मुझे स्वाति में कभी नहीं आया था…

मैं उसके गोल गोल मम्मों को दबाने लगा… पीछे से अपना हाथ उसके केप्री के अन्दर डाला और चूतड़ सहलाने लगा।

बहुत मुलायम थे… उसे चोदने को मन करने लगा…

मैं- डार्लिंग चलो न किसी होटल में… सेक्स करेंगे।

निताशा- आर यू मैड?

यह बोल कर वो चली गई।

मैंने घर आकर देखा तो मेरे अंडरवियर में मुठ निकला हुआ था…

अपना फोन देखा तो स्वाति के बीसियों मिस्ड कॉल थे…

मैंने स्वाति को फ़ोन किया- क्या बात है क्यूँ बार बार फ़ोन करती हो?

स्वाति- तुम्हारा मतलब क्या है? क्या अब हमारे बीच कुछ नहीं रहा?

मैं- कुछ कभी था ही नहीं तो अब क्या होगा? और वैसे भी मैं निताशा को प्यार करता हूँ और वो भी मुझे करती है।

स्वाति- निताशा?

मैं- हाँ… और वैसे भी तुम्हारी जैसे झल्ली को प्यार करूँगा मैं?

स्वाति ने फ़ोन रख प्रिया… वैसे भी निताशा से आज सेक्स करने का मन था और ऊपर से स्वाति की सेंटी बातें !

अगले दिन मैंने निताशा को मिलने बुलाया… फिर से उस सेक्सी को चूमने का मन था।

निताशा- हाय देव, बोलो क्यूँ बुलाया है?

मैं- घूमने चलना है?

निताशा- नहीं और कल जो हुआ बस चान्स की बात थी ! मैं तुमसे नहीं कुलश्रेष्ठ सिंह से प्यार करती हूँ।

मेरे सिट्टी पिट्टी गुम हो गई… इस लड़की के चलते स्वाति से भी हाथ धोना पड़ा।

मैंने स्वाति से पैच अप करने की कोशिश की लेकिन उसकी ज़िन्दगी में विनोद आ गया था।

कुछ महीने बाद विनोद ने बताया- यार किसी को बताना नहीं, कल रात मेरे और स्वाति के बीच सेक्स हो गया।

मैं- क्या?

विनोद- इसमें चौंकने वाली क्या बात है… तुम्हें नहीं पता कि स्वाति मेरी गर्लफ्रेंड है…

मैं क्या बोलता… स्वाति से ब्रेकअप के बाद किसी लड़की ने मुझे देखा तक नहीं था इन महीनों में…

विनोद- यार कल फिर होटल जा रहा हूँ स्वाति के साथ… बोल न कौन सी ड्रेस पहनूँ .. नीली शर्ट कैसी लगेगी?

मैं क्या बोलता… बस इस बात का गर्व था कि स्वाति के साथ सबसे पहले मैंने सेक्स किया था या इस बात का गर्व कि निताशा कौर जैसे लड़की को मैंने किस किया था… ये दोनों बात कोई नहीं मानता…. कॉलेज के लोग मुझे गांडू समझने लगे…

विनोद- जो कहो यार, स्वाति बहुत सेक्सी है… अब तो कॉलेज के बाकी के साल तो आराम से गुज़र जायेंगे।

इस तरह मेरे बाकी के साल बिना लड़की के गुज़र गए कॉलेज में… जॉब लगी तो ऑफिस में अधिकतर लेडी शादीशुदा हैं… अभी मेरी उम्र उनतीस हो गई है… शादी भी नहीं हुई… आखिरी चुदाई मैंने नौ साल पहले की थी…

अब अपनी दिनचर्या बताता हूँ…

पोर्न विडियो देखता हूँ और नंगी तस्वीरें डाउनलोड करता हूँ…

घर आते वक़्त सड़क और बस में लड़कियाँ देखता हूँ… कभी कभी स्पर्श भी हो जाये तो खुशनसीब समझता हूँ।

इस उम्र में अकेले नींद भी नहीं आती… सो बिस्तर में मुठ मारता हूँ… या बाथरूम में पोर्न मैगजीन में फोटो देखकर मुठ मारता हूँ… या सुबह नहाते वक़्त मुठ मारता हूँ…

तो मेरे ज़िन्दगी तो फक हो चुकी है…

यह कहानी थी मेरे दोस्त देव की… उसका ईमेल आया तो मैंने सोचा कि किसी की निजी ज़िन्दगी आपके सामने लेकर आऊँ…

कैसी लगी, अपनी श्रेया को ज़रूर बताना !

श्रेया आहूजा

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

अवि सिंह

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

रसिया राज जैन

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

हेत पटेल

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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