प्रेषक : शमशेर कुमार
दोस्तो, मेरा नाम शमशेर कुमार है, मैं हरियाणा से हूँ। मेरी उम्र 18 साल है, सन् 2011 में 10+2 पास की हैँ बल्कि प्रथम आया हूँ।
बात उस समय की है जब मेरी अध्यापिका एक टैस्ट ले रही थी मैंने सबसे पहले टैस्ट दे प्रिया और क्लासरुम के दरवाजे के आगे जा बैठा।
मेरी कक्षा की सबसे होशियार छात्रा नेहा को गुस्सा आया मुझ पर कि मैंने उससे पहले टैस्ट अध्यापिका को दे प्रिया। नेहा टैस्ट देकर उठी और उसी दरवाजे से जाने लगी जहाँ मैं बैठा था। मैं भी एकदम से उठने लगातो नेहा की और मेरी टक्कर हो गई, मुझसे नेहा के शरीर पर, उसकी चूची और कूल्हों पर हाथ अनजाने में लग गया। सर्दियों के दिन थे, नेहा मुझे काफी गर्म लगी। मैं सर्दियों में केवल शर्ट पहन कर स्कूल जाता था। नेहा हंस कर चली गई शायद नेहा को मेरा छूना अच्छा लगा।
मैं भी अन्दर गया नेहा और मैं कमरे में अकेले थे। नेहा मुझसे बातें करने लगी !
नेहा बहुत खूबसूरत थी, पहले मैंने नेहा से कभी ऐसे बात नहीं की थी। खैर नेहा ने मेरा फोन नंबर ले लिया और वह हर रोज स्कूल से जाते ही मुझे फोन करने लगी। हम पढ़ाई की बातें कम सेक्स की बातें ज्यादा करते थे। हम दोनों में प्यार हो गया। स्कूल में हम आँखों में आँखें डाल कर बातें करते थे। मैं मौका मिलते ही नेहा को अपनी बाहों में भर लेता था, नेहा भी यही चाहती थी।
उसके बाद नेहा मुझे अपने घर बुलाने लगी। नेहा के घर से आगे एक मंदिर था, एक और मंदिर नेहा के घर के बिल्कुल करीब था। मैं हर रोज शाम को दोनों मंदिरों में जाने लगा ताकि किसी को शक न हो। मैं सुबह चार बजे उठ कर मंदिर जाने लगा। नेहा ने एक दिन चार बजे शाम को मुझे अपने घर बुलाया, कहा- हमारे घर पर आज कोई नहीं है, तुम जल्दी आना।
मेरे घर से नेहा का घर का रास्ता केवल दस मिनट का ही है। मैं 3 बज कर 50 मिनट पर घर से निकला। अब चार बज चुके थे मैं नेहा के घर के बाहर देख रहा था कि मोहल्ले में कोई है तो नहीं।
तभी नेहा के घर के अन्दर देखा तो नेहा ने मुझे अन्दर आने का इशारा किया। मैं अन्दर चला गया।
नेहा ने मुझे बैठने को कहा लेकिन मैंने उसे बाहों में भर कर चूमना शुरु कर प्रिया।
नेहा ने कहा- थोड़ा सबर करो !
फिर नेहा ने मुझसे चाय के लिए कहा तो मैंने मना करते हुए कहा- तुम अपने हाथों से सिर्फ़ एक गिलास पानी पिला दो ! उसके बाद मैं तुम्हारे लाल-2 होंठों का रस पिऊँगा। क्या पिलाओगी मुझे?
“क्यों नहीं? इसीलिये तो बुलाया है।”
नेहा पानी ले आई मैंने पानी पी लिया। फिर नेहा मेरी गोद में बैठ गई, कहने लगी- मुझसे जुदा न होना ! मैं सहन नहीं कर पाऊँगी।
मैंने कहा- नेहा, मैं सिर्फ़ तुमसे प्यार करता हूँ, तुझे किसने कहा कि मैं तुझसे जुदा हो जाऊँगा?
नेहा ने कहा- डर लगता है।
“कुछ नहीं होगा, मैं सिर्फ़ तुझसे शादी करूँगा ! अगर तुम्हारी शादी किसी और के साथ हो गई तो मैं मर जाऊँगा।”
नेहा ने मेरा हाथ पकड़ कर कहा- हम दोनों साथ मरेंगे !
फिर मैंने नेहा की चूचियों को मसलना शुरु किया तो नेहा ने भी मेरे होंठों को चूमना शुरु कर प्रिया, दोनों को काफी मजा आ रहा था।
फिर मैंने नेहा का कमीज उतार प्रिया, उसने नीचे कुछ भी नहीं पहना था। अब नेहा की चूचियाँ मेरी आँखों के सामने थी जो गोल और काफी छोटी थी।
चूचियों के मसलने से नेहा पर नशा छाने लगा, नेहा ने मेरी पैंट की ज़िप खोली, मेरे लोले को बाहर निकाल कर हाथ से सहलाने लगी।
मैंने कहा- मेरा निकलने वाला है।
नेहा ने कहा- निकलने दो।
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फिर मेरे लोले से पिचकारी लगी और मेरा माल नेहा की चूचियों पर जा गिरा।
नेहा हंसने लगी।
मेरा लोला नेहा जैसी कली के लिये काफी बड़ा था। नेहा के घर वालों का आने का वक्त हो रहा था तो हमने जल्दी से कपड़े पहने, मैंने नेहा की चूचियों को तौलिए से साफ किया ओर मौका देख कर उसके घर से निकल गया।
मुझे नेहा ने रात को फोन किया कहा कि सुबह चार बजे मंदिर के पीछे मिलेंगे।
मैंने कहा- ठीक है जाने मन ! आय लव यू।
हमारे बीच फोन पर लगभग एक घण्टा बात हुई। रात भर दोनों को नींद नहीं आई, चार बजे मैं मंदिर के पीछे पहुँच गया।थोड़ी देर बाद नेहा भी आ गई, आते ही मुझे चूमने लगी, कहने लगी- आज मेरी चूत मारो, इस पर सिर्फ़ तेरा अधिकार है।
फिर मैंने नेहा की चूचियो को मसलना शुरु कर प्रिया, नेहा मेरे लोले को सहलाने लगी। यह खेल दस मिनट तक चलता रहा।
नेहा काफी गर्म हो चुकी थी, कह रही थी- जल्दी करो, दिन निकलने से पहले चलना होगा।
उसके इतना कहने के बाद मैंने चारों तरफ देखा तो एक तखत पर नजर पड़ी। फिर हमने कपड़े उतारने शुरु किये और दोनों बिल्कुल नंगे हो गये, दोनों के कपड़े तखत पर बिछा कर लेट गए।
नेहा ने कहा- देर मत करो।
मैंने भी देर नहीं ,की नेहा की चूत को फोन की लाइट जला कर देखा। नेहा की चूत बिल्कुल बन्द थी, नेहा पहले से ही तेल लगा कर आई थी। मैं नेहा की चूत में उंगली से सहलाने लगा तो नेहा उछलने लगी।
मैंने देर न करते हुए नेहा के दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और लोले को चूत पर रगड़ने लगा।
उसने कहा- अब घुसेड़ दो अन्दर !
फिर मैंने जोर से धाक्का मार लोले का सुपारा एक ही झटके में अन्दर कर प्रिया, फिर बिना देरी किये दूसरा धक्का मारा तो आधा लण्ड अन्दर चला गया।
नेहा दर्द से कराहने लगी, उसकी चूत से खून आने लगा, फिर भी मैं अपने काम में लगा रहा। फिर मैंने तीसरा धक्का मारा और पूरा लण्ड अन्दर !
फिर नेहा के मुँह से किलकारी निकली, मैंने उसके मुँह पर हाथ रखा और कहा- सब ठीक हो जाएगा।
फिर पांच मिनट रुकने के बाद धक्के लगाने शुरु किये तो नेहा को भी मजा आने लगा, वह भी मेरा साथ देने लगी। लगभग बीस मिनट बाद मैं और नेहा दोनों इकट्ठे ही झड़ गये मैं नेहा की चूत में ही झड़ गया।
इस खेल में हम दोनों को बड़ा मजा आया और नेहा काफी खुश दिख रही थी !
अब दिन निकलने को था तो हम दोनों अपने-अपने घर चल दिये।
इसके बाद हम हफ़्ते में दो बार सेक्स कर ही लेते हैं।
मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे इमेल करें !
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