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जवान लड़की पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 613 बार

मैं हूँ इंडियन देसी लड़की सानिया

मैं हूँ इंडियन देसी लड़की सानिया
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लेखिका : सानियामैं हूँ इंडियन देसी लड़की सानिया!मेरी किस्मत अच्छी है कि मैं बहुत सुन्दर, सेक्सी हूँ, मेरा मानना है कि मेरे सामने पुरुष काफ़ी देर तो मेरी आँखों में देख ही नहीं पाते क्योंकि उनकी निगाहें मेरी बड़ी बड़ी चूचियों से हट ही नहीं पाती।

मुझे पता है कि सभी पुरूष मेरी बातें सुनकर मुझे पाना चाहेंगे, लेकिन मुझे पाना इतना आसान नहीं है। मुझे लड़कों से सेक्स की बातें करना और यौन-पूर्व क्रीड़ा करना अच्छा लगता है इसलिये लड़को मेरी कहानी पढ़कर अपना लंड हिला कर ही ना रह जाना, मुझ से बात भी करना।

मैं आपसे अपना पहला अनुभव बताती हूँ, बात चार पाँच महीने पहले की है, मेरे स्कूल का लड़का रोहित जो लगभग मेरी उम्र का ही था, स्कूल के हॉस्टल में रहता था, मुझ पर लट्टू था और मुझ से बात करने के बहाने ढूंढता रहता था।

वैसे मुझे भी वो लड़का अच्छा लगता था, मुझे तो सभी लड़के अच्छे लगते हैं क्योंकि उनके पास वो होता है जो मेरे पास नहीं है।

एक दिन तो उसने हद ही कर दी, वह कुछ नोट्स लेने के बहाने से मेरे घर ही आ गया।

मैं अपनी एक सहेली दिया के साथ ट्यूशन गई हुई थी, मेरे घर में सिर्फ़ मेरी मम्मी थी।

मम्मी ने ही दरवाज़ा खोल कर उसे अन्दर बुलाया और ड्राइंगरूम में बैठाया। उसने मम्मी को बताया कि उसे मुझ से कुछ नोट्स चाहिएँ!

तो मेरी मम्मी ने उसे बताया कि मैं ट्यूशन के लिए गई हुई हूँ तो उसने मेरी मम्मी से मेरा मोबाईल नम्बर ले लिया और मुझे फ़ोन मिला कर बात करने लगा, पूछने लगा नोट्स के बारे में!

मैं दिया को अपने साथ ही लेकर घर आ गई, मेरे मन में कुछ मस्ती सी छा गई थी यह जानकर कि एक लड़का जो मेरा दीवाना है, मेरे लिए मेरे घर तक पहुंच गया।

दिया भी रोहित की दीवानगी के बारे में जानती थी और हम दोनों अकसर रोहित के बारे में बातें भी किया करते थे।

मुझे अपने सामने पाते ही उसकी आँखों में एक चमक सी आ गई लेकिन मेरी सहेली को साथ देख वो चमक ज्यादा देर नहीं टिकी उसकी आँखों में!

मम्मी हमारे लिए शर्बत लेकर आई तो मैं उसे नोट्स देने के बहाने उसे अपने कमरे में ले गई। मैं बहुत खुश थी, मैंने दिया को आंख से इशारा किया, वो समझ गई।

कमरे में जाकर मैंने रोहित से आँखें नचा कर पूछा- क्यों आए हो? नोट्स तो एक बहाना है ना?

रोहित बोला- तुम सब जानती हो तो इतने दिनों से क्यों तड़पा रही हो?

इतना कह कर वो मेरा हाथ पकड़ने लगा लेकिन मैंने एकदम से अपना हाथ पीछे खींच लिया।

मम्मी को बुलाऊँ क्या? मैंने रोहित से कहा।

रोहित मेरे पैरों में गिर गया और बोला- मैं तुम्हें सच्चा प्यार करता हूँ, मुझे मत ठुकराओ!

इतना कहते हुए उसने सच में मेरे पैर पकड़ लिए और सहलाने लगा।

मैं एकदम सिहर उठी, यह किसी पुरूष का मेरे बदन पर पहला स्पर्श था।

आह…!! क्या कर रहे हो रोहित? मेरे मुझ से निकला।

रोहित के हाथ अब तक मेरे पैरों से ऊपर होकर मेरी पिंडलियों तक पहुँच चुके थे। मेरा बदन कांपने लगा था, उसके हाथ धीरे धीरे ऊपर की तरफ़ बढ़ रहे थे और मैं आनन्द के वशीभूत हो उसे रोक नहीं पा रही थी।

अचानक दिया वहाँ आ गई तो मेरी तन्द्रा टूटी।

दिया बोली- क्या खेल हो रहा है यहाँ इस कमरे में!

मैं घबरा कर एक कदम पीछे हटी और रोहित दिया को खा जाने वाली नज़रों से देखने लगा।

बाहर आँटी तुम्हारा इन्तज़ार कर रही हैं और तुम दोनों यहाँ रासलीला रचा रहे हो? वो तो आँटी अन्दर आने को थी, मैंने उन्हें रोका और मैं अन्दर आ गई, नहीं तो मारे गए थे तुम दोनों!

चलो अब बाहर और ये प्रेम-व्रेम का नाटक बाद में कर लेना।

गुस्सा तो मुझे भी बहुत आया दिया पर! कितना मज़ा आ रहा था, रोहित के हाथ मेरे घुटनों से ऊपर सरकने लगे थे, और मैं पत्थर बनी उस असीम आनन्द में डूब रही थी।

लेकिन दिया ने आकर मुझे, मेरा मतलब हम दोनों को बचा लिया था।

रोहित ने मेरे मेज से ऐसे ही कुछ कागज उठा लिए और मन मसोस कर हम तीनों बाहर आ गए।

थोड़ी देर में रोहित चला गया तो मैं दिया को लेकर अपने कमरे में आ गई।

दिया पूछने लगी- मजा आ रहा था?

हाँ, बहुत!!

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क्या क्या किया?

अरे, तूने करने ही कहाँ प्रिया?

तो बिना कुछ किए ही मजा आ रहा था? तो अब तेरा मजा तो गया! अब क्या करेगी तू?

हम बातें कर ही रहे थे कि मेरा मोबाइल बज उठा।

देखा तो रोहित का ही फ़ोन था।

मैंने घबराहट में दिया को फ़ोन पकड़ा प्रिया।

दिया ने पूछा- रोहित, कहो क्या काम है?

रोहित : सानिया को फ़ोन दो ना!

दिया : मुझे बताओ!

रोहित : नहीं सानिया से ही बात करनी है!

दिया आँख मारते हुए मुझे फ़ोन पकड़ा कर बोली : ले! तुझ से ही बात करना चाहता है!

मैंने फ़ोन पर कहा : हेलो!

रोहित : नाराज हो?

मैं : नहीं तो!

रोहित : सानिया, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो!

मैं : मुझे पता है कि तुम मुझे पसंद करते हो! मुझ में ऐसा क्या है जो मैं तुम्हें अच्छी लगती हूँ?

रोहित : वो… वो तुम्हारी जां… आँखें?

मैं : क्या कहा? आँखें? या कुछ और? कुछ और बोलने लगे थे ना तुम?

रोहित : मुझे तुम्हारा सब कुछ अच्छा लगता है!

मैं : सब कुछ? यानि मेरा बदन?

रोहित : तुम्हारा बदन भी और तुम भी!

मैं : मेरे बदन में सबसे अच्छा क्या लगता है?

रोहित : वो… वो… तुम्हारी च… चू…

मैं : मेरी चूचियाँ? या मेरी वो… चू… त!

रोहित : हाय!

मैं : और मेरी गोरी गोरी टांगें कैसी लगी?

दिया बीच में टोकते हुए बोली- सानिया, कैसी कैसी बातें कर रही हो?

रोहित फ़ोन पर : मजा आ गया था तुम्हारी चिकनी टाँगें सहला कर! वो तो बीच में तुम्हारी सहेली आ गई, नहीं तो तुम्हारी स्कर्ट उठा कर तुम्हारी जांघें चूम लेता।

मैं (दिया के होंठों पर ऊँगली रखते हुए) : मज़ा तो मुझे भी बहुत आया पर ये साली दिया ने सारा मजा खराब कर प्रिया।

दोस्तो, अब आगे क्या हुआ, कैसे हुआ, मुझ से फ़ोन पर पूछ लो! मैं आपको बताऊँगी अपने पहले अनुभव की एक एक बात!

मेरा फ़ोन नम्बर जानने के लिए यहाँ क्लिक करें!

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

लण्डबाज़

1 month ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

राहुल श्रीवास्तव

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

अमी

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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