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माँ की चुदाई • पठन समय: 18 मिनट • पढ़ा गया: 1,258 बार

संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-29(Sanskari vidhwa maa ka randipana-29)

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25 Oct 2021 को प्रकाशित

संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-29(Sanskari vidhwa maa ka randipana-29)
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हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-

मैं इतना एक्साइटेड हो गया था कि जैसे ही मौसी की चूत पर अपना लंड रखा, तुरंत झड़ गया। मौसी ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मेरे लंड से निकली मलाई समेटी और उसे चाटते हुए एक कातिल मुस्कान के साथ मेरी तरफ देखा।

मौसी बोली, “कोई बात नहीं बेटा, पहली बार में ऐसा अक्सर हो जाता है। कम से कम मुझे तुम्हारी मलाई चखने का मौका तो मिला, मेरे लिए इतना ही काफी है।”

मैंने मायूस होकर कहा, “मौसी, मैं तो आपको ठीक से चोद भी नहीं पाया और अब आप चली जाएंगी। क्या आज आप रुक नहीं सकतीं?”

मौसी ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रखे और एक लंबा किस लेकर बोली, “चिंता मत करो, अगली बार जब आऊंगी तो तुम्हें खूब मज़ा दूंगी। अब जल्दी से अपने कपड़े ठीक करो, वरना अगर सविता ने देख लिया तो बड़ी गड़बड़ हो जाएगी!”

उसके बाद मैं तुरंत कमरे से निकल कर बाथरूम की तरफ भागा, ताकि मम्मी को लगे कि मैं वहीं से आ रहा हूं। फिर मम्मी के पास बैठ कर थोड़ी देर बातें की, तब तक मौसा जी भी आ गए। मौसा जी चाय-नाश्ता करते हुए मम्मी से उनकी तबीयत का हाल पूछ रहे थे और मौसी दूसरे कमरे में तैयार हो रही थी।

मैं बहाने से फिर कमरे में गया और जाते ही मौसी को पीछे से अपनी बाहों में भर लिया। मौसी उस समय सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में खड़ी थी। मैंने बिना देर किए पीछे से अपने हाथ उनके बूब्स पर जमा दिए और उन्हें जोर से दबोच लिया।मौसी ने गर्दन घुमा कर मेरे होंठों को चूमा और प्यार से बोली, “क्या हुआ मेरे बेटे?”मैंने उदास मन से कहा, “मौसी, आप जा रही हैं और मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा है।”

मौसी ने मुस्कुराते हुए कहा, “ओहो, कहीं तुम्हारा दिल अपनी मौसी पर तो नहीं आ गया? अब तो तुम्हारे मौसा जी भी आ गए हैं, वो मुझे साथ लेकर ही जाएंगे। पर कोई बात नहीं, जाने से पहले मैं तुम्हें अपना ढेर सारा प्यार देकर जाती हूं।”

फिर मौसी मुझे पागलों की तरह किस्स करने लगी। थोड़ी ही देर में उन्होंने अपना पेटीकोट कमर तक ऊपर किया और बेड पर अपनी टांगें फैला कर लेट गई। मैंने बिना वक्त गंवाए उनकी चूत चाटना शुरू कर दिया और उन्हें झड़ा दिया। इसके बाद उन्होंने मेरा लंड चूस कर मेरा सारा वीर्य पी लिया और चाट कर उसे बिल्कुल साफ कर दिया। फिर मौसी ने मुझे जल्दी से कमरे से बाहर भेजा और खुद तैयार होने लगी।

शाम होते-होते मौसी के जाने का वक्त हो गया। मम्मी उन्हें विदा करते समय भावुक होकर रोने लगी। उनके जाने के बाद मम्मी उदास होकर अपने कमरे में बैठ गई। रात को खाना खाने के बाद मैं अपने कमरे में लेटा यही सोचता रहा कि अब आगे क्या करूं?

अगले दो दिन मम्मी मेरे सामने कम आने लगी और ज़्यादातर अकेले ही रहने लगी थी। जब मैं अपनी शॉप पर जाता, तो वहां कुछ कस्टमर जुनैद के ना होने की वजह पूछने लगते। एक कस्टमर ने तो यहाँ तक कह दिया, “आपके पिता जी आज-कल शॉप पर दिखाई नहीं दे रहे?” यह सुन कर मेरा खून खौल जाता था; हर कोई आकर उल्टी-सीधी बातें कर रहा था।

मेरी अपनी कुछ पार्टियों के लोग भी जुनैद से ही डील करना चाह रहे थे। जब मैंने सब को जुनैद की हकीकत बताई, तो सब सुन कर हैरान रह गए। यहाँ तक कि जुनैद ने मेरी एक पार्टी से जो कहा था, वो उन्होंने मुझे बताया, “राहुल जल्द ही मेरा बेटा बनने वाला है, आप लोग फिर मेरे साथ ही डील करना। मैं उसकी माँ सविता से शादी करूँगा, तो आप लोग बधाई देने ज़रूर आना।”

पार्टी वालों ने बताया कि जब उन्हें यकीन नहीं हुआ, तो जुनैद ने उन्हें अपनी और मेरी माँ की कुछ निजी तस्वीरें दिखाई, जिनमें वो उन्हें किस्स कर रहा था और उनके साथ हमबिस्तर था।

मेरा शॉप पर बैठना मुश्किल हो गया था, गुस्से से मेरा बुरा हाल था। जुनैद शॉप पर भी हमें बर्बाद कर गया था। पर इन सब के बावजूद मेरा प्यार माँ के लिए कम नहीं हो रहा था। आखिर उन्हें इस सब से बाहर निकालना और खुश रखना अब मेरा ही फर्ज़ था।

अगले दो दिन मैंने जैसे-तैसे काटे। फिर एक रात मैं माँ के कमरे में गया, तो देखा कि वो बहुत उदास बैठी थी। उनके चेहरे पर अब वो चमक और खुशी नहीं थी, जो जुनैद की चुदाई के बाद हर रोज़ झलकती थी। माँ ने अब फैशनेबल कपड़े पहनना भी छोड़ दिया था; वो एक साधारण, पैरों तक लंबी नाइटी पहने चुप-चाप बैठी थी।

मैं उनके पास गया और कहा, “मम्मी, यह क्या है? आप हमेशा ऐसे अकेले क्यों रहती हैं? ट्रिप से आने के बाद से आप मुझसे ठीक से बात तक नहीं कर रही हैं…”

मम्मी ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा, “बेटा, तेरा इतना कीमती हार मुझसे खो गया, मैं बस उसी शर्मिंदगी में खुद को संभाल नहीं पा रही हूं।”

मैंने जवाब दिया, “मम्मी, मेरे लिए आप कीमती हैं, वह हार नहीं! आप एक मामूली हार के लिए अपना दिल छोटा क्यों कर रही हैं?”

मम्मी बोली, “बात बस हार की ही नहीं है…”

मैंने जोर देते हुए कहा, “मम्मी, जो भी बात है मुझे साफ-साफ बताइए ना?”

मम्मी हिचकिचाते हुए बोली, “बेटा, मैं तुझे कैसे बताऊं, मुझे समझ नहीं आ रहा है।”

मैंने उनका हाथ थाम कर कहा, “मम्मी, आपने मुझे बेटे से ज़्यादा अपना दोस्त माना है, और एक दोस्त से तो हर बात कही जा सकती है।”

तभी मम्मी ने मुझे गले लगा लिया और मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए बड़ी उदास और डरी हुई आवाज़ में बोली, “मुझे जुनैद जी के बिना इस घर में अच्छा नहीं लग रहा है, मुझे उनकी कमी खल रही है…”

मम्मी के होंठों से जुनैद का नाम सुनते ही मेरा खून खौल उठा। मैंने एक झटके में मम्मी को खुद से अलग किया और दहाड़ते हुए कहा, “मम्मी! ये क्या बोल रही हैं आप? आपको शर्म नहीं आई मेरे सामने उसका नाम लेते हुए? आपको अंदाज़ा भी है कि उसने क्या किया है?”

मम्मी घबराकर बोली, “बेटा, मेरी बात तो सुनो…”

मैं बेड से उतर कर ज़मीन पर खड़ा हो गया और तेज़ आवाज़ में चिल्लाया, “बस! मुझे अब कुछ नहीं सुनना। आपने ही जुनैद को इस घर में इतना सिर चढ़ाया कि आज उसने हमें बर्बाद कर दिया!”

फिर मैंने मम्मी को वो सब दिखाया और बताया जो जाल मैंने खुद बुना था। मैंने उन्हें वे सबूत दिखाए कि कैसे जुनैद ने मेरी पार्टियों से झूठ बोल कर मोटी रकम वसूली थी। फिर मैंने उन्हें यह भी यकीन दिलाया कि वो हार भी जुनैद ने ही गायब किया था और उसका सौदा कर रहा था। मेरी हर बात उन्हें सच लगे, इसलिए मैं बहुत ही दुखी और उखड़े हुए अंदाज़ में ये सब कह रहा था।

मम्मी यह सब देख और सुन कर दंग रह गई, वो अपना माथा पीटने लगी।

मैंने गुस्से में कहा, “जुनैद के इतना सब करने के बाद भी आपको उसके बिना अच्छा नहीं लग रहा है? माँ, आख़िर आप चाहती क्या हैं? आज आपने जिस तरह से यह बात कही है, मुझे आपको माँ कहते हुए भी शर्म आ रही है! मैं अब पुलिस कंप्लेंट करके जुनैद को उसकी सजा दिलवाकर ही रहूँगा, चाहे फिर आपसे मेरा रिश्ता रहे या ना रहे।”

इतनी बात बोल कर मैं अपने कमरे की तरफ जाने लगा। मम्मी रोते हुए मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और बोली, “बेटा, मेरी एक बात तो सुन ले…”

पर मैं बिना रुके अपने कमरे में आ गया और अकेले में अपने किए पर रोने लगा। उधर मम्मी भी अपने कमरे में रात भर रोती रहीं।

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सुबह जब मैं उठा, तो देखा कि फोन पर मौसी की चार मिस कॉल थी। मैंने जब मौसी से बात की, तो उन्होंने कहा, “राहुल बेटा, सविता की बात सुन लो। ऐसा कुछ मत करो जिससे घर की और बदनामी हो जाए। अपनी मम्मी को गलत मत समझो, वो तुमसे बहुत प्यार करती हैं! प्लीज़ मेरी बात मानो।”

मौसी की बात सुन कर मेरा गुस्सा थोड़ा शांत हुआ। सुबह से रात हो गई, पर मम्मी ने बिना कुछ खाए-पिए खुद को कमरे में बंद रखा।

अगली सुबह, मैं तैयार होकर पूरे रौब के साथ घर से निकलने लगा, तभी मम्मी अपने कमरे से बाहर आई और सीधा मेरे पैरों में गिर गई। उनकी आँखों में आंसू थे और वो बुरी तरह सिसक-सिसक कर रो रही थी।

मम्मी बोली, “राहुल, मुझे माफ कर दे! तेरे सिवा मेरा दुनिया में कोई नहीं है। अगर तू भी मुझे छोड़ कर चला गया, तो मैं खुद को कभी माफ नहीं कर पाऊंगी।”

मैंने सख्त लहज़े में कहा, “मैं आपको माफ तो कर देता, पर मुझे एक बात समझ नहीं आ रही। आखिर आप मुझे जुनैद को सजा दिलाने से क्यों रोक रही हैं?”

मम्मी काँपती आवाज़ में बोली, “बेटा, क्योंकि सच्चाई बहुत बड़ी है, तू सुन नहीं पाएगा। और शायद यह सब जानने के बाद तू मुझे अपनी माँ कहलाने के लायक भी ना समझे।”

यह सुन कर मेरा लहज़ा थोड़ा नरम हुआ। मैंने कहा, “मैं आपसे हमेशा प्यार करूँगा, बस आप बताइए तो सही कि ऐसी क्या बात है जो आप उसे सजा देने से रोक रही हैं?”

मैंने मम्मी को सहारा देकर उठाया और उन्हें सोफे पर अपने साथ बिठाया। फिर उनका सिर अपने कंधे पर रख कर मैं प्यार से उनकी पीठ सहलाने लगा।

मम्मी सिसक-सिसक कर रोते हुए बोली, “बेटा, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई थी… मैं शायद माफ़ी के लायक भी नहीं हूं!”

मैंने उनका हाथ थाम कर कहा, “मम्मी, आप मुझे बेझिझक सब बता सकती हैं। मैं आपसे वादा करता हूं कि चाहे जो हो जाए, मैं आपसे हमेशा प्यार करता रहूंगा।”

मम्मी ने सिसकते हुए कहना शुरू किया, “बेटा, तेरे पापा के जाने के बाद मैं बहुत अकेलापन महसूस करने लगी थी। दिन तो जैसे-तैसे कट जाता था, पर रातें काटनी मुश्किल हो जाती थी। हर दिन मुझे उस प्यार और साथ की ज़रूरत महसूस होती थी, जो सिर्फ एक मर्द ही दे सकता है। जुनैद जी के घर आने-जाने और उनसे बातें करने से मेरा अकेलापन दूर होने लगा था। उनके साथ समय बिताते हुए मैं भावनाओं में बह गई और भूल गई कि मैं तेरे पापा की विधवा हूं। जुनैद से मिलने वाली खुशियां मुझे उसके साथ संबंध बनाने पर मजबूर कर गई। आखिर बेटा, मैं क्या करती? मैं भी तो एक औरत हूं…”

मम्मी मेरे कंधे पर सिर रख कर फूट-फूट कर रो रही थी और उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मैं सब कुछ जानते हुए भी यह सारी सच्चाई उन्हीं के मुंह से सुनना चाहता था।

मैंने थोड़ा भावुक और हैरान होने का नाटक करते हुए कहा, “मम्मी, आपने मुझसे इतना कुछ छुपाया? वह घर का नौकर होकर आपकी इज़्ज़त पर हाथ डालने की हिम्मत कर गया!”

मम्मी रोते हुए बोली, “माफ़ कर दे बेटा, मैं अपने किए पर बहुत शर्मिंदा हूं!”

मैंने और भी नर्मी से कहा, “मम्मी, आपने मुझे अपना दोस्त माना था, फिर भी मुझे यह सब बताना सही नहीं समझा? मैं भी तो आख़िर आपकी खुशियां ही चाहता था!”

मम्मी ने सिसकते हुए जवाब दिया, “बेटा, मैंने तुझे कई बार बताने की कोशिश की, यहाँ तक कि अपने बर्थडे पर भी हिम्मत नहीं जुटा पाई। मैं एक बहुत गलत माँ हूं, तेरा इतना कीमती हार भी नहीं संभाल पाई!”

मैंने उनकी आँखों में देखते हुए गंभीर आवाज़ में कहा, “मम्मी, अब मुझे सारा सच जानना है। आख़िर उस रिसॉर्ट में क्या हुआ था?”

मम्मी सिसकते हुए बोली, “बेटा, जुनैद भले ही घर का नौकर था, पर मुझे उसमें तेरे पापा की कमी पूरी होती दिख रही थी। मुझे वह मर्द का सुख मिला जो शायद मुझे पहले कभी नहीं मिला था। उसका प्यार पाकर मैं बिल्कुल पागल हो गई थी, उसकी हर बात मानना मेरे लिए जैसे तेरे पिता जी का हुकुम हो गया था। दिन-रात मैं बस उसे ही पाना चाहती थी। मैं उसके प्यार में इस कदर अंधी थी कि रिसॉर्ट पर बर्थडे मनाना तो बस एक बहाना था, हकीकत तो यह है कि उस रात मैं जुनैद के साथ वह कीमती हार पहन कर सुहागरात मना बैठी…”

मैंने मम्मी के सामने हैरान होने का झूठा नाटक किया और कहा, “मम्मी! आप इतनी हदें पार कर गई? आपने उस दो कौड़ी के नौकर को खुद को छूने दिया? आपने एक बार भी नहीं सोचा कि वह कौन है और क्या है?”

मम्मी बोली, “बेटा, जुनैद से वह सुख पाकर मैं अंधी हो चुकी थी। ट्रिप पर उसने मुझसे कहा कि वह अब मुझसे शादी करना चाहता है। यह सुन कर मुझे खुशी हुई कि अब समाज के सामने से मेरे ऊपर से विधवा होने का बोझ हट जाएगा। मैं उसे तुम्हारा पिता बनाना चाहती थी। पर जुनैद को डर था कि अगर तुम्हें हमारा रिश्ता पसंद नहीं आया, तो हम हमेशा के लिए दूर हो जाएंगे। फिर जुनैद ने मुझसे कहा कि राहुल अब बड़ा हो गया है, हम उसे अकेला छोड़ सकते हैं। इसी बात पर रिसॉर्ट में हमारा झगड़ा हुआ था। मुझे नहीं पता था कि वह मेरे जिस्म से खेल कर हमें बर्बाद करना चाहता था। माफ कर दे बेटा, सारी गलती मेरी है… मैं उसके प्यार में इतनी अंधी थी कि उसके बच्चे की माँ बनने तक को तैयार हो गई थी।”

मम्मी यह सब कहने के बाद रोते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लेती हैं। मैंने हैरानी का झूठा ड्रामा करते हुए कहा, “मम्मी, आपने इतनी हदें पार करने की सोची? यहाँ तक कि उसके बच्चे की माँ? मैं आपको कैसे माफ करूँ यह सुन कर कि आपने मेरे खातिर उसे ठुकराया?”

मम्मी टूट कर बोली, “मुझे पता था बेटा, तू मुझे कभी माफ नहीं करेगा…”

मम्मी मेरे पास से उठ कर रोती हुई अपने कमरे में चली गई। उन्होंने पूरा दिन बिना कुछ खाए-पिए सिर्फ रोते हुए बिताया। मैं अपने कमरे में बैठा सोचता रहा कि मम्मी के सिवा मेरा और है ही कौन? मुझे उन्हें माफ कर देना चाहिए।

रात को मैं मम्मी के कमरे के बाहर खड़ा रहा और उन्हें तब तक आवाज देता रहा, जब तक उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। जैसे ही गेट खुला, मैंने तुरंत उन्हें अपने गले लगा लिया।

मैंने उन्हें अपनी बाहों में भर लिया और आँखों में आंसू लिए कहा, “मम्मी, आपने जो भी किया, मैं उसके लिए आपको माफ करता हूं। मैं आपसे बहुत प्यार करता हूं… आज के बाद आप अपनी हर ज़रूरत मुझसे शेयर करेंगी, किसी और से नहीं।”

उसके बाद से मैं मम्मी को उस उदासी से बाहर निकालने की कोशिश में लग गया। साथ ही, मैंने खुद को बदलने के लिए जिम जाना शुरू कर दिया। मम्मी को बिना बताए मैं अपनी बॉडी को सॉलिड और गठीला बना रहा था। धीरे-धीरे मम्मी जुनैद के दुख से बाहर आ रही थी और अब वो अक्सर मेरे साथ बैठ कर बातें करते हुए मेरी बॉडी पर गौर करने लगी थी। चार महीने बीतते-बीतते मेरा शरीर एक-दम कसरती और गठीला हो गया था।

जिम में कड़ी मेहनत के बाद जब मैं घर आता, तो मेरा शरीर पसीने से भीगा होता था। नहाने के बाद मैं अक्सर अपनी बॉडी पर ऑयल मसाज किया करता था।

एक दिन मैं जिम से घर आया और मम्मी को कॉफी बनाने का बोल कर नहाने चला गया। नहाने के बाद मैं कमरे का दरवाजा बंद करना भूल गया और पूरी तरह नंगा होकर अपनी बॉडी पर तेल से मसाज करने लगा। मैंने अपनी एक टांग ऊंची जगह पर रखी थी और झुक कर अपनी जांघों की मसाज कर रहा था। उत्तेजना की वजह से मेरा लंड पूरी अंगड़ाई लिए सीधा खड़ा हुआ था। मुझे मसाज करते हुए कुछ ही देर हुई थी कि तभी कमरे की चौखट पर बर्तन गिरने की आवाज हुई। मैंने मुड़ कर देखा तो…

इसके आगे क्या हुआ, वह मैं आपको अगले भाग में बताऊंगा। मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी कहानी पहले से भी ज़्यादा पसंद आ रही होगी। मेरे जिन पाठकों को इस पल का बेसब्री से इंतज़ार था, अब वह घड़ी आ गई है कि आप इस कहानी का पूरा लुत्फ़ उठाएं।

तो दोस्तों, अपना फीडबैक मुझे ज़रूर दें!support@mohakkisse.com

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