Group Sex Story

एक चूत दो लण्डों से चुदी -2

लेखक: अज्ञात दिनांक: 17-12-2023 पठन समय: 8 मिनट

मैं फिर अनुराग को ढूंढने लगी कि तभी उसका लण्ड मेरे हाथों में आया और मैं उसके लण्ड को अपने मुँह में भर कर लण्ड को चूसने लगी।तभी मुझे लण्ड में कुछ फर्क महसूस हुआ तो मैंने कहा- अनुराग तुम्हारा लण्ड कुछ बदला बदला लग रहा है।

तो अनुराग ने कहा- नहीं तो रोमा डार्लिंग, चूसो लण्ड।

तो फिर मैंने कहा- तुम्हारी आवाज भी दूर से क्यूँ आ रही है?

मैंने अपने आँखों पर से रुमाल को खोल प्रिया। एक मिनट के लिए तो मुझे कुछ साफ साफ दिखाई ही नहीं प्रिया और जब दिखाई प्रिया तो मेरे सामने अनुराग नहीं था, मैं जिसका लण्ड चूस रही थी वो अनुराग का दोस्त विजय था।

मैंने अपने मुँह उसका लण्ड बहार निकल कर अनुराग के ऊपर गुस्सा करने लगी।तब अनुराग ने कहा- क्या हो जाएगा अगर तुम मेरे दोस्त से भी चुद लोगी तो? यह भी तुम्हें चोदना चाहता है… चुद लो न विजय से भी!

तब विजय ने मेरा मुँह अपनी तरफ घुमाया और अपना लण्ड फिर से मेरे मुँह में डाल प्रिया। मैं उसके लण्ड को नहीं चूस रही थी फिर भी वह अपने लण्ड को मेरे मुँह में डाल कर मेरे मुँह की चुदाई करने लगा।

फिर मैंने विजय को धक्का मार कर अपने से अलग कर प्रिया तो अनुराग ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और वो मुझे बाथरूम लेकर गया।

बाथरूम में अनुराग ने शावर को चालू कर प्रिया और मुझे शावर के नीचे खड़ा कर मेरे बूब्स दबाते हुए मुझे चूमने लगा।

तभी बाथरूम में विजय भी गया और वो भी मेरे बूब्स दबाने लगा। मैं मन ही मन सोचने लगी कि विजय का लण्ड भी अनुराग के जैसा ही है आज तो दो लण्ड से चुदने में बहुत मजा आएगा।

तभी विजय ने मुझे नीचे बैठा कर अपना लण्ड फिर से मेरे मुँह में भर प्रिया और कहने लगा- लो चूसो रोमा!

इस बार मैं विजय का लण्ड मजे ले लेकर चूसने लगी, मेरे सामने दो लण्ड थे, एक अनुराग का और एक विजय का…

मैं अभी विजय का लण्ड चूसती तो कभी अनुराग का… फिर विजय और अनुराग ने मिल कर मेरी ब्रा और पेंटी भी उतार दी, वो दोनों तो पहले से ही नंगे थे।फिर अनुराग शावर बंद कर प्रिया और बाथरूम के फर्श पर लेट गया, उसने मुझे अपने मुँह पर बैठा लिया और मेरी चूत चूसने लगा।विजय खड़ा था तो मैं उसका लण्ड चूसने लगी।काफी देर तक मैं विजय का लण्ड चूसती रही, फिर विजय ज़ोर ज़ोर से ‘आआअह्हह उउफ्फ्फ’ करते हुए उसने अपना सारा माल मेरे मुँह में ही भर प्रिया।फिर विजय बाथरूम से बाहर चला गया, अनुराग अभी भी मेरी चूत चूस रहा था और अब मेरे मुँह से भी सिसकारियाँ निकलने लगी, मैं आआअह्ह्ह्ह्ह्ह्ह आआअह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह करने लगी, तभी मेरा बदन अकड़ने लगा तो मैंने कहा कि मैं छूटने वाली हूँ।तो अनुराग ने कहा- मेरे मुंह पर ही छूटना!

मैं जब छूटी तो अनुराग ने सारा पानी पी लिया, विजय ये सब बाथरूम के बाहर खड़े होकर देख रहा था।

फिर हम तीनो बेड पर आकर लेट गए। मेरी चूत में बहुत खुजली हो रही थी क्योंकि मैं अभी न तो अनुराग से चुदी थी और न ही विजय से अब मेरा मन चुदने का कर रहा था।विजय का लण्ड थोड़ा सिकुड़ा हुआ था क्योंकि वो एक बार झड़ चुका था पर अनुराग अभी तक नहीं झड़ा था तो उसका लण्ड अभी भी खड़ा था।अब अनुराग मेरी चूत पर अपना लण्ड रख कर लण्ड से मेरी चूत को सहलाने लगा, फिर अनुराग ने अचानक मेरी चूत में एक ज़ोर के धक्के के साथ अपना आधा लण्ड मेरी चूत में डाल प्रिया।

मैं जोर से चिल्लाई ‘आआअह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह’ कर के तो विजय ने अपना एक हाथ मेरे मुँह के ऊपर रख प्रिया और दूसरे हाथ से मेरे बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा।

अनुराग ने एक और धक्के अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल प्रिया और मुझे चोदने लगा।

कुछ देर बाद विजय ने अपना लण्ड फिर से मेरे मुँह में डाल प्रिया, मैं लण्ड चूसने लगी, इससे विजय लण्ड फिर से खड़ा हो गया।

इधर मैं विजय का लण्ड चूस रही थी और उधर अनुराग मेरी चूत चोद रहा था, जब विजय का लण्ड खड़ा हो गया था तो विजय नेअनुराग से कहा- अब मुझे रोमा की चूत चोदनी है।

तो अनुराग ने अपना लण्ड मेरी चूत में से निकल लिया और फिर विजय ने मेरी चूत में अपना लण्ड टिका प्रिया और लण्ड को चूत के अंदर डालने लगा।

तब तक अनुराग ने मेरे बूब्स को अपने मुँह में ले लिया और मेरे बूब्स चूसने लगा। अब विजय का लण्ड भी मेरी चूत में पूरी तरह से घुस चुका था और विजय ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा।मेरे मुँह से आअह्हह्ह उउउफ्फ्फ उउइइ इइइ आआअह्हह्हह की आवाज निकलने लगी।

विजय मुझे ज़ोर ज़ोर से चोद रहा था और अनुराग देख कर मजा लेने लगा, कुछ देर बाद विजय ने अनुराग से कहा- अनुराग, तू रोमा डार्लिंग की गांड मार और मैं चूत मार ही रहा हूँ।

तो मैं डर गई और मैंने साफ साफ मना कर प्रिया क्योंकि इससे पहले मैंने कभी गांड नहीं मरवाई थी।

तब अनुराग और विजय मुझे बहुत फ़ोर्स करने लगे तो मैं मान गई और एक करवट लेकर लेट गई।विजय ने सामने से, मेरी चूत जो पहले से गीली थी, उसमें अपना लण्ड डाला और चोदने लगा तो पीछे से अनुराग मेरी गाण्ड चोदने केलिए तैयारी कर रहा था, उसने अपने लण्ड पर तेल लगाया और कुछ तेल मेरी गांड के छेद पर भी लगाया और लण्ड घुसाने लगा।

मैं चिल्लाने लगी, तभी विजय ने लिप किस करके मेरा मुँह बंद कर प्रिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा, अनुसग पीछे से झटके मार रहा था तो विजय को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी, अपने आप विजय का लण्ड मेरी चूत में घुस जा रहा था।

वो दोनों ऐसे ही मुझे चोदते रहे, तभी विजय कहने लगा- रोमा डार्लिंग… तुम्हारी चूत में जाने क्या जादू है, कब से तुम्हें चोद रहा हूँ पर अभी तक मेरा लण्ड अकड़ा नहीं !

तभी अनुराग ने कहा कि वो छूटने वाला है और फिर वो छूट गया और हमसे अलग हो गया, अब सारी मेहनत विजय को ही करनी थी तो विजय ने मुझे ऊपर आने को कहा और वो नीचे लेट गया।अब मैं विजय के लण्ड के ऊपर उछलने लगी और अनुराग वहीं बेड पर लेटे लेटे विजय और मेरी चुदाई देख कर मजे ले रहा था।

कुछ देर बाद विजय ने कहा- मेरा छूटने वाला है।

तो मैंने भी विजय को बताया- मैं भी छूटने वाली हूँ।

तब विजय ने अपना सारा माल मेरी चूत में ही छोड़ प्रिया और मैं भी सुस्त होकर विजय के ऊपर ही लेट गई और कहने लगी- बड़े ज़ालिम हो तुम लोग… आज पता चला कि दो मोटे लण्डों से एक साथ चुदने में कितना मजा आता है। पहली बार इतने जानदार मर्दों से चुदी हूँ।

मेरी चूत पूरी तरह फूल चुकी थी, मेरी चूत से रस नीचे बह रहा था।

तभी विजय बोला- अभी तो शुरूआत है, आज हम तुम्हें पूरी तरह से मजा देंगे, तुम आज का दिन जिंदगी भर नहीं भूल पाऊँगी… तुम्हारी चूत को पूरी तरह से फ़ाड़ कर उसका भोंसड़ा बना देंगे, आज से तुम हम दोनों की रखैल बन कर रहोगी… कुतिया… ज़िंदगी भर।

हम तीनो थक चुके थे, पता नहीं चला कि कब हमारी आँख लग गई और हम तीनों सो गए।कहानी जारी रहेगी।