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Hindi Sex Story • पठन समय: 6 मिनट • पढ़ा गया: 151 बार

हस्तमैथुन क्यूँ और कैसे करें?

रेणु फुद्दी

16 Apr 2008 को प्रकाशित

हस्तमैथुन क्यूँ और कैसे करें?
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प्रेषिका : रेणु फ़ुद्दी

हस्तमैथुन करना एक साधारण आदत है जिसे हर पुरुष पसंद करता है। छोटी अवस्था में ही उसे अपने लिंग की पहचान हो जाती है। ऐसा कहा जाता है कि घर की नौकरानी बालक को चुप करने के लिए उसके लिंग की मालिश कर देती है। बालक भी थोडा बड़ा होने पर अपने लिंग से खेलना सीख जाता है और आनंद उठाने के लिए अक्सर अपने लिंग को पकड़ कर सहलाता है। थोड़ा और बड़ा होने पर उसे चरम रीमा का आनन्द आने लगता है। कुछ लोग इसे लिंग का दुरूपयोग या पाप कहते हैं परन्तु जो लोग इसे लिंग का दुरूपयोग या पाप कहते हैं वे स्वयं भी इस का आनन्द लेते हैं। हाँ, किसी भी बात को अधिकता में करने से हानि होती है यह बात हस्तमैथुन के लिए भी लागू होती है।

वास्तव में हस्तमैथुन शारीरक और मानसिक तनाव को दूर करने का एक अनूठा साधन है। जो राहत हस्तमैथुन से प्राप्त होती है वह सम्भोग से भी प्राप्त नहीं होती। हस्तमैथुन अर्चनाओं की उड़ान पर आधारित होता है और आप अर्चनाओं में किसी भी ऊंचाई तक जा सकते हैं। आप की अर्चना में संसार के सबसे सुन्दर स्त्री या पुरुष आ सकते हैं, आप अपनी इच्छा से उनके साथ व्यवहार कर सकते हैं, आप का तीव्रता और धीमी गति पर नियंत्रण होता है। हस्तमैथुन में आपको अपने लिंग की क्षमता प्रदर्शित करने की भी आवश्यकता नहीं होती। आप और आपका हस्तमैथुन करने का तरीका ही आपके आनन्द की रीमा को तय करते हैं।

हस्तमैथुन कई प्रकार से किया जाता है। सबसे साधारण तरीका है लिंग को अपने हाथ में लेकर सहलाना या तीव्रता से आगे पीछे करना, जब तक आप का वीर्य न निकल जाये। यह उन स्थानों के लिए बहुत उपयोगी है जहाँ जगह का अभाव या एकांत न हो। जैसे छोटे घर या संयुक्त परिवार में रहने वाले लोग ! जहाँ एकांत केवल शौचालय या अपने बिस्तर में ही मिलता हो। ऐसे स्थानों में हस्तमैथुन का आनन्द केवल वीर्य स्लखन तक ही सीमित होता है। समय का अभाव, स्थान का अभाव मजबूर कर देता है कि हम तीव्रता से अपने आनन्द तक पहुँचें। इसका दुष्परिनाम आने वाले समय में विवाह में पता चलता है क्यूंकि बचपन से ही जल्दी समाप्त हो जाने की आदत पड़ जाती है। इसका अर्थ यह नहीं कि मर्दानगी समाप्त हो चुकी है। आप मर्द थे, मर्द हैं, और मर्द ही रहेंगे बस केवल आप अपने साथी से पहले स्लखित हो जाते हैं। इसका उपाय एक दूसरा विषय है।

हस्तमैथुन अपनी आवश्यकता के अनुसार किया जाता है, दिन में एक बार, दो बार, या चार बार, जितनी आवश्यकता हो उतना हस्तमैथुन करें। हर बार वीर्य स्लखन होना भी आवश्यक नहीं है। दिन में एक बार वीर्य स्लखित हो जाना उचित है या जब भी आपका शरीर वीर्य को बाहर निकलने की आवश्यकता दर्शाए। यदि आप वीर्य को बाहर नहीं निकालेंगे तो वह अपने आप ही बाहर निकल जायेगा, जिसे स्वप्नदोष कहा जाता है।

हस्तमैथुन का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप अपने हाथ और लिंग पर तेल या कोई चिकना पदार्थ लगा लें, फिर हल्के हाथ से लिंग की मालिश करें जब तक लिंग पूरी तरह से सख्त न हो जाये। लिंग-मुण्ड पर चिकनाई अच्छी तरह लगा कर उसे अपनी उंगली और अंगूठे के बीच प्रवेश कराएँ जैसे किसी योनि या गुदा में प्रवेश करा रहें हों या फिर चारों उँगलियों और अंगूठे को मिला कर गोलाई का रूप दें और उसमें अपने चिकने लिंग को ऐसे प्रवेश कराएँ जैसे किसी के मुख में प्रवेश करा रहें हों, मुखमैथुन मुद्रा में !

सख्त लिंग को कभी भी कस कर न पकड़ें ! चिकनाई के कारण घर्षण ऐसे करें जैसे सम्भोग किया जाता है। अर्चना करें कि आपका हाथ नहीं बल्कि वह आपकी प्रियतमा की योनि, मुख या गुदा है। यदि आप हस्तमैथुन को अधिक देर तक करना चाहते हैं तो बीच बीच में घर्षण क्रिया रोक कर अपने लिंग को सहलाएं या अपने अंडकोषों से खेलें। आप ऐसा भी कर सकते हैं कि दूसरे हाथ की एक उंगली में थोड़ा सा तेल कर उससे अपनी गुदा के चारों ओर और बीच में सहलाएँ। ध्यान रहे कि उंगली गुदा में प्रवेश न करे। ऐसे केवल स्लखित होते समय ही करें। स्लखित होते समय गुदा में उंगली के प्रवेश से आपका चरमरीमा का आनन्द दोगुना हो जायेगा, साथ ही साथ वीर्य निकलने की तीव्रता भी बढ़ जाएगी।

अब जब आपको लगने लगे कि वीर्य स्लखित होने वाला है तो घर्षण की तीव्रता की बढ़ा दें परन्तु हल्के हाथ से ! जोश और तनाव में सम्भव है कि आपकी पकड़ मजबूत हो जाये जिसके कारण नसों पर दवाब भी बढ़ जायेगा जो आगे चल कर हानिकारक हो सकता है।इस समय आपके लिंग में खून का प्रवाह तेज़ी से हो रहा होता है, कस कर पकड़ने से खून के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो सकती है।स्लखित होने से पहले लिंग की स्थिति को निर्धारित करें अर्थात ऊपर की ओर, नीचे की ओर, दायें या बाएं ! एक बार स्थिति बन गई तो फिर आप अपने वीर्य को निकलने दें।

स्लखित होने के तुरंत बाद लिंग को न छोड़ें, उसे सामान्य स्थिति में आने तक हल्के हाथ से सहलाते रहें। स्लखित होने के बाद लिंग को निचोड़ें नहीं, ऐसा करने से कोई लाभ नहीं होता। स्लखित होने के तुरंत बाद लिंग पर ठंडा पानी न डालें। यदि आपको तुरंत साफ़ करने की आवश्यकता है तो गुनगुने पानी का प्रयोग करें या किसी साफ़ कपड़े से लिंग को पोंछ लें अन्यथा 15 मिनट तक लिंग व शरीर को ठंडा होने दें फिर स्नान किया जा सकता है।

स्वामी सुखानन्द महाराज

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