फक देसी भाभी स्टोरी में एक विधवा अकेली रहती थी. एक बार उसकी पड़ोसन सहेली ने उसे उसके पति को भोजन करवाने को कहा. विधवा ने हाँ कर दी. रात को सहेली का पति आया.
नमस्कार पाठको, मेरा नाम अथर्व देवराज है और मैं कानपुर से हूं।मेरी उम्र 28 वर्ष है और पेशे से बैंक क्लर्क हूं।
मैं आपके सामने अपनी अगली कहानी लेकर प्रस्तुत हुआ हूं, आशा है कि आपको पसन्द आयेगी।मेरी पिछली कहानी5 आत्माओं ने विधवा की प्यास बुझाईमें आपने अमृता और उसके जीवन के बारे में जाना।
तो चलिए, फक देसी भाभी स्टोरी को आगे बढ़ाते हैं।
तंत्र क्रिया पूरी करने और आत्माओं के साथ संभोग करने के बाद अमृता में एक अलग ही आकर्षण पैदा हो गया।उसका बदन अब और अधिक आकर्षक और सुडौल बन चुका था।नितम्बों और स्तनों में कसावट आ गई थी और शरीर किसी अप्सरा की तरह आकर्षक हो गया था.
पर थी तो वो बेचारी एक विधवा ही … इसलिए सफेद वस्त्र धारण कर के स्वयं को पवित्र बनाए रखने का प्रयत्न करती थी.
लेकिन अब उसका यौवन उसके नियंत्रण में नहीं था।उसकी पड़ोसन सुधा कुछ दिनों के लिए अपने मायके गई थी क्यूंकि उसकी मां बीमार थी।आजकल अमृता अकेली ही रहती थी और अकेले ही मंदिर आती जाती थी।
एक शाम अमृता के पास सुधा का फोन आया- अमृता, तुमसे एक मदद चाहिए मुझे।अमृता- हां बोलो, क्या हुआ?सुधा- मेरे पति मुंबई से कल वापस आ रहे हैं, क्या तुम दो दिन उनके लिए भोजन और खाने पीने का इंतजाम कर दोगी?अमृता- हां बिलकुल, कर दूंगी, तुम परेशान मत हो, मैं संभाल लूंगी।
सुधा का पति मुकेश मुंबई में रहकर नौकरी करता था और साल में एक दो बार ही आता था।जब भी आता था तो सुधा और अपनी मां के लिए कुछ न कुछ तोहफे जरूर लाता था।
अमृता से भी उसके ठीक ठाक संबंध थे।रात को वो अमृता के घर भोजन के लिए आया।
अमृता सफेद साड़ी में खाना बना रही थी और किचन में काफी गर्मी की वजह से उसे काफी पसीना आ रहा था।उसका सूती ब्लाउज उस पसीने से लथपथ हो गया था और ब्रा झलकने लगी थी।
अमृता ने मुकेश को खाना परोसा।
मुकेश आज अमृता को ही देख रहा था।अमृता का जवान बदन मुकेश को आकर्षित कर रहा था।
मुकेश की नजरें अमृता के कपड़ों को चीरते हुए उसके गोरे मादक जिस्म को निहार रही थी।अमृता भी मुकेश की नजरों को भांप गई और समझ गई कि मुकेश की अंतर्वासना जाग उठी है।
मुकेश ने खाना खाते हुए कहा- खाना बहुत गर्म है भाभीजी, और स्वादिष्ट भी।अमृता- लगता है आपको ज्यादा भूख लगी है भाई साहब, दो रोटियां और ले लीजिए।मुकेश- भाभीजी, पेट तो भर गया है, बस दिल नहीं भर रहा है।
अमृता- तो आपका दिल कैसे भरेगा भाई साहब?मुकेश- क्या भाभीजी, इतने दिनों बाद घर लौटा हूं और सुधा मायके में है, भला मेरा मन भरेगा भी कैसे? सोचा था कि घर जाकर सुधा के साथ रात बिताऊंगा, लेकिन वो तो गायब है।अमृता- उसने बताया था कि उसकी मां बीमार है, इसीलिए बेचारी को जाना पड़ा।
मुकेश- लेकिन मैं क्या करूं अब, इतने दिन बाद घर आया हूं और फिर अकेला रहना पड़ेगा।
अमृता- समझ सकती हूं भाई साहब, आप परेशान न हों, कोई रास्ता जरूर निकलेगा।मुकेश- भाभीजी मैं मुंबई से कुछ तोहफे लाया था, आप ले लीजिए, मेरी तरफ से तोहफा समझकर।
अमृता- लेकिन वो तो आप सुधा के लिए लाए थे ना? आप उसी को दीजिए वरना उसे बुरा लगेगा।मुकेश- अरे उसकी फिक्र आप मत करो, मैं उसे समझा दूंगा, अब मेरा ख्याल आप रख रही हो तो गिफ्ट पर हक भी आपका ही है भाभीजी।अमृता- ठीक है, आप छत पर दे दीजिएगा, मैं खाने के बाद आ जाऊंगी,11 बजे।
मुकेश खाना खाकर अपने घर चला गया।अभय को खाना खिलाकर अमृता छत पर अपने बेडरूम में आ गई।
पसीना आने की वजह से अमृता ने रात को स्नान किया और फिर अपने बेडरूम में आकर बाल खींचे और फिर से अपने विधवा स्त्री के वस्त्र धारण कर लिए।
रात के 11 बजे थे इसलिए अमृता छत पर आ गई।वहां मुकेश उसका इंतजार कर रहा था।
मुकेश ने एक पैकेट अमृता को दिया।अमृता ने शुक्रिया अदा किया तो मुकेश बोला- भाभीजी, प्लीज इसे पहनकर दिखा दीजिए, मैं बहुत मन से लाया हूं और इस सफेद साड़ी में आपको देख कर मुझे जरा भी अच्छा नहीं लगता, आप आज रात यही पहन लीजिए ना।अमृता ने कहा- ठीक है, मैं पहन लूंगी।
यह कहकर वो नीचे अपने बेडरूम में चली गई।उसने पैकेट खोल कर देखा तो उसमे वॉयलेट कलर की नाईट रॉब थी और साथ ही ब्रा पैंटी का एक सेट भी था।
वो नाईट रोब स्कर्ट की तरह घुटनों तक आती थी।
अमृता ने अपने विधवा स्त्री वाले वस्त्र उतार दिए और फिर मुकेश की दी हुई नाइटी और ब्रा पैंटी पहन ली।ब्रा ऐसी थी कि उसमें स्त्री के स्तनों का अधिकांश भाग दृष्टिगोचर होता था।नाईटी पहन कर अमृता ने अपनी नाइटी का कुछ भाग ढीला ही रखा ताकि उसके क्लीवेज दिख सकें।
अमृता उसी अवस्था में छत पर आ गई तो मुकेश उसी के इंतजार में था।मुकेश ने अमृता का बदन देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं।वो अभी किसी अप्सरा की तरह खूबसूरत लग रही थी।उन्नत वक्ष, उसकी दृष्टिगोचर होती श्वेत घाटियां, हल्की मांसल कमर, और सुडौल नितंब,किसी अप्सरा की तरह लगता अमृता का बदन मुकेश को लुभा रहा था।
अमृता ने शरारती अंदाज में पूछा- कैसी लग रही हूं भाई साहब?मुकेश ने भी नहले पर दहला मारा और कहा- भाभीजी, इस अंधेरे में कुछ साफ दिख नहीं रहा है, तो मै कैसे कह दूं कि आप कैसी लग रही हो?अमृता- तो इस अंधेरे में उजाला कहां से लाऊं मैं, ताकि आप देख सको?मुकेश- बेडरूम में दिखा दीजिए, वहां तो रोशनी होगी ही।अमृता- ठीक है, आ जाइए।
मुकेश अपनी छत से कूद कर अमृता की छत पर आ गया और उसके साथ उसके बेडरूम की तरफ चल दिया।
बेडरूम में आ कर मुकेश ने दरवाजा लॉक कर दिया।अमृता उसके इरादे भांप गई।
लाइट खोल कर अमृता मुकेश के सामने खड़ी हो गई।
मुकेश ने जी भर के अमृता के जिस्म को निहारा और फिर कहा- भाभीजी, ये नाइटी आपके ऊपर खूब जंच रही है। आपको एक तोहफा और देना चाहता हूं, प्लीज मना मत करिएगा।अमृता ने कहा- अच्छा, क्या लाए हैं आप, दीजिए।
मुकेश- आप आईने के सामने आंख बंद कर के खड़ी हो जाइए।अमृता आईने के सामने आंख बंद कर के खड़ी हो गई।
मुकेश ने अपनी जेब से एक गोल्डन चेन निकाली और उसे अमृता को पहना दी।
अमृता को चैन पहनाकर अमित उसके बिलकुल पीछे खड़ा हो गया।उसकी लुंगी में से उसका लिंग तना हुआ था जो अंडरवियर के अंदर फुफकार रहा था।
मुकेश ने अपनी अंडरवियर को अमृता के बदन से सटा दिया।
अमृता के बदन से लंड छूते ही उसे एक भीषण उत्तेजना का अहसास हुआ।मुकेश ने अमृता की कमर पर हाथ रख कर उसे सहलाना शुरू कर दिया।
अमृता- भाई साहब, ये मत करिए, ये गलत है।मुकेश- कुछ गलत नहीं है भाभीजी, मैं भी प्यासा हूं और आप भी, आज आप मेरी और अपनी दोनो की प्यास बुझा दीजिए भाभीजी।
ये कहकर उसने नाइटी की गांठ खोल कर उसे अमृता के बदन से अलग कर दिया।
अमृता अब ब्रा पैंटी में थी।वो वॉयलेट कलर की स्ट्रिंग ब्रा उसके गोरे गोरे बदन पर खूब फबता था।
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मुकेश ने धीरे से उसकी ब्रा को खोल दिया और अमृता के 34B आकार के सुडौल स्तन ब्रा की कैद से मुक्त हो कर लटक गए।
नारियल के आकार के उसके स्तन इतने मांसल थे जैसे किसी कारीगर ने तराशे हों।
मुकेश के होंठ अमृता के होंठों पर सट गए और फिर दोनों ने एक लंबा स्मूच किया।
अमृता की अंतर्वासना भी अब भड़क उठी थी और उसने मुकेश की लुंगी में हाथ डाल कर उसके अंडरवियर को नीचे कर दिया।
मुकेश का लिंग 7 इंच का था।अमृता उसे सहलाने लगी.
मुकेश ने अपनी लुंगी खोल दी और अंडरवियर भी उतार दी।उसका काला लंड अमृता के सामने था।
अमृता एक प्यासी हिरनी की तरह उसपर टूट पड़ी।
मुकेश का काला लिंग अमृता के मुख में प्रवेश कर चुका था।अमृता अपनी जीभ से उसके लिंग के साथ खेल रही थी।
इसकी गुदगुदी से पैदा हुआ आनंद मुकेश को अत्यंत सुख दे रहा था।
मुकेश ने बहुत समय से सेक्स नहीं किया था इसलिए वो अमृता के मुंह में ही स्खलित हो गया।
उसके लिंग से निकलता वीर्य दही जैसा गाढ़ा और लसलसा था।
अमृता को बहुत समय बाद वीर्य का स्वाद चखने को मिला था।
अमृता ने चटखारे लेकर उसका स्वाद लिया।इसके बाद मुकेश जाकर बेड पे लेट गया।अमृता ने अपनी पैंटी की स्ट्रिंग खींच कर खोल दी और पूर्ण रूप से नग्न हो गई।
अमृता जाकर मुकेश के मुंह पर इस तरह से बैठ गई कि उसकी योनि मुकेश के होंठों से जा सटी।
मुकेश पागलों की तरह अमृता की योनि को चूसने लगा।अमृता के शरीर में वासना का ज्वार उठने लगा।
उसकी योनि से रस निरंतर बहता जा रहा था और मुकेश किसी प्यासे जानवर की तरह उसे पीकर अपनी प्यास बुझा रहा था।
मुकेश ने अमृता की योनी को इतना चूसा कि वो मुकेश के मुंह में ही झड़ गई।झड़ने के बाद अमृता मुकेश के बगल में ही लेट गई।
मुकेश का लिंग अब तन गया था और मुकेश अमृता को चोदने के लिए तैयार था।
मुकेश ने अमृता की चूत पर हाथ फेरा तो अमृता झनझना उठी।झड़ने की वजह से योनि हल्के से स्पर्श से भी झनझना उठी थी।
अमृता ने कहा- अभी रुक जाइए भाई साहब, अभी अभी झड़ी हूं इसलिए दर्द हो रहा है।मुकेश ने कहा- अरे भाभीजी, लेकिन ये जो लंड खड़ा हो गया है इसको कहीं न कहीं तो डालना पड़ेगा ना! चलिए चूत नहीं, आपके रसीले स्तनों को चोदता हूं।
यह कहकर मुकेश उठकर अमृता के ऊपर बैठ गया और फिर उसके स्तनों के बीच अपना लिंग फंसा लिया।अमृता ने अपने स्तनों को अपने दोनों हाथों से दबा लिया और फिर मुकेश उसके स्तनों को अपने लंड से चोदने लगा।
अमृता के स्तनों को इस अहसास से बहुत सुख प्राप्त हो रहा था।उसकी योनि गीली हो गई थी और रगड़ की वजह से उसे आनंद भी आ रहा था।
मुकेश का लिंग अमृता के चेहरे से टकराता और अमृता को अपने स्तन चुदवाने का सुख प्राप्त हो रहा था।तब मुकेश ने धक्के तेज कर दिए और फिर वो अमृता के स्तनों में ही झड़ गया।
मुकेश का सारा वीर्य अमृता के गले और स्तनों पर फैल गया और अमृता ने उसको अपने हाथों से इकट्ठा कर के चाट लिया।इसके बाद दोनों एक दूसरे की बाहों में समा कर लेट गए।
करीब डेढ़ घंटे तक चली इस प्रक्रिया ने दोनों के चेहरे पर संतुष्टि के भाव ला दिए थे लेकिन अभी भी उनके बीच संभोग होना बाकी था।
अमृता धीरे धीरे मुकेश के बदन को सहला रही थी, ताकि उसके अंदर फिर से वासना जागृत हो जाए।मुकेश के लिंग में फिर से कठोरता आने लगी।
मुकेश ने भी अपनी एक उंगली को अमृता की योनि में घुसा दिया और उसी से उसकी योनि में धक्के लगाने लगा।
कुछ ही देर बाद अमृता की योनि भी पानी छोड़ने लगी।अब वो पूरी तरह से संसर्ग के लिए तैयार थी।
अमृता ने कहा- मुकेश, अब रहा नहीं जा रहा, अपना औजार मेरे अंदर डाल दो ना!मुकेश ने कहा- लेकिन भाभी, मेरे पास कंडोम नहीं है, अगर आपको बच्चा ठहर गया तो?अमृता ने कहा- कोई बात नहीं, मैं गोली खा लूंगी लेकिन अब और मत रुको, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है।
मुकेश ने अमृता को सीधी लिटा दिया और फिर अपने लिंग पर थूक लगाकर उसे चिकना किया।अमृता की योनि पर रगड़ते हुए उसने धीरे से अपना लिंग अमृता की योनि में प्रवेश कर दिया।
फक देसी भाभी का मजा लेते हुए अमृता की आंखें आनंद से बंद हो गई।मुकेश धीरे धीरे उसकी योनि पर धक्के लगा रहा था ताकि उसे पूर्ण आनंद आए।
अमृता और मुकेश के होंठ आपस मे मिल गए और फिर धीरे धीरे उनके धक्के लगाने की गति बढ़ने लगी।अमृता के मुंह से आहें निकल रही थी और वो अपनी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी।
करीब आधा घंटे तक अमृता को चोदने के बाद मुकेश उसी की योनि में झड़ गया।अमृता भी अब तक दो बार और झड़ चुकी थी।
सच कहूं तो अमृता को आज के लिए चरमसुख मिल चुका था।इसके बाद अमृता ने अपनी योनि को साफ किया और फिर मुकेश को एक लिपलॉक किया।
रात के दो बजे थे इसलिए उसने मुकेश को आज रात अपने साथ ही रुकने को कहा।मुकेश भी उसके साथ उसी अवस्था में सो गया।
दूसरे दिन सुबह 5 बजे मुकेश छत से अपने घर पर चला गया और फिर दोपहर के खाने के समय उसने अमृता की फिर से चुदाई की।
दो दिन यही खेल चलता रहा जबतक सुधा वापस नही आ गई।
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