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भाभी की चुदाई पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 1,082 बार

फुद्दी चुदाने को राजी भाभी

नितेश जैन

20 Feb 2024 को प्रकाशित

फुद्दी चुदाने को राजी भाभी
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‘भाभी.. आपकी चूत से कुछ बह रहा है.. क्या मैं चूस लूँ..?’भाभी ने कहा- चल हट.. बदमाश कहीं के.. हर समय शरारत ही सूझती है।‘नहीं भाभी.. सचमुच.. आप खुद देख लो।’ मैंने कहा।‘अरे एक-दो बूँद पेशाब होगा।’

मैंने कहा- भाभी शायद नहीं.. भाभी पेशाब पीला होता है। यह सफ़ेद है.. गाढ़ा लिसलिसा सा।‘ओह.. तेरा क्या इरादा है.. चूस लो।’ भाभी ने चुदास भरा जबाव प्रिया।‘अच्छा भाभी।’

और मैं भाभी की चूत चूसने लगा। कुछ सफ़ेद सा लिसलिसा सा था.. शायद प्री-कम था.. उफ़.. भाभी का माल अच्छा था.. मुझे मजा आ गया।भाभी बोली- छोटू छोड़ दे.. मुझे जोर से पेशाब आया है।‘अरे भाभी जब मेरा मुँह लगा ही है तो अपना अमृत यहीं निकाल दो न।’

भाभी पेशाब करने लगीं, उनकी पेशाब कुछ नमकीन सी थी।

मैं सुरेन्द्र जैन.. उम्र 21 साल.. पठानकोट का रहने वाला हूँ। मेरा कद 5 फिट 9 इंच है। मैंने अपने जिस्म को बहुत संवार कर रखा हुआ था लौंडियाँ मुझ पर मरती थीं.. मेरे लौड़े का नाप 7 इंच है.. अच्छा-खासा मोटा और चूत की चुदाई के साथ खुदाई करने में सर्वोत्तम लौड़ों में से एक लवड़ा है।

अपने 5 भाई-बहनों में मैं सबसे छोटा हूँ.. और प्यार से मुझे लोग छोटू कहते हैं। मेरी भाभी सुनयना जैन.. उम्र 24 साल.. मेरे बड़े भाई की बीवी.. बहुत ही कामुक जिस्म वाली मस्त माल किस्म की महिला जिसके उठे हुए सख्त मम्मों का नाप 34 इंच.. 24 इंच की कमनीय कमर.. और 36 इंच के उठे हुए चूतड़.. वो बहुत ही सुन्दर है.. और मुझसे काफी खुली हुई हैं।

मेरे भाई नरेंद्र जैन दुबई में नौकरी करते हैं.. वो 28 साल के हैं तथा कुछ बुझे-बुझे से रहते हैं।तीन बहनें हैं तीनों शादीशुदा है.. पर उनमें से एक विधवा है.. जो यहीं हमारे घर पर ही रहती है और अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है.. उसका नाम रविंदर है।

हम एक मिडल क्लास फैमिली हैं। माँ-बाप और 5 भाई-बहन हैं.. पापा एक सरकारी नौकरी में थे.. अब रिटायर हो गए हैं.. और घर पर ही रहते हैं।

माता-पिता आज कल चार धाम यात्रा पर गए हुए हैं। अब घर पर मैं.. मेरी भाभी और रविंदर ही हैं। रविंदर अकसर कॉलेज और अपनी पढ़ाई में व्यस्त रहती है।मेरी भाभी तीन साल से शादीशुदा हैं और उसे माँ ना बन पाने का गम है। इसलिए हम दोनों में तय है कि जब तक वो गर्भ से नहीं हो जाती.. मैं उससे सम्भोग कर सकता हूँ।भाई अभी तक यहीं थे.. अभी 5 दिन पहले ही दुबई वापस गए हैं और मेरे लिए मैदान खुला छोड़ गए हैं।रविंदर के कॉलेज जाने के बाद मैं अकसर भाभी से छेड़खानी और चुदाई किया करता हूँ।

बात कुछ यूँ हुई.. एक दिन भैया और भाभी काफी मूड में थे और आपस में गुफ्तगू कर रहे थे.. मैं भी वहीं बैठा था.. भाभी बोली- आप दुबई चले जाते हो.. इधर मेरा मन नहीं लगता.. बताओ.. मैं क्या करूँ?

तो भैया बोले- अरे ये छोटू है ना.. तुम्हारा मन लगाने के लिए.. इसको सब अधिकार हैं तुम्हारे साथ यह ‘कुछ’ भी कर सकता है।भाभी बोली- ‘वो’ सब भी?भैया मुस्कुरा कर बोले- बाहर वालों से तो घर वाला अच्छा है।भैया जब चले गए तो अगले दिन जब रविंदर कॉलेज में थी और माँ-पिता जी तीर्थ-यात्रा पर चले जा चुके थे।

तो मैंने भाभी से कहा- आज बहुत मन हो रहा है कि आपके साथ कोई पिक्चर देखी जाए।भाभी बोली- कौन सी देखनी है?मैंने कहा- ‘ख्वाहिश’ देखें?

हम दोनों पिक्चर देखने चले गए।उस फिल्म में चुम्बनों के कई गरम सीन थे.. मेरा मन हुआ कि भाभी को चूम लूँ.. पर हिम्मत ना कर सका।पिक्चर का अंत होते-होते मैं इतना गरम हो गया था कि मैंने भाभी की चूची दबा दी।

जिसे भांप कर भाभी चौंक गईं और बोली- इसलिए पिक्चर देखना चाहते थे।मैंने कहा- हाँ भाभी..फिर यूँ ही हँसी-मजाक होता रहा और फिल्म खत्म होने पर हम लोग घर आ गए।

इतने में रविंदर के आने का समय भी हो गया था.. इसलिए हम दोनों चुप हो गए। दूसरे दिन बड़े सुबह ही रविंदर को कहीं जाना था और वो तैयार होकर चली गई। सुबह का सुहाना मौका था.. मैंने भाभी को पीछे से जाकर चूम लिया।

मेरे चूमने से नाराज़ ना होकर.. वो भी मुझसे लिपट गईं और हम लाग एक-दूसरे को देर तक चूमते रहे।

फिर भाभी मुझसे अलग होकर बोली- देखो छोटू.. आओ हम तुम एक समझौता कर लेते हैं.. तुम जब चाहो मुझे चोद सकते हो पर इन 21 दिनों में मैं प्रेगनेंट होना चाहती हूँ.. कर सकोगे?मैंने हामी भर दी और इस तरह शुरू हुआ हम दोनों का चुदाई का सफ़र।

उस दिन हम दोनों नहा-धोकर कमरे में आ गए और मैंने भाभी को चुम्बन करना शुरू किया। चुम्बन करते-करते मैंने उसके ब्लाउज में हाथ डाल कर उसके मम्मे दबाने लगा और धीरे-धीरे उसके ब्लाउज के बटन खोलना शुरू कर प्रिया।

जैसे-जैसे बटन खुल रहे थे.. भाभी के चेहरे पर चमक आते जा रही थी। पूरा ब्लाउज उतार कर मैंने उसकी ब्रा का हुक भी खोल प्रिया।

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अब भाभी मेरे सामने आपने 34 डी नाप के मम्मों को ताने हुए खड़ी थी। वो हँस कर मुझे देख रही थी और कह रही थी- छोटू ये सब करना कहाँ से सीखा?मैंने मुस्कुरा कर कहा- सब आप लोगों को करते हुए देख कर सीख लिया।

अब मैंने आगे बढ़ कर भाभी की चूचियों को चूसने लगा, वो सीत्कार करने लगी- अह.. उफ़.. अह उफ़!

अब मेरा हथ उसके पेटीकोट के इजारबन्द पर था और मैंने उसका इजारबन्द खोल प्रिया, इजारबन्द खुलते ही पेटीकोट नीचे गिर गया।

अब भाभी एकदम नंगी हो गई थी। अब उसकी बारी थी.. वो मेरी टी-शर्ट उतार कर मेरे जिस्म को चूमने लगी। मुझे उसके मादक जिस्म से भीनी-भीनी खुश्बू आ रही थी और मैं मदमस्त होता जा रहा था।

वो मेरी टी-शर्ट उतार कर मेरी पैन्ट की जिप खोल रही थी और मेरे लौड़े को पकड़ कर उसे उत्तेजित करने लगी। मेरा लौड़ा धीरे-धीरे आसमान की तरफ़ देखने लगा था और उसने उसे अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर प्रिया।

मैं अपने हाथों से उसके मम्मों को दबा रहा था और वो लौड़े को चूस रही थी। लौड़े को चूसते-चूसते थोड़ा सा प्री-कम भी निकला जो उसने चट कर लिया।

अब मैं उसकी चूत को चूसने लगा। मैंने पहले तो उसकी चूत को धीरे-धीरे चाटा.. फिर तेजी से अपनी रफ्तार बढ़ा कर अपनी जीभ को अन्दर-बाहर करने लगा।भाभी खूब आनन्दित हो रही थी और धीरे-धीरे से मादक आवाजें निकाल रही थीं- करे जाओ.. मेरे देवर राजा.. बहुत मजा आ रहा है.. आह।हम दोनों को इस आनन्द को उठाते हुए काफी समय बीत गया था और दोनों तरफ़ से कोई अपनी कामवासना में कमी नहीं आ रही थी।

कभी वो मेरे को कस कर गले से लगाती और कभी मैं उसको गले लगाता। यूँ ही कामातुर हो कर एक-दूसरे को चूमते-चाटते काफी समय हो गया.. तो भाभी बोली- अब मेरा ‘काम’ कर ही डालो छोटू.. नहीं तो रविंदर आ जाएगी।

हम दोनों बिस्तर पर चले गए और भाभी को पलंग पर चित्त लिटा कर मैं उसकी जाँघों को सहलाने लगा.. भाभी मस्त हो रही थी और उसने अपनी टाँगें रण्डियों के जैसे फैला दीं।अब उसकी चुदासी चूत मुझे साफ़ नज़र आने लगी और मेरे लौड़े का भी बुरा हाल हो रहा था।

मैंने ऊपर वाले का नाम लेकर भाभी की बुर के मुहाने पर अपना लण्ड रख कर एक तेज धक्का लगा प्रिया.. और नसीब ने साथ देकर मेरा आधा लण्ड उसकी चूत के अन्दर कर प्रिया, एक-दो धक्कों के बाद पूरा का पूरा लण्ड चूत की जड़ में अन्दर तक चला गया।

जैसे ही लवड़े ने उनकी बच्चेदानी पर चोट की.. भाभी जोर से चीख पड़ीं।मैंने उसका मुँह बन्द कर प्रिया और हचक कर धक्के लगाता रहा।वो मस्त हो गई और मेरे जिस्म को चूमने लगी। मैं उसके मम्मों को चूमता और उसके निप्पलों को अपने होंठों से चचोरता हुआ उसकी चूत में अपना लौड़ा अन्दर-बाहर किए जा रहा था।

इस तरह चुदाई करते-करते मैंने अपना पूरा लौड़ा भाभी की बुर में पेल प्रिया।वो एकदम से झड़ कर मुझसे बुरी तरह से चिपक गई थी.. मैं भी झड़ गया था और उसको अपनी बाँहों में भर कर उसी के ऊपर पड़ा रहा।

इस तरह हम करीब आधे घन्टे तक लिपटे पड़े रहे। अब रविंदर के आने का समय हो गया था इसलिए एक-दूसरे को चुम्बन करके अलग हो गए।

अब मेरे मन में एक चिंता थी कि अगर रविंदर को इस बात का पता चल गया.. तो क्या होगा.. अभी 21 दिन चुदाई करना है और अगले हफ्ते तो पूरे सात दिन उसकी छुट्टियाँ हैं।मैंने भाभी से कहा- इस जाल में रविंदर को भी फंसना पड़ेगा.. नहीं तो हम दोनों को महंगा पड़ेगा।

इसलिए हम दोनों अभी सोच ही रहे थे कि रविंदर आ गई। भाभी ने धीरे से कहा- यह तुम मुझ पर छोड़ दो.. दो-तीन ब्लू-फिल्म की सीडी लाकर मुझे दो मैं उसे पटा लूँगी।मैंने कहा- ओके मैं ला दूँगा।

मैंने चार ब्लू-फिल्मों की सीडी लाकर भाभी को दे दीं और खाना खाकर घर से निकल गया।मैं उस दिन.. सारा दिन बाहर रह कर भाभी का जादू देखने को बेताब रहा.. शाम हुए घर आया। मैंने भाभी की तरफ देखा.. तो भाभी ने हँस कर आँख दबा दी। मतलब काम हो गया था.. मेरी तबियत मस्त हो गई।

अब आगे क्या हुआ.. क्या मैं रविंदर को भी.. कर लूँगा..? अगली बार समय मिलाने पर लिखूँगा।

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