फोन सेक्स चैट

अंदर से गीली और नर्म है

लेखक: Antarvasna दिनांक: 08-12-2013 पठन समय: 1 मिनट

जब टिका देते हो इस जगह तुम अपनी जुबानमेरे जिस्म में उठा देते हो तुम एक तूफ़ानजी चाहता है बस यूँ ही तुम चूमते रहो प्यार सेचाट चाट के मेरी इसे हो जाओ हलकानइसका इलाज बस यही है प्यार से खा जाओ इसेयह तंग मुझे बहुत करती है, करती है मुझे परेशानजब भी देख लेती है तुम्हें, यह फुदकने लगती हैतुम से मिल के कुछ करने का सोचने लगती हैचूमने चाटने के बाद जब यह हो जाय गीली और मस्तइसकी आग बुझा दो मेरे साजन, यह तो है आतिश फ़िशाँचाट चाट के तुम बना दो इसको बदमस्त और दिवानीफिर डाल के अंदर कर दो इसके पूरे सारे अरमानभट्टी की तरह गर्म है अंदर से गीली और नर्म हैबहुत ही ज्यादा बेशर्म है बेहया है, है यह नादानढीठ है बहुत लाज आती नहीं मुझे तुम्हें सब कुछ देते हुएतुमसे करवाने के लिए इसके लबों पे रहती है हमेशा हाँ…