होम पर वापस जाएं
भाई बहन पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 223 बार

गाँव की तीन कमसिन गोरियाँ

राज मिश्रा

17 Sep 2012 को प्रकाशित

गाँव की तीन कमसिन गोरियाँ
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

जवानी हर इंसान की काबिले अन्जाम होती है..निगाहें नेक भी इस उम्र में बदनाम होती हैं..

नमस्कार दोस्तो, मैं अपनी पहली कहानी आपके लिए लिख रहा हूँ

मेरे घर में और पापा और मम्मी हैं, मैं अपने घर में अकेला हूँ.. न मेरा कोई भाई है और न कोई बहन है।

मैं जवान हो चुका हूँ और पढ़ता हूँ। उस दिन भी मैं नियमित रूप से कोचिंग गया था और जब घर आया तो देखा कि मामा जी घर आए थे.. मैंने मामा को प्रणाम किया।

फिर मामा ने मुझसे चलने को बोला.. तो मैंने पूछा- कहाँ चलना है?तो मामा ने कहा- चलो तो सही..

मैं तुरन्त अपना सामान ले कर तैयार हो गया और मामा अपनी कार से मुझे अपने घर ले आए।मैं 7 साल बाद मामा के घर आया था। सब कुछ बदल चुका था..

मेरे मामा के घर मामा-मामी और उनकी दो बेटियाँ हैं उनकी सिर्फ दो बेटियां आनवी और अनु हैं.. मामा के भी कोई बेटा नहीं है।मामा एक गाँव में रहते हैं.. आज वे कहीं जाने वाले थे और मामी भी मायके चली गई थीं.. क्योंकि मामा के ससुर जी बीमार थे।

गाँव वालों से दुश्मनी के कारण मामा किसी को अपने घर नहीं बुलाते थे, अगर वे कहीं जाते हैं तो बस मेरी माँ को ही बुलाते हैं.. लेकिन इस बार मुझे बुलाया और वे चले गए।

मैं बाहर टहलने निकल गया था.. जब वापस आया तो शाम हो गई थी।आनवी बोली- भैया मैं गेट बन्द कर देती हूँ.. आप अन्दर आ जाओ..

मैंने अपने जूते निकाले.. और हम दोनों अन्दर चले गए।

मैंने अन्दर आकर देखा कि उसकी एक सहेली भी आई थी.. तो मैंने आनवी से पूछा- ये कौन है?उसने बताया- ये पूजा.. मेरी सहेली है.. ये आज मेरे पास सोएगी।

फिर हमने साथ-साथ खाना खाया, हम साथ-साथ ही सोने भी चले गए।हम सब एक ही बिस्तर पर सोये हुए थे।

तभी आनवी ने मेरा मोबाईल माँगा.. मैंने मोबाइल उसे दे प्रिया और मैं सोने लगा उसने कोड पूछा और मैंने उसे बता प्रिया।मेरे मोबाईल में ब्लू-फिल्म थी और मैं डर रहा था कि कहीं वो उसे देख ना ले।

दस मिनट बाद मैंने देखा कि वो ब्लू फिल्म देख रही थी और अपनी बहन और सहेली को भी दिखा रही थी।मैं समझ गया कि आज वर्षों की तमन्ना पूरी होने वाली है।मैं तुरन्त उठ गया और बोला- ये क्या देख रही हो?पूजा बोली- जो देखना चाहिए..

मैं मुस्कुरा कर अपना लौड़ा सहलाने लगा.. वो तुरन्त आकर मेरे लन्ड को सहलाने लगी।मैं भी उसे चूमने लगा..तब तक आनवी और अनु एक-दूसरे को चूमने लगीं.. फिर हमने एक योजना बनाई।

मैंने पूछा- अनु फ्रिज में बियर है?तो अनु बोली- हाँ, पापा ने दो बोतल रखी हैं।

यह भी पढ़ें (Recommended)

चूत शृंगार-1

मैंने लाने को कहा.. अब हम सबने दो बोतलें पीकर खाली कर दीं।उन सब ने पहली बार पी थी.. तो वे तीनों बहकने लगीं।पहले हम सब बाथरूम में गए और अपना-अपना हथियार साफ किया और कमरे में आने के बाद वे सब एक साथ मुझ पर भूखे शेर की तरह टूट पड़ीं।

सब नशे में थे.. हम सबने कपड़े उतार दिए और पूजा ने अपनी चूत को मेरे मुँह पर लगा प्रिया, मैं उसकी बुर को चाटने लगा।फिर आनवी और अनु की चूत को भी चाटा, उनके मुँह से अजीब सी आवाजें निकल रही थीं।

आनवी ने मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और चाटने लगी।उधर मेरे मुँह में पूजा की चूत थी और हाथ में अनु की चूचियाँ थीं।

मुझे लगा था कि बीयर की वजह से मुझे पेशाब आने वाली है.. मैंने आनवी के मुँह को हटाया और बाथरूम में जाकर पेशाब किया.. फिर आकर चुदाई चालू हुई।

मैंने उसकी चूचियाँ इतनी जोर से मसलीं कि वे लाल हो गईं और फिर मैंने उसकी बुर में हाथ लगाया और अपना हथियार उसकी बुर में पेलने लगा।

मुझे ऐसा लग रहा था कि वो पहले कहीं चुदवा चुकी है.. लेकिन मैं नशे में चोदता रहा और उसकी रसीली चूचियाँ दबाता रहा।उसने अपना पानी छोड़ प्रिया तो मेरा पानी भी निकल गया।अब वो अपनी चूत मेरे मुँह पर रख कर अपना पानी चटाने लगी।

फिर बीस मिनट बाद आनवी आई और अपने कपड़े उतारने लगी।

मेरा चूत चाटने को मन कर रहा था.. मैंने उसकी चूत को देख कर अपनी जीभ अपने होंठों पर फिराई.. तो आनवी ने तुरन्त अपनी चूत मेरे मुँह में लगा दी।

अब मैं उसकी चूत चाट ही रहा था कि मादरचोदी ने मेरे मुँह में पेशाब कर दी और मैं उसकी पेशाब पीने लगा।फिर मैंने उसको नीचे करके उसकी गाण्ड में तीन सेल वाला तेल लगाकर लाईटली लौड़ा पेल प्रिया.. वो रोने लगी। मैं पूरा पेल कर ऊपर-नीचे करता रहा।

लण्ड पेलते-पेलते उसकी गांड को बाइस्कोप बना प्रिया और फिर चूत में उंगली डालने लगा।फिर उसकी बुर को भोसड़ा समझ कर चोदने लगा।वो पानी छोड़ बैठी और चली गई।

फिर अनु आई.. पर मुझमें दम ही नहीं बचा था कि कैसे पेलूँ.. फिर मैं उसकी चूचियाँ दबाने लगा और चूत चटाई की रस्म चलने लगी।

हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए और कुछ देर बाद मैंने उसकी बुर में लन्ड पेलना चाहा पर असफल रहा और वही तीन सेल वाले तेल को लगा कर लौड़ा पेलने लगा.. वो कराहने लगी फिर मैं अपने होंठों से उसकी बुर का रसपान करने लगा।

वो गनगना उठी और इठते हुए झड़ने लगी.. मैंने उसका चूत वाला पानी पिया और उसको भी मूतने को कहा।उसने मूता और मैंने उसका मूत भी पी लिया।फिर उसने मेरा मूत पिया और हम सभी थक कर सो गए। फिर सुबह मामा नहीं आए.. तो फिर से चुदाई शुरू हुई।

यह कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताएं.. फिर मैं अगली कहानी लिखूँगा।support@mohakkisse.com

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

चूत शृंगार-1
भाई बहन

चूत शृंगार-1

जाने क्या सोच कर मेरे माता-पिता ने मेरा नाम कमला रख़ प्रिया था, यों तो कमला लक्ष्मी का नाम है, पर मुझे सदा धन की कमी रही है, भाग्य ने कभी साथ नहीं प्रिया, गर्भ में बच्चा आते ही पति का देहान्त हो गया और बच्चा पैदा हुआ तो मरा हुआ! जिस औरत का न पति हो, न ...

9 मिनट 784
मेरी चढ़ती जवानी के रोचक प्रसंग- 1
भाई बहन

मेरी चढ़ती जवानी के रोचक प्रसंग- 1

Xxx ट्रेन में सेक्स का हल्का फुल्का मजा मुझे मेरे छोटे भाई ने प्रिया जब हम दोनों रेलगाड़ी से अपने मामा के घर जा रहे थे. डिब्बे में बहुत भीड़ थी. वहां भाई ने मेरे साथ क्या किया?

20 मिनट 536
बुआ जी के लड़के के लण्ड की भूख
भाई बहन

बुआ जी के लड़के के लण्ड की भूख

दोस्तो, मैं तनुजा मान अपने वादे के मुताबिक फिर से अपनी कहानी ले कर हाज़िर हूं।आप सब मुझे जानते ही हो जो नए पाठक हैं वो मेरी पिछली कहानीब्रदर सिस्टर सेक्स: भाई से सील तुड़वायीपढ़ें।मेरे प्यारे मित्रो, मुझे आपके बहुत से मेल मिले हैं, मैं सबका रिप्‍ल...

12 मिनट 166

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।