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भाभी की चुदाई • पठन समय: 16 मिनट • पढ़ा गया: 922 बार

गांव की देसी भाभी की मालिश और चुदाई

शिवा अवस्थी

11 Nov 2024 को प्रकाशित

गांव की देसी भाभी की मालिश और चुदाई
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दोस्तो, मेरा नाम शिवा है और अभी मेरी उम्र 22 साल है. मैं फर्रुखाबाद जिले का रहने वाला हूँ. मेरा कद 5 फुट 7 इंच का है और मैं एक गोरे रंग का सुडौल जवान हूँ.

यह बात उस समय की है, जब मैं 12वीं की पढ़ाई कर रहा था. मेरे गाँव में एक मेरी भाभी रहती हैं. उनका नाम सुमन था. वैसे तो उनकी उम्र 32-33 की होगी, मगर उनके शरीर की बनावट और गठाव ऐसा है कि कोई भी उन्हें देखकर यही कहेगा कि उनकी उम्र 23-24 साल की है.

भाभी के मेरे घर वालों से बड़े अच्छे सम्बंध हैं, इसलिए मेरा अक्सर उनके घर आना जाना होता रहता है. उनकी शादी को कई साल हो गए, पर अब तक उनके कोई बच्चा नहीं है.

एक दिन भाभी मेरे घर आईं और उन्होंने कहा- शिवा, मुझे कल मंदिर जाना है और तुम्हारे भैया घर पर नहीं हैं. क्या तुम मुझे मंदिर ले चलोगे?मैंने हाँ कर दी.यह मन्दिर शहर से काफी दूर था.

दूसरे दिन सुबह उनका फोन आया और भाभी ने कहा कि शिवा भूलना मत … ठीक 8 बजे तक आ जाना.मैं ठीक 8 बजे बाइक लेकर उनके घर पहुंच गया. मैंने दरवाजा खटकाया, तो भाभी बाहर आ गईं.

मैं तो अपनी देसी भाभी को देखकर अपने होश खो बैठा. लाल साड़ी में क्या मस्त माल लग रही थीं. मैं उन्हें एकटक देखता रह गया.तभी उन्होंने कहा- क्या हुआ शिवा?मैंने कहा- कुछ नहीं चलें?भाभी ने कहा- हां चलो.

वे लपक कर मेरे साथ बाइक पर बैठ गईं और हम लोग चल पड़े.

मेरे मन में आज उनको लेकर कामुक विचार आने लगे. मैं उनके बारे में सोचने लगा कि भाभी को कैसे चोदा जाए. भाभी का स्पर्श भी मुझे इस समय मिल रहा था. ये सब महसूस करके और सोचकर मेरा लंड खड़ा होने लगा.

तभी भाभी ने कहा- क्या सोच रहे हो … बाइक इतनी धीरे क्यों चला रहे हो?मैंने कहा- भाभी मैं सोच रहा था कि आप बहुत सुंदर हो. लाल साड़ी आप पर कितनी फबती है.उन्होंने हंसते हुए कहा- अच्छा … तो ये सोच रहे हो.मैं हंस प्रिया.

उस दिन हम लोग बातें करते हुए मंदिर पहुंचे, वहां नेहा की और हम लोग वापस चल पड़े.रास्ते में मैंने कहा- भाभी, चलो कहीं बैठ कर खाना खा लेते हैं.

हम लोग एक रेस्टोरेंट में गए, वहां लंच किया और शाम को 4 बजे तक वापस आ गए.लेकिन दोस्तो … बार बार भाभी के बारे में सोच कर मेरा लंड खड़ा हो रहा था.

आखिर में मैंने उनके नाम की मुठ मारी और अपने लंड को शांत किया. उस दिन मैं सारी रात नहीं सोया. मेरी आँखों में बार बार भाभी का गदराया बदन घूम रहा था. मैं उन्हें चोदने की सोच कर बड़ा बेताब होने लगा था.

दूसरे दिन मैं उनके घर गया और मैंने देखा कि भाभी नहाने जा रही थीं. इस वक्त मैंने उन्हें देखा, तो वे पेटीकोट ब्लाउज में थीं. मैंने भाभी को इस अवस्था में पहली बार देखा था. उन्हें देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया और लगा कि अभी पकड़ कर भाभी को चोद दूँ.

भाभी के 34 साइज़ के मम्मों का उभार देखकर मेरे मुँह से दबी हुई आवाज निकल गई- वाऊ … क्या मस्त फिगर है.तभी भाभी ने तौलिया से मम्मों को ढकते हुए कहा- क्या देख रहे हो?मैंने कहा- सॉरी भाभी … मैं चलता हूँ.भाभी- तुम बैठो, मैं अभी दस मिनट में आती हूँ.

लेकिन मैं नहीं रुका और भाभी के बाथरूम में जाते ही मैं घर चला आया. घर जाकर मैंने सीधे उनके नाम की मुठ मारी … तब मुझे कुछ चैन मिला. अब तो मेरी बेचैनी और बढ़ गयी थी.

तभी भाभी का फोन आया और कहा- तुम अचानक चले क्यों गए?मैंने कहा- कुछ नहीं … बस ऐसे ही. आप व्यस्त थीं. तो मैंने सोचा कि बाद में आ जाऊंगा.भाभी ने पूछा- अरे मैं व्यस्त नहीं थी, बस नहाने जा रही थी. तुमको कोई काम था क्या?मैंने कहा- नहीं भाभी मैं तो बस यूं ही आया था. मेरा मन नहीं लग रहा था, तो सोचा कि आपके पास जाकर कुछ बात करके समय बिताऊं.भाभी- अरे तो तुम रुकते तो!

फिर हमने फोन से बात करनी चालू कर दीं. भाभी मुझे खूब बात करती थीं.उन्होंने कहा- मैं भी सारे दिन बोर होती रहती हूँ. तुमसे बात करके मेरा भी टाइम पास हो जाता है.इससे मुझे उनसे बात करने का बहाना मिल गया था. अब जब भी दिन में खाली समय मिलता, तो भाभी से बात करने लगता.

एक दिन भाभी ने मुझसे पूछा- शिवा यार … अपनी गर्लफ्रेंड से तो मिलवाओ?मैंने कहा- नहीं भाभी … मैं अभी इन चक्करों में नहीं पड़ा हूँ.भाभी हंस कर बोलीं- इन चक्करों में पड़ा नहीं जाता, खुद ब खुद चक्कर पड़ जाते हैं.मैं उनकी इस बात पर हंस प्रिया.

अब मुझे लगा कि शायद भाभी भी कुछ चाहती हैं. इसके बाद भाभी मुझसे गर्लफ्रेंड और सेक्स आदि को लेकर धीरे धीरे खुलने लगीं. हालांकि हम दोनों के बीच अभी खुल कर बात नहीं हुई थी. तब भी मुझे इस बात का इन्तजार था, जब भाभी मुझे खुद से अपने ऊपर आने का कहेंगी.

फिर ऐसे ही कुछ दिन बीते थे कि एक दिन भाभी ने मम्मी से फोन पे कहा- आज मैं घर पर अकेली हूँ और मेरी तबीयत भी ठीक नहीं है. आज शिवा को मेरे घर सोने भेज दो.मम्मी ने मुझे बुलाया और कहा- आज तुम भाभी के यहाँ जाकर सो जाओ, वो अकेली हैं … और उनकी तबीयत भी ठीक नहीं है.

यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा. मैं तुरंत भाभी के घर की तरफ चल पड़ा. मैंने जैसे ही गेट खटकाया, तभी भाभी दरवाजा खोलने आईं. भाभी ने गेट खोला, तो मैंने देखा कि उस दिन भाभी ने काली नाईटी पहनी हुई थी.क्या मस्त कांटा माल लग रही थीं वो. उनको देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे काम की देवी सामने खड़ी हो.

फिर भाभी ने नशीले अंदाज में कहा- ऐसे क्या देख रहे हो … अन्दर आ जाओ.हम दोनों अन्दर आ गए.

मैंने पूछा- भाभी, आपकी तबीयत को क्या हुआ?भाभी बोलीं- कुछ नहीं यार … बदन में दर्द हो रहा है. तुम बैठो मैं चाय बनाकर लाती हूँ.

फिर हम लोगों ने चाय पी, पर मेरी नजर सिर्फ उनके मम्मों को घूर रही थी. तभी भाभी ने झुक कर अपने मम्मों को दिखाते हुए कहा- मेरा एक काम करोगे?मैंने कहा- हाँ क्या काम है बताओ?भाभी ने कहा- ये लो ट्यूब … इससे मेरे बदन की मालिश कर दो.ये सुनकर मैंने कहा- हां क्यों नहीं, आप लेट जाओ, मैं अभी आपकी मालिश कर दूँगा.

तुरंत ट्यूब हाथ में में ले लिया मैंने और भाभी पट होकर लेट गयीं.मैंने कहा- भाभी, ऐसे तो आपकी नाईटी खराब हो जाएगी.

तो उन्होंने उठ कर अपनी नाईटी उतार दी. अब वो मेरे सामने केबल ब्रा और पेंटी में थी, उन्होंने रेड कलर की ब्रा और पेंटी पहन रखी थी. मैं भाभी को घूरता रह गया. ऐसा लग रहा था जैसे कोई अप्सरा मेरे सामने हो. भाभी ने एक कंटीली मुस्कान बिखेरी और गांड ऊपर करके लेट गईं.

मैं भी बेड पर बैठ के भाभी की पीठ की मालिश करने लगा. मेरे हाथ का स्पर्श जैसे ही भाभी के जिस्म से हुआ, मेरा लंड लोवर में टेंट बनाने लगा. आज मुझे भाभी पूरे मूड में दिख रही थीं. मैं भी प्यार से रगड़ते हुए भाभी के जिस्म का अहसास करने लगा.

मैंने भाभी के कंधे दबाते हुए उनसे पूछा- भाभी इधर दबाने से आपको कैसा लग रहा है?भाभी बोलीं- सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा है.मैंने पूछा- और अच्छे से करूं?भाभी बोलीं- हां जैसे मर्जी हो, वैसे करो. बस मुझे चैन मिलना चाहिए.

उनकी इस दो अर्थी बात से मुझे कुछ समझ आया, तो मैंने कहा- पूरा चैन चाहिए तो फिर मुझे आपके ऊपर चढ़ना पडेगा.भाभी बोलीं- मेरी तरफ से तुम्हें पूरी छूट है … मेरे ऊपर चाहे जैसे चढ़ जाओ.

मैं ये सुनते ही भाभी के ऊपर ऐसे बैठा कि मेरा लंड भाभी की गांड से टच होने लगा.

तब उन्होंने कहा- आह सच में बड़ा मजा आ रहा है … तुम थोड़ा और ऊपर कंधों से पूरी पीठ तक हाथ फेर कर करो.मैंने कहा- फिर तो मुझे आपकी ब्रा हटानी पड़ेगी.उन्होंने कहा- हां तो ब्रा का हुक पीछे ही तो है, उसे खोल दो.

मैंने झट से उनकी ब्रा खोल दी और एकदम नंगी पीठ पर एक हाथ से मालिश करने लगा.

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तब भाभी ने कहा- दोनों हाथों से दबा दबा कर करो न.मैंने कहा- आपको अच्छा लग रहा है न.उन्होंने कहा- हां मुझे बड़ा मजा आ रहा है. बस तुम्हारा लोअर मुझे चुभ रहा है. तुम अपना लोवर उतार कर मेरे ऊपर आ जाओ.

अब मुझे लगा कि भाभी भी चुदाई कराना चाहती हैं. मैंने तुरंत अपनी लोवर उतार कर उनके ऊपर चढ़ गया. अब मेरा लंड उनकी मस्त गांड की दरार पर टच हो रहा था. भाभी भी मेरे लंड को महसूस कर रही थीं. उनके मुँह से सेक्सी आवाज निकलने लगी थी.

तभी भाभी ने कहा- शिवा अब थोड़ा नीचे जांघों में भी मालिश कर दो.

मैं खुद को बहुत खुशनसीब समझ रहा था कि इतनी मस्त औरत मुझसे अपने बदन की मालिश करवा रही है. मैं भाभी की जांघों की मालिश करने लगा. मेरा लंड मुझे बेकाबू कर रहा था, मगर मुझे डर लग रहा था कि कहीं भाभी कुछ करने से नाराज न हो जाएं, इसलिए मैं अपने आप को बार बार रोक रहा था. मगर कब तक रोक पाता.

अब मैं मालिश के साथ साथ उनकी गांड को भी सहला रहा था और उनकी चूत भी टच करने लगा. अब भाभी भी गरम होने लगी थीं और उनकी चूत गीली हो रही थी, जिसकी भीनी भीनी खुशबू मुझे पागल बना रही थी.

तभी मैंने अपनी एक उंगली भाभी की चूत पर टच की, जिससे भाभी एकदम सिहर उठीं और एकदम से बोलीं- क्या कर रहे हो?मैं तो डर गया. मैंने कहा- सॉरी.तो भाभी ने पूछा- तुमने कभी सेक्स किया है?मैंने कहा- नहीं.तो उन्होंने कहा- आज करोगे मेरे साथ?

यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा और मैं एकदम से गर्म हो गया.

उन्होंने कहा- क्या हुआ?मैंने कहा- भाभी आप क्या कह रही हो?उन्होंने चित होते हुए अपने मम्मे दिखाए और मेरा लंड पकड़ लिया जो एक लोहे की रॉड की तरह खड़ा था.

भाभी ने मेरी चड्डी में खड़ा लंड देख कर कहा- वाह कितना बड़ा लंड है. इसे बाहर निकालो.उन्होंने मेरी चड्डी नीचे कर दी और मेरे लंड को सहलाने लगीं.

तभी मैंने कहा- भाभी मैं आपकी चूत देखना चाहता हूँ.तो उन्होंने कहा- देखना चाहते हो या चोदना चाहते हो?मैंने कहा- दोनों … अगर आपकी इच्छा हो तो?

उन्होंने कहा- मेरी पेंटी निकाल दो.मैंने तुरंत उनकी पेंटी निकाल दी.

दोस्तो … क्या मस्त गांड और चूत मेरे सामने नंगी थी. एकदम भरी हुई मस्त भाभी की चूत को मैं सहलाने लगा. भाभी ने टांगें फैला दीं और मस्त सिसकारी भरने लगीं.

तभी मैंने अपनी जीभ भाभी की मस्त चूत पर रखी, जिसके स्पर्श से मानो भाभी को 44 हजार बोल्ट का करंट लगा हो. वो एकदम से सिहरते हुए मस्त हो गईं.

फिर भाभी ने कहा- अपने कपड़े निकाल दो.मैंने अपनी टी-शर्ट निकाल दी.

हम दोनों एकदम नंगे हो गए. उसके बाद हम लोग एक दूसरे को किस करते रहे. मैं भाभी के मम्मों के साथ खेलने लगा. मैं कभी एक मम्मे को चूसता, तो दूसरे को मसलता. मैंने बारी बारी से दोनों गुब्बारों का मजा लिया.

भाभी मेरे लंड से खेलने लगीं और बोलीं- मुझे भी कुछ करने दोगे?मैंने कहा- क्या?उन्होंने कहा- मुझे लंड चूसना है.

ये कहते हुए उन्होंने मुझे धक्का देकर लिटा प्रिया और मेरे लंड को मुँह में ले लिया.दोस्तो … भाभी बड़े ही स्टायल से लंड चूस रही थीं. मैं तो सातवें आसमान पर था.

फिर जब चुदास बढ़ी और खुल कर खेल होने लगा, तो हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए. मैं भाभी की चूत चाटने लगा और वो मेरा लंड चूस रही थीं. भाभी की चूत भी एकदम क्लीन थी और फूली हुई थी. मैं भाभी की चुदाई जीभ से कर रहा था, तभी भाभी ने मेरा मुँह चूत पर दबाया और गांड उठाते हुए उनकी चूत ने फव्वारा छोड़ प्रिया. वो झड़ चुकी थीं और मैं भी लगभग आने वाला था. मैं भाभी के मुँह को जोर जोर से चोदने लगा.

मैंने कहा- मैं झड़ने वाला हूँ.

उन्होंने लंड निकाल कर मुझसे कहा- मेरे मुँह में माल निकालो, मुझे तुम्हारा माल पीना है.वो फिर से लंड चूसने लगीं. मैं अपनी स्पीड बढ़ाते हुए 10-12 झटकों के बाद भाभी के मुँह में झड़ गया. वो मेरा सारा माल गटक गईं और मेरा लंड चाटकर साफ कर प्रिया. हम दोनों ऐसे ही लेट गए.

कुछ देर बाद मैं फिर से भाभी की चूत चाटने लगा. धीरे धीरे भाभी फिर से गरम हो गईं. अब वो चुदाई के लिए तड़प रही थीं.

भाबी बार बार बोल रही थीं- चोद मुझे शिवा … चोदो मुझे … अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता … तुम अपना लंड मेरी चूत में डालो.

मैं भाभी की टांगों के बीच में आ गया और अपना लंड चूत पे सैट करके चूत को रगड़ा. भाभी ने अपनी गांड उठा कर लंड पेलने का इशारा किया और मैंने जोर का एक धक्का दे मारा. मेरा आधा लंड चूत में समा गया और भाभी की चीख निकल गयी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैंने उनके होंठों को दबाते हुए दूसरा धक्का मारा. इस बार मेरा पूरा लंड अन्दर जा चुका था. शायद भाभी को मेरे मोटे लंड के कारण दर्द हो रहा था … पर मैंने उन पर ध्यान न देते हुए धक्के मारने चालू कर दिए.

कुछ देर बाद भाभी भी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगीं. वो बोल रही थीं- आह शिवा … और तेज चोदो मुझे … फाड दो मेरी चूत को … आह … बना दो इसे भोसड़ा …फिर मैंने उन्हें डागी स्टाइल में चोदा. काफी देर चुदाई करने के बाद मैं झड़ने वाला था और भाभी इस बीच दो बार झड़ चुकी थीं.

मैंने कहा- भाभी मैं झड़ने वाला हूँ … क्या करूं?तो उन्होंने कहा कि मेरे मुँह में अपना माल निकालो और मेरा लंड चूत से निकाल कर मुँह में ले लिया.

मैंने स्पीड बढ़ाते हुए 4-5 धक्कों में अपना सारा माल भाभी के मुँह में डाल प्रिया और वो बड़े प्यार से उसे पी गईं. भाभी ने मेरा लंड चाट कर एकदम से साफ कर प्रिया.

हम लोगों ने उस रात चार बार चुदाई की, जिसमें मैंने देसी भाभी की गांड भी मारी. चूंकि हम दोनों एक दूसरे से खुल गए थे और चुदाई भी दमदार हुई थी, तो हमें जब भी मौका मिलता, हम लोग चुदाई कर लेते.

इसके बाद मैंने भाभी से पूछा- आपको बच्चा क्यों नहीं हुआ?जिसका जबाव उन्होंने मुझे कुछ समय रुकने का कहा. कारण पूछने पर बताया कि पति को इस बात का भरोसा दिलाना पड़ेगा कि मैंने शिवा से बच्चा पा लिया है. क्योंकि डॉक्टर ने उनकी जांच करके उन्हें कभी पिता न बन पाने का कहा है.

मैं समझ गया.

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