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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 376 बार

गाँव में दोस्त ने दिलाई दो भाभियों की चूत-1(Gaon mein dost ne dilayi do bhabhiyon ki chut-1)

sumitkumar

06 Sep 2018 को प्रकाशित

गाँव में दोस्त ने दिलाई दो भाभियों की चूत-1(Gaon mein dost ne dilayi do bhabhiyon ki chut-1)
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दोस्तों, मेरे और दोस्तों के बीच में क्या गुल खिला इस कहानी में जरुर पढ़े। और जाने कि फिर हमारे बीच क्या हुआ।

मेरा नाम गौरव और मैं गाँव का रहने वाला लड़का हूं। मेरी उम्र 25 साल और कद 5 फुट 4 इंच का है। मेरा रंग एक-दम साफ है।

गाँव में मेरे चार दोस्त है जो इस प्रकार से है- सुधीर, नामित, रवि और अमर। मैंने दो लड़कियों के साथ संबंध बनाए हैं। दोस्तों मेरे गाँव में औरते ज्यादा और मर्द काफी कम है। क्यूंकि कई सारी भाभियों के पति शहर में कमाने के लिए जाते थे।

दोस्तों मेरे गाँव में सारी औरतें शौच के लिए सुबह-शाम खेत में जाया करती हैं। मेरे गाँव के कुछ दोस्त उधर ही डेरा जमाए हुए बैठते थे, और उन लोगों ने मुझे भी बुला लिया था। उनके साथ-साथ रहते हुए मेरी संगत भी काफी बदल चुकी हुई थी। अब मैं उनके साथ सुबह शौच के लिए जाता था, तो लौटते-लौटते सब मिल कर छुप-छुप कर औरतों को शौच करते देखते थे।

हम अनुमान लगाते कि किसने क्या खाया था। गन्ने के खेत में छुप-छुप कर सब की गांड से निकलती हुई टट्टी को देखते और सब के जाने के बाद उस जगह जाते जहां सारी औरतों ने मिल कर एक साथ शौच करके टट्टी निकाली हुई थी। सब की टट्टी को देखते और उस पर विचार विमर्श होने लगता।

रवि बोला: यह देख मेरे बगल की शिल्पा आंटी ने यहां टट्टी किया है।

और हम सब ह्म्म्म्म कहने लगे। फिर रवि ने उस पर पेशाब कर दिया।

नामित बोला: देखो मेरे पड़ोसी तुषार की मम्मी ने यहां टट्टी किया।

उसने वहां पर मूत्र विसर्जन चालू किया।

सुधीर बोला: मेरी मां ने यहां किया है।

और पेशाब करने लगा।

मैं भी सुधीर की मां के ऊपर सोच कर पेशाब करने लगा। हमारे गाँव के खेत में सुबह-सुबह खुलेआम चुदाई होती हैं और कई औरतें तो शौच के तुरंत बाद चुदवा कर जाती हैं। मैंने भी कई बार कई सारी औरतों को चुदवाते हुए देखा था।

गाँव की औरतों के चूतड़ काफी बड़े और फैले हुए दिखते थे, जिसके कारण धीरे-धीरे मुझे देसी औरतों के चूतड़ पसंद आने लगे। हमें कई साल बीत चुके थे, लेकिन किसी चूत पर हमारा निशान नज़र नहीं आया। बस चुदाई देखने के लिए सुबह सुबह सारे दोस्त आते थे। मानसून के समय सारे दोस्त सम्मिलित हुए, तो हमने सब की सहमति के आधार पर विचार किया कि सब अपने घर और आस-पड़ोस की चुदाई का वर्णन करेंगे। कुछ समय के बाद सब अपने-अपने घर की कहानी सुनाने लगे।

सुधीर बोला: यार मैं कई दिनों से अपनी मां की चुदाई देख रहा हूं और मुठ मार रहा हूं।

मैंने पूछा: किसके साथ देखा?

सुधीर बोला: वो माली नहीं है?

रवि बोला: कौन माली?

सुधीर बोला: वह बृजेश माली नहीं है, उसके साथ मैं अपनी मां की चुदाई कई महीनों से देख रहा हूं।

इस बार रवि बोला: हां यार मेरी मां और कोमल दीदी भी किसी और से चुदवा रहीं थी।

नामित बोला: यार मैंने अपनी चाची और पापा की चुदाई देखी है।

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मैंने कहा: तेरी चाची भी तो काफी खूबसूरत हैं। किसी को भी फंसा सकती हैं।

उसने कहा: तभी तो पिछले कुछ सालों सेचुदाई करवा रहीं हैं।

अमर बोला: यार मैंने अपने पापा को पडोसी आंटी को चोदते हुए देखा। देख कर के मज़ा आ गया।

उसके बाद अंतिम बारी मेरी थी।

मैंने कहा: यार मैंने भी अपने चाचा को मेरी मां चोदते देखा है।

सब ने अपने घर का हाल सुनाया और सब ने एक-एक बार मुठ मारी और शांत होकर घर चले गए। इसी बीच बड़ी दुखद घटना हुई। नामित के चाचा की दुर्घटना और रवि के छोटे भाई की करंट लगने से मौत हो गई।

उसके बाद कई दिनों बाद दोनों मिले और अपना दुख सुनाया। वह काफी दुखी‌ था।‌उसने कहा कि कोई रास्ता बताओ, मैं अपनी चाची को ऐसे नहीं देख सकता। किसी की बुद्धी नहीं चल रही थी। लेकिन मेरे मन में अजीब सा भाव उमड़ आया।

मैंने कहा: मेरे पास एक विचार है अगर तू कहे तो बताऊं।

मैंने कहा: देख तेरी चाची तो विधवा हो गई। एक काम कर, तू कभी उनकी चुदाई कर दे। इसी बहाने वह खुश भी रहा करेगी।

सब ने मेरी तरफ देखा, लेकिन सुधीर ने इसपे सहमति जताई।

उसने कहा: देख सिद्घार्थ ने जो कहा वह सही कहा। देख तेरी चाची भी शौच के लिए सुबह आएगी। वह अपने बगल में बैठी हुई औरत को हर बार किसी ना किसी से चुदवाते हुए देखेगी तो उसे भी चुदवाने का शौक आ जाएगा, और किसी का भी पकड़ लेगी।

उसकी आँखों में मैंने उसकी चाची के लिए चमक देखी। उसके बाद वह अपनी चाची को खूब चोदने लगा था।‌मेरे सारे दोस्त किसी ना किसी औरतों को चोदने लगे। उनके साथ मैं भी गाँव की कुछ भाभियों की बुर मारना चालू किया। अधिकतर भाभियों के पति बाहर रहने से कई सारी भाभियां दूसरे मर्दों से चुदवाती थी।

मेरे घर के तीन घर बाद जिस आंटी का घर है, आंटी तो नहीं रही, लेकिन उनकी दो-दो बहुएं घर में रहती थी। मैंने कई बार पीछा करते हुए देखा सुबह के समय दोनों भाभियां खेत में जाकर किसी से चुदवा कर आती थी। उसी समय मैंने भी दोनों भाभियों को खूब जम कर चुदाई की थी।

एक बात उपर बताना भूल गया मेरे गाँव में दूसरे समुदाय की कई सारे औरतें रहती थी, जिनके कई-कई सारे बच्चे होते थे। मैंने अपने गाँव में सुना कि इनकी महिलाएं कई-कई सारे लोग से चुदवा-चुदवा कर बहुत ज्यादा बच्चा पैदा करती थी। गाँव में कई भाभी भी सलवार पहन कर शौच करते हुए देखा। जब शौच करती सलवार को ऊपर उठा देती थी। उनकी बड़ी-बड़ी झांट देख कर के कई बार पानी निकाल चुका था।

मेरी भाभियों से बातचीत होती, लेकिन कुछ नहीं मिलता। इसका गवाही मैं दे सकता हूं। मेरे घर में जो पड़ोसी अंकल है, उनकी बहु भी उसी समुदाय से है। उनके छह बच्चे थे। उनके बेटे को अपने गाँव की कई महिलाएं और कुंवारी ल़डकियों को चोदते हुए बहुत महीने पहले भी देख चुका था।

मैंने भी गाँव में दो ल़डकियों की सील तोड़ी थी। बाकी सब चुदी चुदाई मिली हुई थी। मैं अपने समुदाय की कई सारी भाभी, उनकी बेटी और अधेड़ उम्र की औरतों के साथ चुदाई कर चुका हुआ था। मैंने अपने समुदाय की जितनी भी भाभी की चूत चोदी, उन सब की चूत के आस-पास कि जगह चुदवा-चुदवा कर पूरी ही काली हो चुकी थी। मुझे इंतजार था तो अब सिर्फ दूसरे समुदाय की भाभियों के चुतड़ों का।

अब आगे मिले या नहीं इसलिए किसी किसी को चोद लेता था। हर वक़्त यह सोचता रहता था कि कब मौका मिले और कब मेरी किस्मत खुलेगी। पर मेरे हाथ कुछ नहीं लगा। इससे मैं चिंतित हो गया था, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि जिसने मेरे अरमान बदल दिए थे।

क्या हुआ था, और कैसे हुआ था, ये सब अगले पार्ट में पढ़े। फीडबैक support@mohakkisse.com पर मेल करके दें।

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