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गे सेक्स स्टोरी पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 1,293 बार

बस से होटल के कमरे तक

सन्नी शर्मा गाण्डू

18 Jan 2016 को प्रकाशित

बस से होटल के कमरे तक
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सन्नी

पिछली कहानी थी ‘ट्रेन में लंड चूसा‘ उसके आगे…

ट्रेन में मैंने दो फौजियों के साथ ख़ूब मस्ती की। उन्होंने मुझे अपना नम्बर तक दे डाला लेकिन मैंने उनसे मिलना ज़रूरी नहीं समझा क्योंकि मैं सफर में बने सम्बन्ध को वहीं छोड़ देता हूँ।

दोस्तों एक बार मैं कॉलेज के लिए बस पकड़ने के लिए खड़ा था। इन्तज़ार था किसी खचाखच भरी बस का। तभी एक मिनी बस आई, मैं चढ़ गया और मेरी निगाहें किसी ऐसे मर्द को तलाश कर रहीं थीं जिसे देख मैं समझ लूँ कि कहीं वो मेरी हरक़त पर बवाल तो नहीं मचा देगा।

तभी मैंने एक मूछों वाला कड़क सा मर्द देखा। मुझे लगा कि वो सही रहेगा। ख़ैर मैं उसके आगे खड़ा हो गया। मैंने देखा था उसका वो भाग काफी फूला हुआ था, मैं उसके पास ही आगे खड़ा हो गया। 5 मिनट वैसी ही उधर-उधर का जायज़ा लेकर मैंने धीरे से गाँड को हरक़त में लाने की कोशिश की और पहले धीरे से उसपर दवाब प्रिया। भीड़ की वज़ह से जब धक्का लगा तो हम झुक गए। फिर मैंने गाँड गोल-गोल तरीके से घुमानी शुरु की, अपना जलवा और तज़ुर्बा शुरु किया। उसको मैंने अहसास दिला प्रिया कि मैं अपनी मर्ज़ी से अपनी गाँड उसके लंड से घिस रहा हूँ। उसके लंड में भी हरक़त महसूस हुई। साफ़ लगा कि वह खड़ा हो रहा था।

मैंने गाँड को और दबाया। मैंने एक हाथ से ऊपर डंडे को पकड़ रखा था, धीरे से दूसरा हाथ नीचे लेकर गया। भीड़ में किसी का ध्यान वहाँ नहीं था। मैंने हाथ से उसको छू लिया। उसे बहुत अच्छा लगा। मैंने और सहलाया और उसने कान के क़रीब आकर बोला- कहाँ जाना है?’मैंने उसे बताया कि कॉलेज।

उसने कहा,’बहुत मज़ा आ रहा है, लेकिन यहाँ ठीक नहीं है। अगले स्टॉप पर उतर जाते हैं।’मैंने अनजान बनकर पूछा- ‘लेकिन वहाँ क्या होगा?’उसने कहा,’यार उतर तो सही, मेरे दोस्त का एक गेस्ट-हाउस है। हमसे कौन सा पैसे लेगा। चले हैं न वहाँ।’

ऐसे ही कान में फुसफुसात हुए, इधर-उधर देख बातें करते हुए उसका लंड मसल प्रिया।उसने कहा,’साले गाँडू, यहीं खड़ा करके जुलूस मत निकलवा देना’

दोनों बस से उतर गए, सीधा गेस्ट-हाउस गए। उसका दोस्त वहाँ नहीं था, रूम-सर्विस वाला लड़का था। वह प्यार से उससे मिला, एक कोने में ला जाकर कुछ कहा, उसने एक चाबी उसे दी और हम दोनों दूसरी फ्लोर पर एक ए.सी. कमरे में पहुँच गए।

उसने कहा,’अच्छा कमरा है।’ और उसने दरवाज़ा लॉक कर प्रिया और सीधा मुझे पकड़ लिया और मेरी गाँड मसलने लगा, मेरे मम्मे दबाने लगा।

मैंने अपनी शर्ट उतार दी और फिर देखते ही देखते सिर्फ अण्डरवीयर में रह गया। उसके बाद मैं उठा और उसके भी सारे कपड़े उतार दिए और उसको खड़ा कर ख़ुद घुटनों के बल बैठ कर सीधा ही उसके लंड को मुँह में भर कर चूसने लगा। वो आहें भर-भरकर मुझसे चुसवा रहा था। मैं भी उसके नुकीले लंड को बड़े मज़े से चूस रहा था, क्या लंड मिला था।

मैंने कुछ देर चूसने के बाद उसको कहा कि अब चोद लो और झट से उसके सामने घुटनों के बल झुक कर घोड़ी बन गया।वो बोला,’ऐसे ही घोड़ी बने-बने कुतिया की तरह चलता हुआ आ और मेरा चूस।’मैंने कुछ देर चूसने के बाद अपनी गोरी गाँड उसकी ओर कर दी और कॉण्डोम चढ़ा प्रिया और बोला- चल डाल दे।

उसने भी घुसाना शुरु किया। कामासूत्र के कॉण्डोम में बहुत चिकनाई से जिससे मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। हाय राजा… फाड़ डाल मेरी आज… धो डाल मुझे।ले साले, यह ले- कह जब वो झटके मारता तो जान निकाल देता।बहुत दम था उसकी जाँघों में। ज़बर्दस्त चोद रहा था। हाय, ऐसा ही मर्द मैं तलाशता हूँ, जो कमीना ऐसे ही घिस-घिस कर ले मेरी।

उसने मुझे पलट कर सीधा कर प्रिया और बीच में आते हुए लंड गाँड पर रख नीचे घड़ी लगा कर डाल प्रिया, जिस से गाँड कस सी गई। वो भी मास्टर निकला इन कामों का। बोला ‘साले अब बोल, रगड़ का मज़ा मिलता है?’

‘हाँ मिलता है’

कुछ ही पलों में उसका भी अन्त हो गया। अह…अहहहह… अहह… आधा घंटा ऐसे ही वो मेरी गाँड मारता रहा और बोला,’झड़ने वाला हूँ। उसने बाहर निकाला और मेरी छाती पर बैठ अपने लंड से कॉण्डोम निकाल, वीर्य मेरे मुँह में डाल प्रिया और बोला,’थोड़ा चूस दे।’

मैंने मूठ मारते हुए चूसना चालू किया और उसने एकदम अपने हाथ में नियंत्रण लेते हुए तेज़ी से हिला-हिला कर सारा माल मेरे मुँह में डाल प्रिया। एक-एक क़तरा चाट-चाट कर मैंने साफ़ कर प्रिया। कुछ देर हम एक-दूसरे से चिपके रहे और मैंने फिर से उसके लंड को थाम कर सहलाना शुरू कर प्रिया।

वो फिर से हरक़त में आने लगा। देखते-ही-देखते उसका बाम्बो फिर से दहाड़ने लगा और पता नहीं चुदाई का मास्टर था, दूसरी बार दस मिनट चूसता रहा, फिर भी झड़ा नहीं। उसके बाद बोला,’अब तू ख़ुद चुदेगा। तू इसपर बैठ कर उछल।’मैंने वैसा ही किया। एक घंटा चुदाता रहा। मेरी गाँड लाल हो गई, तब कहीं जाकर वह झड़ने के क़रीब आया। इस बार उसने माल मेरी कमर पर उगल प्रिया और कुछ गाँड की छेद पर डाल उस पर लंड रगड़ प्रिया। इससे मुझे बहुत सुख सा मिला। उसका गरम माल लगते ही सारी खुज़ली खतम हो गई।

दोस्तों यह थी सन्नी की एक और चुदाई की दास्ताँ

अगली चुदाई लेकर जल्द हाज़िर होऊँगा, तब तक के लिए लंड एण्ड ओनली लंडsupport@mohakkisse.com0949

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

साहिल हैदराबादी

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

राजेश बिराना

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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