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गे सेक्स स्टोरी पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 440 बार

मेरी गांड को लग गई मौज

सन्नी शर्मा गाण्डू

12 May 2010 को प्रकाशित

मेरी गांड को लग गई मौज
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लेखक : सनी

दोस्तो, सब कैसे हो !

उम्मीद है सब ठीक ठाक होंगे। सभी पाठकों और सबसे पहले आदरणीय गुरूजी को प्रणाम !

आप सबका धन्यवाद जो आप सबने मेरी कहानी ( कैसे बन गया मैं एक चुद्दकड़ गांडू ) को पसंद किया। उसके बाद भी मैंने कुछ कहानिया भेजीं हैं। उम्मीद है कि आपको पंसद आई होंगी।

यह जो कहानी आज लिखने जा रहा हूँ यह आज से ठीक दो महीने पहले की बात है, पापा जी ने घर ऊपर वाला हिस्सा किराये पर देने का फैसला किया और एयरफोर्स में काम करने वाले मद्रास के रहने वाले एक युगल को प्रिया। बीवी एयरफोर्स स्कूल में टीचर है। बीवी पर तो नहीं मियां पर मेरी नज़र थी, ऊपर जाने के लिए सीढ़ियाँ अन्दर से ही निकलतीं थीं।

जैसे कि आप सब तो जानते ही हैं कि मुझे लौड़ों से कितनी चाहत है !

एक दिन दोपहर की बात है, मैं कॉलेज से घर आया। बहुत गर्मी थी, मैं बाथरूम में नहाने के लिए जाने लगा, दिमाग में आया कि तौलिया तो ऊपर तार पर ही सूख रहा होगा। मैं ऊपर गया, उनका कमरा बंद था, अन्दर से बहसने की आवाजें आ रही थी।

वो बोला- साली ना तेरे में गर्मी है, न सुन्दर ! ऊपर से नखरे हज़ार ! चल मुँह में लेकर इसको चूस !

वो नहीं मानी। मैं चला आया। शाम को ऊपर किसी काम से गया तो अंकल नहा रहे थे, पानी से उनका अंडरवियर चिपका हुआ था और फूले हुए भाग से मालूम हुआ कि लौड़ा मस्त है। मेरी नज़र वहाँ पड़ती देख अंकल ने अन्दर हाथ डाल साबुन लगाने के बहाने साइड से लौड़ा दिखा ही प्रिया।

क्या मस्त लौड़ा था !

आजकल उनकी रात की शिफ्ट थी, वो नहा कर तैयार होकर चले गए। सुबह वो आठ बजे आते थे और आंटी नौ बजे जातीं थी। घर में कोई नहीं था, मैं अकेला था, कॉलेज ११ बजे जाना था। आंटी चाभी देकर चली गई। अंकल आज लेट थे।

जैसे ही वो आये, झट से कपड़े उतार बाथरूम में घुस गए। उन्होंने आवाज़ दी- मैं नहा रहा हूँ, आया !

मैं भी सिर्फ अंडरवियर पहन बाहर आया। उनकी नज़र मेरे चिकने और लड़की जैसे जिस्म पर थी- वाह बेटा ! चिकने हो ! देखूँ छाती ! कोमल !

बोले- अकेला है ?

जी हाँ ! अकेला ही हूँ !

ऊपर आजा ! मैं भी अकेला हूँ, मिलकर नहाते हैं !

मैं उनके पास गया और एक हाथ से चाबी देते हुए नीचे से लौड़े को मसलते हुए कहा- आप नीचे क्यूँ नहीं आ जाते ! ए.सी में मजा भी आयेगा !

हाय मेरी जान अभी आया !

मेन गेट बंद करते हुए आना !

सोचा- अबे ओ सनी ! तेरी गांड को तो मौज लग जायेगी ! वो भी घर में ही !

मैं शावर के नीचे नहाने लगा, अंकल भी आ गए। मैं उनसे चिपक गया, वो मेरे होंठ चूसने लगे। मैं हाथ में लौड़ा लेकर सहलाने लगा। पानी में और भी आनंद मिलने लगा।वाह मेरे गांडू !

वो मेरे चूतडों को पकड़ कर मसलने लगे। बेटा ! कितनी गांड मरवाता है कितने मस्त चूतड़ हैं !

मार के देख लेना जान ! कितने मस्त हैं ! आपका लौड़ा रात को जबसे देखा है चूसने को दिल कर रहा है।

हाँ हाँ चूस न !

मुझे पता है आंटी नहीं चूसती !

भोसड़ी की बहुत हरामी है !

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ऐसे ही है अंकल ! मैंने उनका कच्छा उतार प्रिया और नीचे झुक कर मुँह में डाल लिया। मुँह में जाते ही उनका खड़ा होने लगा, देखते ही तन कर खड़ा हो गया।

आह मेरे लाल ! चूसता जा !

६९ में होकर मेरी गांड चाटने लगे, साबुन गांड पर लगा ऊँगली डालते हुए मुझे पूरा मजा देने लगे।

आह अह अह ! अंकल आई लव योउर लौड़ा !

चूस बेटा ! अच्छा लगा, बहुत अच्छा !

आह आह ! बिस्तर में चले अंकल?

ज़रूर !

तौलिए से पोंछ कर उठा मेरे ही कमरे में मेरे ही बिस्तर पर डाल प्रिया। अंकल ने दिल खोल कर चुसवाया, मैंने भी दिल से चूसा ऐसा लौड़ा।

मुझे घोड़ी बना पीछे से लौड़ा गांड पर रख प्रिया, मैंने पकड़ ठिकाने पर लगा प्रिया। पहले धक्के से थोड़ा सा घुसा, दो चार धक्कों से पूरा अन्दर घुस गया।

आह अंकल ! अब गांड मारो !

आह ओह !मेरे बेटा ! बहुत मस्त निकला ! तेरी गांड रोज़ मारूँगा ! क्या माल है ! ऐसा मजा तो मेरी औरत ने नहीं प्रिया !

आह अंकल ! फाड़ डालो मेरी गांड !

उनका लौड़ा ज़बरदस्त तरीके से मेरी गांड के अंदर बाहर हो रहा था।

चल ऊपर बैठ जा ! देखूँ कैसे उछल उछल कर इस पर बैठेगा ! तुझे भी मजा आ जायेगा ! वैसे भी तेरी पोली पोली गांड जब जांघों से घिसेगी तो मजे का आलम छा जायेगा मेरी जान !

लो अंकल आ गया ऊपर !

चल इस पे बैठता जा साले, नाटक मत कर, बहनचोद, सब जाने तू !

संभालो अंकल ! मैं अपने तरीके से आराम से पूरा लौड़ा निगल गया।

औ अह मेरी जान ! उछल ! अह ओह अह ओह ! बेटा मजेदार माल है ! फाड़ दूंगा तेरी ! आज से तू मेरी औरत ! क्या मुझे रोज़ मरवाया करेगा?

ज़रूर अंकल ! बाहर मुँह मारने से अच्छा है यहीं मरवाया करूँगा बिना किसी डर से !

अंकल ने एकदम मुझे पलटा और मेरे ऊपर आ गए दोनों टांगें कन्धों पर रखवा कर बीच से मोर्चा फतह किया। अब वो झड़ने वाले थे, वो फाड़ देने पर उतर आये थे। यह अंदाज़ मुझे स्वर्ग दिखा रहा था।

ओह बेटा !

वह जोर जोर से झटके लगाने लगे। कुछ मुझे दर्द भी हुआ, लेकिन सब भूल कर मैं चुदवाता रहा। फ़िर अंकल एकदम मुझ पर गिर गए और सारा माल अन्दर डाल प्रिया।

दोस्तो, मेरी तो गांड को मौज लग गई। वो ड्यूटी से आते और मुझे चोदने के बाद ही कॉलेज जाने देते। वह पूरे मजे लूट रहे हैं।

अब तो आंटी का पेट बाहर आने लगा है, उनका भाई कुछ दिनों में उनको लेने आने वाला है ताकि बच्चे की और माँ की देख रेख किसी घर की सयानी की देख रेख में हो।

मैं और अंकल बहुत खुश हैं। बोलते हैं- अब से तू मेरी पत्नी है ! तू घबरा मत, तुझे मैं नए लौड़े दिलवाता रहूँगा। किसी दिन हम उसके एक दोस्त के घर जाकर चुदाई करेंगे, उसके बारे में जल्दी लिखूंगा।

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

विशाल नकुम

1 month ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

अशोक लव मी मोर

1 month ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

मनीष प्रेमी

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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