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गे सेक्स स्टोरी पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 167 बार

शिक्षक के लंड से गांड मरवाकर संतुष्टि मिली

विवेक अग्रवाल

12 Jan 2011 को प्रकाशित

शिक्षक के लंड से गांड मरवाकर संतुष्टि मिली
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गे टीचर चुदाई कहानी में पढ़ें कि मुझे मेरे चाचा ने गांड मरवाने की लत लगा दी थी. कोचिंग के टीचर से गांड मरवाने की चाह होने लगी. मैं उन्हें सेट करने की तरकीब सोचने लगा.

मेरा नाम अभय है और मैं जयपुर में कोचिंग में अपनी पढ़ाई करता हूँ. मेरी उम्र 25 साल है.मेरा दिल एक टीचर पर आ गया, जो बहुत सुंदर दिखते थे. उनका नाम विनोद यादव है, उम्र 38 साल की है.

यह गे टीचर चुदाई कहानी इन्हीं टीचर की है.

मुझे कोचिंग क्लास में पढ़ाई करते हुए एक महीना हो गया था.मैं विनोद सर के बारे में सोच सोच कर पागल हो गया था. मैं सोचता कि काश उनके साथ सेक्स होता, तो मजा आ जाता.

आपको मैं बता दूं कि मैंने विनोद सर के बारे में सोच कर कई बार हस्तमुथैन भी किया है और बहुत बार उनकी बांहों में सोने के सपने भी देखे हैं.लेकिन अब मैं हकीकत में ये सब करना चाहता था इसलिए मैंने विनोद सर को अपने रूम पर पढ़ाने के लिए बात की.

उन्होंने फीस कुछ ज्यादा बता दी लेकिन मेरा दिल उन पर आ गया था तो मैं उनकी सब डिमांड पूरी करने के लिए तैयार हो गया.

क्या करूँ यार … काफी पहले चाचा जी ने मेरी गांड जो मारी थी, तभी से मेरा मन किसी सुंदर मर्द को देखते ही मचलने लगता है.

विनोद सर भी बहुत ही सुंदर हैं, इसलिए मेरे जिस्म की गर्मी बाहर आने को बेताब हो रही थी.

शाम सात से आठ बजे विनोद सर मुझे पढ़ाने के लिए आने लगे.

कुछ दिन हो गए लेकिन बात नहीं बन रही थी.अब क्या करूँ … इसलिए मैंने सर को मैंने अपने यहां रूम पर खाने के लिए बोल प्रिया.

विनोद सर तैयार हो गए.मैंने सर के लिए एक अच्छी सी ड्रेस खरीद ली और जैसे सर मेरे रूम पर आए, वो कपड़े उनको पहनाने के लिए राजी कर लिया कि विनोद जी मैं ये कपड़े आपको अपने हाथों से पहनाना चाहता हूँ.

सर एक बार तो मुस्कुराते हुए शर्मा गए.उनकी वही मुस्कान मेरे दिल को बहुत अच्छी लगी.

फिर जैसे ही सर ने कपड़े निकाले, वैसे ही मैंने उनके बदन को अपने हाथों से छू लिया.मेरे बदन में एकदम से जैसे बत्ती जल गई.

मैं विनोद सर को पैंट पहनाने लगा.इसी बहाने मैंने विनोद सर के लंड को तीन बार जानबूझकर हाथ लगा लिया.

विनोद सर ने इस बात को गौर से नहीं देखा था.

फिर शर्ट पहनाने से पहले मैंने सर को अपनी सीने से लगा लिया.

सर कुछ समझते, इस पहले मैंने विनोद सर को आई लव यू बोल प्रिया.मैंने कह प्रिया कि सर मैं आपसे प्यार करता हूँ.

विनोद सर ने मुझे अपने से दूर कर प्रिया और बोले- अभय, ये तुमको क्या हो गया है?

“सर मैंने जब से आपको देखा है, तभी से मुझे आपसे प्यार हो गया है. सुबह शाम बस आपके बारे में ही सोचता रहता है … क्या करूं मैं, आप ही बताओ. आपकी सुन्दरता मुझे आपकी ओर खींच ले आती हैं. सर ये रूम पर पढ़ाई आप से प्यार करने के लिए शुरू की, नहीं तो वहां पर भी तो पढ़ाते थे. लेकिन मैं आपका प्यार पाना चाहता हूँ सर!”

मेरी ये सब बातें सुनकर विनोद सर उतेजित हो गए.वे मेरे मन की बात समझ गए थे.

विनोद सर ने कहा- चलो, पहले खाना खा लेते हैं … ठीक है?

हम दोनों बैठे, खाना खा रहे थे लेकिन दिल दिमाग दोनों का ही घूम रहा था.वो भी शायद यही बात सोच रहे थे.

खाना पूरा हुआ तो विनोद सर ने मुझे अपने पास बुलाया और लव यू बोल कर मेरे हाथ पर किस कर दी.

मैं तो मानो निहाल हो गया था, सर उस रात मेरे पास सोने के लिए राजी हो गए.विनोद सर ने लाईट बंद कर दी और अपने सारे कपड़े निकाल दिए.

इससे पहले कि मैं कुछ समझता, सर ने मुझे बेड पर गिरा लिया और मुझसे लिपट गए.

“आई लव यू यार अभय … तुम मुझे इतना प्यार करते हो, मुझे पता ही नहीं था.”

सर को नंगा देखकर मैंने सारे कपड़े निकाल दिए और सर से लिपट गया.“हां विनोद, मैं आपको बहुत प्यार करता हूँ. मैं कह ही नहीं पाया इतने दिनों तक आई लव यू.”विनोद सर ने मेरे होंठों पर होंठ रखते हुए मेरी मदहोश जवानी में आग लगा दी.

मैं सर के होंठों को चूमने लगी.सर मेरे ऊपर आ गए. मेरी आंखों में आंखें डाल कर चूम रहे थे.

मैं बस उनके जिस्म की गर्मी पाकर सर को अपने बदन से लिपटाए जा रहा था.विनोद सर के मुँह में मैं अपने होंठों को देने लगा और वो मेरे होंठों को बड़े प्यार से काटने लगे.

विनोद सर मेरे गले के पास किस करते हुए मेरी छाती के दोनों निप्पलों को बारी बारी से चूसने लगे थे.मैं ऐसे आहें भर रहा था, जैसे कोई औरत अपने नए पति से मिलती है.

सर मेरे बदन को काटने लगे, जो मेरी जवानी की गर्मी को ठंडक दे रहा था.

मैंने सर को अपने पास खींच लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए.अब मेरी जीभ विनोद सर के मुँह में जाने लगी थी.विनोद सर भी बड़े प्यार से मेरी जीभ चूसते हुए मेरा साथ देने लगे.

सर के बदन को किस करते हुए मैं उनकी जांघों तक पहुंच गया और सर की अंडरवियर को निकाल प्रिया.

सर की अंडरवियर हटते ही उनके लौड़े के दीदार हुए.मैंने उनके लौड़े को अपने मुँह में भर लिया.

मेरे ऐसा करते ही सर की “आहह …” निकलने लगी.

मैं प्यार से लौड़ा चूसने लगा.“आहह ईई सीईई … जानू … आह बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा है.”

मैं भी विनोद सर का लौड़ा चूस कर खुश हो गया कि आज मुझे सर का प्यार मिल गया है. मैं सर को पूरी तरह से खुश करना चाहता था इसलिए मैंने उनका लंड खूब चूसा.

काफी देर तक लंड चूसते रहने के साथ ही सर उछल उछल कर मेरे मुँह में झटके झटके दे रहे थे.

फिर एक जोरदार झटके साथ ही सर ने अपने लंड का पानी मेरे हलक में छोड़ प्रिया.

मैं सर के लंड का स्वाद चखते हुए पूरा पानी पी गया और साथ ही इस तसल्ली के साथ कि सर ने मेरे दिल की तमन्ना पूरी कर दी, सर के लंड को जीभ से चाट कर साफ कर प्रिया.

विनोद सर बेड पर आराम से लेटे हुए थे. मैं उनके करीब जाकर लेट गया.

सर ने मेरे ऊपर टागें डालकर हाथ डाल प्रिया और वो मेरे शरीर से चिपक गए.

सर बोले़- अभय, आज तो तुमने मेरी घरवाली से भी ज्यादा मजा और सुकून प्रिया है. मेरी जान बहुत मजा आया है.

अब मैं और सर एक दूसरे से लिपट गए और सो गए.मुझको नींद नहीं आ रही थी और मैं विनोद सर के लंड से चुदने के लिए बेताब हो रहा था.

विनोद सर को फिर से जगाने के लिए मैं उनके सिर पर हाथ फेरने लगा.बस अब सर ने मेरे गाल पर फिर से किस की और लंड चूसने के लिए कहा.

मैंने सर के लंड को मुँह टोपे जीभ से चाट कर उसे पूरा जोश से भर प्रिया.उनका लौड़ा फनफनाना कर मुझे डसने के लिए तैयार हो गया था.

विनोद सर के सामने मैंने झुक कर अपनी गांड पेश कर दी.

विनोद सर समझ गए कि इसी छेद की सर्विसिंग होनी है.उन्होंने बगल में रखी तेल की शीशी से थोड़ा सा तेल अपनी हथेली पर लिया और अपनी उंगलियों की सहायता से मेरी गांड में टपकाना शुरू कर प्रिया.

फिर उन्होंने सीधे तेल की शीशी से ही गांड के छेद में तेल टपकाना शुरू किया और एक उंगली की मदद से अन्दर तक तेल लगाने लगे.

फिर उन्होंने अपने लौड़े को हाथ से मुठियाते हुए उसे तेल से सराबोर कर लिया.अब सर का सात इंच लंबा लौड़ा मेरी गांड को चोदने के लिए तैयार हो गया था.

सर ने मेरे चूतड़ों पर अपनी हथेली से थपथपा की लौड़े के सुपारे को छेद पर सैट कर प्रिया.फिर एक ही झटके में मेरी गांड में अपना मूसल पेल प्रिया.

“आह … उईउई ईईई सीसई.”मेरी दर्द भरी मीठी आवाज निकलने लगी थी क्योंकि सर ने अपना पूरा लौड़ा एक बार में ही पेल प्रिया था.

उनका हथियार काफी कड़क था और उन्होंने उसे मेरी गांड को फाड़ते हुए अन्दर तक घुसेड़ प्रिया था.

“आहहह जानू … आज ही फाड़ दोगे क्या मेरी गांड को आह बहुत लंबा है आह मर गई.”

मेरी इन आवाजों का विनोद सर पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा था. उन्होंने मुझे घोड़ी बनाते हुए मेरी कमर पकड़ ली और धाड़ धाड़ शॉट मारने लगे.

मैं घोड़ी बना जरूर था लेकिन अधमरी कुतिया की तरह मिमयाते हुए लौड़ा खा रहा था.सर मस्त हो गए थे और झटके पर झटके दिए जा रहे थे.

कुछ ही देर में दर्द जाता रहा और अब मैं उछल उछल कर अपनी गांड मस्ती से चुदवाए जा रहा था.

सर की मादक आवाजें मेरी मस्ती बढ़ा रही थीं- आह ले मेरी जान … चुद ले अपने सर के लौड़े से … आह कितनी मक्खन सी मुलायम गांड है तेरी … आह.

उनका लौड़ा अब मेरी गांड में फूल कर कुछ ज्यादा ही मोटा हो गया था. इससे मेरी गांड को और ज्यादा मजा आ रहा था.

मैं इस लज्जत से मानो पागल हो गया था. विनोदटीचर जी का लंडझटके पर झटके ले लेकर गांड की खुजली मिटा रहा था.मेरा पूरा बदन गर्म हो गया था.

विनोद सर अभी भी मेरी गांड को चोदे जा रहे थे- आह ले मेरी जान … चुद ले अपने यार के लंड से … आह.

फिर कुछ देर ही बाद विनोद के लंड की रफ्तार बढ़ गई और वो पूरी तेजी से अपनी कमर को चलाते हुए लंड पेले जा रहे थे.

उनके झटके मेरी मदहोश जवानी को रंगीन बना रही थी.“आह मेरी जान आज मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा.”“बस सर अब निकाल दो रबड़ी …”

“जरा और रूक जा मेरी जान … तुझे तो मैं इतने प्रेम से चोद रहा हूँ, इतना तो मैंने कभी अपनी बीवी को भी नहीं चोदा है. कसम से तेरी गांड में लौड़ा इतना मजा दे रहा है कि बाहर ही नहीं निकल रहा है.”“आह तो चोद डालो न लौड़े से … फाड़ दो सर मेरी गांड को … आह जानू.”

विनोद सर ने बहुत तेजी से हांफते हुए मेरी गांड में अपने लंड का लावा उड़ेल प्रिया.उन्होंने ऊअया करते हुए मेरी कमर को खींच कर लंड को जड़ तक पेल कर अपना सारा वीर्य मेरी गांड में छोड़ प्रिया और मेरे ऊपर लेट गए.

गे टीचर चुदाई करके मेरे दिल की ख्वाहिश पूरी हो गई और मेरा दिल खुश हो गया था.

विनोद सर मेरे साथ ही सो गए. अब सर से मेरे रिश्ते बन गए थे.इसलिए अब वो मुझे रूम पर पढ़ाने नहीं आते.

वे उस दिन से मेरे कमरे पर मुझे चुदाई वाला पाठ पढ़ाने ही आते.

सर अब मेरी गांड पर फिदा हैं. मैं सर के लंड पर और उनकी खूबसूरती पर.

कई बार हम दोनों बाहर घूमने भी गए थे.आपको मेरी ये गे टीचर चुदाई कहानी कैसी लगी, प्लीज बताएंsupport@mohakkisse.com

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12 मिनट 347

पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अभिषेक कुमार 9

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

युवराज सिंह

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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