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गे सेक्स स्टोरी • पठन समय: 8 मिनट • पढ़ा गया: 354 बार

ठेकेदार और उसके दोस्त से गांड मरवाई

सन्नी शर्मा गाण्डू

31 Dec 2010 को प्रकाशित

ठेकेदार और उसके दोस्त से गांड मरवाई
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दोस्तो, बात पिछले कुछ दिनों की ही है, जब मुझे गांड मरवाने के लिए लंड की तलाश थी।

उस रात मेरे घरवाले शादी पर चले गए और मुझे अन्तिम समय पर पता चला कि मुझे घर में ही रुकना है। बल्कि मैंने अपनी पढ़ाई का वास्ता देकर खुद को रोक लिया, मैं अक्सर अकेला घर में रुक लेता हूँ क्यूंकि मुझे तो मौज लग जाती है, लेकिन उस रात मुझे कोई लंड नहीं मिल पा रहा था। कोई भी आशिक शहर में नहीं था। लेकिन मैं तो चुदाई के लिए मचल रहा था क्यूंकि यह मौका मैं कभी नहीं छोड़ता। पहले भी यही मौका होता है जब मैं खुलकर गांड मरवाता हूँ।

मैंने अपना कंप्यूटर ऑन किया और याहू पर चैट करने लगा। वहाँ मुझे अपने सिटी के एक गांडू ने पता बताया। मैं तुंरत कार निकाल अपने घर से उसके बताये पते पर चला गया। वहाँ दो हट्टे-कट्टे मर्द बैठे हुए थे। मुझे संकोच सा हो रहा था, वो मकान बन रहा था ठेकेदार अपने दोस्त के साथ दारु पी रहा था, चौकीदार उनको सर्व कर रहा था। कार दो बार सामने से निकाली उसकी तरफ देखते हुए होंठ दबा कर जुबान होंठों पर फेरता हुआ !

वो कुछ-कुछ समझ चुका था लेकिन मैं वहाँ नहीं मरवाना चाहता था। फिर मैंने कार आगे जाकर रोक दी और स्टार्ट रखे बैठा रहा वो मेरे पास आया और शीशा नॉक किया। मैंने बटन से शीशा नीचे किया, वो बोला- कौन है तू? किसी से पिटाई करवाएगा अपनी ! तेरी गाण्ड टिकती नहीं है क्या ?

मैंने भी हंसते हुए कहा- नहीं टिकती दोस्त ! बैठ तो सही, चलती कार में पूछ लेना !

वो बैठ गया, बोला- अब इस रास्ते ना आईयो ! शक करेंगे ! पिछले प्लाट खाली हैं, वहीं से आते हैं।

बोला- बता क्यूँ घूम रहा है?

मैंने उसकी जांघ सहलाते हुए कहा- घर में अकेला हूँ, गांड टिकती नहीं है।

मैंने उसके लौड़े को सहलाते हुए कहा- बबलू ने मुझे यह पता प्रिया है।

उसने खुद जिप खोल दी और लौड़ा निकाल लिया। क्या लौड़ा था दोस्तो, थोड़ा टेढ़ा सा था, ऊपर से नोकीला था। मैं पूरा लौड़ा सहलाते हुए मजा लेने लगा।

उसको भी अच्छा लगने लगा, बोला- बबलू तो माल है, क्या तू भी उसका चेला है?

मैंने उसके घर के पिछवाड़े में लाइट्स बंद कर कार रोकते हुए झुक कर मुँह में ले लिया। वो खुद एक हाथ से अपना लौड़ा पकड़ दूसरे हाथ से मेरे सर को दबाते हुए चुसवा रहा था।

मैंने कहा- चलो, घर चलते हैं !

बोला- उसका क्या करूँ ? वो मेरा मेहमान समझ ले, दोस्त समझ ले ! दूसरे शहर से आया है।

बिठा लो, उसको भी ले चलते हैं !

बोला- रुक, अभी आया !

अपने दोस्त को उसने आगे बिठा प्रिया।

वाह ! उसने लुंगी पहनी थी, कच्छे से लौड़ा दिख रहा था। मैंने चलते हुए उसकी लुंगी में हाथ घुसा प्रिया और लौड़ा मसलने लगा। वो बहुत खुश हुआ। मैंने भी उल्टे सीधे रास्तों से कार निकाली ताकि मेरे घर का रास्ता न जान पाएँ। रात का समय था। घर पहुंचा बिना रुके साथ वाले प्लाट में गाड़ी लगा दी, वहाँ से छोटे दरवाज़े से उनको अन्दर लेकर गया और दरवाजा खोल उनके लॉबी में बिठा प्रिया। गेट लॉक किया, अन्दर आया, अपने कमरे में बिठा प्रिया। दारु की बोतल खोली, बर्फ़ लाया, नमकीन लाया। एक-एक पैग खींचने के बाद एक-एक और पैग बनाकर दोनों के बीच बैठ गया। दोनों ने अपनी लुंगी और पजामा उतार कर फेंक प्रिया। दोनों के लौड़े आधे खड़े हुए मेरे हाथ में थे। शराब डाल डाल कर चुसवाने लगे, देखते ही उनके लौड़े अब तन कर सलामियाँ देने लगे। क्या लौड़े दिए थे भगवान् ने उनको ! वाह यारो ! मैं खुश था।

दोनों ने मिलकर मेरा पजामा उतार प्रिया और मेरी चिकनी गांड पर हाथ फेरने लगे। मेरे मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी। जैसे ही मुझे ऊपर से नंगा किया, दोनों हैरान हो गए, मेरी लड़कियों जैसी छातियाँ देख देख पागल से होने लगे। एक एक पैग डाल पहले मैं कुतिया की तरह चलते हुए मेज़ की तरफ गया। दोनों पीछे आ गए और गांड चाटने लगे। मैं मज़े लेने लगा, पैग बनाता रहा।

एक ने मेरा मम्मा दबा प्रिया, मेरा चुचूक मसल प्रिया- आउ !

पैग खींचने के बाद दोनों मुझे मसलने लगे, हैवान बन कर मेरे ऊपर छाने लगे, मसल मसल कर मेरे मम्मे और गांड लाल कर डाली थी।

वाह शेरो ! वाह !

अब मैं भी बेशर्मी पर उतर आया था, गंदी गंदी बातें कर उन्हें उकसाने लगा। वो भी गाली देकर रहे थे- मादर चोद ! गांडू तेरी माँ चोद देंगे !

दोनों मेरे बालों को पकड़ पकड़ कर मुँह में डाल कर चुसवाने लगे। वाह और रगड़ो ! कमीनो ! रंडी हूँ मैं !

दोनों दबा दबा कर मेरे निपल चूस रहे थे और गांड में ऊँगली डाल कर चोद रहे थे।

अब डालो और फाड़ दो ! पूरी रात चोदना है अभी !

पूरी बोतल ख़तम कर चुके थे। मैंने खुद ही एक को धक्का मार सीधा लिटा प्रिया और उसके ऊपर आकर उसके लौड़े पर कंडोम चढ़ा प्रिया और उसको अपने छेद पर टिकाते हुए बैठने लगा। वो मेरी करामात पर हैरान था। देखते ही देखते मैंने पूरा लौड़ा अन्दर ले लिया और ऊपर नीचे होने लगा।

वाह गांडू ! क्या माल है ! लड़कियाँ तेरे सामने फ़ीकी लगेंगी !

दूसरे वाले को इशारे से सामने आने को कहा और उसका मुँह में ले लिया। नीचे वाला मुझे सीधा करके ऊपर से डालते हुए तेज़ तेज़ धक्के दते हुए झड़ गया।

मैंने झट से दूसरे के लौड़े पर निरोध चढ़ा प्रिया और उसने भी गरम लोहे पर चोट मारनी चालू की।

वाह मेरे राजा वाह ! और मार !

तेरी बहन चोद दूंगा ! मादर चोद साले गांडू !

चल बहन चोद अपना काम करता रह ! और तेज़ तेज़ तेज़ !

उसने कहा- घोड़ी बन !

मैं बन गया और उसने गांड में घुसाते हुए तेज़ धक्के देने शुरु किये। साथ में वो मेरे लौड़े की मुठ मारने लगा।

इस हरक़त से मैं दीवाना हो गया, मेरी आँखें बंद होने लगी। मैंने मस्ती में पहले वाले का लटका हुआ लौड़ा मुँह में ले लिया और वो तेज़ होता गया और मेरी मुठ मारता रहा। हम दोनों एक साथ छूटे। दोस्तो, यह मजा किसी ने नहीं प्रिया था, आज तक किसी ने मुझे इस तरह संतुष्ट नहीं किया था।

सुबह के चार बजे तक मेरी गांड की खूब रेल बनी। मैंने उन्हें सुबह होने से पहले वहीं पहुंचा प्रिया और मोबाइल नंबर देते हुए कहा- मिलते रहना !

अगर आज भी अकेला रहेगा तो बुला लेना ले जाना !

अगले दिन भी जब घरवाले नहीं आये तो मैंने शाम को कार निकाली पहले ठेके से बोतल खरीद पैग खींचा। ठेके के पीछे बने अहाते पर ही मुझे कोई ?????????

जवाब देते रहना !

इसके आगे क्या हुआ, जल्दी हाज़िर हूँगा !

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां
म

मल्लिका राय

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

च

चिराग रघु

4 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

ज

जितेन्द्र 1

4 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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