होम पर वापस जाएं
Hindi Sex Story पठन समय: 5 मिनट पढ़ा गया: 829 बार

अग्निपरीक्षा

फ़ुलवा

22 Mar 2012 को प्रकाशित

अग्निपरीक्षा
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

फ़ुलवाऍम बी ए करके सुसुमन को अच्छी नौकरी मिल गई।

छोटे से शहर की रहने वाली सुसुमन सरल स्वभाव की थी, अतः नौकरी के लिए मायानगरी मुम्बई भेजते समय माता-पिता का मन भी चिंताओं से भरा था परन्तु अपने एक बुजुर्ग मित्र के पास बेटी के रहने की व्यवस्था हो जाने से उनको कुछ राहत सी मिली।

बहुत सारी हिदायतों के साथ बेटी को अपना भविष्य उज्ज्वल बनाने के लिए भेज प्रिया उन्होंने। कम्पनी की बस से ऑफिस आने जाने की तथा रहने की व्यवस्था हो जाने के कारण अधिक समस्या नहीं हुई सुसुमन को मुम्बई में। घर और यातायात प्रमुख समस्या हैं महानगरों की।

ऑफिस में अपने सहयोगियों से अच्छी पटती थी सुसुमन की। आकर्षक व्यक्तित्व की स्वामिनी, मृदुभाषिणी, सदा सबके साथ सहयोग करने वाली सुसुमन थी ही ऐसी, जो मिलता प्रभावित हो जाता।

सुदीप, उसके सहकर्मी ने ऑफिस के काम में उनकी बहुत सहायता की। सुसुमन के हृदय में कृतज्ञता की भावना थी सुदीप के प्रति।

प्रायः लौटते समय काम निबटा कर साथ साथ ही निकल जाते थे दोनों।

कभी काफी, स्नैक्स आदि लेकर सुसुमन ऑफिस बस के स्थान पर ऑटो या लोकल ट्रेन पकड़ कर घर पहुँच जाती थी। आत्मीयतापूर्ण व्यवहार मिलने से दोनों एक-दूसरे के साथ अपनी परेशानियाँ भी साझा कर लेते। सुसुमन विश्वास भी करने लगी थी सुदीप का।

अचानक ही एक दिन सुदीप ने उनके समक्ष शादी का प्रस्ताव रख प्रिया। सुसुमन को बुरा नहीं लगा क्योंकि उसको भी सुदीप का साथ अच्छा लगने लगा था।

अपने माता-पिता से भी उसने कुछ सकुचाते हुए सुदीप के प्रस्ताव के विषय में बताया।

भिन्न जाति, रहन-सहन का पता चलने पर माता-पिता को कुछ असहज लग रहा था, परन्तु सगे सम्बन्धियों और मुम्बई वासी मित्र से बात करके उन्होंने सुदीप के विषय में जानकारी करने को कहा।

सब कुछ सामान्य देख कर और सुदीप से प्रभावित हो कर मित्र ऩे सुसुमन के पिता को तैयार कर लिया।

सुदीप के माता-पिता तो किसी सड़क दुर्घटना का शिकार हो स्वर्ग सिधार चुके थे, हाँ एक छोटा अविवाहित भाई अवश्य था जो विदेश में रहता था।

सुसुमन के माता-पिता ऩे मुम्बई आकर सुदीप से स्वयं भी मिलकर दोनों का विवाह सादगी से सम्पन्न करा प्रिया। सुदीप के कोई दूर के सम्बन्धी और भाई तथा ऑफिस के साथी, मित्र उपस्थित रहे, कुछ समय वहीँ रूककर वो लोग अपने शहर लौट आये।

सुदीप और सुसुमन ऩे अपना अलग घर ले लिया था। घूमने फिरने में कब समय पंख लगाकर उड़ गया पता ही नहीं चला।घर, ऑफिस, घूमना-फिरना यही दिनचर्या रहती थी दोनों की।

दोनों की जोड़ी लोगों के लिए चर्चा व कुछ के लिए ईर्ष्या का विषय थी। सुसुमन का साथ पाकर सुदीप भी स्वयं को धन्य ही मानते थे।

एक दिन दोनों फिल्म देखकर लौट रहे थे, बाईक पर सवार सुदीप और सुसुमन को चारों तरफ से कुछ मवाली छाप गुंडों ने घेर लिया।

सस्ती बातें करते हुए उन गुंडों के इरादे कुछ नेक नहीं थे। सुसुमन की सुन्दरता को लेकर उन गुंडों की अश्लील बातें सुनकर उन दोनों ऩे अनहोनी का अंदाजा लगा लिया था।

दोनों की बहुत देर तक हाथापाई हुई और अंत में वही हुआ जिसका डर उन दोनों को था, गुंडे सुसुमन को उठाकर ले गये। सुदीप अकेले हाथ मलते कुछ भी नहीं कर सके।

पुलिस में शिकायत दर्ज कराना, निरर्थक भागदौड़ यही सब दो दिन तक चलता रहा।

तीसरे दिन सुसुमन भाग कर घर पहुँची, अपने घर आकर उसको राहत मिली। सुदीप घर पर ही थे।

सुसुमन उनके गले लगकर बिलखती रही। परन्तु सुसुमन को अहसास हुआ कि सुदीप की प्रतिक्रिया कुछ विचित्र थी, उन्होंने कोई ढाढस नहीं बंधाया सुसुमन को, बस औपचारिकता वश उनको चुप कराया। सुसुमन की आशा के विपरीत सुदीप ऩे उससे ढंग से बात भी नहीं की।

सुसुमन को लगा कि वो कुछ समझी नहीं, उसने पूछा- मतलब?

सुदीप का ठंडा सा उत्तर था- दो दिन कैसे रही तुम गुंडों के साथ? लोग क्या कहेंगें, सोचेंगें?

सुसुमन तो मानो आसमान से गिरी, परन्तु सुदीप की सोच नहीं बदली।पति की आँखों में अविश्वास और उपेक्षा, वो भी जब वो पति के साथ ही थी और निर्दोष थी।

सहन नहीं कर सकी दी, और नींद की गोलियाँ खाकर स्वयं चिर निंद्रा में सो गई।

सुसुमन का दोष क्या था, उसका सौंदर्य ही उनका सबसे बड़ा शत्रु बन गया !

इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिला कि निर्दोष होने पर भी सीता को ही सदा अग्निपरीक्षा क्यों देनी पड़ती है?

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

पोर्न फिल्म देख कर पड़ोसन भाभी ने चूत चुदवाई
Hindi Sex Story

पोर्न फिल्म देख कर पड़ोसन भाभी ने चूत चुदवाई

मेरा नाम अजय (नाम बदला हुआ) है.

8 मिनट 775
रखैल की चुदाई ने चार चूतों के राज उगले
Hindi Sex Story

रखैल की चुदाई ने चार चूतों के राज उगले

मैं जिस शहर की जिस गली में रहता हूँ.. वहाँ जमील मियाँ नाम के एक व्यक्ति रहते हैं। आप और हम तो एक ही औरत से पार नहीं पा पाते.. जबकि उन्होंने चार शाप्रियाँ की हैं और उनकी चारों बेगमें उनसे बड़ी खुश दिखाई देती हैं।

15 मिनट 872
चूत का रसिया-2
Hindi Sex Story
5 मिनट 1,288

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।