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चुदाई की कहानी पठन समय: 7 मिनट पढ़ा गया: 323 बार

मेरा बदन उनके दोस्त की बाँहों में

shalinimittal4u

02 Sep 2011 को प्रकाशित

मेरा बदन उनके दोस्त की बाँहों में
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लेखिका : शालिनी

मैं भी अब अंतर्वासना की पक्की पाठक बन चुकी हूँ। यहाँ छपने वाली एक एक मन मोहित कर देने वाली कथा पढ़ कर काम-इच्छा जागना स्वाभविक है। आज मैं भी अपनी एक ऐसी चुदाई लेकर सबके सामने आई हूँ, मुझे आशा है कि मेरी इस मेहनत को दरकिनार नहीं किया जायेगा।

मैं पानीपत की रहने वाली एक महला हूँ, हम तीन भाई बहन हैं, सबकी शादी हो चुकी है, मैं सबसे छोटी हूँ। जैसे जैसे मैं बड़ी होती गई, जवानी मेरे जिस्म को सजाती गई और मेरी जवानी और ज्यादा कंटीली होती गई। यौवन के फूल जब खिलते हैं तो उनकी महक फिज़ा में फ़ैल जाती है और स्वाभाविक है कि इस महक से भंवरे इर्द गिर्द मंडराने लगते हैं।

मेरे पांव फिसलते देर नहीं लगी। देखते ही देखते मैं अपनी जवानी लुटाने लगी, कई भंवरों ने मेरा रसपान किया। यह देखते हुए माँ ने बीस साल की उम्र में ही मेरी शादी सोनीपत के एक घर में सर्वेश नाम के युवक से कर दी।

मेरे जैसी आग और कोमल लड़की से शादी करके सर्वेश अपने दोस्तों में फूला नहीं समाया। रात के ९ बजे मेरी ननद ने मुझे कपड़े बदलवा मुझे सुहाग-सेज पर बिठा दिया। गुलाब की मदहोश सुगंध से दिल मचलने लगा। करीब एक घंटे बाद सर्वेश अन्दर आया, दरवाज़ा बंद हुआ, यह मेरा पहली बार नहीं था फिर भी एक्टिंग तो करनी पड़नी ही थी, आते ही घूंघट उठाते ही उससे रुका नहीं गया।

मुझे बाँहों में लेकर चूमने लगा। उसकी ऐसी हरक़त से मैं बहुत खुश थी। देखते ही हम दोनों निर्वसन हो गए। वो तो जैसे चूम के सब-कुछ कर देना वाला था। कुछ पल में मैं उसके नीचे कसमसाने लगी। मेरे चरम-सीमा से पहले ही वो निढाल हो कर हांफने लगा। मेरे सपने टूट गए, सुहाग-सेज के गुलाब मुझे कांटे लगने लगे। पूरी रात मुझे अपने आशिकों की याद आती रही।

फिर मैंने सोचा कि शायद तजुर्बा न होने की वजह से या फिर एकदम से मेरी जैसे आग को देख उसका यह हाल हुआ है। लेकिन फिर मेरे अरमान रोज़ कुचले जाने लगे।

एक साल बाद ही मैंने बच्ची को जन्म दिया। मेरी सेक्स लाइफ अरमान बन रह गई। फिर एकदम से मेरे पति के बिज़नस में गिरावट आई और उसने सब कुछ समेट लिया और मुझे वहां बुलाने का वायदा कर शहर आ गया। यहाँ पर उसको एक प्राइवेट कंपनी में अच्छी नौकरी मिल गई और उसने कम्पनी के दिए क्वाटर में मुझे बुलवा लिया। शहर आकर तो मेरी जवानी और निखरने लगी। लेकिन अब सेक्स-लाइफ और बदतर हो गई। थका आता, कभी चोदता कभी नहीं !

मेरी चूत शहर के मर्द देख और गीली होने लगी। अब मैं चुप नहीं रही और उसको उसकी कमजोरी पर ताने कसने लगी। उसको शराब की लत लग गई। उसके कुछ दोस्त घर आते और बैठ कर दारू पीते। एक दिन मेरा पति जॉब पर नहीं पहुंचा और सुबह ही शराब पीकर टुन्न होकर अपने किसी दोस्त के घर लुढ़क गया। आधे घंटे बाद उसका एक दोस्त अमित घर आया। मैंने कपड़े ही ऐसे डाले थे कि उसकी आंखें फटी रह गई। मैंने चुटकी बजाकर उससे कहा- क्या हुआ ?

उसको अन्दर बुलाया, उसने मुझे कहा कि सर्वेश को सुबह ही ज्यादा हो गई है, जॉब पर नहीं गया ! मेरे घर पड़ा है !

उसने मेरी इतनी तारीफ की। औरत तारीफ की भूखी होवे- सब जाने !

मैं उसके लिए चाय बनाने रसोई में गई, मेरे अरमान मचलने लगे। तभी उसने मुझे पीछे से दबोच लिया और एक साथ ही मुझपर चुम्बनों की बरसात कर दी।

यह क्या कर रहे हैं आप- मैंने दिखावे के लिए कहा।

भाभी पागल बना दिया तेरी जवानी ने ! कैसे काटती होगी ऐसे मर्द के साथ ?

मैंने पलटी खाई, चिपक गई उसके साथ। मैंने भी उसको चूम लिया। बहुत प्यासी हूँ मैं भाई साब !

ओह, मुझे मालूम है तुझ जैसी औरत की चूत वो ठंडी नहीं कर पाता होगा !

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मन्जू की चूतबीती-1

बिस्तर पर डाल उसने मुझे नंगी कर लिया और मेरा स्तनपान करने लगा- क्या छाती है तेरी !

ओह, अमित बहुत प्यासी हूँ इस आदमी की वजह से ! मैंने भी उसके फूले हुए हिस्से को मसलते हुए कहा और उसकी बेल्ट खोल दी। फिर उसका अंडरवियर उतार दिया। क्या लौड़ा था उसका ! पकड़ते ही आग लग गई ! मैंने झट से उसके लौड़े को अपने मुँह में ले लिया और वो अपने लौड़े की चुसाई मेरे बालों में हाथ फेरते हुए देखने लगा।

लौड़ा है अमित आपका !

भाभी बहुत बड़ा है मेरा ! क्या करूँ !

अब मैं करुँगी कुछ !

मैं एक रंडी की तरह उसकी आँखों से आंखें मिला कर लौड़ा चाटने लगी। मैं ६९ पे आ गई और उसके होंठों पे अपनी चूत रख दी। वो खूब चाटने लगा, मैं सिसकने लगी।

एक साल बाद मुझे असली लौड़ा मिला था और मज़बूत बाहें मिली थी। मैं कसमसाने लगी। मैंने मुँह से लौड़ा निकाल दिया और टांगें चौड़ी कर के लेट गई। उसने बीच में आकार अपना नौ इंच का लौड़ा मेरी चूत पे रखा तो मैं पागल हो कर गांड उठाने लगी। वो तड़पाने लगा, फिर उसने अपना लौड़ा घुसाना शुरू किया। कसी हुई चूत ऐसे लौड़े की आदत ही भूल चुकी थी।

भाभी ! सच में वाह ऐसी चूत ! वो भी इतनी कसी, बस डालते जाओ !

उसने मेरे दर्द को नज़र अंदाज़ करते हुए जड़ तक डाल दिया।

हाय ! हाय ! चोद मुझे मादरचोद ! और जोर से चोद मेरी चूत को !

यह ले साली कुतिया ! यह ले !

अह उह उह सी सी कर मैं उसको उकसाने लगी और वो और जोश से ठोकने लगता। मैं झड़ चुकी थी लेकिन वो अभी लगा था। उसने मुझे घोड़ी बनाया और मेरी करीब बीस मिनट की ठुकाई से उसने अपना माल जब छोड़ा तो मेरी चूत की प्यास बुझ गई। उसके बाद पूरा दिन उसने मुझे कई बार ठोका और अब मौका मिलते ही मैं उसको बुला लेती। जिस दिन पति की रात की ड्यूटी होती वो दिन में करवा लेता और रात को उसको बुला लेती और वासना के खेल खेलते। लेकिन कुछ महीनों बाद ही उसका ऑस्ट्रेलिया का फ़ैमिली वीसा आ गया और वो चला गया।

उसके बाद अखिलेश नाम का उसका दोस्त मेरे पति को छोड़ने आता। मेरा उस पर दिल आने लगा। वो भी मुझे चाहता था लेकिन पहल नहीं कर पा रहा था, वो मैंने कर दी। उसके बाद मेरी जिन्दगी में क्या हुआ, अगले भाग में लिखूंगी।

गुरु जी ! प्लीज़ मेरी चुदाई ज़रूर छाप देना !

मैं जल्दी ही अखिलेश और उसके बाद जो हुआ सब लिखूंगी।

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पाठकों की राय

3 टिप्पणियां

राज सिंह11

2 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

यश वैद्या मैगी

3 weeks ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

भरत बरोट

4 weeks ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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