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Behan Ki Chudai पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 802 बार

छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-2(Chhoti behan Sapna ki bumper chudai alag-alag lund se-2)

rajukavya

17 Nov 2020 को प्रकाशित

छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-2(Chhoti behan Sapna ki bumper chudai alag-alag lund se-2)
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पिछला भाग पढ़े:-छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-1

आशा है आपने पिछली सेक्स कहानी को पढ़ लिया होगा, आगे की कहानी…

मेरठ कॉलेज का वो दौर खत्म होने के बाद जब सपना वापस गाँव आई, तो वह पहले से कहीं ज्यादा परिपक्व और समझदार हो चुकी थी। विनय और शुभम के उन हादसों ने उसे दुनिया की कड़वी हकीकत सिखा दी थी। लेकिन मेरे प्रति उसका प्यार और मेरे लंड के लिए उसकी दीवानी वैसी ही बनी रही। बल्कि अब तो वह अपनी मर्जी से, बिना किसी झिझक के मेरे और करीब आने के बहाने ढूंढती थी।

यह किस्सा उस वक्त का है जब कॉलेज की छुट्टियां खत्म होने वाली थी और गाँव में सावन का महीना शुरू हो चुका था। दो दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही थी।

उस रात किस्मत से माता-पिता किसी रिश्तेदार के यहाँ पास के कस्बे में गए हुए थे और भारी बारिश के कारण वहीं रुक गए थे। पूरे बड़े घर में सिर्फ मैं और सपना अकेले थे। रात के करीब नौ बज रहे थे। बाहर बिजली कड़क रही थी और बारिश की बूंदें टिन की छत पर ढोल की तरह बज रही थीं। गाँव की बत्ती गुल हो चुकी थी और चारों तरफ घाना अंधेरा था।

मैंने दालान में एक मोमबत्ती जलाई। सपना रसोई से खाना खाकर कमरे में आई। उस रात उसने हल्के आसमानी रंग की सूती साड़ी पहन रखी थी। बारिश की वजह से हवा में ठंडक थी, लेकिन घर के अंदर एक अजीब सी उमस और कामुक गरमाहट थी। साड़ी के पतले पल्लू के पार से उसके 32-30-32 के गदराए बदन का उतार-चढ़ाव साफ दिख रहा था।

वह मोमबत्ती की मद्धम रोशनी में मेरे बेड के पास आकर बैठ गई और बोली, “भैया, बिजली नहीं आएगी क्या? बहुत डर लग रहा है, और उमस भी बहुत है।”

मैंने मुस्कुराते हुए उसका हाथ पकड़ा, जो थोड़ा ठंडा था। “जब मैं तुम्हारे साथ हूँ सपना, तो डरने की क्या जरूरत? और रही बात उमस की… तो इसका इलाज तो हमारे पास हमेशा से है।”

मेरी आँखों की चमक देख कर सपना के चेहरे पर वही पुरानी, जानी-पहचानी मुस्कान तैर गई। उसने बिना कुछ बोले अपनी साड़ी का पल्लू अपने कंधे से सरका दिया। पल्लू के हटते ही उसका गहरे गले का ब्लाउज और उसमें कस कर बंधी उसकी भारी चूचियां मोमबत्ती की रोशनी में चमक उठी।

मैंने आगे बढ़ कर उसके ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले। जैसे ही ब्लाउज के दोनों पट अलग हुए, बिना ब्रा के उसकी पपीते जैसी कड़ी और सुडौल चूचियां बाहर की तरफ छलक आई। गर्मी के कारण उसकी छाती और नाभि के पास पसीने की बारीक बूंदें चमक रही थी।

“आह, भैया… बहुत दिनों बाद हम इस तरह अकेले हैं,” सपना ने अपनी आँखें मूंदते हुए कहा और मेरे सीने से चिपक गई।

मैंने उसे कस कर बाहों में भींच लिया। मेरे हाथों ने तुरंत उसकी साड़ी को नीचे सरकाना शुरू किया। पेटीकोट का नाड़ा ढीला होते ही उसकी साड़ी और पेटीकोट पैरों के पास ढेर हो गए। अब वह सिर्फ एक छोटी सफेद पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी। उसकी चौड़ी, कद्दू जैसी गांड और गठीली जांघों का उभार उस मद्धम रोशनी में किसी अप्सरा जैसा लग रहा था।

मैंने उसे धीरे से बिस्तर पर लेटा दिया और खुद उसके ऊपर आ गया। मैंने सबसे पहले उसके गुलाबी और भूरे निप्पल्स को अपने मुंह में भरा और उन्हें धीरे-धीरे चूसना शुरू किया। सपना बेडशीट को अपने हाथों में भींचते हुए सिसकने लगी, “उहहह… भैया… हाँ… वैसे ही चूसो जैसे खेत में चूसा था… बहुत तड़प रही हूँ मैं…”

मैंने नीचे सरकते हुए उसकी पैंटी को भी उतार फेंका। अब वह पूरी तरह निर्वस्त्र थी। उसकी जांघों के बीच की गुलाबी बुर से काम-रस बह कर बिस्तर को गीला करने लगा था। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के दाने पर रखी, तो वह पूरी तरह से कांप उठी और बिस्तर पर अपनी गांड ऊपर-नीचे पटकने लगी।

अब और सब्र करना नामुमकिन था। मैंने अपनी पैंट उतारी और मेरा 8 इंच लंबा और मोटा लंड कड़ा होकर सलामी देने लगा। सपना ने उसे देखा, उसकी आँखों में वही पुरानी भूख जाग उठी। उसने दोनों हाथों से मेरे लंड को पकड़ा, उसे सहलाया और अपनी चूत के मुहाने पर टिका दिया।मैंने अपने दोनों हाथ उसकी पतली कमर पर जमाए और एक ही जोरदार, गहरे धक्के से अपना पूरा लंड उसकी चूत की गहराई में उतार दिया।

‘पकाक-फच’ की एक रसीली आवाज पूरे कमरे में गूंज उठी।

“ओहहह माई गॉड! भैया… आह…” सपना की आँखों से सुख के आँसू निकल आए।बाहर बारिश की रफ्तार तेज हो रही थी, और अंदर मेरी चुदाई की स्पीड। मैंने बिना रुके लगातार भारी और जोरदार धक्के मारना शुरू कर दिया। कमरे के सन्नाटे में अब सिर्फ ‘फच-फच-फच’, ‘चट-चट-चट’ और ‘फट-फट’ की आवाजें गूंज रही थी। जब भी मेरा आंड उसकी गांड के निचले हिस्से से टकराता, एक तेज थाप की आवाज आती।

सपना पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी। उसने अपने दोनों पैर उठा कर मेरी पीठ पर कस लिए ताकि लंड और गहराई तक जा सके। मैंने उसे सीधा लिटा कर करीब 15 मिनट पेलने के बाद, उसे बेड पर ही घोड़ी बना दिया। पीछे से उसकी भारी गांड पर हाथ से दो-तीन थप्पड़ मारे, जिससे उसकी गांड लाल हो गई, और फिर पीछे से अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू किया। हर धक्के के साथ उसके बूब्स जोर-जोर से बाउंस कर रहे थे।

करीब आधे घंटे की इस नॉन-स्टॉप और जोरदार चुदाई के बाद, सपना का पूरा बदन झटके लेने लगा और उसकी चूत ने अपना सारा पानी छोड़ दिया। उसके तुरंत बाद, मैंने भी एक आखिरी गहरा धक्का मारा और अपना सारा गर्म वीर्य उसकी चूत के अंदर खाली कर दिया।

हम दोनों पसीने से लथपथ, हांफते हुए एक-दूसरे के ऊपर निढाल होकर गिर पड़े। बाहर बारिश अब भी जारी थी, लेकिन हमारे अंदर की आग शांत हो चुकी थी। सपना और मेरे बीच का यह सिलसिला कभी खत्म होने वाला नहीं था।

गाँव की उस बरसात वाली रात के बाद हमारा हौसला और बढ़ चुका था। अब हम दोनों बस ऐसे मौकों की तलाश में रहते थे जहाँ पाबंदियों की दीवारें टूटें और हमें एक-दूसरे के जिस्म को सहेजने का मौका मिले। ऐसा ही एक अनसुना और बेहद रोमांचक किस्सा तब का है, जब शरद ऋतु की शुरुआत हो रही थी और पास के एक बड़े कस्बे में सालाना वार्षिक मेला लगा हुआ था।

शाम के वक्त मैं और सपना अपनी पुरानी एम्बेसेडर गाड़ी से मेले में घूमने गए थे। सपना ने उस दिन गहरे लाल रंग का पटियाला सूट पहन रखा था, जिसके साथ उसने नेट का दुपट्टा लिया हुआ था। उसका 32-30-32 का कातिलाना फिगर उस सूट में इस कदर निखर कर आ रहा था कि मेले में हर कोई उसे ही मुड़-मुड़ कर देख रहा था। लेकिन सपना की नज़रें तो सिर्फ अपनी पसंद पर टिकी थी। पर वहां पर दो लड़के जो शायद मेरी ही उम्र के थे, पर शरीर से मोटे तगड़े थे, वो सपना के आगे पीछे ही घूम रहे थे। पर ये बात मैंने तब तक नोटिस नही किया था जब तक वो दोनों सपना पर कमेन्ट नही किए थे। वो दोनों सपना के आगे-पीछे घूमते हुए कमेन्ट किए।

पहला लड़का: यार शानू क्या माल है यार एक-दम पटाका है साली।

शानू: अबे यार माल तो है साली, गांड तो देख कितने गठीले है और चूची देख साली की मन कर रहा अभी मसल दूं।

पहला लड़का: यार शानू तू कहे तो आज इसको बजा दूं। साली की चूत कितनी गुलाबी होगी बे, इतनी गोरी चिट्टी है साली।

शानू: यार राज भाई जो इस साली को चोदेगा वो बहुत किस्मत वाला होगा। जिससे इसकी शादी होगी उसके मजे ही मजे होंगे।

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राज: कोई चोदेगा नही भाई ये चुदती है लिख के लेले। तभी साली के गांड और चूची देख इतने भारी-भारी है।

शानू: तुझे कैसे पता बे?

राज: भाई बिना चुदे कोई लड़की इतनी हाॅट नहीं हो सकती। भाई मेरा तो लंड खड़ा हो गया है मैं जा रहा सटा दूंगा।

कहते हुए जैसे आगे बढ़ा, तब तक शानू ने रोक दिया रुक जा भाई, मुझे दिखाते हुए… ये लड़का शायद साथ में ही है इसके….

मैं कुछ खरीदने के चक्कर में जैसे ही थोड़ा वहां से दूर हुआ, वो दोनों आए और सपना को पीछे से धक्का मारते हुए-

राज: क्यूं चलेगी, आज रात रंगीन कर दूंगा तेरी?

शानू: यार आप बहुत प्यारी लग रही हो आपको देख मेरा लंड तुम्हें चोदना चाह रहा। मेरा लंड ले लो और इसकी इच्छा पूरी कर दो।

कहते हुए वो दोनों सपना को खींचते हुए कोने में ले जाने लगे। तभी दो-तीन लोग उन दोनों को देख लिए और फिर भीड़ ने पकड़ कर पीट दिया। और सपना को बोलने लगे तुम्हारे साथ कौन आया है। ऐसे लोगों से सावधान रहा करो बेटा।

मैं जब तक वहां आया पूरा मामला ठंडा हो चुका था, पर रास्ते में मैंने सुना, कि अच्छा हुआ उस आदमी ने देख लिया नहीं तो आज उस लड़की के साथ वो गुंडे गलत कर देते। मैं जब आया तो सपना की आंखो में डर और आंसू थे। मैंने पूछा तो वो रो रो कर बताने लगी। तो मैं उन लड़को को मारने को दौड़ा तभी सपना बोली कि उसको लोग बहुत पीटे हैं चलिए घर चलते हैं। फिर हम कुछ खाए पिए।

मेले से लौटते-लौटते रात के करीब नौ बज चुके थे। गाँव को जोड़ने वाली वह सड़क दोनों तरफ ऊंचे-ऊंचे पेड़ों और झाड़ियों से घिरी हुई थी। दूर-दूर तक कोई रोशनी या आबादी नहीं थी। अचानक, गाँव से करीब तीन किलोमीटर पहले गाड़ी ने दो-तीन हिचकी ली और उसका इंजन पूरी तरह बंद हो गया।

मैंने नीचे उतर कर बोनट खोल कर देखा, तो समझ आ गया कि इस सुनसान रास्ते पर गाड़ी आज रात ठीक होने वाली नहीं थी। जब मैं वापस गाड़ी के अंदर आकर बैठा, तो सपना थोड़ी घबराते हुए बोली, “क्या हुआ भैया? गाड़ी ठीक नहीं होगी क्या? इस अंधेरे में मुझे बहुत डर लग रहा है।”

मैंने गाड़ी के अंदर की मद्धम पीली लाइट जलाई और उसकी पतली कमर पर हाथ रखते हुए उसे अपने करीब खींचा। “जब तक तुम्हारा भाई तुम्हारे साथ है, तुम्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है सपना। वैसे भी, इस सुनसान रास्ते पर बंद गाड़ी के अंदर जो मजा है, वह घर के बंद कमरे में कहाँ?”

मेरी बात सुनते ही सपना के चेहरे का डर गायब हो गया और उसकी आँखें कामुकता से चमक उठी। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “आप भी ना भैया, कभी बाज नहीं आते।”

सपना ने बिना कोई वक्त गंवाए गाड़ी के आगे की दोनों सीटों को आगे की तरफ झुका दिया और खुद रेंगती हुई गाड़ी की चौड़ी पिछली सीट पर चली गई। मैंने गाड़ी की सारी लाइटें बंद कर दी, ताकि बाहर के अंधेरे में अंदर का कुछ भी नजर ना आए। केवल चाँद की हल्की रोशनी खिड़की के कांच से छन कर अंदर आ रही थी।

मैंने पीछे जाकर सपना को अपनी बाहों में कस लिया। उसके लाल कुर्ते के पीछे की डोरी को जैसे ही मैंने खींचा, उसका कुर्ता ढीला हो गया। मैंने उसे ऊपर की तरफ सरकाया, तो बिना ब्रा के उसके 32″ के एक-दम टाइट और सुडौल बूब्स अंधेरे में भी साफ मचलते हुए दिखे।

गर्मी और उत्तेजना से उसके निप्पल एक-दम अकड़ चुके थे। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए और उसके मुंह के रस को चूसने लगा। सपना ने भी पागलों की तरह मेरा साथ दिया। एक हाथ से मैंने उसके बूब्स को जोर-जोर से मसला, तो दूसरे हाथ से उसकी पटियाला सलवार का नाड़ा खोलकर सलवार और उसकी छोटी पैंटी को एक साथ उसके पैरों से बाहर निकाल दिया।

अब वह गाड़ी की उस सीट पर पूरी तरह निर्वस्त्र होकर मेरे सामने लेटी थी, और उसकी चूत से काम-रस बह कर सीट के कवर को गीला करने लगा था।

मैंने तुरंत अपनी पैंट नीचे सरकाई और मेरा 8 इंच लंबा कड़ा लंड झटके से बाहर आ गया। सपना ने खुद अपनी दोनों टांगों को फैला कर गाड़ी की खिड़कियों की तरफ टिका दिया, जिससे उसकी चूत की फांकें पूरी तरह खुल गई। उसने मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत के मुहाने पर सेट कर दिया।

मैंने उसकी जांघों को कस कर पकड़ा और एक ही जोरदार धक्के से अपना पूरा लंड उसकी चूत के अंदर पेल दिया। गाड़ी के सीमित स्पेस में लंड ‘सड़सड़-फच’ करता हुआ सीधा उसकी चूत की गहराई से जा टकराया। “आहहह… भैया… उई मां…” सपना के मुंह से एक तीखी सिसकारी निकली, जिसे उसने अपने दुपट्टे को मुंह में दबा कर छुपाने की कोशिश की। मैंने बिना रुके अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की।

उस बंद गाड़ी के अंदर अब सिर्फ ‘फच-फच-फच’, ‘चट-चट-चट’ की तेज रसीली आवाजें गूंजने लगी। हमारे हर धक्के के साथ वह भारी गाड़ी ऊपर-नीचे जोर-जोर से हिल रही थी, जैसे कोई तूफान आया हो। सपना पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी, उसने अपनी आँखें मूंद ली थी और वह मेरे हर धक्के का भरपूर आनंद ले रही थी।

मैंने उसे सीट पर ही घुटनों के बल लाकर घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी चौड़ी गांड को सहलाते हुए दोबारा अपना लंड उसकी चूत में पेलना शुरू किया। गाड़ी के कांच पर हमारी सांसों की वजह से धुंध जम चुकी थी। करीब 25 मिनट की इस नॉन-स्टॉप और जोरदार चुदाई के बाद सपना का पूरा बदन कांपने लगा और वह पूरी तरह झड़ गई।

उसके तुरंत बाद, मैंने भी दो-तीन गहरे धक्के मारे और अपना सारा गर्म वीर्य उसकी चूत के अंदर ही खाली कर दिया। हम दोनों पसीने से लथ-पथ होकर उसी सीट पर एक-दूसरे से लिपट कर हांफते रहे। कुछ देर बाद हमने खुद को साफ किया, कपड़े पहने और गाड़ी के अंदर ही सुबह होने का इंतजार करने लगे।

यह था हमारी बंद गाड़ी के रोमांच का वो अनसुना किस्सा, जिसने हमारे रिश्ते को और भी गहरा कर दिया। हमारी इस यात्रा के और भी कई पहलू हैं, जो समय के साथ आपके सामने आते रहेंगे। तब तक के लिए अपना प्यार इसी तरह बनाए रखें!

अगला भाग पढ़े:-छोटी बहन सपना की बम्पर चुदाई अलग-अलग लंड से-3

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