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चाची की चुदाई • पठन समय: 6 मिनट • पढ़ा गया: 494 बार

बुआ ने मुझे चोदा

रॉकी जेम्स

24 May 2011 को प्रकाशित

बुआ ने मुझे चोदा
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प्रेषक : रॉकी

गुरु जी को प्रणाम, सभी कुंवारी लड़कियों और शादी शुदा औरतों को मेरा प्यार और सेक्स भरा नमस्कार !

यह बिल्कुल सच्ची घटना है काल्पनिक न समझें, सिर्फ नाम काल्पनिक हैं।

मेरा नाम कमल है मेरी उम्र 22 साल है, लण्ड सात इंच, बदन गोरा, लम्बाई 5 फ़ुट 10 इंच, गठीला बदन है।

मेरी बुआ का नाम सरिता है, उम्र 31 साल, गोरा बदन, सेक्सी, आज भी हिरोइन सी लगती है, वो बहुत ही कामुक है।

बहुत दिन पहले मेरी बुआ मुझे ऊपर छत पर ले गई, मुझे बैठा कर मेरे सामने अपनी चड्डी उतार कर टट्टी करने लगी और एकदम अलग नजरों से देखने लगी। मुझे उसकी चूत दिखी, थोड़ी-थोड़ी सुनहरी झांटें थी और छोटी सी प्यारी सी गुलाबी सी चूत थी। पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि वो ऐसा क्यों कर रही है। टट्टी करने के बाद वो मेरे पास आई, मेरी चड्डी खोलने लगी और मेरी लुल्ली से खेलने लगी। फिर मेरी लुल्ली खड़ी हो गई। और फिर वो अपनी चड्डी उतार कर मेरे ऊपर चढ़ गई मेरे लण्ड के ऊपर अपनी चूत रगड़ने लगी। धीरे धीरे उसने अपनी चूत में मेरा लण्ड घुसवाना चालू किया।

वो सेक्सी सेक्सी आवाजें निकाल रही थी पर धीरे धीरे ! ताकि कोई सुन न ले !

मुझे भी अच्छा लग रहा था पर उतना नहीं जितना कि मेरी बुआ को ! फिर अचानक वो एकदम से तेज़-तेज़ हिलना चालू हो गई और एकदम उसका दबाव मुझ पर बढ़ने लगा। मैं तो छोटा था, मुझे डर लग रहा था कि इस पर भूत-चुड़ैल तो नहीं घुस गया। मैं तो एकदम चुप हो गया था।

धीरे धीरे वो एकदम शांत हो कर मुझ पर ही लेट गई, शायद क्योंकि उसकी वासना की आग बुझ चुकी थी। मेरा वीर्य नहीं निकला पर मुझे बहुत अच्छा लगा था।

उस दिन के बाद मेरी नज़र हमेशा मेरी बुआ के ऊपर थी कि कब वो फ़िर से मुझे चोदेगी।

पर उस दिन के बाद बुआ मुझे ध्यान ही नहीं देती थी पता नहीं क्यों !

शायद उसे अपनी गलती का अहसास हो गया था इसलिए वो मुझसे ज्यादा बात भी नहीं करती थी और दूर दूर रहती थी। लेकिन मैं तो अब उसे और ध्यान से देखने लगा था। क्या जवानी थी उसकी ! साफ सफाई करती थी झुक झुक कर तो मैं उसके बूब्बे देखा करता था हमेशा नजर बचा कर ! मैंने इस बारे में आज तक किसी से बात नहीं की है, डर लगता है।

वो जब समझ जाती थी कि मैं उसे देख रहा हूँ तो मुझे घूर कर देखती थी क्योंकि वो भी किसी को कुछ नहीं बता सकती थी।

ऐसे ही कुछ साल बीत गए मेरी बुआ और ज्यादा जवान हो गई और सेक्सी लगने लगी लेकिन मुझे सेक्स का ज्ञान ही नहीं था।

पर कुछ समय बाद मुझे अपने दोस्तों के साथ ब्लू फिल्म देखने को मिली जिससे मुझे थोड़ा बहुत ज्ञान मिला।

एक दिन जब हमारा पूरा परिवार एक साथ हॉल में सो रहा था तो मेरी बुआ मेरे पास ही सोई हुई थी। उसकी टांगें मेरी तरफ थी। बुआ ने लहंगा और गाउन पहना था। गर्मी का मौसम था इसलिए किसी ने भी चादर नहीं ओढ़ी थी।

रात के लगभग दो बज रहे थे, अँधेरा होने के बावजूद मेरी आँखों में तो नींद ही नहीं थी, मैं तो अपनी बुआ के जवान स्तन देखना, चूसना चाहता था, उसकी चूत चाटना और चोदना चाहता था।

पर मुझे यह भी डर लग रहा था कि घर वाले मुझे पकड़ न ले ! वे तो मुझे मार ही डालेंगे।

धीरे से आखिर हिम्मत करके उसके लहंगे की तरफ मेरा हाथ बढ़ा, मैंने उसकी टांगों को उठाने की कोशिश की। वो शायद गहरी नींद में थी, इसलिए उसे पता नहीं चला। धीरे से मैंने उसका गाउन उसके घुटनों तक ऊपर किया जिससे मुझे मधिम रोशनी में उसकी चड्डी हल्की सी दिखी।

अब मैं धीरे से उसकी जांघ पर अपना हाथ फिर रहा था, वो अब भी नींद में थी। धीरे धीरे मैं उसकी पैन्टी के ऊपर हाथ फिराने लगा। मुझे बहुत डर भी लग रहा था और बहुत अच्छा और सेक्सी भी लग रहा था।

अचानक हाथ फिराते हुए मुझे लगा कि उसके जिस्म में हरकत हो रही है इसलिए मैंने तुरंत बुआ की चूत से हाथ हटा प्रिया और आंखें झपका कर सोने का नाटक करने लगा।

मेरा शक सही था, बुआ झटके से उठी और शायद समझ गई। उसने पहले अपना लहंगा ठीक किया और मेरी तरफ एकदम घूर कर देखने लगी। अँधेरे के कारण उसे ठीक से नहीं दिखा कि मैं भी पलकें झपका कर उसे देख्र रहा हूँ।

मैं थोड़ी देर ऐसे ही पड़ा रहा जैसे मुझे कुछ मालूम ही नहीं। उसे पता होने के बाद भी वो किसी को मेरे बारे में बता नहीं सकती थी क्योंकि यह सब शुरू ही उसने किया था। कुछ देर तक वो मुझे देखने के बाद आखिर वो सो गई। शायद मुझे फिर से हरकत करते हुए रंगे हाथ पकड़ने के लिए !

पर इस बार मेरी हिम्मत ही नहीं हुई।

इस दिन के बाद मुझे कभी उसके साथ सोने का मौका नहीं मिला।

इसके कुछ समय बाद मेरी बुआ की शादी हो गई और मेरा उसको चोदने का सपना आज तक अधूरा है क्योंकि मेरी बुआ ने तो मुझे चोद प्रिया पर मैं उसे नहीं चोद पाया हूँ।

खैर आज भी मेरी तम्मना है कि मैं उसे चोदूँ।

पर मेरी जिंदगी सेक्स के लिए नहीं रुकी, मेरी जिंदगी में बहुत सी लड़कियाँ आ गई, बड़े अच्छे पल थे वो भी !

कई कुंवारी चूतों का स्वाद चखा है मैंने !

जैसे मेरी कुछ नौकरानियाँ खासकर सरोज, उसकी माँ, मेरी चचेरी और ममेरी बहन, मेरी बड़ी बुआ की बहु, मेरी सगी बहन की सहेलियाँ, मेरी बहुत सारी गर्लफ़्रेन्ड्स, आंटियाँ !

अगली बार इनके बारे में भी बताऊंगा। मुझे मेल जरूर करें !

support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां
र

राहुल सुमन

4 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

क

कबीर राज

4 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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