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माँ की चुदाई पठन समय: 24 मिनट पढ़ा गया: 413 बार

मैं कुछ करता हूँ

कोमल कमालू

22 May 2013 को प्रकाशित

मैं कुछ करता हूँ
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यह कहानी 1964 की गर्मियों की है.हमारे परिवार के सभी सदस्य एक विवाह में शरीक होने अपने गांव गये थे, हम तीन भाई-बहन और मां-बाबूजी.

मैंने 12वीं की बोर्ड की परीक्षा दी थी और परिणाम का इंतज़ार कर रहा था.

मैं तीनों भाई बहन में सबसे बड़ा हूं. उस समय मैं 19वें साल में था और अन्य लड़कों की तरह मुझे भी चूची और चूत की तलाश थी.लेकिन उस समय तक एक भी औरत या लड़की का मजा नहीं लिया था. बस माल को देखकर तरसता रहता था और लंड हिलाकर पानी निकाल कर संतुष्ट हो जाता था.

दोस्तों के साथ हमेशा चूची और चूत की बातें होती थी.

मुझसे छोटी बहन, माला है और उससे छोटा एक भाई.

मां का नाम मीना है और उस समय वो 34-35 साल की भरपूर जवान औरत थी. बाबूजी 40 साल के मजबूत कद-काठी के मर्द थे जो किसी भी औरत की जवानी की प्यास को बुझा सकते थे.

बाबूजी की तरह मैं भी लम्बा और तगड़ा था लेकिन पता नहीं क्यों मुझे लड़कियों से बात करने में बहुत शरम आती थी, यहाँ तक कि मैं अपनी मस्त जवान बहन के साथ भी ठीक से बात नहीं करता था.

गांव में शादी में बहुत से लोग आये थे. चचेरी बहन की शादी थी, खूब धूमधाम से विवाह सम्पन्न हुआ.

विवाह के बाद धीरे-धीरे सभी मेहमान चले गये. मेहमानों के जाने के बाद सिर्फ घरवाले ही रह गये थे.

पांच भाइयों में से सिर्फ मेरे बाबूजी गांव के बाहर काम करते थे, बाकी चारों भाई गांव में ही खेती-बाड़ी देखते थे. गांव की आधी से ज्यादा जमीन हमारी थी.

बाबूजी की छुट्टी खत्म होने को थी, हम लोग भी एक दिन बाद जाने वाले थे.

हम वहाँ 17-18 दिन रहे. बहुत लड़कियों को चोदने का मन किया, बहुत औरतों की चूची मसलना चाहा लेकिन मैं कोरा का कोरा ही रहा.मेरा लन्ड चूत के लिये तरसता ही रह गया.

लेकिन कहते हैं कि ‘देर है लेकिन अन्धेर नहीं है’

उस दिन भी ऐसा ही हुआ. उस समय दिन के 11 बजे थे. औरतें घर के काम में व्यस्त थीं, कम उम्र के बच्चे इधर-उधर दौड़ रहे थे और आंगन में कुछ नौकर सफाई कर रहे थे.

मेरे बाबूजी अपने भाइयों के साथ खेत पर गये थे. मैं चौकी पर बैठ कर आराम कर रहा था.

तभी माँ मेरे पास आई और बगल में बैठ गई.

मेरी माँ मीना ने मेरा हाथ पकड़ कर एक लड़के की तरफ इशारा करके पूछा- वो कौन है?

वो लड़का आंखें नीची करके अनाज को बोरे में डाल रहा था. उसने सिर्फ हाफ-पैंट पहन रखा था.

‘हाँ, मैं जानता हूँ, वो गोपाल है.. कंटीर का भाई!’ मैंने माँ को जवाब प्रिया.

कंटीर हमारा पुराना नौकर था और हमारे यहा पिछले 8-9 सालों से काम कर रहा था.माँ उसको जानती थी.

मैंने पूछा- क्यों, क्या काम है उस लड़के से?’

मां ने इधर उधर देखा और बगल के कमरे में चली गई.

एक दो मिनट के बाद उसने मुझे इशारे से अन्दर बुलाया.मैं अन्दर गया और मीना ने झट से मेरा हाथ पकड़ कर कहा- बेटा, मेरा एक काम कर दे…’

‘कौन सा काम माँ!’

फिर उसने जो कहा वो सुनकर मैं हक्का बक्का रह गया.

‘बेटा, मुझे गोपाल से चुदवाना है, उसे बोल कि मुझे चोदे…!’

मैं मीना को देखता रह गया. उसने कितनी आसानी से बेटे के उम्र के लड़के से चुदवाने की बात कह दी.

‘क्या कह रही हो…ऐसा कैसे हो सकता है…’ मैंने कहा.

‘मैं कुछ नहीं जानती, मैं तीन दिन से अपने को रोक रही हूँ, उसको देखते ही मेरी बुर गरम हो जाती है, मेरा मन करता है की नंगी होकर सबके सामने उसे अपने अन्दर ले लूँ!’माँ ने मेरे सामने अपनी चूची को मसलते हुए कहा- कुछ भी करो, बेटा गोपाल का लन्ड मुझे अभी चूत के अन्दर चाहिए!’

मीना की बातें सुनकर मेरा माथा चकराने लगा था.मैंने कभी नहीं सोचा था कि मां, बेटे के सामने इतनी आसानी से लण्ड और बुर की बात करेगी.

मुझे यह जानकर अचम्भा हुआ कि मैं 18 साल का होकर भी किसी को अब तक चोद नहीं पाया हूँ तो वो गोपाल अपने से 20-22 साल बडी, तीन बच्चे की माँ को कैसे चोदेगा.मुझे लगा कि गोपाल का लन्ड अब तक चुदाई के लिये तैयार नहीं हुआ होगा.

‘मां, वो गोपाल तो अभी छोटा है.. वो तुम्हें नहीं चोद पायेगा…’मैंने माँ की चूची पर हाथ फेरते हुए कहा- चल तुझे बहुत मन कर रहा है तो मैं तुम्हें चोद दूंगा ..!’

मैं चूची मसल रहा था, माँ ने मेरा हाथ अलग नहीं किया.यह पहला मौका था कि मेरे हाथ किसी चूची को दबा रहा था और वो भी एक मस्त गुदाज़ औरत की, जो लोगों की नजर में बहुत सुन्दर और मालदार थी.

‘बेटा, तू भी चोद लेना, लेकिन पहले गोपाल से मुझे चुदवा दे…अब देर मत कर…बदले में तू जो बोलेगा वो सब करुंगी… तू किसी और लड़की या औरत को चोदना चाहता है तो मैं उसका भी इंतज़ाम कर दूंगी, लेकिन तू अभी अपनी माँ को गोपाल से चुदवा दे.. मेरी बुर एकदम गीली हो गई है.’

मीना ने सामने से चुदाई की पेशकश की है तो कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा.

मैंने जोर जोर से 3-4 बार दोनों मस्त मांसल चूचियों को दबाया और कहा- तू थोड़ा इन्तज़ार कर…मैं कुछ करता हूँ!यह कहकर मैंने माँ को अपनी बांहों में लेकर उसके गालों को चूसा और बाहर निकल कर आ गया.

दिन का समय था, सब लोग जाग रहे थे, किसी सुनसान जगह का मिलना आसान नहीं था.

मैं वहाँ से निकल कर ‘कैटल-फार्म’ में आ गया जो आंगन से थोड़ी ही दूर पर सड़क के उस पार था.वहाँ उस समय जानवरों के अलावा और कोई नहीं था. वहाँ एक कमरा भी था नौकरों के रहने के लिये. उस कमरे में भी कोई नहीं था. मैंने सोचा क्यों ना आज माँ की चुदाई इसी कमरे में की जाये.

कमरे में एक चौकी थी और उस पर एक बिछौना भी था.मैं तुरंत आंगन वापस आया.

मीना अभी भी बाहर ही बैठी थी और गोपाल को घूर रही थी. मैं उसके बगल में बैठ गया और कहा कि वो दस मिनट के बाद उस नौकर वाले कमरे में आ जाये.

वहाँ से उठ कर मैं ग़ोपाल के पास आया और उसकी पीठ थप-थपा कर मेरे साथ आने को कहा.वो बिना कुछ बोले मेरे साथ आ गया.मैंने देखा कि मां के चेहरे पर मुस्कान आ गई है.

गोपाल को लेकर मैं उस कमरे में आया और दरवाज़ा खुला रहने प्रिया.मैं आकर बिछौने पर लेट गया और गोपाल से कहा कि मेर पैर दर्द कर रहा है, दबा दे.. यह कहते हुये मैंने अपना पजामा बाहर निकाल प्रिया.

नीचे मैंने जांघिया पहना था.

ग़ोपाल पांव दबाने लगा और मैं उससे उसके घर की बातें करने लगा.

वैसे तो गोपाल के घरवाले हमारे घर में सालों से काम करते हैं फिर भी मैं कभी उसके घर नहीं गया था.

गोपाल की दादी को भी मैंने अपने घर में काम करते देखा था और अभी उसकी माँ और भैया काम करते हैं.तभी गोपाल ने बताया कि उसकी एक बहन है और उसकी शादी की बात चल रही है.वो बोला कि उसकी भाभी बहुत अच्छी है और उसे बहुत प्यार करती है.

अचानक मैंने उससे पूछा कि उसने अपनी भाभी को चोदा है कि नहीं.ग़ोपाल शरमा गया और जब मैंने दोबारा पूछा तो जैसा मैंने सोचा था, उसने कहा कि उसने अब तक किसी को चोदा नहीं है.

मैंने फिर पूछा कि चोदने का मन करता है या नहीं?

तो उसने शरमाते हुये कहा कि जब वो कभी अपनी माँ को अपने बाप से चुदवाते देखता है तो उसका भी मन चोदने को करता है.ग़ोपाल ने कहा कि रात में वो अपनी माँ के साथ एक ही कमरे में सोता है . लेकिन पिछले एक साल से माँ की चुदाई देख कर उसका भी लन्ड टाईट हो जाता है.

‘फिर तुम अपनी माँ को क्यों नहीं चोदते हो…’ मैंने पूछा.लेकिन गोपाल के जबाब देने के पहले मीना कमरे में आ गई और उसने अन्दर से दरवाजा बन्द कर प्रिया.

ग़ोपाल उठकर जाने लगा तो मैंने उसे रोक लिया.गोपाल ने एक बार मीना के तरफ देखा और फिर मेरा पैर दबाने लगा.

‘क्या हुआ मां?’

‘अरे बेटा, मेरा पैर भी बहुत दर्द कर रहा है, थोड़ा दबा दे!’ मीना बोलते बोलते मेरे बगल में लेट गई.

मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा, डर से या माँ को चोदने के खयाल से, मालूम नहीं. मैं उठ कर बैठ गया और माँ को बिछौने के बीचोंबीच लेटने को कहा.

मैं एक पैर दबाने लगा . ग़ोपाल चुपचाप खड़ा था.

‘अरे ग़ोपाल, तुम क्यों खड़े हो, दूसरा पांव तुम दबाओ!’ मैंने ग़ोपल से कहा लेकिन वो खड़ा ही रहा.

मेरे दो-तीन बार कहने के बाद गोपाल दूसरे पांव को दबाने लगा. मैंने माँ को आंख मारी और वो मुस्कुरा दी.

‘मां, कहाँ दर्द कर रहा है?’‘अरे पूछ मत बेटा, पूरा पाव और छाती दर्द कर रहा है, खूब जोर से पैर और छाती को दबाओ.’

मां ने खुल कर बुर और चूची दबाने का निमंत्रण दे प्रिया था.

मैं पाँव से लेकर कमर तक एक पर को मसल मसल कर मजा ले रहा था जब कि गोपाल सिर्फ घुटनों तक ही दबा रहा था.

मैंने गोपाल का एक हाथ पकड़ा और माँ की जांघों के ऊपर सहलाया और कहा कि तुम भी नीचे से ऊपर तक दबाओ.वो हिचका लेकिन मुझे देख देख कर वो भी मीना लम्बी लम्बी टांगों को नीचे से ऊपर तक मसलने लगा.

2-3 मिनट तक इस तरह से मजा लेने के बाद मैंने कहा- मां साड़ी उतार दो … तो और अच्छा लगेगा.

‘हाँ, बेटा, उतार दो!’‘गोपाल, साड़ी खोल दो.’ मैंने गोपाल से कहा.उसने हमारी ओर देखा लेकिन साड़ी खोलने के लिये हाथ आगे नहीं बढ़ाया.

‘गोपाल, शरमाते क्यों हो, तुमने तो कई बार अपनी माँ को नंगी चुदवाते देखा है…यहाँ तो सिर्फ साड़ी उतारनी है, चल खोल दे.’ और मैंने गोपाल का हाथ पकड़ कर साड़ी की गांठ पर रखा.

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उसने शरमाते हुये गांठ खोली और मैंने साड़ी माँ के बदन से अलग कर दी. काले रंग के ब्लाऊज़ और साया में गजब की माल लग रही थी.

‘मालकिन, आप बहुत सुन्दर हैं…’ अचानक गोपाल ने कहा और प्यार से जांघों को सहलाया.

‘तू भी बहुत प्यारा है..’ मीना ने जबाब प्रिया और हौले से साया को अपनी घुटनों से ऊपर खींच लिया.

माँ के सुडौल पैर और पिंडली किसी भी मर्द को गर्म करने के लिये खाफी थे.

हम दोनों पैर दबा रहे थे लेकिन हमारी नजर मीना की मस्त, गोल-गोल, मांसल चूचियों पर थी. लग रहा था जैसे कि चूचियाँ ब्लाऊज़ को फाड़ कर बाहर निकल जायेंगी.

मेरा मन कर रहा था कि फटाफट माँ को नंगा कर बूर में लन्ड पेल दूं. मेरा लंड भी चोदने के लिये तैयार हो चुका था.

और इस बार घुटनों के ऊपर हाथ बढ़ा कर मैंने हाथ साया के अन्दर घुसेड़ प्रिया और अन्दरुनी जांघों को सहलाते हुये जिन्दगी में पहली बार बुर को मसला.एक नहीं, दो नहीं, कई बार बुर मसला लेकिन माँ ने एक बार भी मना नहीं किया.

माँ साया पहने थी और बुर दिखाई नहीं पर रही थी. साया ऊपर नाभि तक बंधा हुआ था.मैं बुर को देखना चाहता था. एक दो बार बुर को फिर से मसला और हाथ बाहर निकाल लिया.

‘मां, साया बहुत कसा बंधा हुआ है, थोड़ा ढीला कर लो.. ‘

मैंने देखा कि गोपाल अब आराम से मीना की जांघों को मसल रहा था.तो मैंने गोपाल से कहा कि वो साया का नाड़ा खोल दे.

तीन चार बार बोलने के बाद भी उसने नाड़ा नहीं खोला तो मैंने ही नाड़ा खींच प्रिया और साया ऊपर से ढीला हो गया.

मैं पांव दबाना छोड़कर माँ की कमर के पास आकर बैठ गया और साया को नीचे की तरफ ठेला.

पहले तो उसका चिकना पेट दिखाई प्रिया और फिर नाभि. कुछ पल तो मैंने नाभि को सहलाया और साया को और नीचे की ओर ठेला.

अब उसकी कमर और बुर के ऊपर का चिकना चिकना भाग दिखाई पड़ने लगा. अगर एक इंच और नीचे करता तो बुर दिखने लगती.

‘आह बेटा, छाती बहुत दर्द कर रहा है..’ मीना ने धीरे से कहा . साया को वैसा ही छोड़कर मैंने अपने दोनों हाथ माँ की मस्त और गुदाज चूचियों पर रखे और दबाया.

गोपाल के दोनों हाथ अब सिर्फ जांघो के ऊपरी हिस्से पर चल रहा था और वो आंखे फाड़ कर देख रहा था कि एक बेटा कैसे माँ की चूचियाँ मसल रहा है.

‘मां, ब्लाउज खोल दो तो और अच्छा लगेगा.’ मैंने दबाते हुए कहा.

‘खोल दे!’ उसने जवाब प्रिया और मैंने झटपट ब्लाउज के सारे बटन खोल डाले और ब्लाउज को चूची से अलग कर प्रिया.

मां की गोल-गोल, उठी हुई और मांसल चूची देख कर माथा झनझना गया.मुझे याद नहीं था कि मैंने आखरी बार कब माँ की नंगी चूची देखी थी. मैं जम कर चूची दबाने लगा.

‘कितना टाईट है, लगता है जैसे किसी ने फ़ुटबाल में कस कर हवा भर दी है.’ मैंने घुन्डी को कस कर मसला और ग़ोपाल से कहा- क्यों गोपाल कैसा लग रहा है?’ मैं जोर जोर से चूची को दबाता रहा.

अचानक मैंने देखा कि गोपाल का एक हाथ माँ की दोनों जांघों के बीच साया के ऊपर घूम रहा है. एक हाथ से चूची दबाते हुए मैंने गोपाल का वो हाथ पकड़ा और उसे माँ की नाभि के ऊपर रख कर दबाया.

‘देख, चिकना है कि नहीं?’ मैं उसके हाथ को दोनों जांघों के बीच बुर की तरफ धकेलने लगा. दूसरे हाथ से मैं लगातार चूचियों का मजा ले रहा था. मुझे याद आया कि बचपन में इन चूचियों से ही दूध पीता था. मैं माँ के ऊपर झुका और घुन्डी को चूसने लगा.

तभी माँ ने फुसफुसाकर कान में कहा- बेटा, तू थोड़ी देर के लिये बाहर जा और देख कोई इधर ना आये..’

मैं दूध पीते पीते गोपाल के हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर साया के अन्दर ठेला और गोपाल का हाथ माँ के बुर पर आ गया. मैंने गोपाल के हाथों को दबाया और गोपाल बुर को मसलने लगा . कुछ देर तक हम दोनों ने एक साथ बुर को मसला और फिर मैं खड़ा हो गया. ग़ोपाल का हाथ अभी भी माँ की बुर पर था लेकिन साया के नीचे. बुर दिख नहीं रही थी.

मैंने अपना पजामा पहना और गोपाल से कहा- जब तक मैं वापस नहीं आता, तू इसी तरह मालकिन को दबाते रहना. दोनों चूचियों को भी खूब दबाना.

मैं दरवाजा खोल कर बाहर आ गया और पल्ला खींच प्रिया. आस पास कोई भी नहीं था. मैं इधर उधर देखने लगा और अन्दर का नजारा देखने का जगह ढूंढने लगा. जैसा हर घर में होता है, दरवाजे के बगल में एक खिड़की थी. उसके दोनों पल्ले बन्द थे. मैंने हलके से धक्का प्रिया और पल्ला खुल गया. बिस्तर साफ साफ दिख रहा था.

मीना ने गोपाल से कुछ कहा तो वो शरमा कर गर्दन हिलाने लगा. मीना ने फिर कुछ कहा और गोपाल सीधा बगल में खड़ा हो गया. मीना ने उसके लन्ड पर पैंट के ऊपर से सहलाया और ग़ोपाल झुक कर साया के ऊपर से बुर को मसलने लगा. एक दो मिनट तक लंड के ऊपर हाथ फेरने के बाद मीना ने पैंट के बटन खोल डाले और गोपाल नंगा हो गया. मीना ने झट से उसका टनटनाया हुआ लंड पकड लिया और उसे दबाने लगी.

मां को मालूम था कि मैं जरूर देख रहा हूँ, उसने खिड़की के तरफ देखा. मुझसे नजर मिलते ही वो मुस्कुरा दी और लंड को दोनों हाथों से हिलाने लगी. गोपाल का लंड देख कर वो खुश थी.

उधर गोपाल ने भी बुर के ऊपर से साया को हटा प्रिया था और मैंने भी पहली बार एक बुर देखी वो भी अपनी माँ की, जिसे मेरी आंखों के सामने एक लड़का मसल रहा था.

मीना ने कुछ कहा तो गोपाल ने साया को बाहर निकाल प्रिया.वो पूरी नंगी थी. उसकी गठी हुई और लम्बी टांगें और जांघ बहुत मस्त लग रही थी. बुर पर बहुत छोटे छोटे बाल थे, शायद 6-7 दिन पहले झांट साफ किया था.

मीना लंड की टोपी खोलने की कोशिश कर रही थी. उसने गोपाल से फिर कुछ पूछा और गोपाल ने ना में गर्दन हिलाई. शायद पूछा हो कि पहले किसी को चोदा है या नहीं. मीना ने गोपाल को अपनी ओर खींचा और खूब जोर जोर से चूमने लगी और चूमते-चूमते उसे अपने ऊपर ले लिया.

अब मुझे मीना की बुर नहीं दिख रहा था. मीना ने हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और अपने हाथ से लंड को बुर के छेद पर रखा.मीना ने गोपाल से कुछ कहा और वो दोनों चूची पकड़ कर धीरे धीरे धक्का लगा कर चुदाई करने लगा.

गोपाल अपने से 20 साल बड़ी गांव की सबसे मस्त और सुन्दर माल की चुदाई कर रहा था.

मैं अपने लंड की हालत को भूल गया और उन दोनों की चुदाई देखने लगा.गोपाल जोर जोर से धक्का मार रहा था और मीना भी चूतड़ उछाल उछाल अपने बेटे की उम्र के लड़के से चुदाई का मजा ले रही थी.

यूँ तो गोपाल के लिये चुदाई का पहला मौका था लेकिन वो पिछले साल से हर रात अपनी माँ को नंगी देखता था, बाप से चुदवाते.

मैं देखता रहा और गोपाल जम कर मेरी माँ को चोदता रहा और करीब 15 मिनट के बाद वो माँ के ऊपर ढीला हो गया. मैं 2-3 मिनट तक बाहर खड़ा रहा और फिर दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया.

मुझे देखते ही गोपाल हड़बड़ा कर नीचे उतरा और अपने हाथ से लंड को ढक लिया. लेकिन मीना ने उसका हाथ अलग किया और मेरे सामने गोपाल के लंड को सहलाने लगी.

मां बिल्कुल नंगी थी. उसने दोनों टांगों को फैला रख्खा था और मुझे बुर का फांक साफ साफ दिख रहा था.

लंड को सहलाते हुये मीना बोली- बेटा, गोपाल में बहुत दम है … मेरा सारा दर्द खत्म हो गया.फिर उसने गोपाल से पूछा- क्यों, कैसा लगा?

मैं उसकी कमर के पास बैठ कर बुर को सहलाने लगा.बुर गोपाल के रस से पूरी तरह से गीली हो गई थी.

‘बेटा, साया से साफ कर दे.’

मैं साया लेकर बुर के अन्दर बाहर साफ करने लगा और उसने गोपाल से कहा कि वो गोपाल को बहुत पसन्द करती है और उसने चुदाई भी बहुत अच्छी की. उसने गोपाल को धमकाया कि अगर वो किसी से भी इसके बारे में बात करेगा तो वो बड़े मालिक (मेरे बड़े काका) से बोल देगी और अगर चुप रहेगा तो हमेशा गोपाल का लंड बुर में लेती रहेगी.

गोपाल ने कसम खाई कि वो किसी से कभी मीना मालकिन के बारे में कुछ नहीं कहेगा. मीना ने उसे चूमा और कपड़े पहन कर बाहर जाने को कहा.

ग़ोपाल बहुत खुश हुआ जब माँ ने उससे कहा कि वो जल्दी फिर उससे चुदवायेगी.

मैंने गोपाल से कहा कि वो आंगन जाकर अपना काम करे. गोपाल के जाते ही मैंने दरवाजा अन्दर से बन्द किया और फटाफट नंगा हो गया. मेरा लन्ड चोदने के लिये बेकरार था.

माँ ने मुझे नजदीक बुलाया और मेरा लन्ड पकड़ कर सहलाने लगी.

‘हाय बेटा, तेरा लौड़ा तो बाप से भी लम्बा और मोटा है…, लेकिन अपनी माँ को मत चोद. तू घर की जिस किसी भी लड़की को चोदना चहता है, मैं चुदवा दूंगी.. लेकिन मादरचोद मत बन.’

मैंने अपना लंड अलग किया और माँ के ऊपर लेट गया. लंड को बुर के छेद से सटाया और जम कर धक्का मारा…

‘आह्ह…’

मैं माँ के कन्धों को पकड़ कर चोदने लगा.

‘साली, अगर मुझे मालूम होता कि तू इतनी चुदासी है तो मैं तुझे 4-5 साल पहले ही चोद डालता, बेकार का हत्तू मार कर लौड़े को तकलीफ नहीं देता.’ कहते हुये मैंने जम कर धक्का मारा.. ‘आअह्ह … मजा आआआअ ग… याआअ..’

मां ने कमर उठा कर नीचे से धक्का मारा और मेरा माथा पकड़ कर बोली- बेटा, वो तो गोपाल से चुदवाने के लालच में आज तेरे सामने नंगी हो गई, वरना कभी मुझे हाथ लगाता तो एक थप्पड़ लगा देती.

मैंने धक्का मारते मारते माँ को चूमा और चूची को मसला.

‘साली, सच बोल, गोपाल के साथ चुदाई में मजा आया क्या?’ मेरा लौड़ा अब आराम से अपनी जन्मभूमि में अन्दर-बाहर हो रहा था.

‘सच बोलूं बेटा, पहले तो मैं भी घबरा रही थी कि मैं मुन्ना के उम्र के लड़के के सामने रन्डी जैसी नंगी हो गई हूँ लेकिन अगर वो नहीं चोद पाया तो!’ माँ ने गोपाल को याद कर चूतड़ उछाले और कहा- गोपाल ने खूब जम कर चोदा, लगा ही नहीं कि वो पहली बार चुदाई कर रहा है.. मैं तो खुश हो गई और अब फिर उससे चुदवाऊँगी.’

‘और मैं कैसा चोद रहा हूँ मेरी जान?’ मैंने उसके गालों को चूसते हुये पूछा.

‘बेटा, तेरा लौड़ा भी मस्त है और तेरे में गोपाल से ज्यादा दम भी है … मजा आ रहा है.’

और उसके बाद हम जम कर चुदाई करते रहे और आखिर में मेरे लंड ने माँ के बुर में पानी छोड़ प्रिया. हम दोनों हाँफ रहे थे. कुछ देर के बाद जब ठण्डे हो गये तो हमने अपने कपड़े पहने और बिस्तर ठीक किया.

‘बाप रे, सब पूछेंगे कि मैं इतनी देर कहा थी, तो क्या बोलूंगी…’ माँ अब दो दो लंड खाने के बाद डर रही थी.

मैंने उसे बांहों में जकड़ कर कहा- रानी, तुम डरो मत. मैं साथ हूँ ना… किसी को कभी पता नहीं चलेगा तुमने बेटे और नौकर से चुदवाया है.’ मैंने माँ के गालों को चूमा और उससे खुशामद किया कि वो दो-ढाई घंटे के बाद फिर इस कमरे में आ जाये जिसमें से कि मैं उसे दुबारा चोद सकूँ.

‘एक बार में मन नहीं भरा क्या..?’ उसने पूछा..‘नहीं साली, तुमको रात दिन चोदता रहूँगा फिर भी मन नहीं भरेगा… जरूर आना..’‘आऊँगी..लेकिन एक शर्त पर…!’ माँ ने मेरा हाथ अपनी चूची पर रखा.‘क्या शर्त?’ मैंने चूची जोर से मसला…‘गोपाल भी रहेगा…’ माँ फिर गोपाल का लौड़ा चाहती थी.‘साली, तू गोपाल की कुतिया बन गई है… ठीक है, इस बार मैं अपनी गोदी में लिटा कर गोपाल से चुदवाऊँगा.‘तो ठीक है, मैं आऊँगी…’

आंगन के रास्ते में मैंने उससे पूछा कि वो पहले कितने लौड़े खा चुकी है.. तो उसने कहा कि बाद में बतायेगी.आंगन में पहुंचते ही बड़ी काकी ने पूछा- माँ को लेकर कहाँ गया था. सब खाने के लिये इंतजार कर रहे हैं.मैंने जबाब प्रिया कि मैं माँ को गाछी (फार्म हाउस) दिखाने ले गया था. फिर किसी ने कुछ नहीं पूछा.

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