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रिश्तों में चुदाई पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 1,314 बार

मामा जी ने चोदा

निशा कोठारी

17 Sep 2018 को प्रकाशित

मामा जी ने चोदा
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मेरे मामा जी की पत्नी यानि मेरी मामी का अकस्मात निधन हो गया था। मामाजी अट्ठाईस साल के खूबसूरत वयक्तित्व वाले हैं। उनकी पत्नी भी पढ़ी-लिखी सुंदर औरत थी। निधन के समाचार से मेरी मम्मी और परिवार के सभी सदस्यों को बहुत दुःख हुआ था। मामाजी की एक दो साल की लड़की थी।

थोड़ा अपने बारे में बता दूँ!मेरी उम्र 18 से कुछ ज्यादा है, बला की खूबसूरत हूँ मैं! मुझे देखते ही आदमी की आह निकल जाती है। बी.कॉम की परीक्षा के बाद गर्मियों की छुट्टियों में मम्मी ने मामाजी की लड़की जॉली को सम्हालने के लिए मुझे इस वर्ष अकेले ही भेज प्रिया।

मामाजी के यहाँ पूरा परिवार छोटे मामाजी, नानी जी, नानाजी सभी जॉली को बहुत अच्छे से रखते हैं। मामाजी बिलकुल उदास और गमगीन रहते थे। वो अकसर कामकाज के सिलसिले में बाहर जाते थे, रात को देर सवेर घर पर आते थे।

एक रोज रात को मामाजी करीब साढ़े गयारह बजे घर पर आये। मैं जॉली को सुला रही थी, सोते वक्त जोली रोने लगी, मुझे बहुत दया आई और अपनी शर्ट को खोलकर जॉली को अपना चुचूक चुसाने लगी। चुसाते-पिलाते कब जाने नींद लग गई।

जब मेरी नींद उड़ी तो देखा मामाजी के हाथ मेरे स्तनों को धीमे धीमे सहला रहे थे, नींद उड़ते ही एकदम से मैं सन्नाटे में आ गई। पर सोचा कि आज चार माह हो गए मामीजी को मरे हुए, रोजाना सेक्स करने वालों की क्या हालत होती होगी। फिर सबसे बड़ी बात मेर गुलाबी चुचूकों पर मामाजी का हल्का स्पर्श पाकर मैं खुद रोमांचित हो गई। मैं नींद का बहाना करके सोई रही।

मामाजी ने धीरे धीरे शर्ट के चार बटन खोल दिए ब्रा को थोड़ा और ऊपर खिसका कर एक स्तन पर अपने होंठ रगड़ने लगे, दूसरे पर हल्का हल्का हाथ चला रहे थे। मेरे पूरे बदन में चिंगारियाँ फूटने लगी। वक्ष पर मामाजी की चलती हुई जबान से मेरी चूत कुलबुलाने लगी।

इधर मामाजी के पजामे के सामने ऐसा लगा जैसे टेंट खड़ा हो गया हो। धीरे से मामाजी का हाथ मेरी कमर से रेंगते हुए जींस तक पहुँच गया परन्तु तंग जींस होने से हाथ चूत तक नहीं पहुँच सका। फिर मामाजी जो भी हरकत कर रहे थे, बहुत डरते डरते से कर रहे थे। मैं आँख बंद कर आनंद ले रही थी पर डर मुझे भी लग रहा था। थोड़ी देर बाद मामाजी ने चुचूक चूसते चूसते पजामे में से अपना आठ-नौ इंच लम्बा लंड निकाल कर हाथ में ले लिया। वासना के वशीभूत हो के हाथ से लंड को जोर जोर से हिलाने लगे, दूसरे से मेरे स्तन दबाते रहे और मुँह में निप्पल लेकर लॉलीपॉप सरीखे चूसते रहे।

इच्छा तो मेरी भी बहुत हुई पर आंखे मींचे शर्म के मारे लेटी रही। थोड़ी देर बाद मामाजी के लंड ने पिचकारी मारी, जैसे होली पर रंग निकला हो, ढेर सारा वीर्य निकल कर बेडशीट पर जा गिरा। मामाजी जोर जोर से हांफ़ने लगे। सांसों को ठीक कर धीरे धीरे मेरी शर्ट के बटन लगाने लगे। सब कुछ सामान्य हो गया सिवा मेरे बदन के, आग लग गई उसमें!

एक घंटे बाद जब लगा कि मामाजी सो गए, मैं धीरे से उठकर अपने कमरे में चली गई। सीधे बाथरूम में जाकर पूरी नंगी होकर नहाई, नहाते हुए जमकर चूत में ऊँगली डाली, तब जाकर राहत मिली और सो गई।

अगले रोज मामाजी से मैं बराबर निगाह नहीं मिला पा रही थी, पर ऐसा जाहिर किया जैसे रात जो कुछ हुआ उसकी मुझे जानकारी न हो। परन्तु सारे दिन रात के वाकयात मेरी निगाहों से न निकले, रह रह कर रात वाली बात याद आती और कुदरन सेक्स करने की इच्छा होने लगी। इससे पहले हल्का फुल्का वक्ष को स्पर्श करवाना, बन-ठन कर रहना, लड़कों को कुत्ते की तरह पीछे दौड़वाने तक का खेल मैंने किया था पर सेक्स के मामले में विगत रात अब तक का मेरा उच्च स्कोर थी।

जैसे-तैसे दिन कटा, रात होते ही खुद-ब-खुद मेरे कदम मामाजी के कमरे की तरफ बढ़ने लगे, परन्तु आज बहाना न रहा! जॉली नानीजी के पास जो सो गई थी। मन मार कर मैं अपने कमरे में सो रही थी।नौ बजे के करीब मामाजी आये, उनकी कमर में थोड़ा दर्द हो रहा था। नानीजी ने मुझे आवाज लगाई- बेटी निशा, मामाजी के कमर पर जरा तेल लगा देना!

मुझे जैसे मुँह मांगी मुराद मिल गई हो। आज मैंने नाईट-सूट पहन रखा था, वो भी बिना ब्रा और पेंटी के! मामाजी चादर ओढ़ कर लेटे थे। मैंने पूछा- मामाजी, कहाँ दर्द हो रहा है?

मामाजी ने कमर की बगल में इशारा किया वहाँ तेल लगाने के लिए मामाजी को पजामा खोलना पड़ता। उन्होंने पजामा और चड्डी खोलकर नग्न होकर चादर डाल ली। मैं चादर के अंदर हाथ डालकर आहिस्ता-आहिस्ता मालिश करती गई। दस मिनट बाद मुझे कंपकपी छूटने लगी। वासना से मेरा बदन जलने लगा।

एकाएक मामाजी जो बगल में होकर लेटे हुए थे, थोड़ा सीधा हो गए। सीधा होते से ही सांप की फुफकारता उनका लंड मेरे हाथ से टकराया। रिश्ते-नाते, उम्र सब भूलकर मैंने लंड को हाथ में पकड़ लिया। मामाजी भी सिसकारियाँ भरने लगे। मुझसे और बर्दाश्त न हुआ, लंड को मुँह में ले लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। मामाजी मेरी ब्रा विहीन चूचियों को कस के दबाने लगे, चूसने लगे। बेतहाशा लिपट गए, चिपट गए!

इसके आगे क्या हुआ?बाकी की कहानियों में आप लोग रोजाना पढ़ते ही हो!मतलबमामा ने चोदा अपनी भानजी कोमेरी सच्ची कहानी अच्छी लगी हो तो मेल करें!support@mohakkisse.com

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