लड़कियों की गांड चुदाई

गर्लफ्रेंड के बिना उसकी सहेलियों संग थ्री-सम –9

लेखक: विवान श्रीवास्तव दिनांक: 08-03-2024 पठन समय: 13 मिनट

अब तक आपने पढ़ा..

दीक्षा अपनी गाण्ड हिलाते हुए उठ कर दीवान के एक छोर पर बैठ गई और उसने एक तकिया सुरभि के सर के नीचे लगा प्रिया।मैं फिर से सुरभि की चूत में लण्ड डाल कर हिलाने लगा और वहाँ दीक्षा उसके मम्मे काटने-चूसने लगी।उसके दोनों निप्पलों को दीक्षा दांतों से काटने लगी।

सुरभि बोली- जीजू अब दीक्षा की तरह कुत्ते वाले पोज़ में मेरी चुदाई करो न..‘ठीक है चल बन जा..’

अब आगे..

वो उठ कर कुतिया बन गई.. और मैं उसकी चूत में लण्ड घुसेड़ कर पेलने लगा ‘फच फच फच..’

उधर दीक्षा दीवान से उठ कर नीचे बैठ कर.. सुरभि के लटकते चूचों को दोनों हाथों से पकड़ कर दुहने लगी.. जैसे गाय के थन से दूध निकालते हैं.. वैसा करने लगी।वो कभी-कभी चूचों को अपने मुँह में ले लेती थी.. जिससे सुरभि को बहुत मजा आ रहा था।

इधर मैंने अपना लण्ड निकाल कर.. उसकी गाण्ड में घुसेड़ प्रिया और उसकी गाण्ड चोदने लगा।मैं उसके कूल्हे पकड़ कर उसे चोद रहा था.. उसके चूतड़ काफी बड़े थे.. उन पर एक प्यारा सा तिल भी था।

सुरभि मजे से चुदने लगी.. उधर दीक्षा वही बैंगन फिर उठा लाई.. और अपने मुँह में लगाने के बाद अपनी चूत में डालने लगी।फिर वो सुरभि के नीचे से घुस कर उसके निप्पलों ऐसे नीचे घसीटने लगी थी जैसे निप्पलों को नोंच कर खाना हो।उसकी इस हरकत से सुरभि तेजी से चिल्लाने लगी- कमीनी रंडी.. मार डालेगी क्या.. कुतिया आराम से कर..दीक्षा- आराम में मजा कहाँ.. मजा तो दर्द में हैं..

उसने बैंगन साइड रख प्रिया और उसके दोनों निप्पलों को जोड़कर चूसने लगी.. काटने लगी।इधर मैं उसकी गाण्ड लगातार बजाए जा रहा था..थोड़ी देर दीक्षा ने सुरभि के निप्पलों को चूसने के बाद अपना सर सुरभि की चूत के नीचे कर प्रिया और तकिए के ऊपर अपना सर रख लिया। अब वो सुरभि की चूत चूसने लगी.. उसकी क्लिट नीचे की ओर घसीटने लगी।

सुरभि पागल हुई जा रही थी.. तो उसने अपने दोनों हाथ दीवान पर टिका कर.. पूरा नीचे झुक कर दीक्षा की चूत में अपना मुँह लगा प्रिया और ‘सलरप सलरप’ चूत चूसने लगी।

मैंने उसकी गाण्ड से लण्ड निकाल कर फिर से उसकी चूत में पेल प्रिया.. और तेज-तेज झटकों से उसकी चूत के छेद को और बड़ा करने लगा। सुरभि मदहोश हुए जा रही थी और अपने हाथ दोनों हाथ दीक्षा के चूचों के ऊपर रख कर पूरा ज़ोर देने लगी.. उसके निप्पलों को अंगूठों से दबाने लगी और इसी के साथ उसने अपना मुँह दीक्षा की चूत में घुसेड़ प्रिया और उसकी चूत को खाने लगी।

मैंने फिर से लण्ड निकाल कर उसकी गाण्ड में डाल प्रिया.. और मौका देखते ही.. दीक्षा ने बैंगन लेकर सुरभि की चूत में पेल प्रिया।अब सुरभि की चीख निकल गई- कुतिया मार ही डाल ना.. मादरचोदी दर्द हो रहा रंडी.. निकाल बैंगन मेरी चूत से..

लेकिन दीक्षा बैंगन तेज-तेज उसकी चूत में अन्दर-बाहर करने लगी.. और उधर मैंने भी ऊपर से उसकी गाण्ड में अपना लण्ड ‘दे..दनादन..’ पेलना चालू कर प्रिया।

सुरभि मारे गुस्से के दीक्षा के निप्पलों को नोंचते हुए.. उसकी चूत में अपने दांत गड़ा बैठी और उसकी क्लिट को तेजी से ऊपर की और खींचने लगी.. जिससे दीक्षा कामातुर होकर.. सुरभि की चूत की क्लिट रगड़ने और उसकी चूत में बैंगन लगातार तेज झटकों के साथ पेलने लगी थी। उधर ऊपर से मेरा लण्ड उसकी गाण्ड का बैंड बजा रहा था।

इस तरह सुरभि के दोनों छेद में चुदाई चल रही थी.. जिसे सुरभि ज्यादा देर नहीं झेल सकी.. और करीब 20 से 30 झटकों में.. सुरभि की चूत ने पानी छोड़ प्रिया.. जो बैंगन निकालते ही दीक्षा के मुँह जाने लगा जिसे दीक्षा बड़े चाव से चूसने-चाटने लगी और पूरा बैंगन भी अपने मुँह में लेकर चाट गई।

सुरभि वहीं धराशाई हो गई.. दीक्षा ने किसी तरह से उसके नीचे से निकल कर तुरंत ही उसकी गाण्ड में वही बैंगन पेल प्रिया.. जिसे सुरभि बर्दाश्त नहीं कर पाई और तुरंत उठकर दीक्षा की ओर लपकी। यह देखते दीक्षा हँसते हुए उठ कर दीवान के नीचे खड़ी हो गई और सुरभि पूरे दीवान में दीवार के साइड से पैर फैला कर लेट गई।

मैंने उठ कर पानी पिया और दीवान के दूसरी साइड के छोर में जाकर बैठ गया।दीक्षा ने सुरभि को बैंगन फेंक कर मारा.. जो उसके चूतड़ों पर लगा.. सुरभि चिल्लाने लगी।वो चूँकि थक चुकी थी सो जल्द ही पूरे दीवान में पैर फैला कर लेट गई और जल्दी ही सो गई।

दस मिनट बाद दीक्षा दीवान के नीचे मेरे पैरों के बीच में आकर बैठ गई.. और उसने चुपके से अचानक मेरा लण्ड लपक कर अपने मुँह में भर लिया.. और मुझे ब्लोजॉब देने लगी.. जिससे मेरा लण्ड फिर खड़ा होने लगा।

दीक्षा वहीं फर्श पर अपने दोनों हाथ नीचे रख कर कुतिया बन गई.. और मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में ठेल प्रिया और ‘दे..दनादन..’ उसकी चूत में अपना मोटा लम्बा लण्ड पेलने लगा। मैं उसकी कमर को पकड़ कर तेज-तेज झटके मारने लगा।

दीक्षा- आह जीजू पेल दो अपनी साली की कमसिन जवानी को.. डाल दो अपना गधे छाप लण्ड.. मेरी गाण्ड फाड़ दो जीजू..मैं लगातार उसकी चूत पेल रहा था और फिर लण्ड निकाल कर उसकी गाण्ड मारने लगा।

लेकिन फर्श में चुदाई करते नहीं बन रहा था और दीवान में सुरभि सो रही थी.. तो मैं हट कर कुर्सी पर बैठ गया। मेरा लण्ड खड़ा था.. दीक्षा मेरे पास आई और कुर्सी के ऊपर ही मेरे खड़े लण्ड पर बैठ गई।

मैं सीधे पैर करके बैठ गया और दीक्षा ने मेरे लण्ड पर अपनी चूत फंसा कर अपने दोनों पैर मेरे पैर के बगल से कर लिए.. और मेरे लण्ड पर ऊपर-नीचे होने लगी। हालांकि इसमें भी मुश्किल हो रही थी.. तो दीक्षा ने अपने दोनों पैर कुर्सी के हत्थे के ऊपर से ले जाकर दोनों पैर फैला लिए और मैंने उसकी पीठ पकड़ ली। अब दीक्षा मेरे लौड़े पर ऊपर-नीचे होने लगी।

करीब 10 से 12 बार ऊपर-नीचे हुई होगी.. कि वो थक गई।

फिर दीवान के छोर के पास आकर अपने हाथ उसने रख दिए और पीछे अपनी गाण्ड उठा कर मुझे खड़े-खड़े चोदने का निमंत्रण प्रिया।मैं उसकी कमर पकड़ कर तेज-तेज झटकों से पेलने लगा।

दीक्षा अपनी आँखें बंद कर मजे से चुदवा रही थी.. लेकिन उसके दीवान से पकड़ छूट रही थी.. तो उसने सामने लेटी सुरभि के दोनों पैर पकड़ लिए.. और चुदने लगी।

उधर सुरभि की हिलने से नींद टूट गई.. और वो उठ कर बैठ गई। दीक्षा तुरंत ही जाकर दीवान पर चढ़ कर कुतिया बन गई.. और मेरा लण्ड अपनी गाण्ड में खुद ही सैट कर प्रिया। अब मैंने उसकी गाण्ड में एक तेज झटका लगा प्रिया.. और तेज-तेज उसकी गाण्ड बजाने लगा। कभी चूत तो कभी गाण्ड पेलने लगा। उधर सुरभि दीक्षा के लटके चूचों को हाथ से ऐसे मसलने लगी.. जैसे बदला ले रही हो। मेरे लगातार लगते तेज थपेड़ों से दीक्षा के चूतड़ों का रंग बदल गया।

उधर सुरभि कुछ सोचती हुई उठी.. उसने पानी पिया.. और बाथरूम में सूसू करके वापस आ गई। उसके हाथ में वही बैंगन था.. और शायद दिमाग में गुस्से था।

लग रहा था कि वो दीक्षा से बदला लेना चाह रही थी। वो दीक्षा के नीचे सरक कर साइड से उसके चूचे चूसने लगी.. काफी देर चूसने के बाद जब दीक्षा चिल्लाने लगी- अरे चोदू जीजू भड़वे.. दम लगा पेल दे.. अपनी साली को.. फाड़ दे गाण्ड..

तब थोड़ी देर सुरभि उसके चूचे चूसने के बाद बाहर निकली और मेरे बगल से सट कर बैठ गई।मैं लगातार धक्के पे धक्के उसकी चूत में पेल रहा था.. कि अचानक सुरभि ने वही बैंगन अपने मुँह में लेकर उसकी गाण्ड में घुसेड़ प्रिया और बदला लेने लगी।

जब मैं दीक्षा की गाण्ड मारता.. तब सुरभि वो बैंगन उसकी चूत में पेल देती और अचानक से बाहर-अन्दर करने लगती।कुछ देर ऐसा करने के बाद वो बैंगन मुझे पकड़ा कर.. खुद दीक्षा के चूचे चूसने मसलने.. काटने रगड़ने लगी।

उधर दीक्षा का शरीर अब जवाब देने वाला था.. मैं चूत में बैंगन से पेल रहा था और चूतरस से भीगा बैंगन उसकी गाण्ड में डाल रहा था.. उसके दोनों छेद चुद रहे थे और सुरभि उसके चूचे निचोड़ रही थी। वो बेहद दर्दनाक तरीके से उसके निप्पलों को नीचे की ओर खींच रही थी।

मैं लगातार तेज झटके पे झटके मार रहा था.. इसी बीच अचानक से दीक्षा बोल उठी- आह जीजू बस.. आने वाला है.. और तेज पेलो अपनी साली को.. आज पूरा घर वाली बना लो जीजू.. आह आपका लौड़ा कितना मस्त है जीजू..उधर सुरभि- आह जीजू हाँ साली को पेलो अपने हब्शी लौड़े से.. फाड़ दो गाण्ड इसकी.. अपने मोटे हथियार से जीजू..

हम दोनों ही झड़ने वाले थे कि अचानक ही दीक्षा अकड़ गई और मैं उसकी चूत पेल रहा था.. जिससे उसका सारा गरम-गरम पानी मेरे लण्ड पर लग रहा था, मैं बोला- आह्ह.. जान मेरा भी निकलने वाला है..तो दीक्षा और सुरभि दोनों उठ कर मेरा लण्ड चूसने चाटने लगीं।

सुरभि लण्ड चूस रही थी.. और दीक्षा मेरे निप्पल मसलते हुए मेरे गोटे मुँह में डाल रही थी।सुरभि लौड़े को हाथ में पकड़ कर हैंडजॉब देने लगी और लण्ड को आगे-पीछे आगे-पीछे करने लगी।थोड़ी देर में मैं अपना लण्ड अपने हाथ में लेकर तेज-तेज हाथगाड़ी चलाने लगा..और यह देखते हुए सुरभि और दीक्षा जस्ट लण्ड के सामने आ गईं।

दोनों ने अपने चूचों को मेरे लण्ड के सामने हाथों से पकड़ लिए। मेरे लण्ड से निकलती तेज धार पहले सुरभि के चेहरे में पड़ी.. और फिर थोड़ा उसके मम्मों में पड़ी, मैंने अपना लण्ड घुमा कर थोड़ा रस दीक्षा के चूचों में गिरा प्रिया.. और अपना लण्ड खाली कर प्रिया।

वो दोनों उठ कर अपने मम्मे साफ़ करके सूसू करके आ गईं.. और मैं बाथरूम में चला गया।मैं भी लौड़ा साफ़ करके सूसू करके.. पानी पीकर.. दीवान की तरफ आ गया।

वे दोनों नंगी ही दीवान के दोनों कोनों में सो गई थीं.. मैं उनके बीच जाकर.. किसी तरह लेट गया..। मैंने अपना एक पैर सुरभि की गाण्ड के ऊपर.. और एक पैर दीक्षा की गाण्ड के ऊपर.. रख प्रिया.. और पता नहीं कब मुझे गहरी नींद आ गई।

सुबह जब मैं गहरी नींद में सो रहा था.. तो अचानक ही मेरी नींद टूट गई, सुरभि सुबह के खड़े लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूस रही थी.. मेरा लण्ड बिलकुल ही टाइट लोहे जैसा खड़ा था।

सुरभि मेरे लण्ड पर अपनी गरम साँसें छोड़ते हुए.. अपने गर्म मुँह में मेरा गरम लण्ड लिए चूस रही थी।

मेरा लण्ड वो पता नहीं कबसे.. चूस रही थी.. तभी मेरे लण्ड का पानी निकल गया और उसने थोड़ा माल बिस्तर पर गिरा प्रिया और थोड़ा मुँह में भरकर दीक्षा.. जो अभी भी सो रही थी.. उसके ऊपर चढ़ कर उसके मुँह को हाथों से खोलते हुए अपना मुँह का माल उसके मुँह में गिरा प्रिया.. फिर उसके मुँह को खाने लगी।तभी होश में आकर दीक्षा भी उसको चाटने लगी।

फिर हम सब सुबह साथ में नहाकर तैयार होने लगे.. मैंने दोनों के चूचों को चूस कर.. एक बार और मजा लिया।सब तैयार हो गए.. और वो दोनों मुझको छोड़ने नीचे तक जाने लगीं।मेरी नजर आगे चल रही सुरभि पर पड़ी.. वो थोड़ी अजीब ढंग से चल रही थी.. शायद उसकी गाण्ड दर्द कर रही थी।

खैर यह थी.. गर्ल-फ्रेण्ड के बिना थ्री-सम चुदाई.. मुझे उम्मीद है कि आप सभी को हमारी थ्री-सम चुदाई की असली कहानी का मजा आया होगा।

दोस्तो.. आगे क्या-क्या होता है.. जानने के लिए संपर्क में बने रहें।

आपको मेरी तीसरी स्टोरी कैसी लगी जरूर बताएं.. कुछ सुधारना हो.. तारीफें.. या शिकायतें.. आप मेरी ईमेल आईडी से मैसेज कर सकते हैंsupport@mohakkisse.comमुझको फेसबुक में भी जोड़ सकते हैं..facebook id- support@mohakkisse.com

आपका चोदू विवान.. आपके जवाबों का इंतजार करेगा..