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रंडी की चुदाई / जिगोलो • पठन समय: 7 मिनट • पढ़ा गया: 479 बार

गोवा की मस्त रण्डी की चूत चुदाई

राज friends

23 Jan 2011 को प्रकाशित

गोवा की मस्त रण्डी की चूत चुदाई
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नमस्कार दोस्तो.. मेरा नाम राज है आज जो कहानी मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूँ.. यह गोवा की है। पिछले दिसंबर में मैं अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए गोवा गया था।मैं लड़कियों की कमर पेट और नाभि का दीवाना हूँ, जब भी मैं किसी लड़की की गहरी गोल नाभि देखता हूँ.. मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है।

गोवा में एक रात तो बिना किसी की चुदाई के खाली ही निकल गई.. पर दूसरे दिन मैं किसी को चोदने के लिए मरा रहा था।

मैंने 2-3 एजेंट किस्म के लोगों से कांटेक्ट किया.. पर वो सब विदेशी लड़कियाँ सप्लाई कर रहे थे.. जबकि मैं एक गदराई हुई गहरी नाभि वाली कोई देसी माल चाहता था।

मैंने उन्हें बताया कि मुझे एक मस्त रसीली देसी चूत चाहिए.. जिसका पेट चिकना और मुलायम और नाभि खूब गहरी हो। मैंने डिमांड रखी कि मैं नाभि देख के ही लड़की सिलेक्ट करूँगा.. पैसे की परवाह नहीं.. कुछ भी हों..एक एजेंट इसके लिए तैयार हुआ.. जिसने कई लौंडियों की नंगी तस्वीरें दिखाईं.. उनमें से एक पंजाबी लड़की बहुत सेक्सी दिख रही थी.. वो हॉट तो थी ही.. उसकी नाभि भी बहुत गहरी और ‘जूसी’ थी। मैंने उसे पसंद कर लिया।

अब मेरा लण्ड शाम के 5 बजे से ही चुदाई के लिए बेक़रार हो रहा था, वो एकदम खड़ा हो गया था।मैंने होटल पहुँच कर फ्रिज में जूस.. बियर.. क्रीम.. का वेट करते-करते मैंने 2 पैग व्हिस्की के भी लगा लिए और अपने 7 इंच के मोटे लण्ड को हिलाता रहा।

रात में करीब 9-30 पर कमरे की बेल बजी.. मैंने लपक कर दरवाजा खोला.. तो देखा सामने वो खड़ी थी.. मैंने उसे ऊपर से नीचे तक देखा.. कमाल का माल जैसी थी वो.. एकदम दूध सी गोरी.. भरा हुआ मादक बदन.. 38-40 नाप की उठी हुई चूचियाँ.. भरे हुए गदराए चूतड़ों के पहाड़.. और वो बेहद गहरी और गोल सी सेक्सी नाभि वाली.. वो मेरी चाहत के हिसाब से ही थी।वो एक बेहद सेक्सी और पारदर्शी साड़ी में आई थी।

उसे देखते ही मेरा तो लण्ड खड़ा हो गया। मैंने उसका वेलकम किया और वो कामुक सी मुस्कान बिखेरते हुए अन्दरआ गई।उसने एक बार मेरे लण्ड की तरफ देखा.. जो लोअर में टेंट की तरह खड़ा था.. वो कातिल से नयना मटकाते हुए मुस्कुराई।

मैंने पूछा- क्या लोगी?वो फिर मुस्कुराई और अदा से बोली- सब ले लूँगी.. जल्दी क्या है जी..।उसने मटकती चाल से आगे बढ़ते हुए फ्रिज से जूस का कैन निकाल लिया और पूछा- जूस लोगे?

मुझे नशा सा हो रहा था.. उसकी गोरी गदराई हुई कमर को मसलने और चाटने को मन कर रहा था। मुझे तो सुनाई प्रिया कि चूसोगे?मैंने कहा- हाँ.. लेकिन तुम्हारी नाभि का जूस लूँगा..

वो थोड़ा चौंक गई लेकिन मैं पागल हो रहा था। मैंने दौड़ कर उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और पागलों की तरह उसकी नाभि को चूसने लगा।उसने मेरा सर पकड़ कर अपने पेट में घुसा लिया। मैं उसकी नाभि में जीभ डाल के चूस और चाट रहा था, वो मेरे बालों को सहला रही थी।फिर मैं उसके पेट को चाटने लगा.. एकदम मलाई जैसा चिकना पेट था..

‘आआअह..’ वो सिसकारियाँ भरने लगी।मैं पागल सा होने लगा और नीचे झुका.. पेटीकोट के साथ उसकी साड़ी को घुटनों से ऊपर उठा लिया, जल्दी से पैन्टी को नीचे खींच प्रिया।उसने सिसकारी ली- आह्ह.. यू नॉटी.. अभी रुको..

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पर मैं तो पागल हो चुका था। चड्डी खींच कर.. उसके पैरों के नीचे से भी निकाल दी.. और अपना मुँह साड़ी और पेटीकोट के बीच में डाल कर उसकी चूत को चाटने लगा ‘स्लुप्प.. सलूश.. चुस्स स्स्स्लूऊप्प.. आआह्ह्ह्हाआ..’उसने कहा- रुको..ओ.. न..

मैं अचानक खड़ा हुआ.. अपना पैन्ट खोल कर अपना टाइट लौड़ा निकाला और उसके हाथ में दे प्रिया, लौड़ा हाथ में लेते ही जैसे उसके अन्दर आग लग गई, उसने मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगी।हम दोनों जीभ डाल कर एक-दूसरे को चूम रहे थे।नीचे से मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उठा प्रिया और वो मेरे लण्ड को चूत के पास सैट करने लगी.. पर लण्ड केवल उसके चूत के ऊपर झांटों वाले एरिया तक ही पहुँच पा रहा था।

मैं पागल हो रहा था.. मैंने उसे कमर से पकड़ कर ऊपर उठाया और गोद में उठा लिया। उसने अपनी टाँगें मेरी कमर के निचले हिस्से से लपेट लीं, अपनी दोनों टांगों से उसने मेरी कमर को ग्रिप में जकड़ लिया, एक हाथ से उसने बगल की अलमारी का हैंडिल पकड़ा और दूसरा हाथ दीवार से टिका प्रिया। मैंने एक हाथ उसकी कमर से लपेट प्रिया और एक हाथ से लण्ड सैट करने लगा।

वाऊ.. पलक झपकते ही क्या पोजिशन बनाई थी उसने.. मेरा लण्ड उसकी गाण्ड के आस-पास कहीं छू रहा था।बाएं हाथ से मैंने उसे पकड़ रखा था और दायें हाथ से मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट ऊपर को खिसकाया, जब तक उसकी चूत दिखने नहीं लगी।अब मैं सीधे हाथ से ही लण्ड को उसकी चूत पर सैट करने लगा, वो धीरे से बोली- राजा.. थोड़ा ऊपर.. उफ़हह.. और थोड़ा धीरे करो..मैं चिल्लाया- चोद लेने दो रानी.. अब मत रोकना.. आआह्ह्ह्ह..

हम दोनों सिसकारियाँ ले रहे थे उसने एक हाथ से हैंडिल पकड़े-पकड़े ही दूसरे हाथ से जल्दी से लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के छेद में लगा प्रिया और बोली- डाल दो न..मैंने मजा लेने के लिए बोला- क्या डाल दूँ रानी?वो मदमाती हुई बोली- अपना लण्ड.. पूरा डाल दो.. अन्दर आआह्ह्ह्ह..

मैंने एक झटका प्रिया.. लण्ड का सुपारा उसकी चूत में अटक गया.. दूसरे झटका मारा तो सुपारा पूरा अन्दर.. उईइ..पोजीशन अभी भी परफेक्ट नहीं थी।उसने अपनी कमर उचकाई और उसी वक़्त मैंने पूरी ताक़त से लण्ड पेला.. तो पूरा जड़ तक अन्दर घुस गया, आआह… आआअह्ह ह्ह्ह्ह.. फ़क मी जान..’ वो चिल्लाई- आअह्ह्ह्ह.. तेरा बहुत बड़ा है..’

मैंने एक बार उसे उछाला और नीचे से धक्के दे-देकर पेलने लगा।वो थोड़ा मोटी थी। इसलिए मैं जरा थकने सा लगा था उसने समझ लिया और वो मुझे बिस्तर पर ले गई मुझे नीचे लिटा कर उसने मेरे घोड़े की सवारी शुरू कर दी।बीस मिनट की चुदाई के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया।

दोस्तो.. वो रंडी जरूर थी.. पर चुनिन्दा लोगों के साथ ही चुदाई करने वाली थी.. मतलब ऐसा नहीं था कि रोज ही दस-बीस लौड़े खाने वाली थी।वो हफ्ते में एकाध कस्टमर के नीचे लेटती थी और महंगी भी थी, पर वो पैसा वसूल आइटम थी।उसके साथ अभी पूरी रात बाकी थी.. बहुत मजा लिखना बाकी है..

आपको मेरी ये रसीली कहानी कैसी लगी.. मुझे ईमेल लिखोगे तो मैं आगे की कहानी भी लिखूंगा।तब तक के लिए नमस्ते।मुझे मेल करके आपके विचार भेजिएगा।support@mohakkisse.com

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