हिंदी गांडू कहानी में एग्जाम के लिए मैं अपने दोस्त के चाचा के घर रुका. वे अकेले रहते थे, उनके पास एक कमरा, एक सिंगल बेड था. रात को चाचा ने पूरे नंगे होकर कपड़े बदले.
यार, तब मैं पॉलिटेक्निक में पढ़ाई कर रहा था.मेरी उम्र लगभग 21 साल की थी.
मैं तब मेरठ में रहता था और पढ़ाई गाज़ियाबाद से कर रहा था.मैं रोज़ ट्रेन से पॉलिटेक्निक कॉलेज आता जाता था.
मेरे साथ एक और लड़का मेरठ से ही रोज़ सफ़र करता था.लेकिन वह दूसरी ट्रेड का था.
हमसफ़र होने की वजह से हम अच्छे दोस्त बन गए थे.
यह हिंदी गांडू कहानी तब बनी जब मेरे फ़ाइनल एग्ज़ाम के सारे प्रैक्टिकल सुबह नौ बजे पड़ गए.मैं उस दिन मेरठ आने-जाने का रिस्क नहीं ले सकता था.
मेरे दोस्त ने कहा कि उसके दूर के रिश्ते के एक चाचा हैं, विकास … वे गाज़ियाबाद में ही जॉब करते हैं और रूम किराए पर लेकर रहते हैं. मैं उनके पास रुक जाऊं.
उसने पहले चाचा से बात की तो उन्हें कोई समस्या नहीं थी.
हमारा इंस्टीट्यूट, चाचा जी की फैक्ट्री और उनका रूम … तीनों एक ही इलाके में थे.मैंने अब वैसा ही किया.प्रैक्टिकल से पहले मैं दिन में उनकी फैक्ट्री पहुंच गया, फिर उनके साथ ही उनके कमरे पर चला गया.
रास्ते में चाचा ने कहा- यार, मुझे चाचा मत कहना. बस दोस्त की तरह रहो तो हम दोनों ही कम्फर्ट ज़ोन में रहेंगे. तुम या तो मेरा नाम लो … या बस ‘यार’ कहकर बुलाओ!
वे 35 साल के थे लेकिन थे खूब जवान और देखने में बेहद सेक्सी लगते थे.उनका साफ़ गोरा-गेहुंआ रंग, क्लीन शेव्ड चेहरा.घी-दूध पर पला हुआ कसरती जिस्म चुस्त कपड़ों में उनकी गोल-मटोल गांड और चौड़ी छाती गज़ब ढा रही थी.चुस्त पैंट में उनका सुस्त अवस्था में पड़ा लंड भी खूब उभर रहा था.
काफ़ी बड़ा कमरा था.कमरे से अटैच्ड बाथरूम था, कोने में किचन की स्लैब बनी थी.दो कुर्सियां और दीवार के साथ एक दीवान बिछा हुआ था जो बस एक आदमी के लिए ही बना था.
फिर उन्होंने मेरी तरफ़ पीठ करके अपनी पैंट और शर्ट उतार दी.अब वे मेरे सामने बिल्कुल नंगे खड़े थे क्योंकि नीचे न तो बनियान पहनी थी, न अंडरवियर.
उनका जिस्म बहुत खूबसूरत था.उनके गोल-उभरे हुए चूतड़ देखकर मेरे कान गर्म होने लगे.
फिर उन्होंने खूँटी से पजामा-कुर्ता उतार कर पहन लिया.वह पजामा-कुर्ता बहुत महीन था, सो उनका सेक्सी जिस्म उसमें से झांक रहा था और मुझे कामोत्तेजित कर रहा था.
मैं आपको बता दूं कि मेरी शुरू से ही मर्दों में रुचि रही है.
हम दोनों ने बाहर जाकर डिनर किया, फिर वापस रूम में आ गए.
रात हुई तो मैंने कहा- यार जी, मैं चादर बिछाकर फर्श पर सो जाता हूँ!वे बिल्कुल नहीं माने.चाचा बोले- अरे यार एक रात की तो बात है … एडजस्ट हो जाएगा!
तकिया भी सिर्फ़ एक ही था.सोने से पहले उन्होंने अपना कुर्ता उतार प्रिया.उनका कसरती जिस्म और भी खूबसूरत लग रहा था.उनके गोरे-गेहुंए बदन पर डार्क ब्राउन, बड़े-बड़े निप्पल्स गज़ब ढा रहे थे.
अब उनके बदन पर बस पजामा था.वह पजामा इतना महीन था कि उनका लंड साफ़ दिख रहा था शांत और ढीला होने के बावजूद लगभग चार इंच का तो होगा ही.झीने पजामे में वह साफ़ झलक रहा था.
उनके कहने पर मैंने भी अपनी शर्ट और पैंट उतार दी थी.
मैंने भी बनियान नहीं पहनी थी, बस छोटी सी टाइट फ्रेंच ब्रीफ़ पहनी हुई थी.इसलिए मेरा सेमी-सॉलिड लंड खूब उभार रहा था.उनकी नज़र मेरे लंड के उस उभार पर ही जमी हुई थी.
उन्होंने बड़े कामुक अंदाज़ में अपनी जीभ होंठों पर फेरी.उनकी आंखों में तैरते वासना के गुलाबी डोरे साफ़ गवाही दे रहे थे कि वह कई बार जवान लौंडों की जवानी का मज़ा ले चुके हैं.
फिर मैं दीवान पर बैठ गया.मैंने महसूस किया कि अब उनका लंड उनके पजामे में झटके मारने लगा था.वह कड़क होकर खड़ा हो गया था.
चाचा भी उठे और मुझसे सटकर बैठ गए.उनके जिस्म से मर्दानी खुशबू आ रही थी, जो मुझे मदहोश कर रही थी.हम दोनों बातें करने लगे.
उन्होंने अंगड़ाई ली और मेरे कंधे पर हाथ रखकर उसे सहलाने लगे.इससे मेरा जिस्म गर्म होने लगा.
फिर उन्होंने लाइट बंद कर दी और नाइट बल्ब ऑन कर प्रिया.
अब हम दोनों सोने के लिए लेट गए.वे सीधे लेटे थे और मैं उनकी तरफ़ करवट लेकर.मैं लगातार उनके खूबसूरत चेहरे को निहार रहा था.
उन्होंने पूछा- क्या हुआ यार?मैं बोला- नींद नहीं आ रही है!
तो उन्होंने तुरंत अपना हाथ मेरे सिर के नीचे कर लिया, मेरा हाथ पकड़ा और उसे अपने सीने पर रख प्रिया.ऐसा करने से मैं उनसे बिल्कुल चिपक सा गया था.
फिर वे सो गए, लेकिन मुझे अभी भी नींद नहीं आ रही थी.क्योंकि मेरा उन पर दिल आ गया था और मैं उनके साथ सेक्स करना चाहता था.
फिर मैंने हिम्मत करके उनकी चूची सहलानी शुरू कर दी.मिनट भर में ही उनकी चूची की गांठ कड़क हो गई.
फिर मैंने धीरे से अपना हाथ उनके पेट पर रख प्रिया.उनकी ओर से कोई रिएक्शन नहीं किया तो मैंने भी हाथ नहीं हटाया.
कुछ पल बाद मैंने उनकी नाभि को हाथ से सहलाना शुरू कर प्रिया.उनकी नाभि में कम्पन शुरू हो गया था … मतलब अब वे भी जाग गए थे.
मैंने अपना हाथ उनकी जांघ पर रख प्रिया.उन्होंने भी कसमसा कर अपनी टांगें खोल लीं, ताकि मैं उनकी जांघ अच्छी तरह सहला सकूँ.
फिर मैंने धीरे-धीरे उनकी जांघ सहलानी शुरू की.धीरे-धीरे मेरा हाथ उनके आंड पर पहुंच गया.मैंने उनके आंड सहलाने शुरू किए.
उनके आंड बहुत बड़े थे … इससे पता चल रहा था कि खड़ा और सख्त होने पर उनका लंड भी बहुत बड़ा हो जाएगा.
फिर धीरे से मैंने अपना हाथ उनके लंड पर रख प्रिया.उनका लंड अभी पूरा खड़ा नहीं हुआ था लेकिन बिल्कुल सुस्त भी नहीं था.
मैंने उनका लंड सहलाना शुरू कर प्रिया.थोड़ी देर में उनका लंड एकदम कड़क होकर सीधा खड़ा हो गया था.अब वह लगभग आठ इंच का और बहुत मोटा हो चुका था.
मैं काफी देर तक उनका लंड मसलता रहा.शायद वे यही चाहते थे.मेरे साथ-साथ उन्हें भी मज़ा आ रहा था.
फिर मैंने उन्हें तड़पाने की नियत से अपना हाथ उनके लंड से हटा लिया.मैंने देखा कि उनका लंड पजामे में ज़ोर-ज़ोर से झटके मार रहा था!
फिर वे अपना लंड खुद ही मसलने लगे.अब उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख प्रिया.
मैं फिर से उनका लंड सहलाने लगा.
फिर मैंने उनके पजामे का नाड़ा खोला और अब बेफिक्र होकर अपना हाथ उनके पजामे में डाल प्रिया.मैंने उनके लंड का मुठ मारना शुरू कर प्रिया.वे जोर-जोर से आहें भरने लगे.
कुछ देर बाद चाचा बिस्तर से उठे तो उनका पजामा नीचे गिर गया, जिसे उन्होंने उठाकर कुर्सी पर रख प्रिया.
अब उन्होंने कमरे की सारी लाइट्स जला दीं.तेज़ रोशनी में उनका नंगा जिस्म गज़ब ढा रहा था.
उनका लंड बहुत ही खूबसूरत था.लंड का सुपाड़ा तेज़ रोशनी में कांच सा चमक रहा था.
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- जब मज़ा आ रहा है तो शर्म कैसी यार!मैं चुप रहा.
अब उन्होंने मेरे कच्छे को भी अपने हाथों से उतार प्रिया.मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ खड़ा था.
वे मेरे कड़क लंड को देखकर मुस्कुराए और बोले- अच्छा इसलिए नींद नहीं आ रही थी?
वे मुझे प्यार करने लगे.उन्होंने मेरा पूरा जिस्म चूम डाला.
अब वे कमर के बल लेट गए.मैं उनके ऊपर लेटकर उन्हें चूमने लगा.
मैं चूमता हुआ नीचे आया और उनके मस्त कड़क निप्पलों को चूसने लगा.वे जोर-जोर से आहें भरने लगे.
फिर नीचे आकर मैंने उनकी नाभि चूमी और साथ में उनके लंड का मुठ मारता रहा.
उन्होंने मुझसे कहा- लंड चूस ना यार!मैंने कहा- आपके लंड और आंडों पर बहुत बाल हैं!
वे तुरंत समझ गए और झट से उठ कर शेविंग बॉक्स ले आए.मैंने बॉक्स से कैंची निकाली और उनकी झांटें काटने लगा.
जब बाल थोड़े छोटे हो गए, तो रेज़र ले लिया.वे बोले- इधर नहीं बाथरूम में चलते हैं.
मैं उनका हाथ पकड़ कर उन्हें बाथरूम में ले गया.कमरे से एक स्टूल भी ले आया.
मैं स्टूल पर बैठ गया.अब उनका लंड ठीक मेरे सामने था.
मैंने पहले उनका लंड गीला किया, फिर ढेर सारा साबुन लगाया, खूब झाग बनाया.फिर रेज़र से उनकी झांटें साफ़ करने लगा.
थोड़ी देर में मैंने उनके लंड और आंड बिल्कुल चिकने कर दिए.लौड़े को पानी से धो प्रिया.
अब उनका लंड और भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था.
अब वे मेरी तरफ़ गांड करके खड़े हो गए और बोले- इसे भी चिकना कर दे यार!
मैंने उनकी गांड पर साबुन लगाना शुरू किया तो वह नीचे को झुक गए.इससे उनकी गांड और ज्यादा खुल गई.मैंने गांड के बाल भी साफ़ किए.
मैं बार-बार अपनी उंगली उनकी गांड में घुसा देता … वे आह करते तो हम दोनों बड़ा मज़ा आने लगा था.
गांड साफ़ करके मैंने उनकी गांड भी अच्छे से धो दी.फिर तौलिये से उनका पूरा जिस्म पौंछा.
शेविंग की जलन ठीक करने के लिए मैंने उनके लंड, आंड और गांड पर खूब सारा नारियल का तेल लगा प्रिया.
वे वापस कमरे में आकर लेट गए.मैंने अपने हाथ में और तेल लिया, उनके लंड की मालिश करने लगा.
कुछ पल बाद मुझसे रहा न गया तो मैंने लंड का सुपाड़ा जीभ से चाटा.
मस्त स्वाद लगा तो मैंने पूरा लंड मुँह में ले लिया.
क्योंकि मेरी गांड उनके मुँह पर टिकी हुई थी तो वे मेरी चिकनी गांड चाट रहे थे.कभी मेरे चूतड़ों पर दांतों से प्यार से काटते, कभी अपनी जीभ मेरी गांड में घुसा देते.
फिर उन्होंने मेरी गांड पर भी बहुत सारा नारियल का तेल लगाया, उंगली से अन्दर तक तेल भर प्रिया.मुझे पीठ के बल लिटाया ताकि हम एक-दूसरे को देख सकें.
मेरी गांड की शादी हो गई-3
फिर उन्होंने मेरी टांगें ऊपर को उठाईं.पहले तो वह अपने गर्म, मोटे लंड के सुपाड़े को धीरे-धीरे मेरी गांड के आस-पास रगड़ते रहे.जब उनका गीला, तेल से चिकना सुपाड़ा मेरी नाज़ुक त्वचा पर सरका तो ऐसा लग रहा था जैसे कोई गर्म, मुलायम रेशम छू रहा हो.
फिर उन्होंने उसे मेरी गांड के गुलाबी, सिकुड़े हुए छेद पर दबाया. हल्का-सा दबाव, गरमाहट और वह चिपचिपा तेल की महक जो कमरे में पहले से ही फैली हुई थी.वे मुझे गहराई से चूमते रहे, उनकी जीभ मेरी जीभ से लड़ रही थी, सांसें तेज़, गर्म और नम.
धीरे-धीरे उन्होंने थोड़ा-सा लंड अन्दर किया.पहले तो तेज़ जलन और सख्त सी कसावट सी हुई.ऐसा लगा जैसे कोई गर्म लोहे की सलाख़ धीरे धीरे से अन्दर घुस रही हो.
कुछ देर के बाद वह दर्द पिघल कर मीठे मज़े में बदल गया.मेरी सांसें रुक-रुककर आने लगीं, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था.
तब मैंने कांपती आवाज़ में कहा- आह यार … सारा अन्दर कर दो … प्लीज़!
उन्होंने तुरंत खूब सारा नारियल तेल मेरी गांड के छेद पर और अपने लंड के जोड़ पर टपका प्रिया.वह ठंडा-ठंडा तेल अब गर्म होकर चिपचिपा हो गया था और उसकी मीठी-सी खुशबू पूरे कमरे में फैल गई थी.
फिर एक ज़ोरदार और बम पिलाट एक ही धक्के में उन्होंने अपना पूरा आठ इंच का मोटा लंड मेरी गांड में घुसा प्रिया.
मैं कामोत्तेजना और दर्द से कसमसा गया … एक तेज़, गहरी चीख मेरे गले से निकल गई.मेरी आंखें भर आईं, पूरा बदन सिहर उठा.
उनका वह गर्म लंड मेरी अंदरूनी दीवारों को फैलाते हुए अन्दर तक पहुंच गया.मुझे ऐसा लगा जैसे कोई गर्म, धड़कता हुआ लोहा मेरे अन्दर बस गया हो.
उन्होंने फौरन से लंड बाहर निकाल लिया और मेरे होंठों पर अपने गर्म, नम होंठ रख दिए.उनकी सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं.
चाचा मुझे चूमते हुए बोले- मैं तुझे दर्द नहीं पहुंचाना चाहता यार!मैंने हांफते हुए कहा- नहीं … इस दर्द में बहुत मज़ा आ रहा है … आप फिर से अन्दर करो ना … प्लीज़!
उन्होंने फिर से अपना लंड ढेर सारे तेल से तर किया. अब वह चमक रहा था, गर्म और तैयार.फिर एक ही ज़ोरदार धक्के में सारा का सारा लंड उन्होंने मेरी गांड में गाड़ प्रिया.
इस बार मैंने कसमसा कर अपने पैर उनकी कमर पर लपेट लिए.मेरी एड़ियां उनकी गोल, मजबूत गांड पर दब रही थीं.
अब वे आराम आराम से, गहरे-गहरे धक्के देने लगे.उनके हर धक्के के साथ उनकी गर्म सांसें मेरे कान में पड़तीं, उनकी छाती की चौड़ी मांसपेशियां मेरे बदन से रगड़ जातीं.
वे मुझे चूम रहे थे … होंठ, गला, कानों के पीछे … और प्यार से, धीरे-धीरे चोद रहे थे.उनकी मर्दानी, पसीने वाली खुशबू मेरे नथुनों में भर रही थी.
लेकिन यार, मानना पड़ेगा … उनमें बहुत दम था.काफी देर तक वे अपने लंड को मेरी गांड में अन्दर-बाहर करते रहे.
उन्होंने मेरे लंड को मुठियाया था तो मैं झड़ गया था.मगर वे अभी भी चालू थे.
कभी मुझे पीठ के बल लिटाकर गहरे धक्के देते, कभी खुद लेटकर मुझे अपने ऊपर बिठा कर झूला झुलाते.मैं उनके लंड पर ऊपर-नीचे होता, हर बार वे मेरी गांड को पूरी तरह भर देते.
कभी वे बैठ जाते और मुझे गोदी में लेकर चोदने लगते.मेरी कमर पर उनके मजबूत हाथ, मेरी गांड उनके लंड पर पूरी तरह बैठी हुई.
आखिरकार उन्होंने अपनी गर्म, गाढ़े वीर्य की कुछ पिचकारियां मेरी गांड के अन्दर ही छोड़ दीं.उनका वह गर्म तरल पदार्थ मुझे मेरे अन्दर भरता हुआ सा ऐसा महसूस हुआ, जैसे कोई उबलता लावा.
फिर एकदम से उन्होंने अपना लंड मेरी गांड से बाहर निकाल कर मेरे मुँह में ठेल प्रिया.बाकी की बची हुई पिचकारियां मेरे मुँह में छूट गईं.
नमकीन, गर्म, गाढ़ा स्वाद जीभ पर फैल गया.मैंने बड़े शौक से सब निगल लिया, आखिरी बूंद तक रस चूसा और लौड़े को प्यार से चाटकर साफ़ कर प्रिया.
फिर मैं उनका लंड तब तक चूसता रहा, जब तक वह बिल्कुल ढीला, नरम और गीला नहीं हो गया.
अब उन्होंने मेरी टांगें ऊपर करके मेरी गांड में अपनी गर्म, नम जीभ डाल दी.वे चाट-चाटकर मेरी गांड को साफ़ करते रहे.उनकी जीभ अन्दर तक जाती, बाहर निकलती, मेरी गांड के छेद को सहलाती.
वह नमकीन, तेल और वीर्य का मिश्रित स्वाद उनकी जीभ पर मचल रहा था.
हम दोनों सारी रात ऐसे ही पूरी तरह नंगे एक-दूसरे से चिपक कर, पसीने से तरबतर … लिपट कर सोते रहे.उनकी गर्म सांसें मेरे गले पर पड़ रही थीं.
उनका लंड सुबह भी आधा खड़ा था.वे फिर से शुरू करना चाहते थे पर मैंने हंसकर मना कर प्रिया.
उनके ज़्यादा कहने पर मैंने हाथों से उनका मुठ मार दी.तेज़ी से, ऊपर-नीचे ऊपर-नीचे करके मैंने उनके लंड को मथा … तो उसमें से फिर से लालिमा आ गई और वह गर्म होकर फड़कने लगा.
मैंने मुँह में लेकर चूसा.
उन्होंने मेरे मुँह में ही अपना माल छोड़ प्रिया … गर्म, गाढ़ा, भरपूर.मैंने आखिरी बूंद तक चाट लिया.
फिर हम दोनों बाथरूम में आ गये, एक-दूसरे पर साबुन मलते हुए नहाए.उनके मजबूत बदन पर हाथ फेरना, उनकी गांड पर साबुन लगाना, उनकी छाती को सहलाना … यह सब कुछ इतना अंतरंग था कि मानो वे मेरे पति हों.
कमरे में आकर मैंने कपड़े पहने, नाश्ता किया.फिर उन्होंने मुझे अपनी मजबूत बांहों में भींच लिया, मेरे होंठों को चूसा … वह गहरा, लंबा किस मुझे अब भी याद है.
फिर चाचा बोले- बेस्ट ऑफ लक मेरे यार … तू बहुत याद आएगा!
फिर हम दोनों एक साथ रूम से निकले.रास्ते में उन्होंने मुझे अनार का ताज़ा, मीठा-खट्टा जूस पिलाया.
वह ठंडा जूस गले से उतरता हुआ मेरी सारी थकान मिटा रहा था.
मैं कॉलेज निकल गया और वे फैक्ट्री.
मैं तीन बजे फ्री हुआ तो उनकी फैक्ट्री पहुंच गया.वहां से वे मेरे साथ रूम पर आ गए.
रूम पहुंचते ही उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और मुझे जोर से दबोच लिया.मैं खुद बौखलाया हुआ था. मेरी गांड में खुजली हो रही थी.
उन्होंने फटाफट फटाफट अपने और मेरे सारे कपड़े उतार दिए.वे मेरे ऊपर लेटकर किसी दीवाने की तरह चूमने लगे.
उनके गर्म होंठ मेरे होंठों पर, गले पर, छाती पर … हर जगह आग लगा रहे थे.
चूमते-चूमते वे नीचे आए और मेरा लंड सहलाने लगे.उनकी उंगलियां मेरे लंड पर सरक रही थीं.
मेरा लंड इतनी तेज़ी से कड़क हो गया कि लग रहा था जैसे कोई लोहा बन गया हो.
फिर उन्होंने मेरा लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर प्रिया.गर्म, नम मुँह, जीभ का वह खेल … आह मेरे सारे जिस्म में बिजली सी दौड़ गई.मैं वासना से कराहने लगा, बहुत मज़ा आ रहा था.
मैंने हांफते हुए कहा- यार जी … मेरा भी अब गांड मारने को दिल कर रहा है. आज तक मैंने किसी की गांड नहीं मारी है!
उन्होंने मुस्कुरा कर कहा- मैंने भी कभी गांड नहीं मरवाई … आज नया अनुभव हो ही जाए यार!
यह कह कर वे कमर के बल लेट गए.मैं उनके ऊपर चढ़ गया, उन्हें चूमता हुआ मैं नीचे आया.
पहले उनका लंड चूसा, वह गर्म, मोटा लंड मेरे मुँह में भर गया.फिर उनकी टांगें ऊपर करके उनकी गांड चूमने लगा.
नाज़ुक, गुलाबी छेद को जीभ से सहलाया.
फिर खूब सारा तेल उनकी गांड पर और अपने लंड पर लगाया.वही चिपचिपा, मीठी खुशबू वाला तेल.
फिर आराम से अपना सुपाड़ा उनकी गांड के सुराख़ पर दबाया … तो वह आसानी से अन्दर चला गया.उनकी हल्की सी आह निकली.
मैं लगा रहा और धीरे-धीरे पूरा लंड घुसा प्रिया.अब मैं आराम से अन्दर-बाहर करने लगा.
वे उत्तेजित होकर अपने पैरों से मेरी गांड दबाने लगे.हर धक्के के साथ उनकी आहें कमरे में गूँज रही थीं.
फिर मैंने लंड बाहर निकाला और कमर के बल लेट गया.अब वे फिर से मेरा लंड चूसने लगे.
उसके बाद वह मेरी कमर के दोनों ओर पैर करके बैठ गए.उनकी गांड ठीक मेरे लंड के ऊपर.
उन्होंने मेरा लंड पकड़ कर सीधा किया और उस पर बैठकर गांड को दबाया.
एक बार में ही पूरा लंड उनकी गांड में घुस गया.वे आह कह कर एक पल को रुके और अब वे ऊपर-नीचे होकर गांड मरवा रहे थे.
तेज़, गहरे धक्के, फच्च-फच्च की आवाज़ें, पसीने की महक … सब कुछ पागल कर देने वाला.
थोड़ी देर में मैं उनकी गांड में झड़ गया — गर्म वीर्य की पिचकारियां उनके अन्दर चली गईं.लेकिन वे नहीं रुके, ऊपर-नीचे होते रहे.
मेरे ही वीर्य से गांड कीमसाज और चुदाईहो रही थी, मेरा लंड और चिकना हो गया.मुझे बहुत गुदगुदी हो रही थी, पर सच में बहुत मज़ा आ रहा था.
वे मेरा लंड अपनी गांड से निकालने को तैयार ही नहीं थे.उनकी गांड की रगड़ से मेरा लंड फिर से कड़क होने लगा.वे लगातार ऊपर-नीचे होकर मस्ताने लगे.
फिर वे मेरे ऊपर 69 की पोजीशन में लेट गए.उनका लंड मेरे मुँह में, मेरा उनके मुँह में. हम दोनों काफी देर तक एक-दूसरे का लंड चूसते रहे.
गर्म सांसें, जीभ का खेल, आहें … फिर हम दोनों एक साथ ही एक-दूसरे के मुँह में झड़ गए.गर्म, गाढ़ा वीर्य जीभ पर फैल गया, मैंने सब निगल लिया.
उसके बाद हर प्रैक्टिकल से पहले मैं उनके रूम पर पहुंच जाता.जल्दी डिनर करके नौ बजे ही हम दोनों सारे कपड़े उतार कर मज़े लेना शुरू कर देते.वे रात में मुझे दो बार चोदते, हम सुबह तीन बजे सोते.
सुबह उठकर साथ नहाते, साबुन लगाते, एक-दूसरे को छूते.दोपहर को प्रैक्टिकल से आकर मैं उन्हें चोदता.
उन्होंने मेरे साथ कोई ज़बरदस्ती नहीं की … जो भी किया, बड़े प्यार से किया.इसलिए इतना मज़ा आया.
हम लोग चुदाई में बार-बार पोजीशन बदलते, बीच-बीच में ब्रेक लेते, हर बार नया तरीका आजमाने की कोशिश करते.इसलिए बहुत देर तक सेक्स होता.
जब भी उन्हें लगता वे झड़ने वाले हैं, वे अपने लंड को मेरी गांड से बाहर निकाल लेते, मुझे प्यार से चूमते.फिर थोड़ी देर बाद दूसरी पोजीशन में शुरू हो जाते.
उन्होंने मुझसे कहा- अगर मज़ा लेना है तो बेशर्म बन जाओ यार … आंखों में आंखें डालकर सेक्स करो!
दोस्तो, कसम से … मैंने उनके साथ खूब सेक्स किया.पूरी जिंदगी का मज़ा उन कुछ रातों में ले लिया.
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