आदित्य शुक्लादोस्तो, आप सब कैसे हो..! उम्मीद करता हूँ कि सब मस्त होगे !आप लोग सोच रहे होगे कि यह कहीं स्कूल की चिठ्ठी तो नहीं लिख रहा है, पर ऐसा नहीं है मेरे दोस्तों थोड़ा सा लोकाचार तो करना ही पड़ता है सो मैंने भी कर दिया यार !खैर… यह सब छोड़ो और जिस वजह से हम यहाँ है, वो बात करता हूँ।यह बात है जब मैं स्कूल में था पर था बहुत बदमाश, दोस्तों की संगत का असर था। मुझे मेरे दोस्तों द्वारा सारी सेक्सुअल बातें बहुत छोटे में ही पता चल गई थीं तो मेरा हमेशा मन करता था कि मैं कभी कुछ करूँ, पर कुछ हो भी नहीं सकता था।पर लड़के लोग जानते होंगे कि जब मन करता है सारा जहाँ एक तरफ और चोदना एक तरफ !खैर… उस समय मैं काफी छोटा था, पर ख़याल इतने बड़े कि मेरे सपनों के आगे बड़े-बड़े भी पानी भरें। समय गुजरता गया और अब मैं ‘कुछ’ करने लायक भी हो गया।तो हुआ यह कि मेरे घर पर मेरी दूर की कोई रिश्तेदार की लड़की आई थी। उसका नाम रजनी था, उसकी फ़िगर मुझे आज भी याद है, उसका कसा हुआ बदन… लिखते हुए ही मेरा लंड खड़ा हो रहा है !बस दोस्तो, तुम अब सोच ही सकते हो कि वो कैसी रही होगी। अगर नहीं सोच पा रहे हो, तो चिंता मत करो आगे मैं उसका पूरा नाप लिख दे रहा हूँ। वो एक हूर की परी थी उसका फिगर 36-30-36 का था।मैंने अपने भाइयों के द्वारा यह सुन रखा था कि वो थोड़ी गर्म स्वभाव की है। तो मुझे लगा कि अब अपनी तो निकल पड़ी और हुआ भी वही।वह करीब दो महीने के लिए ही आई थी, मेरी तो जैसे बाछें खिल गई हों..! ऐसा लगा जैसे मैंने सारे तीर्थ कर लिए हों, जिसका प्रसाद भगवान मुझे इस तरह दे रहे हैं।मैं उसे रोज देखता और सोचता कि कब इसका काम लगाऊँ।पर मुझे थोड़ा डर लगता था क्योंकि वो मुझसे बड़ी थी मैं रहा हूँगा कुछ 18 साल का और वो थी 22 की, मेरी हिम्मत न पड़े, पिता जी का डर लगता था कि कहीं पिताजी को पता चल गया, तो जूतों से मारेंगे अलग और घर से निकाल देंगे।पर उसके साथ सम्भोग करने की प्रबल इच्छा के सामने पिता जी की मार का डर फ़ीका पड़ गया।हमारा घर काफी बड़ा था, काफी कमरे थे। माँ पिताजी एक साथ बाहर वाले कमरे में लेटते थे और मैं मेरी बड़ी बहन और रजनी एक साथ लेटते थे।मैं रोज रात में जगता और उसके उभरे हुए दूध को निहारता रहता और मन ही मन सोचता कि कब इन रसीले आमों को चूसूँगा।वो इतने बड़े थे कि मैंने अभी तक उतने बड़े किसी के नहीं देखे थे। आज मेरी उम्र 20 साल है, पर अभी तक मुझे उस जैसे किसी के नहीं मिले।मैं रोज हर रात को उठता और देखता और रोज अपना मन मार कर सो जाता, पर एक दिन ना जाने क्या हुआ कि मुझसे रुका नहीं गया और मैं जाकर उसके बगल में लेट गया।थोड़ी देर ऐसे ही लेटा रहा फिर अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया और लेटा रहा। उसे छूते ही मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने वर्ल्ड-कप जीत लिया हो।क्या कमाल का बदन था यार..!मैं क्या बताऊँ.. मैं बस चुपचाप लेटा रहा वैसे ही !थोड़ी देर मैं वो जग गई और मेरे को पास देखकर बोली- यहाँ क्या कर रहे हो?मैं डर गया, मुझे लगा अब तो पापा बहुत मारेंगे!मैंने जल्दी से दिमाग लगाया और कहा- मुझे डर लग रहा था, तो मैं यहाँ आ गया।तो उसने कुछ नहीं कहा, मेरी जान में जान आ गई। मैंने सोचा बच गया और मन ही मन मैं सोचा कि अब कुछ नहीं करूँगा ! पर शायद किस्मत को कुछ और ही मंजूर था या यह कहो कि मेरी रजनी को!उसने मुझे यह कहते हुए चिपका लिया- आ जाओ… डरो मत.. मैं हूँ ना !उसने जब चिपकाया तब मेरा मुँह उसके दूध के ठीक सामने था। उसका दूध मेरे मुँह से लगा हुआ था और मुझसे बिलकुल भी रुका नहीं जा रहा था।मैंने अपना दिमाग लगाया और यह कहते हुए उसे दूर किया कि गर्मी लग रही है, पर मैं था चालाक मैंने अपना हाथ उसके दूध पर रख कर उसे दूर किया और जब दूर कर रहा था तो मैंने उसके दूध दबा दिए।अरे दोस्तों क्या बताऊँ यार… वो जन्नत थी… जन्नत !वो मेरा पहला एहसास था किसी लड़की के दूध दबाने का ! मज़ा आ गया था यार..! फिर क्या था उसके दूध दब चुके थे, वो गर्म हो गई थी।वैसे भी रात का समय था तो उसे और उत्तेजना हुई और वो कहने लगी- मेरे से चिपक जाओ नहीं लगेगी गर्मी.. आओ मेरे पास आओ.. और इन्हें फिर से दबाओ!मैंने भी भोले बनाते हुए कहा- क्या कह रही हो?तो उसने कहा- मैं जानती हूँ कि तुम यहाँ क्यों आए हो!मैं थोड़ा शरमाया, फिर उसने कहा- मैं देख रही थी कि रोज रात को कि तुम जग कर क्या देखते हो!मेरी तो जैसे पैरों तले से ज़मीन सरक गई हो पर मुझे लगा कि शायद वो भी ऐसा ही करवाने की इच्छा रखती है। तो मैंने क्या किया कि उसके दूध से मैं चिपक गया जैसे जोंक चिपकती है और चूसने लगा उसके दूध..!वाह यार इतना मज़ा आ रहा था दोस्तो, कि मैं इस अहसास को शब्दों के द्वारा बता नहीं सकता।खैर मैं उसके दूध चूसता रहा, फिर मैंने उसके दूध उसके कुर्ते से बाहर निकाले और उसकी चूचियों को दबा-दबा कर चूसने लगा।वो दर्द से चिल्लाने लगी तो मैंने डर के मारे छोड़ दिया तो बोली- अरे करो ना!तो मैंने कहा- तुम चिल्ला रही थी, मैंने सोचा दर्द हो रहा है!तो बोली- पागल… मुझे मज़ा आ रहा है..!तो फिर क्या था मैं उसके दूध फिर पीने लगा..! सारी रात पिए मैंने उसके दूध और वो मुझे पिलाती रही !वो दिन दोस्तो, मेरा ऐसा था कि मैं उसे कभी भूल नहीं पाया। उसकी अगली रात को तो उससे भी खतरनाक हुआ मैं सोच भी नहीं सकता कि ऐसा भी हो सकता है, पर दोस्तो, वो सब भी हुआ जो आप सोच रहे हो!इस कहानी के बाद यदि आपका प्यार मुझे मिला तो जरूर मैं अगली रात के बारे में लिखूँगा। तब तक के लिए मुझे आज्ञा दीजिए।आपका दोस्त आदित्य शुक्लाsupport@mohakkisse.com
जब मैंने दूध पीया
आदित्य शुक्ला
02 Jun 2012 को प्रकाशित
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