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अर्चना का सफ़र-2: संध्या ने सिखाया

लेखक: अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज दिनांक: 24-08-2017 पठन समय: 11 मिनट

आपने मेरी कहानीअर्चना का सफ़र: गर्म दूध की चायपढ़ी अब इससे आगे-

भाभी ने अपने होंठ आलोक के होंठों पर रख दिए और आलोक को चुम्बन करने लगी। धीरे धीरे कर संध्या आलोक के शर्ट के बटन एक-एक कर खोलने लगी और उसकी छाती पर अपने मुलायम हाथ चलाने लगी।आलोक अपना नियंत्रण धीरे-धीरे खोता जा रहा था, एक तरफ संध्या का किस करना चालू था, फिर भाभी ने आलोक को खड़ा किया और उसका बनियान भी उतार प्रिया।

अब आलोक संध्या के सामने केवल चड्डी में था। संध्या आलोक को एक पल निहारती रही, बाद में आलोक को बोली- वाओ आलोक… बॉडी तो काफी मेन्टेन की है, कितना छुपा कर रखोगे इसे?

बातें करते-करते संध्या ने आलोक का हाथ अपने बूब्स पर टिका प्रिया।

लेकिन जैसे ही आलोक को ज्ञात हुआ कि संध्या ने उसका एक हाथ उसके स्तनों पर टिका प्रिया है, आलोक ने अपना हाथ संध्या के वक्ष से हटा लिया। संध्या का भी इस पर ध्यान भंग हुआ और उसने आलोक से पूछा- क्या हुआ?

आलोक ने कहा- भाभी यह सब ठीक नहीं है, गलत है यह सब कुछ!

संध्या ने कहा- तुम तो काफी शर्मीले हो आलोक, हम कुछ गलत नहीं कर रहे, मैं केवल तुम्हें यह सब सिखाकर तुम्हारी मदद कर रही हूँ।

आलोक फिर भी असमंजस में था, संध्या ने कहा- अब पछतावा करने से कुछ नहीं होगा, हम दोनों ने अपनी हदें पार कर दी हैं इसलिए अच्छा है कि हम अब आगे बढ़ें और अपने इस कार्य को पूरा कर इसे नियत अंजाम तक ले जाएँ।

आलोक कुछ देर सोच में डूबा रहा, फिर उसे लगा कि शायद भाभी ठीक ही कह रही हैं। अब आलोक कुछ कम्फ़र्टेबल दिख रहा था, अब आलोक ने खुद पहल की, उसने संध्या को कस के अपनी ओर खींचा और अपने होंठ संध्या के होंठों पर टिका दिए।

संध्या कुछ देर बाद अपने आप को आलोक से अलग करके बोली- यह हुई ना बात… मेरे राजा! चल आ जा, तुझे जन्नत के मजे करवाऊँगी।

इतना कहने पर संध्या ने अपने होंठ आलोक के होंठों पर फिर से रख दिए और धीरे-धीरे एक दूसरे को चूमने लगे।संध्या आलोक की जीभ को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी और साथ-साथ आलोक के सर पर बेतहाशा हाथ फेर रही थी, शायद वो बरसों से इस तरह के प्यार को पाने के लिए भूखी थी।

आलोक भी संध्या का जमकर साथ दे रहा था लेकिन जो संध्या करना चाहती थी वो ही आलोक करता था क्योंकि वो अभी नौसिखिया था।

संध्या आलोक को किस करते-करते अपने हाथ आलोक के कन्धों पर, छाती पर पीठ पर फेर रही थी, आलोक भी साथ दे रहा था।

संध्या ने आलोक को किस करते-करते अपने नाखून के निशान आलोक की छाती और पीठ पर बना दिए, आलोक को कुछ जलन महसूस हुई पर वो कुछ नहीं बोला, संध्या अपनी चरमरीमा पर थी शायद!

संध्या और आलोक को अपना चुम्बन का पाठ शुरू किये लगभग आधा घंटा हो गया था और अब भी वे चुम्बन ही कर रहे थे।

संध्या भी किसी तरह की जल्दबाजी नहीं करना चाहती थी, वो खुद भी मज़ा ले रही थी और आलोक को सारी बातें धीरे-धीरे सिखा रही थी।

शाम के 7:30 बज गये थे, आलोक और संध्या अब भी किस कर रहे थे, इतने में दरवाजे की घंटी बजी, संध्या को लगा कि शायद उसके पति हो सकते हैं, और एक तरफ आलोक केवल चड्डी में था, संध्या ने अपने आपको आलोक से जल्दी अलग किया और आलोक को कपड़े लेकर बाथरूम में जाने को कहा और वहाँ पहनने को कहा।

और उसने जल्दी दरवाज़ा खोला, उसके पति ही थे, निशीथ अन्दर आया तभी आलोक भी बाथरूम से कपड़े पहन कर निकला, निशीथ ने आलोक से पूछा- कैसा चल रहा है? तुम अपनी भाभी को ठीक से सिखा तो रहे हो ना?

आलोक ने ‘जी’ में जवाब प्रिया।

निशीथ के आ जाने से संध्या और आलोक की प्रणय-क्रीड़ा टूट गई थी, थोड़ी देर में आलोक अपने घर चला गया।

आलोक के जाने के बाद निशीथ खड़ा हुआ और अपने रूम की तरफ जाने लगा, संध्या ने पूछा- कहाँ जा रहे हो निशीथ?

निशीथ ने कहा- कपड़े बदल कर लेटूंगा थोड़ी देर…

संध्या ने कहा- मेरे सामने बदल लो ना… कितने दिन हो गये तुम्हारे जिस्म के स्पर्श का आनंद लिए हुए! चलो न आज की रात को मिलन की रात बनायें !

निशीथ थका हारा था तो उसने संध्या के गालों पर हाथ फेरा और कहा- डार्लिंग, आज नहीं, फिर कभी… आज तो मैं पूरी तरह थक चुका हूँ।

संध्या बेचारी तड़पती रह गई! शायद यही कारण था जिसके लिए संध्या आलोक को सेक्स के बारे में सिखाने के लिए तैयार हो गई थी।

खैर उस रात निशीथ के आ जाने से आलोक और संध्या की प्रणय-क्रीड़ा पूरी न हो सकी। आलोक उस रात घर तो गया लेकिन उसके दिमाग में संध्या भाभी ही घूमती रही और अपनी इच्छाओं से विवश आलोक ने उस दिन पहली बार संध्या के नाम की मुठ मारी और सो गया।

अगली सुबह जब निशीथ काम पर चला गया तब संध्या आलोक के कमरे में आई, उस वक़्त आलोक उठा ही था और नाईट ड्रेस में था।भाभी उसके पास गई और बोली- आज 5 बजे क्लास में आना, थोड़ा ज्यादा टाइम मिलेगा!

आलोक ने हामी भर दी और बाथरूम की तरफ मुड़ने लगा।

जैसे ही आलोक मुड़ा, संध्या ने हल्का सा चांटा आलोक के पिछवाड़े पे मारा और मुस्कुराई और चल दी।

शाम के 5 बजे आलोक संध्या के घर पर पहुँच गया, संध्या आलोक की ही राह देख रही थी, उसने आलोक को अन्दर बुलाया और उसे चूमने लगी।आज तो आलोक भी जोश में था, उसे पता था कि चुम्बन कैसे करते हैं, आलोक भी संध्या को पूरे जोश के साथ किस कर रहा था। किस करते-करते परसों की तरह ही संध्या ने आलोक के कपड़े उतार दिए और उसे चड्डी में ही छोड़ा, संध्या आलोक को बेतहाशा चूम रही थी।

फिर संध्या ने आलोक से खुद को अलग किया, थोड़ी झुकी और आलोक के कंधों को चूमने लगी, फिर संध्या और भी नीचे आई, आलोक की छाती पर अपने हाथ फेरने लगी और चूमने लगी।चूमते-चूमते कभी संध्या आलोक के स्तनों पर हल्का सा काट भी लेती। संध्या की इन हरकतों से आलोक के मुख से मस्ती भरी सिसकारियाँ निकल जाती।

फिर संध्या ने थोड़ा होश संभाला और आलोक को कहा- चलो, बेडरूम में चलते हैं।

आलोक बेडरूम की तरफ बढ़ ही रहा था कि संध्या ने कहा- ऐसे नहीं!

आलोक ने पूछा- तो कैसे?

संध्या ने कहा- चलो मुझे उठाओ और मुझे बेडरूम ले चलो।

आलोक ने संध्या को उठाया और बेडरूम की तरफ चल पड़ा। बेडरूम में आते संध्या ने कहा- अब मुझे बेड पर पटको!

आलोक ने बिलकुल ऐसा ही किया। अब संध्या ने आलोक को भी अपनी तरफ खींच लिया, आलोक संध्या की तरफ जैसे ही झुका, संध्या आलोक को चूमने लगी। चुम्बन करते-करते संध्या ने परसों की तरह आलोक का हाथ उठा कर अपने वक्ष पे टिका प्रिया।अब की बार आलोक ने हाथ नहीं हटाया, आलोक का हाथ वहीं रखा रहा। संध्या ने आलोक का हाथ पकड़ा और उसको अपने बूब्स पर धीरे-धीरे कर फिराने लगी।

संध्या ने देख लिया था कि आलोक का लंड अब पूरी तरह तन गया है। फिर संध्या ने आलोक को अपनी ओर खींचा और कहा- बाकी अब कल सीखेंगे।

आलोक ने कहा- क्या भाभी, आप भी? अभी नहीं सीख सकते पूरा का पूरा?

संध्या ने ना कहा और बिस्तर पर से उठ कर किचन की ओर चल पड़ी। आलोक अब चड्डी में खड़ा हुआ, नीचे गया और अपने कपड़े पहन कर जाने लगा।

वो जा ही रहा था कि संध्या ने आलोक को बुलाया और कहा- आज जो काम अधूरा छोड़ा है, उसे याद कर रात को मेरे नाम की मुठ जरूर मारना! मारोगे न?

आलोक खामोश खड़ा रहा।

संध्या ने कहा- बोलो आलोक, मारोगे के नहीं?आलोक हकलाता हुआ बोला- हाँ…

संध्या ने कहा- डरते क्यों हो? ठीक से बोलो कि ‘हाँ संध्या मारूंगा!’

अगले दिन जब आलोक संध्या के घर गया तो संध्या किचन में चाय बना रही थी, आलोक ख़ामोशी से किचन में गया और संध्या को कस के पीछे से पकड़ लिया।संध्या ने कहा- आ गये तुम? चाय पियोगे?

आलोक ने कहा- पिलाओगी तुम?

संध्या ने कहा- आप से अब तुम हो गया? बड़ी जल्दी सीख रहे हो…

आलोक ने संध्या को ऐसे ही पकड़े हुए उसकी गर्दन पर किस किया और बाद में उसके कान पर एक चिकोटा काट लिया।

संध्या ने चाय बनाई और इस बार दोनों ने एक ही कप में बारी-बारी से पी। चाय ख़त्म कर आलोक ने संध्या को गोदी में उठा लिया और बेडरूम की तरफ चल पड़ा।

संध्या ने आलोक को कहा- पहले कपड़े तो उतारो!

आलोक ने कहा- इतनी भी क्या जल्दी है… सब करेंगे।

संध्या ने कहा- काफी सीख गये हो. कैसे हुआ ये मिरेकल यानि जादू?

आलोक ने कहा- भाभी, आज कल ब्लू-फिल्में बहुत चलती हैं न! वो ही देख के सीखा।

संध्या ने पूछा- क्या तुम्हारे पास हैं ऐसी वाली फिल्में?

आलोक ने कहा- हाँ ढेर सारी हैं क्या आप देखेंगी?

संध्या ने कहा- हां, मैं देखना चाहूँगी, क्या तुम्हारे कमरे में हैं?

आलोक ने कहा- हाँ!

भाभी ने कहा- जाओ, ले के आओ, साथ में देखेंगे।

आलोक गया, सी डी ले के आया और प्लेयर में लगा दी।

भाभी ने इसी दौरान आलोक को किस किया और आलोक के एक एक कर कपड़े उतारने लगी और उसे रोज की तरह केवल चड्डी में छोड़ा।

अब दोनों सोफे पे बैठ के फिल्म देख रहे थे, संध्या आलोक का सर अपनी गोदी में रख कर बेठी थी और आलोक संध्या की गोद में चड्डी पहने लेटा हुआ था।

संध्या ने थोड़ी देर बाद देखा कि आलोक का लंड खड़ा हो चुका है, उसने आलोक से बोला- आलोक तुम्हारा तो खड़ा हो गया, इसे शांत करना पड़ेगा।

आलोक ने तपाक से कहा- हाँ भाभी, ऐसा ही लगता है।

संध्या ने इतने में पूछा- आलोक, कल मेरे नाम की मुठ मारी थी?

आलोक कुछ बोल न सका।

संध्या ने कहा- चल बे, अब इतना शरीफ न बन… चल अब बता भी दे!

आलोक ने बोला- हां मारी थी।

संध्या ने कहा- यह हुई ना बात!

बातें करते-करते संध्या ने फ़िल्म बंद कर दी और आलोक को बोली- अब कुछ नया करेंगे।

कहानी जारी रहेगी, आपको यह कहानी कैसी लगी, अपने विचार मुझे जरूर मेल करें।