होम पर वापस जाएं
Hindi Chudai Kahani पठन समय: 13 मिनट पढ़ा गया: 413 बार

टक्कर से फ़क कर तक-5(Takkar se fuck kar tak-5)

iloveall ?️

15 Aug 2014 को प्रकाशित

टक्कर से फ़क कर तक-5(Takkar se fuck kar tak-5)
कहानी सुनें

ऑडियो प्लेयर (Play Audio)

स्वर: लोड हो रहा है...

0:00
0:00

पिछला भाग पढ़े:-टक्कर से फ़क कर तक-4

मैंने जैसे यह सुना तो मेरी चूत से तो जैसे मेरे स्त्री रस की धार ही छूटने लगी। मेरा दिमाग घूमने लगा। अब तो मुझे पूरा यकीन हो गया कि जिस तरह परिस्थितियां बन रही थी, मुझे राजन के सामने नंगी होना ही पड़ेगा, और अगर मैं राजन जैसे सशक्त कामुक मर्द के सामने नंगी हो गयी, तो राजन जैसा लंबा चौड़ा इतने बड़े तगड़े लंड वाला मर्द मुझे थोड़े ही छोड़ेगा?

और मान लो अगर उसने कुछ नहीं भी किया, तो भी मुझे अपने आप पर ही एक ढेले भर का भी विश्वास नहीं था। कि मैं सामने चल कर राजन के सामने नंगी नहीं खड़ी हो जाऊंगी, और मुझे चोदने के लिए उससे मिन्नतें नहीं करुंगी। मैंने यही समझ लिया कि अब बेहतरी उसी में थी कि मैं मान लूं कि उस शाम हर हाल में राजन से मेरी ठुकाई तो होनी ही थी।

कोई अगर मुझे उस समय यह पूछता कि क्या मैं राजन से चुदवाने के लिए तैयार थी? तो सुन कर मुझे हंसी आ जाती। मैं तैयार थी? अरे मैं तो मर रही थी कि कब मुझे राजन कस कर पकड़े और अगर मेरे बदन पर कोई कपड़े हों तो उन्हें उतार फेंके, और खुद अपनी छोटी सी निक्कर निकाल फेंक कर, मुझे उसके कमरे में पलंग पर सुला कर, उसके इतने बड़े दिख रहे लंड को बेरहमी से मेरी चूत में घुसा कर, मुझे चोद-चोद कर मेरी चूत फाड़ दे।

कई महीनों से मेरी तगड़ी चुदाई नहीं हुई थी। चुदवाई तो मैं थी कई बार, पर ऐसा लंड नहीं मिला था चुदवाने के लिए। अब जब सामने चल कर ऐसे लंड से चुदवाने का मौक़ा मिले, तो भला कौन स्त्री उस मौके को जाने देगी? तो इसमें भला ना कहने की कोई गुंजाइश थी क्या?

दीदी ने कहा, “राजन जी, मैं यहां कुछ देर और तैरना चाहती हूं। मेरी सखी को आप ले जाओ। वैसे भी वह आप के कमरे में जाने के लिए बड़ी उत्सुक है। मेरा एक सुझाव है। आप वापस आने की जल्दी ना करें। मेरी सहेली को आप खुद उसके सारे गीले कपड़े निकाल कर, अच्छी तरह से नहला धुला कर, उसे इस तौलिये से अच्छी तरह पोंछ कर, आपके कमरे में उसकी ठीक से खूब अच्छे से सेवा करें। आप उसे अपने कपड़े दें, या कोई कपड़ा ना चाहें तो ना दें। वैसे इस वक्त इन हालात में मुझे नहीं लगता उसे कुछ भी पहनने की जरूरत है। बाकी आप समझदार हैं।”

मैंने दीदी को हाथ थाम कर खींच कर पूल के एक कोने में ले जा कर राजन ना सुन सके ऐसे उन्हें पूरा हिलाते हुए पूछा, “दीदी, तुम यह सब क्या और क्यों बक रही हो? राजन मेरे बारे में क्या सोचेंगे?”

दीदी ने मेरा हाथ छुड़ाते हुए कटाक्ष में पूछा, “राजन क्या सोचेंगे? अरे तुमने राजन के निक्कर में उसका लंड देखा नहीं? कैसा फनफना रहा था तुम्हारे करीब आते ही? जब तुम राजन के पास होती थी, तब मैं पहले तुम्हारे चेहरे को और फिर राजन के लंड को ही देखती रहती थी। उस वक्त तुम्हारे चेहरे पर कौए उड़ते रहते थे, और राजन का लंड ऐसे खड़ा हो जाता था, कि जैसे उसकी पतली सी निक्कर फाड़ कर बाहर ही आ जाएगा।

तुमने देखा नहीं, बेचारा राजन उसे बार-बार अपनी निक्कर में वापस डालने के लिए कितनी मशक्क्त करता रहता था? अरे तुम्हें क्या लगता है क्या वह तुम्हें आज चोदे बगैर छोड़ेगा? और वह छोड़ेगा भी तो क्या तुम उससे चुदवाये बगैर उसे छोड़ोगी? यह सब ड्रामे बाजी मुझसे मत करो। मैं अंधी नहीं हूं। मैंने सब कुछ देख लिया है। अब जाओ बिंदास उससे खूब चुदवाओ और पूरा चुदवाने के बाद ही उसे मेरे पास भेजो।”

मेरे पास दीदी की बात का कोई जवाब ही नहीं था। वैसे दीदी का बात सौ प्रतिशत सच थी। मैं खुद इतनी चुदासी हो रही थी कि मैं क्या बताऊं? मेरी चूत ऐसी मचल रही थी कि मैं कैसे उसे शांत कर पाउंगी यह मैं नहीं सोच पा रही थी। अगर राजन ने मेरे साथ कुछ किया नहीं तो क्या मुझे राजन के कमरे से बिना चुदे वापस जाना पडेगा? मेरा सर घूम रहा था।

खैर, राजन के दिए हुए फर वाले कॉटन के गाउन को मेरे लगभग नंगे बदन के ऊपर पहन लिया और राजन के साथ उसके कमरे की और निकल पड़ी। रास्ते में मैं रिसेप्शन पर बस एक लड़की अपने लैपटॉप में सर नीचा किये हुए लगी हुई थी, उसे ही हमने देखा। पर उसने हमें देखा तक नहीं। मुझे लिफ्ट के पास खड़ी छोड़ कर राजन उस लड़की के पास गए, और उससे कुछ बात की। बाद में मेरे पास आकर राजन ने मेरा हाथ थाम कर लिफ्ट में ना जाते हुए सीढ़ी चढ़ कर पहली मंजिल पर अपने कमरे में ले गए।

रास्ते में राजन ने मुझे कहा, “मैंने रिसेप्शनिस्ट से पूछा कि मुझे कुछ गीले कपड़े धुल कर वापस फौरन चाहिए। तब रिसेप्शनिस्ट ने कहा कि वैसे तो धोबी निकल चुका है फिर भी हम कपड़े एक बैग में रख कर रिसेप्शनिस्ट को देदे। वह धोबी से बात करेगी और अगर वह आएगा तो वह कपड़े धुलवा कर एक घंटे के अंदर ही वापस कर देगी।”

कमरे में पहुंचते ही मुझे महसूस हुआ कि मुझे वह गाउन और मेरी पैंटी और ब्रा भी निकाल कर राजन को देना था। राजन वहां मेरे सामने मुझे देखते हुए खड़े रहे। राजन ने कहा, “तुम पूरी गीली हुई हो। बेहतर होगा कि यह पहने हुए गीले कपड़े निकाल कर मुझे देदो। मैं उन्हें लांड्री वाले को दे दूंगा। और तुम बाथरूम में जा कर गरम पानी में शॉवर के नीचे नहा लो।”

मैं फिर भी वहां चुप-चाप खड़ी रही तो राजन ने मेरी और देखा तब मैंने कुछ क्षोभित हो कर राजन से पूछा, “मैं कैसे अपने कपड़े आपके सामने निकाल सकती हूं?”

राजन ने थोड़ा सा शरारत भरी मुस्कान अपने चेहरे पर लाते हुए कहा, “रोमा, अभी ऐसे ही तुम करीब-करीब नंगी ही हो। मैंने तुम्हें पूल में ऊपर से नीचे तक पूरी नंगी तो देख ही लिया है। अब यह एक छोटी सी ब्रा और यह लंगोटी सी पैंटी निकालने में क्या शर्माना? देखो यार, अभी हम अकेले भी हैं। अब मुझसे क्यों साफ़-साफ़ बुलवाती हो कि तुम मुझसे चुदवाना चाहती हो और मैं तुम्हें चोदना चाहता हूं?

यह भी पढ़ें (Recommended)

Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din – Ep 64

हम दोनों जानते हैं की मैं तुम्हें चोदे बगैर जाने नहीं दूंगा और तुम चुदवाये बगैर जाओगी नहीं। तो अब यह सब औपचारिकता का नाटक छोड़ो। सुखाने के लिए तुम्हें ये निकालने तो पड़ेंगे ही। हां अगर तुम फिर भी जिद्द ही करती हो तो लो मैं दूसरी तरफ घूम जाता हूं। अब तुम यह ब्रा और पैंटी निकाल कर मुझे देदो तो मैं चला जाऊंगा, ओके?” यह कह कर राजन दूसरी तरफ घूम गए।

राजन की खरी-खरी मुझे शूल की तरफ चुभ गयी। उनकी बात सौ फीसदी सही थी। मैं मारे गुस्से के आग बबूला हो गयी। एक तरफ मेरी चूत मुझे परेशान कर रही थी। दूसरी तरफ राजन मुझे परेशान कर रहे थे। गुस्से और क्षोभ में नारी का एक मात्र हथियार होता है आँसू। मेरी आंखों में आंसू भर आये।

मैं लगभग रोने ही लग पड़ी। मैंने राजन की आंखों में आंखें डाल कर कुछ गुस्से से और कुछ कुंठा से पूछा, “क्यों? मैं क्यों निकालूंगी अपने कपड़े? आपके हाथों में मेहंदी लगी है क्या? आपने जब मुझे पूल में नंगी किया था, तब क्या मैंने अपने कपड़े खुद निकाले थे? आप तो स्त्रियों का मन अच्छे से जानते हो। इतना सारा लेक्चर झाड़ने के बदले और यह सब जो आप जानते हो उसे कहने कि बजाए, कुछ उस ज्ञान का कुछ अमल ही किया होता? इन हालात में क्या कोई भी स्त्री अपने कपडे खुद निकालती है भला?”

यह कहते ही क्षोभ और कुंठित मैं फफक-फफक कर रोने लगी। मुझे इस तरह रोते देख कुछ पलों के लिए राजन स्तब्ध मुझे देखते ही रहे। फिर पलक झपकते ही राजन ने मुझे एक फूल की हलकी सी माला जैसे अपनी बाहों में ऊपर उठा लिया। मेरे होंठों पर सख्ती से कस कर अपने होंठ दबा कर राजन ने मुझे जिस जोश और उन्माद से चुंबन उस समय किया, वह मैं जिंदगी भर तक नहीं भूलूंगी।

राजन तो मुझ से भी कहीं ज्यादा पागल हो रहे थे। मेरे होंठ, मेरी नाक, मेरी दाढ़ी राजन कभी अपनी जीभ से चाटते तो कभी इतनी कशिश और जोश खरोश से मुझे चूमते, कि मैं तो उनके चूमने से पागल सी बाँवरी ही हो रही थी। मुझे उठाते हुए मेरी गांड के नीचे उनके हाथ थे। अपनी हथेली से इतनी सख्ती से मेरी गांड के गालों को वह दबाने और मसलने लगे कि मुझे लगा कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो मैं तो राजन की बांहों में ही झड़ जाउंगी।

मुझे चूमते और मेरे बदन के ऊपर के हिस्से को पूरे जूनून से चाटते हुए राजन बोल रहे थे, “रोमा, पता नहीं तुमने मुझ पर क्या जादू कर दिया है? जब से मैं तुमसे टकराया था तब से मैं सिर्फ तुम्हारे बारे में ही सोच रहा हूं। पूरी कांफ्रेंस में मेरा ध्यान ही नहीं लग रहा था। जब मैंने तुम्हें पूल में मुझसे मिलने आते हुए देखा तब मैंने तय कर लिया था कि मैं तुम्हें आज चोदे बगैर नहीं जाने दूंगा।

अगर किसी भी कारण मैं तुम्हें नहीं चोद पाया, तो मैं पागल हो जाऊंगा। पर तक़दीर ने मेरी तमन्ना पूरी कर दी जब तुम अनजाने में ही लड़खड़ा कर पूल में गिर पड़ी। पूल में मैं जान गया कि आग दोनों तरफ से लगी हुई है। तुम्हारी दीदी ने मेरी बात की पुष्टि कर दी।”

राजन ने कुछ देर पागल की तरह चूमने के बाद बाथरूम में ले जा कर मुझे शॉवर के नीचे खड़ा किया और खुद भी मेरी बगल में खड़े हो गए। उस समय राजन की आंखों में मैंने वह नशीला पागल सा जूनून देखा तो मुझे कोई भी शक नहीं रहा कि तब मैं हां कहती या ना कहती, वह मुझे चोदने से बख्शने वाले नहीं थे। शॉवर के तापमान को एडजस्ट कर उन्होंने अपना तौलिया निकाल दिया, और खुद निक्कर में खड़े हो गए।

मुझे अपने करीब खिंच कर उन्होंने बड़े प्यार से मुझे घुमा कर मेरी ब्रा के हुक खोल दिए। फिर मेरे कन्धों से ब्रा की पट्टियां खिसका कर ब्रा को निकाल कर अलग से रख दी। मेरी पैंटी को भी अपने अंगूठे से नीचे खिसका दिया तब मैंने अपने पांव सरका कर मेरी पैंटी भी निकाल दी।

मैं राजन के सामने नंगी हो गयी। स्विमिंग पूल में अफरातफरी के कारण राजन मेरे नंगे बदन को ठीक से शायद देख नहीं पाए थे। पर अब उन्हें पूरा मौक़ा था जब वह मुझे आराम से ऊपर से नीचे तक, आगे से पीछे से बड़े आराम से निहार सकते थे।

शॉवर के नीचे पानी की बूंदें मेरे नंगे बदन के एक-एक अंग के ऊपर से नीचे की तरफ धार बन कर बह रही थी, वह बड़ी ही बारीकी से घूरते हुए देख रहे थे। पानी की एक बूंद जो मेरे सर से मेरे बालों की एक लट से बह कर, मेरे ललाट से होती हुई गर्दन से गुजर कर, मेरे स्तनों की गोलाई के ऊपर से मेरी निप्पलों को छूती हुई, मेरे सपाट पेट पर से मेरी कमसिन नाभि में कुछ देर टिकती हुई, मेरी चूत से ऊपर वाले उभार को पार कर, मेरी जांघों के बीच में मेरी चूत में से बूँद दर बूँद रिस रहे मेरे काम रस से मिलती हुई पानी की एक धारा बन कर बाथरूम के फर्श पर गिर रहीं थी।

इसे राजन इस कदर बारीकी से निहार रहे थे जैसे वह उस बाथरूम में कोई गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत स्थापित करने वाले हों। यह बात और है कि वह बूंदों पर कम पर मेरे अंगों पर ज्यादा अपना ध्यान केंद्रित कर रहे थे।

“support@mohakkisse.com”

अगला भाग पढ़े:-टक्कर से फ़क कर तक-6

कहानी पर अपनी प्रतिक्रिया दें (React to Story)

इसी श्रेणी से अन्य कहानियाँ

Jindagi Ki Kahani – Part II
Hindi Chudai Kahani

Jindagi Ki Kahani – Part II

Jindagi Ki Kahani – Part II

12 मिनट 1,225
जैसा बाप वैसा बेटा-5(Jaisa Baap Waisa Beta-5)
Hindi Chudai Kahani

जैसा बाप वैसा बेटा-5(Jaisa Baap Waisa Beta-5)

पिछला भाग पढ़े:-जैसा बाप वैसा बेटा-4

9 मिनट 722
Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din – Ep 64
Hindi Chudai Kahani

Utejna Sahas Aur Romanch Ke Vo Din – Ep 64

आयेशा ने सुनीलजी का हाथ पकड़ा और साथ में अपनी अपनी बन्दूक सम्हाले दोनों चल पड़े।

16 मिनट 852

पाठकों की राय

0 टिप्पणियां
इस कहानी पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!
🔒 सुरक्षा कारणों से कॉपी करने की अनुमति नहीं है।