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पड़ोसी पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,106 बार

करवा चौथ की रात मनाई सुहागरात

चन्दन टीनू

18 Aug 2014 को प्रकाशित

करवा चौथ की रात मनाई सुहागरात
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मेरी यह सेक्स कथा कुछ दिन पहले गए करवाचौथ की रात की है जब मैंने अपनी पड़ोसन को चुदाई का असली मज़ा प्रिया।

जब करवाचौथ के चार दिन बाकी रह गए तो सभी सुहागिन औरतें तैयारी में लगी हुई थी कि तभी उस पड़ोसन भाभी ने मुझे फ़ोन किया। अनजान नंबर था इसलिए मैंने एक बार में नहीं उठाया. जब दोबारा कॉल आया तो मैंने जैसे ही फ़ोन उठाया तो दूसरी तरफ से एक प्यारी सी आवाज ने ‘हेलो …’ बोलकर दिल को छू लिया.

थोड़ी देर तक वो मीठी मीठी बातें करती रही, फिर मैंने पूछ ही लिया कि आप हो कौन?तब उस भाभी ने अपना नाम नेहा (काल्पनिक) बताया.मैंने कहा- क्या मैं आपको जानता हूं?तो नेहा बोली- जब मेरे पीछे पीछे आकर मेरे बदन को निहारता है तो और कितना जानेगा?

नेहा की यह बात सुनते ही मेरा लन्ड खड़ा हो गया, मैं समझ गया कि ये कौन सी भाभी है.

फिर वो बोली- अपने पड़ोस में आ जा।नेहा भाभी हमेशा चुप्पी साध कर रहने वाली औरत थी, मैंने सोचा कि शायद यह आज रात को ही चुद जाये. मग़र मैंने अपनी भावनाओं पर कंट्रोल किया और नेहा के पास चला गया।जैसे ही मैंने नेहा को देखा तो मन किया कि अभी चोद दूँ.

मगर जरूरी था कंट्रोल करना तो मैंने पूछा- क्या बात है नेहा?ये बोलते ही नेहा बोली- क्या बात है … बड़ा प्यार आ रहा है? नेहा भाभी से सीधा नेहा?और बोली- तेरे मुँह से अच्छा लगता है. चल अब अपनी बाइक ले आ, मुझे बाजार जाना है.मैंने कहा- शाम का टाइम है, देख लो?बोली- सब देख लिया… तो चल।

हम चल दिये. भाभी ने सूट पहन रखा था और बाइक पर दोनों साइड पैर किये हुए बैठी थी. कि तभी सड़क पर बाईक के सामने एक कुत्ता आ गया और मैंने जोर से ब्रेक लगा दिए. तो भाभी मुझसे चिपक गयी और बोली- थोड़ा सब्र करो!फिर हमें बाजार से लौटते हुए काफी रात हो गयी.

मैं चुप था तो नेहा बोली- क्या बात है मेरे मजनूँ … क्या हुआ?मैंने भी मजाक में बोल प्रिया- कुछ नहीं नेहा … अब कौन है तेरे बिना मेरा दूजा?नेहा जोर से हंसी और मेरी पीठ पर मुक्का मार के बोली- जितनी मस्ती चढ़ी है ना … सारी निकाल दूंगी।मैं भी बोला- इसी का तो इन्तजार है।

तभी रास्ता सुनसान देख कर मैंने बाइक रोक दी. भाभी उतर कर साइड में खड़ी हो गयी. पास में ही एक अधूरा बना मकान सा था, मैंने नेहा का हाथ पकड़ा और उसे खींचते हुए उस मकान में ले गया. अंदर जाते ही मैंने भाभी के होंठों पर अपने होंठ रख दिये. तभी मुझे पता लगा कि भाई तो भाभी की आग नहीं बुझा सके तभी भाभी इतनी गरम मसाला है.

किस करते हुए जैसे ही मैंने नेहा की सलवार खोलनी चाही तो नेहा दूर हो गयी और बोली- बस आज के लिए इतना ही … बाकी फिर कभी।मैंने काफी मिन्नतें भी की पर नेहा के दिमाग में बड़ा प्लान चल रहा था जो मैं उस वक्त नहीं समझ सका। लेकिन तब तो मैं नेहा से गुस्सा हो गया.

करवाचौथ वाले दिन तक मैंने न नेहा की तरफ देखा और ना ही कोई बात की।करवाचौथ वाली शाम को नेहा मेरे घर आई और मेरी मम्मी के बारे में पूछा तो मैंने भी गुस्से में बता प्रिया कि वो प्लाट में गयी हैं, आधे घंटे बाद आयेंगी.

यह सुनते ही नेहा ने मुझे मेरे बिस्तर पर धकेल प्रिया और मेरे ऊपर चढ़ गई और मुझे पागलों की तरह किस करने लगी।जैसे ही मैं गर्म हुआ कि तभी नेहा मेरे से दूर हो गई और बोली- अभी बस इतना ही … आज रात को तेरी सारी नाराज़गी दूर कर दूंगी।मैं भी रात होने का इंतजार करने लगा।

तभी मेरी मम्मी आ गयी तो भाभी मेरी मम्मी से बोली- चाची, आज चन्दन को मेरे घर सोने को भेज देना, मेरी सासु माँ ने बोला है.मेरी मम्मी ने मुझे बोला- ओ … आज अपनी भाभी के पास सोने चले जाना।मैंने झूठ मूठ मना किया पर मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे, मैंने बुरा मुँह बना के बोल प्रिया- ओके … चला जाऊंगा।

रात को मां ने कोई ख़ास खाना नहीं बनाया हुआ था, मूंग चावल बनाए थे जो मुझे पसंद नहीं तो मैं बिना खाए नेहा के घर चला गया.वहां जाकर देखा तो नेहा घर में अकेली थी. उसने तरह तरह के पकवान बनाए थे।मैंने पूछा- ये पकवान किसके लिए बनाए हैं?तो नेहा ने कहा- ये मैंने अपने पति के लिए बनाए हैं, आज रात को मैं अपने पति को अपने हाथों से खिलाऊंगी.

लेकिन घर में कोई नहीं था तो मेरे मन में कई तरह से सवाल उमड़ रहे थे कि नेहा के पति कहाँ हैं? वो कब आयेंगे. मेरे बारे में नेहा उन से क्या कहेगी. लेकिन मैंने कुछ भी पूछना उचित नहीं समझा और नेहा जैसे जो करती रही, मैं देखता रहा.

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और इस तरह हमें छोटी-छोटी बातें करते हुए रात के लगभग 9:00 बज गए कि तभी पड़ोसन ने आवाज दी- बहन जी, चांद निकल आया है, अपनी नेहा पाठ कर लो.मैंने कहा- जाओ नेहा … नेहा कर लो!तो नेहा बोली- थोड़ी देर रुको, जब सब ऊपर से नीचे चले जाएंगे, तब हम जाकर नेहा करेंगे.

मैं और नेहा लगभग आधे घंटे बाद छत पर चांद की नेहा करने गये. मैं साइड में खड़ा था तो नेहा ने छलनी में से पहले चांद को देखा फिर मुझे देखा और फिर चांद की किरण की फिर मेरी किरण की.मैं नेहा की हरकत समझ गया और मैंने नेहा को अपने हाथों से पानी पिलाया फिर नेहा को गोद में उठाकर नीचे लाया. मैं उठा कर ला रहा था तभी मेरी वासना इतनी प्रबल हो गई, मन किया कि नेहा को भी चोद दूँ.लेकिन मैंने अपने मन को मारा और अपने लन्ड को कंट्रोल करते हुए चुपचाप नेहा को रसोई के पास उतार प्रिया. नेहा ने एक बड़ी थाली में सारे पकवान सजा लिए और लाकर मेरे पास बैठ गई।मैंने जिंदगी में पहली बार नेहा को अपने हाथ से और किसी औरत को इतने प्यार से खाना खिलाया। नेहा ने भी मुझे इसी तरह बड़े प्यार से खाना खिलाया.

खाना खाने के बाद नेहा ने मुझसे कहा- कि जाओ बेडरूम में आराम करो मैं काम खत्म करके आती हूं, फिर बैठ कर बात करेंगे.मैं बेडरूम में जाकर लेट गया और लेटकर अपनी आंखें बंद कर ली.

कुछ देर बाद नेहा अपना काम निपटा कराई और आकर मेरे बगल में लेट कर मुझे किस करने लगी. मैंने जब अपनी आंखें नहीं खोली और कोई हरकत नहीं की तो मुझसे बोली- मेरे जानू, नाराज हो क्या?मैं कुछ नहीं बोला तो उसने अपने पहने हुए सारे कपड़े निकाल दिए और मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी और बोली- अब मैं देखती हूँ कि तुम्हारी नाराजगी कब तक रहती है? आज तुम्हारे सभी गिले-शिकवे दूर कर दूंगी.

और वो मुझे पागलों की तरह चूमने लगी और बोली- मैंने इस रात का बहुत बेसब्री से इंतजार किया है. आज मुझे इतना प्यार दो जो मुझे आज तक नहीं मिला.यह बात बोल कर उसकी आंखों में आंसू आ गए.मैं सब कुछ देख सकता हूं लेकिन एक औरत की आंखों में आंसू नहीं।

फिर मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों से पकड़कर उसके होंठों पर फ्रेंच किस करने लगा और वो धीरे-धीरे गर्म होने लगी, मुझे किस करते हुए मेरे पूरे बदन पर किस करने लगी और किस करते हुए धीरे-धीरे नीचे जाकर अचानक से मेरे लन्ड को अपने मुंह में ले लिया और पूरा का पूरा उसने अपने मुंह में ले लिया.

मैंने कहा- नेहा क्या कर रही है? मेरा निकल जाएगा!तो उसने छोड़ प्रिया और छोड़ते ही वो लेट गई और बोली- आ जाओ सैंया … अब दिखाओ अपना प्यार!यह कहकर उसने अपनी बांहें फैलाई और मैं भी तुरंत उसकी बांहों में चला गया. मैं उसको प्यार से किस करने लगा और फिर धीरे से मैंने अपना लन्ड नेहा की चुत पर रखकर प्यार से झटका प्रिया और प्यार से पूरा पूरा अंदर डाल प्रिया.

नेहा हल्का सा कसमसाई और फिर मेरे प्यार का मजा लेने लगी. और जैसे ही मैंने पूरा डाला उसने मुझे कस के अपनी बांहों में भींच लिया और बोली- पूरी जिंदगी मुझे ऐसे ही प्यार करते रहना … कभी नाराज मत होना!मैंने भी उसकी हां में हां मिलाई और धीरे-धीरे से किस करते हुए से चोदने लगा.

उस रात हमने तीन बार चुदाई की और सुबह जब नेहा चाय लेकर आई तो मुझे किस करके उठाया और बोली- मेरे पतिदेव, अब तो खड़े हो जाओ, कोई आ जाएगा.तभी मैं उठकर बाहर के कमरे में जाकर लेट गया और वहां चाय पीने लग गया.

तब से आज लगभग इस बात को बीस दिन हो गये, मैंने नेहा के साथ आठ दस बार चुदाई की ही है. नेहा मेरी चुदाई की फैन बन गई है.और नेहा भी कहती है- तुम जैसी चुदाई मेरी पूरी रिश्तेदारी में कोई नहीं करता! मैंने सभी अपनी सहेलियों और बहनों से यह पूछा है, सब कहती हैं कि उनके पति तो बस 2-4 मिनट में ही झड़कर दूर जाते हैं. लेकिन तुम सब कुछ प्यार से करते हो!

फिर एक दिन उसने, जब हम चुदाई कर रहे थे, कहा- मेरी एक सहेली है, बेचारी बहुत दुखी है, क्या तुम उसके एक बार चुदाई कर सकते हो?मैंने कहा- चलो … अगर तुम चाहती हो तो मैं बस एक बार करूंगा! लेकिन उस दिन तुम्हारे साथ भी करुंगा!“ओके, ठीक है … मैं कहीं भागी नहीं जा रही, मेरे साथ भी कर लेना लेकिन एक बार तो उसको चोद कर उसकी तसल्ली कर देना.

और हाँ, मुझे बाद में पता चला था कि नेहा के पति रेलवे में टी टी ई हैं और उस दिन उनकी ड्यूटी के कारण वो घर पर नहीं थे. घर में नेहा की विधवा सास थी जो अस्वस्थ रहती है और जल्दी सो जाती है.

मेरी कहानी आपको कैसी लगी? और कोई सुझाव देना चाहते हो तो मुझे मेल कर सकते हैं. मुझे आपके प्यार विचार आदि सभी का इंतजार रहेगा. जल्दी आपके आपके लिए एक नई कहानी लेकर प्रस्तुत होऊंगा, तब तक के लिए नमस्कार!support@mohakkisse.comफिर मिलते हैं.

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

जूही परमार

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

प्रेम सिंह 143

2 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

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