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Group Sex Story पठन समय: 12 मिनट पढ़ा गया: 1,323 बार

खेत में मेरी चूत का गैंगबैंग(Khet mein meri chut ka gangbang)

sweta566

11 Sep 2024 को प्रकाशित

खेत में मेरी चूत का गैंगबैंग(Khet mein meri chut ka gangbang)
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जैसा कि आप जानते हैं पिछली बार कैसे सब्जी वाले ने खेत में मेरी चुदाई की, और तब से कई बार उसने मुझे चोदा। अब उससे बिना चुदे रहा नहीं जाता। और इस बार मेरे साथ ऐसा कुछ हुआ, जिसकी मुझे उम्मीद ना थी। पढ़िए क्या हुआ, इस कहानी में।

तो दोस्तों हुआ ये कि एक दिन मैं सब्जी लेने गई,‌ और सब्जी वाले के पास बैठ गई‌। तो सब्जी वाला मौका देख कर मेरी चूचियाँ मसल देता और बोला-

वो: भाभी जी आज केला, बैगन या खीरा चाहिए? जो तबियत नीचे से ऊपर तक खुश कर दें।

मैं भी मजाक में बोल गई: अब तो सिर्फ केले से मन नहीं भर रहा है। मुझे तो केला बैगन और खीरा ककड़ी सब चाहिए एक साथ।

सब्जी वाला: ठीक हैं भाभी लीजिए केला, खीरा और बैगन सब डाल लीजिए अपनी बुर में, और ये बताईए मेरी प्यारी बुरचोदी रंडी भाभी रखैल अब कब दोगी खेत जोतने?

मैं: परसों आपकी दुकान बंद रहेगी ना, तो उस दिन शाम को आऊँगी खेत पर। लेकिन एक गन्ने के अलावा और मिल जाए तो मजा आ जाए (मजाक में कह कर चली आई)।

उसके बाद मैं घर गई और सब को खाना बना कर, खिला कर, अपने कमरे में आ कर, एक ब्लू फिल्म लगा कर देखने लगी। उसमे एक औरत को तीन लोग चोद रहे थे, और वो मजे से चुदवा रही थी।

ये देख कर मैं गरम होने लगी और बैगन अपनी बुरचोदी बुर मे डालने लगी‌। तभी सोचने लगी कि क्यू ना एक साथ तीनों बुरझौसी बुर में और गांड फुलौनी गांड में डाल कर देखूँ।

फिर मैं अपनी बुर मे खीरा डाल ली। लेकिन गांड में बैगन नहीं घुस रहा था, तो फिर मैंने अपनी गांड में तेल लगाया, और बैगन को तेल में डुबो कर गांड मे डालने लगी। वाह क्या मजा आ रहा था। और कुछ देर ऐसे ही करने पर मैं झड़ गई और सो गई।

फिर वो दिन आ गया और मैं टाइट लाल ब्लाउज पहन ली और एक सिल्की लाल साड़ी पहन कर करीब 4 बजे निकल दी। ये बोल कर कि सहेली के घर जा रही थी, 11 बजे तक आऊँगी।

जब निकल रही थी मोहल्ले से तो दो-तीन औरते आ रही थी। वो आपस में बात करने लगी, “देखो ये बुरझौसी बन ठन कर निकल दी। रंडीपना करने जा रही हैं किसी के साथ। 31 की उम्र में इसका छिनालपना बढ़़ता जा रहा हैं। पति बेचारा विदेश में हैं और बीवी रंडीगिरी कर रही हैं। मजे ही मजे है इसके तो।” फिर मैं खेत पर पहुँच गई, और सब्जी वाला (नाम सन्नी) पहले से मेरा इंतजार कर रहा था।

सन्नी: वाह मेरी रंडी, क्या मस्त माल लग रही है तू कुतिया! इतनी बार तुझे चोद चुका हूं, पर तू इतनी मस्त बन ठन कर आती है कि जी करता है जहा मिले तुझे पटक के पेल दूँ।

मैं: अरे पेल दो ना, पिलवाने ही तो आई हूं। बोलो कहाँ पेलोगे। सारी जगह तो खाली हो गई, ऐसे में हमें कोई देख लेगा।

सन्नी: अरे रंडी, कोई देख लेगा तो क्या उसे भी अपनी बुर मे घुसा लेना। फिर कोई क्या करेगा? चल गन्ने का खेत हैं ना, सारी तैयारी हैं। तुझे आज गन्ने चुसाऊँगा और डालूँगा, वो भी खेत के सारे गन्ने।

खेत के बीचो-बीच एक साफ मैदान बना था, और एक प्लास्टिक चादर बिछाया गया था पुआरा के ऊपर। फिर पहुंचते ही सन्नी पीछे से मेरी चूचियों को पकड़ कर दबाने लगा, और गाली देने लगा।

सन्नी: उफ्फ़ साली, क्या मस्त माल है। तेरी चूचियाँ तो गजब की हैं। आज तो इनका दूध निकाल कर दम लूँगा, चाहे तुझे दर्द ही क्यूँ ना हो कुतिया। आज तुझे वो मजा दूंगा तू याद रखेगी।

और वो मेरी ब्लाउज के खोल दिया और जोर-जोर से मसलने लगा।‌ फिर आगे आ कर मुझे किस्स करने लगा और मेरे पेट की नाभि मे उंगली करने लगा। फिर मेरी साड़ी और पेटीकोट में हाथ डाल कर मेरी बुर में उंगली करने लगा। उसके बाद अपना लुंगी उतार दिया और बोला-

सन्नी: रानी, जानेमन, तनी लड़वा चूस के खड़ा ता करा, तबे ना तोहर बुरिया में घुसी और तोहार बुर के भोंसड़ा बनाईब हो करेजा।

फिर मैं लंड मुह में लेकर चूसने लगी, और वो मेरा सर पकड़ कर जोर-जोर से आगे-पीछे करने लगा। कभी-कभी तो गले के अंदर तक उतार देता। फिर अपने पेलहर/आंड भी चुसवाता। मैं भी मजे से चूस रही थी। फिर उसने मुझे बोला-

सन्नी: ये रानी, अब तोहार बुरइयाँ चटब (और एक ही झटके में मेरी साड़ी निकाल दिया)।

पेटीकोट का नाड़ा खुल नहीं रहा था तो उसने एक जोर के झटके से नाड़ा ही तोड़ दिया। फिर मैं लेट गई और उसने साड़ी मेरे मुंह पर फेक दी, और मेरी चूत चाटने लगा। मैं अब बहुत गरम हो गई थी, और उसका सर पकड़ कर अपनी बुर पर रगड़ रही थी। करीब 10 मिनट चाटने के बाद मैं बोली-

मैं: सन्नी राजा, पेल दो मेरी बुरिया। कई दिनों से चुदी नहीं हूं।

इतना कह कर मैं जैसे ही साड़ी अपने मुंह से हटाई, मैंने देखा कि मेरे आस पास 4 और लोग खड़े थे। वो भी नंगे थे और मुस्कुरा रहे थे। मैं डर गई और अपनी साड़ी से अपने आप को ढकने लगी और बोली-

मैं: सन्नी ये कौन हैं?

सन्नी: अरे जानेमन, डरो मत। ये भी सब्जी वाले ही है, और तुम्हें भी तो केला, खीरा, ककड़ी और बैगन सब चाहिए थे। तो लो मजे, वैसे भी तुझे क्या फरक पड़ता है रंडी। आज तो समझ किसी कोठे पर हैं, और चुद मजे से।

फिर उसने मेरी साड़ी खींच ली।

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सन्नी: चलो भाइयों अपना लंड चुसवा कर परिचय दो अपना-अपना।

फिर एक मेरे पास आया और अपना लंड मेरे मुह के पास लाकर बोला: जी मैं राज हूं।

उसका लंड मोटा था करीब 6.5 इंच का, और मैं चूसने लगी गपा-गप। पूरा मुँह थूक से फ़च फचर कर रहा था मजा। फिर दूसरा आया, उसने भी अपना लंड मेरे सामने रख दिया। उसका बड़ा और मोटा था। लंड की चमड़ी आगे से कटी थी। मैं समझ गई वो मुस्लिम था, और उम्र तकरीबन 55 की होगी।

वो बोला: मेरा नाम समीम खान हैं, लोग खान मियां कहते हैं।

फिर वो अपना लंड मेरे मुँह में पेलने लगा। इसी तरह काजू और मनु दोनों का भी लंड चूसने लगी, और बाकी सब अब मेरे आगे-पीछे हाथ फेरने लगे।

सन्नी: तो कैसी लगी मेरी स्वेता रंडी?

खान मियां: मस्त माल है सन्नी बेटा। शुक्रिया इस रंडी को हमें भी चोदने का मौका दिया। आज तो इस स्वेता रंडी का हलाल करूंगा। इतना पेलेंगे साली को कि रोज हमसे चुदे बिना ना रहे। आज हम सब के सब्जी और गन्ने इसकी बुर मे डाल देंगे।

फिर खान मियां ने मुझे पीठ के बल लिटा कर, मेरे दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख कर, लंड मेरी बुर में सेट कर एक झटका मारा कि लंड मेरी बुर में समा गया। फिर भी अभी एक इंच लंड बाहर ही था।

वो दूसरा झटका मरते हुए बोले: साली बहुत बड़ी छिनाल है। लगता बहुत जल्द जवान हो गई थी, और अनगिनत लंड से चुदी हैं, इसलिए इसे ज्यादा दर्द नहीं हुआ।

फिर थप थप की आवाज आने लगी, और काजू मेरी मुँह के पास आकर अपने पैरों के बीच मेरे मुँह में लंड ठूस दिया। सन्नी और राज मेरी चूचियाँ मसलने और चाटने लगे। मैं तो मानों सातवें आसमान में थी। मुँह में गप गप और बुर/चूत और लंड तकरार से थप थप की आवाज आ रही थी।

गलियों की बरसात हो रही थी, “क्या रंडी हैं साली। मैं जनता था ये सन्नी से चुदती हैं। और सन्नी को डराया कि सब को बता दूंगा, तभी तो इसने हमें बुलाया। अब एक दिन इसे मैं घर ले जाकर चोदूँगा, पूरे घर में दौड़ा दौड़ा कर।”

तभी बारिश भी होने लगी और उसी खुले आसमान में मेरी चुदाई होती रही। पानी पड़ने से चट चट की आवाज आने लगा।

15 मिनट बाद मुझे घोड़ी बनाया गया, और नीचे से सन्नी ने मेरी बुर में और राज ने मेरी गांड पर लंड सेट किया, और धीरे-धीरे अंदर डालने लगा। अब चूत और गांड की कुटाई होने लगी। ऊपर से बारिश और खान ने मेरा दूध पीने लगा, और मन्नू मेरी मुँह में लंड पेलने लगा।

मैं: उफ्फ़ और पेलो, चोदो मुझे इस बुरझौसी बुरचोदी रंडी की गांड और बुर फाड़ो अहह उफ्फ़ वहह। मैं सच में रंडी बन गई।‌ हाए मर गई आज तो, इतने गन्ने कल ना मिले तो क्या होगा मेरा? कौन चोदेगा मुझे? जी भरके चोदो मुझे। सब औरते जलती है मुझसे, जो मुझे इतने लंड मिलते हैं।

राज: हम हैं ना जानेमन तुम्हारी प्यास बुझाने के लिए।‌ जब तुम्हारी चुत चुदासी हो, आ जाना हमारे पास। कोठे की रंडी बना देंगे। स्टेशन के पास कहो तो तुम्हारा रेट लगा दूँ, पैसे भी मिलेंगे?

सन्नी: अरे उसकी जरूरत नहीं, साली बहुत बड़ी रंडी है। मिल रही है फ्री की चूत तो चोदो। ज्यादा ज्ञान ना दो साली को। ये तो कहीं भी खड़ी हो जाए, लाइन लग जाएगी चोदने वालों की। पेलो, साली की गांड फाड़ देना राज भैया। ताकि इसका छेद दिखे आराम से। डरो मत, इसे कुछ नहीं होगा। जितनी ताकत हो साली को पूरे ताकत के साथ पेलो। रंडी हैं साली रंडी।

फिर 30 मिनट बाद सन्नी और राज मेरी चूत और गांड में ही झड़ गए। मैं तो 3 बार झड़ चुकी थी। फिर अब बारी थी खान मिया और मनु। वो दोनों मुझे गोद में बिठा कर मेरी चूत और गांड चोदने लगे।

“साली हरामजादी, बुरमारी, गजब रंडी है रे तू। तेरी जैसी माल चोद कर मजा आ रहा हैं।” उन दोनों ने भी मुझे 20 मिनट तक चोदा। बारिश अभी भी हो रही थी और चुदते हुए 8 बज गए थे।

फिर मैं बोली: सन्नी, अब मुझे चलना चाहिए।

सन्नी: बस एक-एक बार और अपनी खेत जुताई कर लो, और सब्जी की बीज डालने दो।

मैं: ठीक हैं, पर जल्दी लंड पेलो।

फिर चारों ने अलग-अलग मेरी चूत और गांड फाड़ी। जम कर चुद कर मैं भी आज खुश हो गई थी। ऐसे चुदाई जो किसी रंडी की भी नहीं हुई होगी। फिर 10 बजे मैंने अपनी भीगी साड़ी पहनी, और वो भी बिना पेटीकोट के, क्यूंकी उसका नाड़ा टूट चुका था और बारिश बंद हो चुकी थी।

रास्ते में साड़ी मेरे बदन से चिपक गई थी, जिससे सब मेरे मर्द मेरी तरफ देख रहे थे, और कोई तो गंदे कमेंट्स कर रहा था, और कोई मौका देख कर मेरी गांड पर थप्पड़ और छिकोटी काट लेता।

तो दोस्तों कैसी लगी ये कहानी कमेंट्स में जरूर बताएं, और पढ़ते रहिए कि कैसे ट्रुथ और डेयर खेल कर सहेली के साथ चुदी।support@mohakkisse.com

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