पिछला भाग पढ़े:-गांव के लड़कों ने छोटी बहन काव्या को अपने जाल में फंसाया-4
आशा है आपने पिछली कहानी को पढ़ लिया होगा। आगे की कहानी…
कैसे मोहन और लाखन चाचा रुकने का नाम नहीं ले रहे थे और सोनू चुप-चाप काव्या की चुदाई देखने को मजबूर था।
मोहन और लाखन चाचा काव्या की जवानी देख पागल थे, और खेत की मेड़ पर अब वह मंजर था, जिसे देख कर शैतान भी कांप जाए। लाखन और मोहन, दोनों की हवस अब सातवें आसमान पर थी। उन्होंने तय किया कि अब वे काव्या को एक साथ “सांड” की तरह जोतेंगे। उन्होंने काव्या को सरसों की नर्म टहनियों के बीच घुटनों के बल झुका कर “कुतिया” बना दिया। काव्या का गोरा और गदराया हुआ पिछवाड़ा अब उन दोनों के सामने बिल्कुल खुला था।
लाखन ने बिना किसी रहम के काव्या की गांड की दरार को अपने थूक से गीला किया और अपना काला मूसल जैसा लंड उसके तंग छेद पर टिका दिया। वहीं, मोहन उसके आगे खड़ा होकर उसकी चूत में अपना औजार दोबारा उतारने को तैयार था।
लाखन: “मोहन भाई, आज इसकी जवानी को ऐसा निचोड़ेंगे कि ये ताउम्र याद रखेगी।”
जैसे ही लाखन ने अपनी पूरी ताकत लगा कर एक गहरा धक्का मारा, उसका लंड काव्या की गांड को चीरता हुआ अंदर घुस गया… ‘कड़क-फट…!’
काव्या: “आह्ह्ह्ह्ह्ह… नहीं चाचा… मर गई… फट गई मेरी गांड… निकालो इसे…!”
पर लाखन को तो खून लग चुका था। उधर सामने से मोहन ने भी एक ज़ोरदार हूक भरा और अपना लंड काव्या की चूत की गहराई में उतार दिया। अब काव्या दो पहाड़ों के बीच पिस रही थी।
जब दोनों ने एक साथ लय बना कर झटके मारने शुरू किए, तो मंजर और उत्तेजक हो गया। काव्या की थरथराती गांड ने ‘थप-थप’ का शोर करना शुरू कर दिया,गांड ने उछलना शुरू कर दिया। लाखन जब पीछे से प्रहार करता, तो काव्या की भारी और गोल गांड थर-थर-थर-थर कांपने लगती। हर टक्कर इतनी जोरदार थी कि मांस से मांस टकराने की ‘थप-थप-थप-थप’ की आवाज पूरे सन्नाटे को चीर रही थी।
दोनो दोहरा प्रहार करने को इशारे में ही बात करते हैं और फिर आगे से मोहन उसे झिंझोड़ रहा था और पीछे से लाखन उसकी गांड के परखच्चे उड़ा रहा था। काव्या का शरीर किसी रबर की गुड़िया की तरह आगे-पीछे डोल रहा था।
लाखन: “देख मोहन भाई, कैसी उछल रही है साले की गांड! जैसे कोई जिंदा मछली तड़प रही हो।”
काव्या की आंखों के आगे अंधेरा छा रहा था। उसकी गांड का छेद लाखन के मोटे वारों से लाल होकर सूज गया था। लेकिन वह दरिंदा रुकने का नाम नहीं ले रहा था। वह उसे कमर से पकड़ कर इतने बेरहम झटके मार रहा था कि काव्या की गांड का हर हिस्सा बुरी तरह फड़क रहा था। खेत की मिट्टी काव्या के पसीने और इन दोनों की लार से सन चुकी थी। मोहन और लाखन अब पागलों की तरह उसे बारी-बारी से ठोक रहे थे। झटकों की रफ्तार इतनी तेज़ थी कि ‘पट-पट-पट-थप-थप’ का शोर एक संगीत की तरह बज रहा था।
काव्या की सिसकियां अब धीमी पड़ रही थी, वह बस एक बेजान मांस का लोथड़ा बनी इन दोनों को सह रही थी। लाखन ने अपना हाथ काव्या के मुँह पर दबा दिया ताकि उसकी चीखें बाहर ना निकलें और फिर अंतिम प्रहारों का वह दौर शुरू किया जिसने काव्या के जिस्म के रोम-रोम को हिला कर रख दिया।
उस शाम उस सरसों के खेत में काव्या की मासूमियत और जवानी, इन दो पुराने भेड़ियों की हवस की भेंट चढ़ गई। खेत की मिट्टी अब काव्या की सिसकियों और उन तीनों मर्दों की भारी सांसों से बोझिल हो चुकी थी। लाखन और मोहन का जोश थमने का नाम नहीं ले रहा था। काव्या का शरीर अब पूरी तरह जवाब दे चुका था, लेकिन उसकी देह का उभार और उसकी मजबूरी इन दोनों के लिए किसी नशे की तरह काम कर रही थी।
लाखन ने अपनी पकड़ काव्या की कमर पर और भी मज़बूत कर ली। उसने काव्या के चेहरे को मिट्टी की ओर दबा दिया ताकि वह हिल भी न सके। अब वार और भी गहरे और बेरहम होने वाले थे।
लाखन: “मोहन भाई, अब इसकी गांड की गहराई नापनी है। देख कैसे फड़क रही है इसकी जवानी!”
जैसे ही लाखन ने पीछे से अपनी पूरी ताकत झोंकी, काव्या की गांड के मांसल हिस्से ‘थप-थप-थप-थप’ की आवाज़ के साथ ज़ोर-ज़ोर से उछलने लगे। हर झटके में उसका पूरा बदन आगे की ओर खिंच जाता, जहां मोहन उसे संभालने के नाम पर और भी बेरहमी से चोद रहा था।
गांड लंड जाने से गांड की थरथराहट और धमाके से काव्या की गांड अब लाल होकर बुरी तरह सूज चुकी थी, लेकिन लाखन की हवस की आग अभी शांत नहीं हुई थी। वह किसी पागल सांड की तरह उसे पीछे से ठोक रहा था। सरसों के शांत खेत में अब सिर्फ ‘चट-चट’ और ‘पट-पट’ का शोर था।
काव्या की हालत: उसकी गांड झटकों के असर से थर-थर-थर-थर कांप रही थी। जब लाखन अपना पूरा लंड अंदर उतारता, तो काव्या का पिछवाड़ा गुब्बारे की तरह फूल कर वापस पिचक जाता।
मोहन: “लाखन भाई, बस कर, अब मेरा भी निकलने वाला है! इसकी चूत तो एक-दम मक्खन जैसी हो गई है।”
दोनों ने अपनी रफ़्तार को चरम सीमा पर पहुँचा दिया। अब वे बात नहीं कर रहे थे, बस उनके शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे। लाखन ने काव्या के बालों को पीछे से कस कर खींचा और उसकी गर्दन पर अपने दांत गड़ा दिए। तभी, एक ज़ोरदार गुर्राहट के साथ लाखन का शरीर अकड़ गया। उसने अपनी पूरी ज़िंदगी की जमा पूँजी काव्या की गांड के अंदर खाली कर दी। ठीक उसी वक्त, मोहन ने भी अपना सारा गर्म लावा काव्या की चूत की गहराई में उड़ेल दिया।
काव्या एक आखिरी बार ज़ोर से तड़पी और फिर निढाल होकर ज़मीन पर गिर पड़ी। सरसों के पीले फूलों के बीच वह किसी टूटी हुई डाली की तरह बिखरी पड़ी थी। लाखन और मोहन हांफते हुए अपनी लुंगियाँ संभालने लगे, जबकि दूर बैठा सोनू अब भी सन्न था।
उस शाम के सन्नाटे में सिर्फ काव्या की सिसकियां बची थी और सरसों की खुशबू में घुली हुई हवस की वो गंध, जो इस खेत के इतिहास में हमेशा के लिए दफन हो गई।
पसीने से लथपथ और हवस में डूबे लाखन और मोहन अब रुकने के मूड में बिल्कुल नहीं थे। काव्या की हालत अधमरी जैसी हो चुकी थी, लेकिन उसकी गदराई हुई देह इन दोनों बूढ़े भेड़ियों को बार-बार उकसा रही थी।
लाखन ने एक दरिंदगी भरी मुस्कान के साथ काव्या को दोबारा पलटा और उसे चित लेटा दिया। काव्या की जांघें अब कांप रही थीं और उसकी चूत और गांड से सफ़ेद चिपचिपा पानी बहकर सरसों की मिट्टी में मिल रहा था।
लाखन: “मोहन भाई, अब इसे थोड़ा आराम से नहीं, बल्कि ऐसे चोदेंगे कि राजू की बहन कल चल ना पाए।”
लाखन ने काव्या की एक टांग अपने कंधे पर रखी और मोहन ने दूसरी। अब काव्या का पूरा निचला हिस्सा हवा में था और उसकी चूत और गांड बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी। लाखन ने दोबारा अपना लंड सीधे उसकी चूत में उतारा, जबकि मोहन ने अपना हाथ काव्या के स्तनों पर जमा दिया।
‘पट-पट-पट-पट-पट!’ अब झटकों की आवाज़ पहले से भी ज्यादा गूंज रही थी। लाखन ने जब उसे ठोकना शुरू किया, तो काव्या का शरीर नीचे की ओर धंसता जा रहा था। हर धक्के के साथ उसकी गांड नीचे जमीन से टकराती और ‘थप-थप’ की आवाज़ आती।
गांड का कंपन और अपने बेकाबू हवस के चलते मोहन का मन फिर से बदला। उसने लाखन को इशारा किया और काव्या के मुँह की तरफ से हट कर उसके पीछे पहुँच गया। अब दोनों ने एक ऐसी पोजीशन ली जहाँ काव्या पूरी तरह से बेबस थी। लाखन आगे से उसकी चूत फाड़ रहा था और मोहन ने पीछे से उसकी गांड के छेद पर अपना लंड टिका दिया।
जैसे ही दोनों ने एक साथ प्रहार किया, काव्या की गांड थरथराहट के साथ थर-थर-थर-थर बिजली के झटके की तरह कांपने लगी। जिससे भीषण आवाज़े निकलते हुए पूरे खेत में ‘चट-चट-चट-चट’ और ‘पट-पट-पट-पट’ का ऐसा शोर मचा कि पास बैठा सोनू अपनी आँखें बंद करने पर मजबूर हो गया।
मोहन: “आह्ह लाखन भाई… क्या गजब की पकड़ है इसकी गांड में… ऐसा लग रहा है जैसे कोई गर्म गुफा मुझे निगल रही हो!”
लाखन और मोहन अब होड़ लगा रहे थे कि कौन ज्यादा ज़ोर से झटका मारता है। काव्या का शरीर पसीने से नहा चुका था, उसके बिखरे हुए बाल मिट्टी में सन गए थे, लेकिन इन दोनों की प्यास बुझने का नाम नहीं ले रही थी।
लाखन ने काव्या की कमर को अपनी उंगलियों से इतना ज़ोर से भींचा कि वहां नीले निशान पड़ गए। उसने अंतिम कुछ भयानक झटके मारे, उसकी सांसें उखड़ रही थीं और आँखों में खून उतर आया था।
“ले रंडी… संभाल इसे!” एक ज़ोरदार चीख के साथ लाखन ने अपना सारा वीर्य उसकी चूत में भर दिया और मोहन ने ठीक उसी पल उसकी गांड के अंदर अपना सैलाब छोड़ दिया। काव्या का शरीर एक बार ज़ोर से झटका खाकर शांत हो गया, जैसे किसी जलती हुई मोमबत्ती को बुझा दिया गया हो।
सरसों के खेत में अब सिर्फ उन दोनों चाचाओं की भारी सांसों की आवाज़ थी और दूर कहीं सियार के रोने की आवाज़ गूँज रही थी। जिससे लोगों को ये एहसास हुआ कि शाम हो चुकी है पर लाखन और मोहन का मन अब भी उस मखमली बदन से भरा नहीं था। उन्होंने काव्या को अर्ध-बेहोशी की हालत में ही सीधा लिटाया और उसकी सुडौल, गदराई हुई चूचियों पर टूट पड़े। काव्या के स्तन हवस के इस प्रहार से लाल हो चुके थे, लेकिन चाचाओं की जुबान और हाथों ने उन्हें फिर से अपनी चपेट में ले लिया।
लाखन ने एक चूची को अपने पूरे मुँह में भर लिया और उसे किसी भूखे बच्चे की तरह ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा, वहीं मोहन दूसरी चूची को अपनी उंगलियों के बीच मसल रहा था। चूचियों का उभार देख चाचा लोग गर्म हो चुके थे, चाचाओं की गर्म सांसों और लार के स्पर्श से काव्या की चूचियां पत्थर की तरह टाइट हो गई। उनके निप्पल अकड़ कर बाहर निकल आए थे, जिन्हें लाखन अपने दांतों से हल्के से काट रहा था।
काव्या की चूचियां और मखमली गोरा बदन पसीने और लार से चमक रहा था। मोहन उसके पेट और नाभि पर अपनी खुरदरी हथेली फेरते हुए उसकी कोमलता का आनंद ले रहा था।
कुछ ही देर में वो दोनो सोनू को ज़लील करने को सोचने लगे और फिर चुदाई और छेड़-छाड़ के इस दौर के बीच, मोहन पास ही सहमे बैठे सोनू को तड़पाने लगा कि वो तुम्हारी माल को मस्त चोद रहे हैं, और ऐसा करने में उन दोनों को एक अलग ही मज़ा आ रहा था।
क्या अभी भी ये चुदाई रुकेगी या नहीं जानने के लिए बने रहें अपने भाई राजू के साथ।
कमेन्ट करके जरूर बताएं कहानी कैसी लगी, धन्यवाद !
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