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खुले आँगन में नंगी दीदी का खुला स्नान

अरविन्द कुमार

21 May 2011 को प्रकाशित

खुले आँगन में नंगी दीदी का खुला स्नान
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ठीक से तो याद नहीं पड़ रहा, पर मैं शायद बारहवीं कक्षा में रहा होऊँगा, गर्मियों की छुट्टियाँ चल रही थी, पूरा दिन घर में ही रहना पड़ता था और दूसरा कोई काम नहीं!वो कहते हैं न कि ‘खाली दिमाग शैतान का घर…’ मेरे साथ एकदम ऐसा ही था, मैं दिन भर घर में इधर उधर घूमा करता था।

एक दिन ऐसे ही घूमते घूमते मैं अपने घर के चौबारे पर था, छत की तो चारों तरफ से चारदीवारी थी लेकिन उसमें हर जगह जालियाँ, झरोखे बने थे जो हमारे घर आँगन में भी खुलते थे और आस पास के घरों में भी… उन झरोखों से अपने आँगन का नजारा तो साफ़ दीखता ही था साथ ही साथ पड़ोसियों के आँगन का भी भरपूर नजारा मिलता था।

बगल वाले इस पड़ोस के घर में कोई अनजान लोग नहीं बल्कि अपने ही परिवार के लोग रहते थे, मेरे पिताजी के चचेरे बड़े भाई और उनका परिवार!उनके परिवार में तीन बेटियाँ और दो बेटे थे ! हालांकि उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, फिर भी दो बड़ी बेटियों की शादी कर चुके थे और तीसरी ममता दीदी के लिए लड़का ढूंढ रहे थे।उस वक्त ममता दीदी की जवानी उफ़ान पर थी, उनकी जवानी के दर्शन मैंने कई बार अपने दरवाजे पर खड़े होकर किए थे जब वह अपने दरवाजे पर झाड़ू लगाने आती थी, झुक कर जब झाड़ू लगा रही होती थी तो क्या नज़ारा होता था दोस्तो, मैं वर्णन नहीं कर सकता ! कमीज के ऊपर के हिस्से से दोनों चूचियाँ मानो निकल कर गिर पड़ेंगी।

दरअसल गरीबी की वजह से वो अपनी बड़ी बहनों के पुराने काफी खुले गले वाले, घिसे पतले कपड़े वाले सूट पहन लेती थी।खैर ममता दीदी चाहे जो भी पहनती थी, माल बड़ी सेक्सी थी… मैं तो बस इसी ताक में था कि कभी उनको नहाते हुए देखूँ। इसी चक्कर में अक्सर अपनी छत से उनके आँगन में झांक लिया करता था।

और मुझे अब तक विश्वास नहीं होता कि एक दिन मुझे ममता दीदी की नंगी चूत के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो गया!हुआ यूँ कि एक दिन सुबह दस बजे के करीब ऐसे ही झांकते हुए मुझे लगा कि दीदी नहाने की तैयारी में है, उस समय वे अपने घर में शायद अकेली थी, इसलिए पूरी स्वछंदता से जो भी मन में आ रहा था, कर रही थी।

मैंने देखा कि उन्होंने अपनी सलवार उतार रखी थी, गर्मी भी बहुत थी उस दिन और ऐसे ही सारा काम निपटाया जैसे बर्तन धोना, झाड़ू लगाना, कपड़े धोना आदि… ये सभी कार्य उन्होंने आँगन में लगे हैण्ड पम्प से ही किए और फ़िर वहीं पर फिर जब नहाने बैठने लगी तो पहले उन्होंने अपनी कमीज उतारी और दीनी की बड़ी बड़ी चूचियाँ पूरी नंगी मेरे सामने थी। दीदी के बदन पर उस वक्त सिर्फ़ एक कच्छी थी।

तभी दीदी ने कच्छी भी उतार दी और पटरी पर बैठ कर अपनी चूत को देखने लगी।बालों के जंगल से भरी चूत मेरे आँखों के बिल्कुल सामने ही खुली नंगी दिख रही थी।मैं न जाने क्यों थर थर काँप रहा था, शायद किसी के आ जाने के डर के कारण या फिर ममता दीदी का चेहरा ऊपर हो और वो मुझे ना देख लें, इस डर से!

जो भी हो मैं डरते डरते अपनी नंगी दीदी को देखता रहा। उनकी उफनती जवानी अपने चरम पर थी, बड़ी बड़ी चूचियाँ फूली हुई चूत…. माँ कसम गजब नजारा था!

नंगी होने के बाद दीदी ने देखा कि पानी की बाल्टी तो खाली थी।वो खड़ी हुई और हैण्ड पम्प चला कर बाल्टी में पानी भरने लगी।

गजब… दीदी का पूरा बदन हिल रहा था, चूचियाँ ऊपर नीचे झूल रही थी, नंगे चूतड़ भी इधर उधर ऊपर नीचे मटक रहे थे।जिन लोगों ने हैण्डपम्प से पानी भरा है या भरते देखा है उन्हें पता होगा कि पूरा बदन कैसे हिलता है।

मज़ा आ गया…

बाल्टी भर कर दीदी पटरी पर बैठी और अपनी जांघें खोल कर पैरों और एड़ियों को मल मल कर धोने लगी। अब मेरे सामने जवान कुंवारी गोरी लड़की की खुली जांघों का नजारा था। मेरा लंड मेरा कच्छा फ़ाड़ने पर उतारू हो रहा था।

फ़िर दीदी ने पानी का लौटा भर पर अपनी चूत पर डाला और चूत धोने लगी, चूत चोते समय बार बार वो अपनी उंगली अपनी चूत में घुसा रही थी, शायद उनको मज़ा आने लगा था या वो खुद हस्तमैथुन करने लगी थी, वो काफ़ी देर अपनी चूत से खेलती रही।फ़िर साबुन लेकर चूत पर लगाया, चूत धोई।

इसके बाद अब दीदी ने अपने पूरे बदन पर पानी डालना शुरू किया। उसके बाद साबुन लेकर अपनी टांगों और जांघों पर लगाया और फ़िर अपनी गोरी चूचियों पर साबुन की टिकिया रगड़ी।मेरे मन में आया कि यह साबुन की टिकिया कितनी खुशनसीब है जो एक कमसिन गोरी के वक्षस्थल पर फ़िसल रही है… काश कि इस साबुन की जगह मैं होता…

दीदी ने खूब मल मल कर साबुन लगाया अपनी चूचियों पर, अपनी बगलों में…जब दीदी अपनी पीठ और कमर पर साबुन लगाने के लिये पीछे हाथ ले गई तो उनकी चूचियाँ ऊपर उठ कर ऐसे खिल गई जैसे दो गुलाब एक साथ खिले हों!

पीठ पर साबुन लगाने के बाद बारी आई दीदी के चूतड़ों की… चूतड़ों पर साबुन लगाने के लिये दीदी खड़ी हुई और अपने कूल्हों, चूतड़ों की दरार में साबुन लगाने लगी।तभी दीदी ने साबुन की टिकिया पर एक उंगली रगड़ी और उस उंगली को अपने पीछे चूतड़ों की दरार में ले गई। दीदी ने अपनी गांड के छेद में वो उंगली डाल कर वहाँ साबुन लगाया।

अब दीदी बैठ गई और गर्दन चेहरे पर साबुन लगाने के बाद अपने बदन पर पानी डालने लगी, अपने गीले नंगे बदन को मल मल कर साबुन उतारने लगी।बाल्टी में पानी खत्म हो गया तो दीदी उठी, हैण्डपम्प चला कर दीदी ने आधी से कुछ कम बाल्टी भरी और खड़े खड़े ही बाल्टी उठा कर अपने बदन पर उड़ेल ली।

पानी से भीगी हुई मदमस्त हसीना… क्या कहने… एक अनछुई नंगी लड़की, भीगी हुई वो भी जवानी के चरम पर !पानी की बूंदें दीदी के चेहरे पर कन्धों पर और चूचियों पर चमक चमक कर मानो यह कह रही थी ‘है कोई भाग्य शाली हमारे जैसा?’

आखिर चोरी कब तक छिपती ! अचानक तौलिये से बदन पौंछते वक्त दीदी की नजर ऐसे ही इधर उधर दौड़ गई और ऊपर को भी उठ गई…मैं एकदम झटके से पीछे को गया लेकिन उनको एक जोड़ी आँखें अपनी ओर ताकती दिख गई और वो पूछ बैठी- कौन है? कौन है?और मैं नीचे को होकर भाग आया और डर गया कि बात तो अब दीदी की मार सहनी पड़ेगी और घर में बताया तो सबकी मार खानी पड़ेगी।

मैं पक्के तौर पर तो नहीं लेकिन मान सकता हूँ कि दीदी उस समय मुझे पहचान गई होंगी!

लेकिन बात किसी भी तरीके से मेरे ऊपर नहीं आई… शायद दीदी ने अपनी इज्जत की वजह से इस बात को खुद ही दबा प्रिया!जो भी हो, उस दिन से मेरा ताक झांक करना छुट गया।पूरी तरह से तो नहीं, मैंने यदा कदा कोशिश भी की लेकिन दोबारा वैसा मौका नहीं मिला।

कुछ दिनों बाद दीदी की शादी हो गई लेकिन गरीब परिवार में शादी होने की वजह से दीदी अपने आपकी देखभाल नहीं कर पाई और कमजोर होकर आभाहीन सी हो गई, जैसे किसी ने चूस लिया हो, शायद गरीबी ने!

हालांकि जब भी दीदी घर आती हैं तो नमस्ते होती है, हाल चाल पूछा जाता है, मैं सोचता हूँ कि कभी उनसे कह दूँगा कि ‘उस दिन मैं ही छुपकर आपको नहाते हुए देख रहा था, क्या गजब का बदन था आपका, क्या हुस्न था उस समय… और अब देखो आप क्या हो गई हैं…?’देखें कब वो शुभ दिन आता है !

खैर कई साल बीत गए इस घटना को… मैं कभी कुछ नहीं कह पाया दीदी को… पर मैंने उस दिन जितना खूबसूरत नज़ारा आज तक नहीं देखा है।उस वक्त कैमरा वाले मोबाइल फ़ोन नहीं थे वरना उन हसीं पलों को मैं जरूर कैमरे में कैद कर लेता।

इस बात की चर्चा किये बिना कि यह घटना सत्य है या असत्य, अपनी राय नीचे कमेंट्स में ही लिखें!

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

बिग मैन

1 month ago

क्या दीदी को पता चल गया था? अगला पार्ट जल्दी डालो यार।

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