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अनजान शहर में मिली एक अनजानी

विक्की एक्सिस

30 Nov 2008 को प्रकाशित

अनजान शहर में मिली एक अनजानी
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एक दिन मैं कंपनी के कम से बड़ौदा गया था. पूरे दिन में काम करके मैं शाम को घूमने निकलता था.

एक दिन शाम को एक रेस्टोरंट में गया. वहाँ बहुत भीड़ थी, एक मेज़ खाली था. मैं वहाँ पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद सामने के मेज़ पर तीन औरतें आकर बैठ गई. सभी तीस की उम्र की होंगी. उनमें एक औरत बहुत खूबसूरत थी. उसने काली साड़ी पहनी थी. उसका जिस्म बहुत सुन्दर था. उसके बड़े-बड़े स्तन जैसे मेज़ पर ही पड़े थे, ऊपर से उसकी दरार दिख रही थी.

वो मेरी तरफ देख रही थी. पता नहीं नज़रों से कुछ बात हो रही थी. वो मुस्कुराई. मैं भी थोड़ा मुस्कुरा कर बाहर चला गया. वो मेरे पीछे बाहर आई. मैं खड़ा हुआ उसे देख रहा था. मैंने हि्म्मत की और थोड़ा उसके पास गया और उससे हाय किया. उसने भी हाय किया.फिर मैंने थोड़ी बात की- आप कहाँ रहते हो, क्या करते हो?वो एक घरेलू महिला थी.मैंने कहा- मैं बाहर से आया हूँ, यहाँ होटल में ठहरा हूँ. अगर आप चाहें तो होटल में बैठ कर कुछ नाश्ता करें और बाते करें, फिर घूमने जायेंगे.वो बोली- ठीक है, पर सिर्फ दस मिनट हैं मेरे पास.

हम दोनों होटल पर अपने कमरे में गए, थोड़ी देर बात की. फिर मैंने कोल्ड ड्रिन्क मंगाया. वो मेरे बेड पर एक तरफ़ और मैं दूसरी तरफ़ बैठा था.मेरी नज़र उसके वक्ष पर ही थी. वो भी जानती थी पर कुछ कह नहीं रही थी.

थोड़ी देर बाद उसने कहा- मुझे जाना है, देर हो रही है.मैंने कहा- सिर्फ पाँच मिनट रुकिए.

पर वो चलने लगी. अचानक मैंने उसके हाथ को पकड़ा, वो बोली- प्लीज़, मुझे जाना है.मैंने उसका हाथ पकड़ कर एक हाथ उसके कंधे पर रख दिया.वो बोली- मुझे जाने दो!पर चाहती तो वो भी वही थी.

मैंने देखा तो वो आँखें बंद करके जाने को कह रही थी. मैंने धीरे से उसके गाल पर चूम लिया. वो कसक उठी, उसने एक हाथ से मेरे मुँह को हटाया और कहा- प्लीज़, मुझे देर हो रही है.मैंने उसकी कमर पर धीरे धीरे हाथ फिरा दिया. उसने कमर हिलाई और मुँह से स्स्स्स स्स्स्स आवाज़ निकालने लगी.

फिर उसकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा करा उसके वक्ष पर हाथ फिराने लगा. बहुत ही बड़े स्तन थे उसके, मेरे हाथों में भी नहीं आ रहे थे. मेरा लंड भी रेलवे इंजन की तरह धुंआ (?) निकालने लगा. उसका एक हाथ पकड़ कर मैंने अपने लण्ड रखा.

उसने मेरी जिप खोलकर मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया, थोड़ी देर चूसा. फिर मैंने उसको खड़ा किया और उसकी साड़ी निकाली. उसने अन्दर सफ़ेद ब्रा और पेंटी पहनी थी. वो बहुत ही सेक्सी लह रही थी. मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराया, चूत बहुत गीली हो गई थी.

मैंने उसको नंगी करके बेड पे लेटा दिया, फिर उसकी चूत चाटने लगा. वो आआ ऊऊऊऊ… स्स्स्स्स… करने लगी.

फिर उसकी कमर के नीचे तकिया रख दिया. उसकी चूत का दरवाज़ा मेरे खड़े लंड को आमंत्रण दे रहा था. मैंने अपना सुपारा उसकी चूत के ऊपर रगड़ा तो वो बोली- जल्दी डालो! ऐसे तड़पाओ नहीं!धीरे से लंड उसकी चूत में डाला और अन्दर-बाहर किया…मुझे बहुत मजा आ रहा था. वो आआअ… स्स्स्स स्स्स्स चोदो! चोदो! कह रही थी.

मैं भी एक भूखे शेर की तरह उसकी चूत को घिसने लगा. थोड़ी देर बाद वो अपने आप झटके मारने लगी. मुझे मालूम था कि वो झड़ने वाली है. उसने जोर से मेरे लंड पर ही योनि-रस छोड़ दिया.मैं तो अपनी मस्ती में चालू ही था. थोड़ी देर बाद वो दोबारा झड़ गई…

वो पूरी तरह थक गई थी, वो बोली- जल्दी करो! मुझ में हिम्मत नहीं!फिर मैं भी झड़ गया.

फिर थोड़ी देर बात करके वो अपने घर चली गई. मैं वहाँ दो दिन रुका था, दो दिन में मैंने उसको 5 बार चोद लिया.मानो या ना मानो उसको चोदने जितना मजा आज तक मुझे नहीं आया.अब भी जब मैं बड़ौदा जाता हूँ तो उसको बहुत ही प्यार करता हूँ और सेक्स करता हूँ.

यह है मेरी कहानी!कैसी लगी दोस्तो, ज़रूर बतानाsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

वैभव पटेल

1 week ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

आदित्य पवन

3 weeks ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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