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कोई मिल गया पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 498 बार

अस्पताल में प्यार

विजय अग्रवाल

22 Jan 2019 को प्रकाशित

अस्पताल में प्यार
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हाँ तो दोस्तों, मेरा नाम है अजय, उम्र २२ वर्ष। मैं बंगलोर में रहता हूँ। यहाँ रहने वाले हजारों लोगो की तरह मैं भी एक सॉफ्टवेयर इंजिनियर हूँ। तो मेरा अनुभव पेश है जो कि मैं आपके साथ बाटना चाहता हूँ। इसे कृपया मेरी अर्चना ना समझें।

मैं एक ६ फीट का गठीले शरीर का मालिक हूँ, लेकिन थोड़ा शर्मीला हूँ और लड़कियों से ज्यादा करीब नहीं रहा हूँ। उत्तर प्रदेश बोर्ड से मेरी शिक्षा होने के कारण मैं हमेशा लड़कों के स्कूल में ही रहा। कॉलेज में एक लड़की से ऐसा प्यार हुआ कि किसी दूसरी की तरफ नज़र उठा कर नहीं देखा।

लेकिन हाय री किस्मत, उसने मुझमें ज्यादा रुचि नहीं ली। तो अब तक की कहानी का निचोड़ यह है कि मैं २२ साल तक कुंवारा था।

किन्तु एक दिन मेरी किस्मत ने मेरा ऐसा साथ प्रिया कि वो दिन ज़िन्दगी भर के लिए यादगार बन गया और वही अनुभव मैं आप लोगो के साथ बांटना चाहता हूँ।

यहाँ बंगलोर में एक अस्पताल है, संत जोन्स हॉस्पिटल।

कुछ महीने पहले ही मेरी आँखों में कुछ परेशानी हो रही थी, तो मैं वहां गया, मैंने रजिस्टर कराया और डॉक्टर के कमरे के सामने बैठ कर इंतज़ार करने लगा। ऐसे ही १५ मिनट गुज़र गए। मैं परेशान था क्योंकि कोई भी मरीज़ अन्दर नहीं जा रहा था और न ही किसी का नाम पुकारा जा रहा था।

तो मैंने ऐसे ही डॉक्टर के कमरे के अन्दर झाँक कर देखा। सही बता रहा हूँ दोस्तो ! अन्दर जो लड़की बैठी थी वो जैसे कि कोई अप्सरा थी और वो डॉक्टर के सफेद लैब-कोट में तो मैं बता नहीं सकता कि कितनी सुन्दर लग रही थी !

वैसे मैं बता दूं कि डॉक्टर के लिए मेरा ख़ास आकर्षण रहा है हमेशा से।

हाँ तो मैंने उससे पूछा- इतने लोग इंतज़ार कर रहे हैं?

वो बोली- वो वहां पर इन्टर्न है और डॉक्टर अभी आये नहीं हैं ! इसीलिए !

और एक बहुत प्यारी सी मुस्कान दी। मेरे शरीर का रोम रोम खिल उठा उसे देखकर। मैं भी मुस्कुरा प्रिया और कहा- ओके !

मैं बाहर आकर बैठ गया किन्तु इस बार मैं ऐसी जगह बैठा जहाँ से कमरे के अन्दर वो मुझे दिख रही थी। उसने मेरी तरफ देखा और एक मध्यम सी मुस्कराहट दी, मैंने भी वही किया। इस से पहले कि इशारे कुछ और आगे बढ़ पाते, इतने में डॉक्टर आ गया और वो उसके साथ मरीजों को देखने में व्यस्त हो गई।

मेरी बारी आई, डॉक्टर ने आँखें देखीं और बोला- सामान्य जांच करा लो ! कोई ख़ास परेशानी नहीं है तुम्हारी आँखों में !

अब शायद आप लोगों को मालूम हो कि सामान्य जांच में एक टेस्ट होता है जिसमें एक डार्क-रूम में ले जाकर एक मशीन के जरिये रेटिना(आंख का हिस्सा) चेक किया जाता है. उस टेस्ट के लिए मुझे इंतज़ार करने के लिए बोला गया। मैं बाहर बैठ कर इंतज़ार करता रहा और बीच बीच में हमारी नज़रें मिलती रहीं।

जब आधे घंटे बाद डॉक्टर चला गया, तो उसने मुझे टेस्ट के लिए बुलाया, वो अँधेरा कमरा था इसीलिए कुछ दिखाई नहीं दे रहा था, बस उस मशीन से जो प्रकाश आ रहा था उसमें मुझे वो दिख रही थी। उसने कहा- अपनी आँख को इस लेंस के सामने लाओ, फिर उसने कहा- नीचे देखो, दायें देखो, बाएँ देखो, सामने देखो, मैंने सामने देखा तो उसका वो चाँद जैसा चेहरा था।

मैं उसे देखता ही रह गया, वो बोली- बस टेस्ट फिनिश !

लेकिन मैं उसे सुन नहीं पाया और बस उसे ही देखता रहा।

उसने भी मेरी तरफ देखा, और फिर दोस्तों मुझको नहीं मालूम कि किसने शुरू किया लेकिन अगले ही पल हम दोनों के होंठ आपस में जुड़े हुए थे।

मैं पागल हो रहा था और उसके नरम होठों को चूसे जा रहा था, उसका भी यही हाल था। किस करते करते ही ५ मिनट के अन्दर हम दोनों टोपलेस थे. मैं उसके स्तनों के साथ खेले जा रहा था और वो मेरे बालों में हाथ फिरा रही थी। तभी अचानक से वो रुकी और मेरी तरफ देखा, मुझे देखते देखते ही थोड़ी दूर गई और मैं पूरी तरह से असमंजस में था, लेकिन तभी उसने अपनी जींस उतार दी और वहीं खड़ी रही।

मैं भाग कर उससे लिपट गया और फिर से किस करने लगा। मेरी जींस कब उतर गई मुझे पता ही नहीं लगा। मैं बस उसे सर से पैर तक चूमता रहा और वो मुझे अपने हाथों से अपने शरीर से चिपकाती रही।

फिर मैंने उसे मेज़ पर लिटाया और फिर हम लोगो ने लगातार दो बार सेक्स किया।

उसके बाद, जब हम अलग हुए और मैंने कपड़े पहनने शुरू किये तो देखा कि मेज़ पर थोड़ा बहुत खून था और वो रो रही थी।

मैंने उसके माथे पर किस किया और पूछा- क्या हुआ?

तो वो बोली- आई फील लाइक ए सलट ! कितनी गिर गई थी मैं !

मैंने उससे कहा- ऐसी कोई बात नहीं है, यह तो भगवान् का प्रिया उपहार है, जिसका आनंद लेना सबका हक़ है।

लेकिन उसने कपड़े पहने और चली गई, अपना नाम तक नहीं बताया। मैं भी थोड़ा खुश, थोड़ा दुखी अपने घर आ गया।

उसके बाद मैं कई बार वहां गया उससे मिलने, लेकिन वो नहीं दिखी, उसने शायद अपना तबादला किसी दूसरे अस्पताल में करा लिया होगा।

तो प्रियतमा !

मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि मैंने कभी तुम्हारे बारे में कुछ गलत नहीं सोचा। वो तो एक समय था जिसमें पूरी कायनात हमें साथ लाना चाहती थी। मैं तुमसे पहली ही नज़र में प्यार कर बैठा था और आज भी करता हूँ !

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

सोनू सिंह

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

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kg4galz

2 months ago

सच में बहुत ही हॉट और उत्तेजक कहानी है भाई। मजा आ गया पढ़कर।

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