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दोस्त की लिव-इन

अजय सिंह 31

06 Jan 2013 को प्रकाशित

दोस्त की लिव-इन
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प्रेषक : विजय

मेरा नाम विजय है, दिल्ली में इंजीनियरिंग कर रहा हूँ। मैं एक स्मार्ट लड़का हूँ। मैं आप को बताने जा रहा हूँ कि कैसे मैंने अपने दोस्त सुयश की गर्लफ्रेंड एकता को उसी के फ्लैट में चोदा।

मैं हॉस्टल मैं रहता था, सुयश और एकता एक साथ लिव इन रिलेशन में रहते थे। एकता बहुत ही सुंदर है, उसको देख कर किसी का भी लण्ड खड़ा हो जाए। मैंने भी कितनी बार उसके नाम क मुठ मारी होगी।

एक दिन मेरी लड़ाई हो गई और मुझे तीन दिन के लिए हॉस्टल से निकाल प्रिया गया। मैं सुयश के फ्लैट पर पहुँचा और बेल बजाई तो एकता ने दरवाजा खोला।

मैंने पूछा- सुयश है?

तो उसने बोला- नहीं, वो तो घर गया है, दो दिन बाद आएगा, कोई काम है तो बोलो?

मैंने उसे बताया- मुझे तीन दिन के लिए हॉस्टल से निकाल प्रिया गया है, मेरे पास रहने को कोई जगह नहीं है, इसलिए ही आया था।

तो वो बोली- अरे यार, तो इसमें क्या है, सुयश नहीं है तो क्या हुआ, मैं हूँ ना ! यहीं रह लो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है।

फिर उसने मुझसे खाना खिलाया और फिर हम लोग बातें करने लगे।

फिर मैंने कहा- चलो, लैपटॉप पर कोई मूवी देखते हैं। हम लोग मूवी देखते-देखते सो गए।

रात मैं जब मैं उठा तो देखा कि एकता की पैंटी दिख रही थी। मेरा लण्ड खड़ा हो गया पर मैंने अपने पर काबू किया और दूसरी तरफ मुँह करके सो गया।

सुबह जब नींद खुली तो देखा कि एकता नहा कर निकल रही थी, वो अपने बदन पर तौलिया लपेटे थी और एकदम माल लग रही थी।

वो मुझे जागे हुए देख कर शरमा गई और हड़बड़ा कर वापिस बाथ्रूम में जाने लगी तो मैं उसका तौलिया खुल गई और वो मेरे सामने ब्रा और पेंटी में थी, वो और शरमा गई और वहाँ से भाग कर दूसरे कमरे में चली गई।

दोपहर को खाने का टिफ़िन आ गया पर वो तब तक भी कमरे से बाहर नहीं आई तो मैंने उस के कमरे का दरवाजा खटखटाया और उसे खाना के लिए बोला।

उसने दरवाजा खोला तो मैं बोला- इसमें शर्म की क्या बात है, आखिर मैं तुम्हारा देवर ही तो हूँ।

इस बात पर वो मुस्करा दी।

फिर हमने साथ में खाना खाया। फिर मैंने कहा- नई मूवी आई है, चलो, देख कर आते हैं।

वो मान गई, हम दोनों मॉल गए और टिकेट लेकर हॉल में बैठ गए। मैंने जानबूझ कर किनारे वाली सीट ली थी।

हॉल में ज्यादा लोग नहीं थे, मूवी स्टार्ट हुई, मूवी में कई सारे सेक्स सीन थे, मैंने काफी देर कण्ट्रोल किया फिर आखिर में मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने उसकेहाथ को अपने हाथ में ले लिया। वो कुछ नहीं बोली, शायद वो भी गर्म हो चुकी थी। फ़िर मैंने उसका चेहरा अपनी तरफ़ घुमा कर उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूमना चालू कर प्रिया। और साथ ही उसकी चूचियाँ दबाने लगा। मैं उसके लब चूसने लगा, उसको मजा आने लगा और वो मेरे बालों में उंगली फिराने लगी।मैंने उसकी जींस के ऊपर से ही उसकी चूत को रगड़ने लगा और वो एकदम मस्त हो गई, उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी और वो मेरे लण्ड को ऊपर से ही सहलाने लगी।

फिर हम मूवी छोड़ कर फ्लैट पर आ गए और आते ही वो मुझसे चिपक गई, कहने लगी- विजय तुम्हारा लण्ड बहुत बड़ा लग रहा है ! मुझे यह चाहिए।यह सुनते ही मैंने उसे उठा कर बेड पर पटक प्रिया और उसके ऊपर चढ़ कर बेतहाशा चूमने लगा। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसके निप्प्ल को मुँह में चूसने लगा। फिर मैंने उसकी चूत को चाटना चालू कर प्रिया।

क्या मस्त चूत थी, एकदम गुलाबी ! उसकी चूत से पानी निकल रहा था और मैं उस जीभ डाल कर चूस रहा था और वो मस्त होती जा रही थी।उसने मेरे लण्ड पैंट से निकाल लिया और मेरे सात इंच लम्बे लण्ड को मुँह में लेकर लॉलीपोप की तरह चूसने लगी।

फिर मैंने लण्ड उसके मुँह से निकाला और उसके चुच्चों के बीच में रख कर वक्षचोदन करने लगा, और बूब्स को दबाने लगा।

वो अह अह कर रही थी, बोलने लगी- यार, अब मुझे और मत तड़पा, मेरी चूत को फाड़ दे।

मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा और रगड़ने लगा।

वो बड़बड़ा रही थी- प्लीज़, मुझे मत तड़पाओ, चोद दो मुझे !

मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में उतार प्रिया और वो दर्द से तिलमिलाने लगी, उसकी आँखों से आँसू बहने लगे पर मैंने बिना परवाह किये उसे चोदना चालू रखा। थोड़ी देर में वो भी कमर हिला हिला कर मेरा साथ देने लगी। लगभग बीस मिनट बाद वो झड़ गई और कुछ झटकों के बाद मैं भी उसकी चूत में ही झड़ गया और उसी के ऊपर लेट गया।फिर उसने मुझे प्यार से माथे पर चूमा और बोली- थैन्क्यू ! बहुत दिन बाद मुझे इतना मजा आया है, ऐसे ही मुझे चोदते रहना।

थोड़ी देर बाद वो उठ कर बाथरूम में गई, मैं भी चुपके से उसके पीछे बाथरूम में गया और उसे मूतते हुए देखने लगा। उसकेमूतने से शर्र शर्र की आवाज माहौल को मादक बना रही थी।

वो चिल्लाने लगी, कहने लगी- प्लीज़, वहाँ नहीं ! मुझे छोड़ दो !

वो चिल्ला रही थी और मैं उसकी गाण्ड में अपने लण्ड को धकेल रहा था। थोड़ी देर के बाद उसे भी कुछ मजा आने लगा और वो भी अपने चूतड़ पीछे धकेलने लगी।

थोड़ी देर के बाद मैंने अपना लण्ड निकाल कर उसके मुँह में दे प्रिया और मुखचोदन करने लगा और उसके मुँह में ही झड़ गया।

वो मेरा सारा माल पी गई।

मैंने उसको दो दिन और रात भर चोदा, फ़िर सुयश के आने के बाद एक दिन हम तीनों साथ रहे पर कुछ किया नहीं।

और अब भी जब हमें मौका मिलता है, जरुर चुदाई करते हैं।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

अलंकृता शर्मा

1 month ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

आरव आर्य

2 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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