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गुजरात का डांडिया नृत्य

गुजरात का डांडिया नृत्य
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प्रेषक : लव

पूरा गुजरात नवरात्र की तैयारी में जुट गया था! गुजरात ही क्यों, पूरा देश नवरात्र के स्वागत के लिए तैयार हो रहा था! सारे देश में नवरात्र अलग अलग ढंग से मनाए जाते हैं! पश्चिम बंगाल में देवी दुर्गा नेहा का आयोजन होता है, तामिलनाडू के घर घर में कोलू दिखाया जाता है, आंध्र, कर्नाटक और केरला में नवरात्र के नौ दिन और रात में अलग अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है! लेकिन गुजरात की बात ही कुछ और है, सारी गुजराती लड़कियाँ और औरतें नवरात्र में सारी रात गरबा एवं डांडिया खेलती हैं!

मुझे एक बार दिल्ली जाना था और मैं रात में मुंबई के एक होटल में ठहरा था! मैं भूल गया कि नवरात्र चल रहे हैं। और मेरे भाग्य में कुछ और ही लिखा था। मुझे सुबह की उड़ान पकड़नी थी इसलिए थोड़ी नींद लेने के लिए मैं जल्दी सो गया! रात दस बजे मेरी नींद ढोल की आवाज ने तोड़ दी। मैं अपने बिस्तर में बैठकर सोचने लगा कि क्या हुआ? मैं बाहर आया तो देखा नाच-गाने की तैयारियाँ हो रही थी। लोग समूह बना रहे थे, ढोल वाले जोर जोर से ढोल बजाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करके उनको बुला रहे थे। फिर नाच गाना शुरू हो गया। वहाँ बहुत अदभुत नजारा था। मैंने सोचा, ऐसे नज़ारे बार बार देखने को नहीं मिलते, इसलिए थोड़ा नाच-गाना देख लूँ !

खूबसूरत, प्यारी सूरत वाली लड़कियाँ और भाभियाँ हाथ में डांडिया लेकर संगीत के ताल पर नाच रही थी। मैंने उन्हें हाथ हिलाकर हैलो किया और हवा में इशारा करके हवाई चुम्बन प्रिया। दो तीन लड़कियों ने मेरे इशारों को हंसकर प्रतिसाद प्रिया। पूरा गाना खत्म होने में एक घंटा लगा! फिर नया समूह बनाना शुरु हो गया।

अचानक एक लड़की जिसने मेरे इशारे को प्रतिसाद प्रिया था, मेरे पास आई और मुझसे गुजराती में कुछ बोलने लगी। मैं समझ नहीं पाया कि वो क्या बोल रही है। इसलिए मैंने हिंदी में उसे पूछा- तुझे क्या चाहिए?

उसने मुझसे पूछा- क्या आप इस होटल में ठहरे हुए हैं?

मैंने कहा- हाँ !

उसने पूछा- क्या मैं आपके कमरे में पानी पीने आ सकती हूँ?

मैं बोला- हाँ हाँ ! क्यों नहीं !

मैं अपने कमरे की तरफ जो पहले माले पर था, दौड़ते हुए निकल पड़ा। वह लड़की मेरे पीछे पीछे दौड़ती हुई आ गई। मैंने दरवाजा खोला और जग में से पानी निकाल कर ग्लास में भरकर उसे देने लगा। पर वो वहाँ नहीं थी, वो मेरे बिस्तर में लेट गई थी।

वो बोली- मैं बहुत थक गई हूँ, थोड़ा लेट जाती हूँ !

मैं उसके पास में बैठ गया। मैंने देखा कि वो 20 साल के करीब की अमीर खानदान की लड़की थी। बड़ी चूचियां, पतला पेट और कमर, बहुत मेकअप ! उसका ब्लाउज जो बहुत सारे सजावटी सामान के सजा हुआ था, उसे अन्दर से चुभ रहा था। इसलिए उसने अपने ब्लाउज के कुछ बटन खोल दिए। अब उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ ब्रा से बाहर झांक रही थी।

मैंने उससे पूछा- क्या मैं तुम्हारी ब्रा खोलने में मदद कर सकता हूँ?

उसने मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा और अपनी पीठ मेरे तरफ कर दी। मैंने झट से उसके ब्लाउज के निचले भाग को थोड़ा ऊपर किया और ब्रा का हुक खोजकर उसे खोल प्रिया! फिर वो पीठ के बल लेट गई और मेरी तरफ आशा से देखने लगी। कमरे का ऐ.सी. चल रहा था और कमरा काफी ठंडा था। मैंने अपना हाथ उसकी चूचियों पर गोलाकार घुमाना शुरू कर प्रिया। वो अपनी आँखें थोड़ी मूंदकर मेरे स्पर्श का आनंद ले रही थी। उसके चुचूक कड़े हो गए थे। मुझे इतना इशारा काफी था, वो मेरे बिस्तर पर अपने पैर थोड़े फैलाकर मुझे निमंत्रित कर रही थी।

मैं उसके सामने आ गया और थोड़ा झुककर उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा। वो गर्म सांसें निकालकर मेरे लण्ड की तलाश में अपना हाथ मेरे पायजामे के नाड़े तक लेकर गई और मेरा नाड़ा खोलकर मेरा तना हुआ लंड अपने हाथ में पकड़ लिया। उसकी इस आक्रमकता से में हैरान हो गया। मैंने भी अपनी आक्रमकता बढ़ाई और उसका लहंगा ऊपर किया। अब उसकी खूबसूरत जांघें दिखाई दे रही थी। उन्हें सहलाने का मोह दबाकर मैंने उसकी गीली चड्डी उतार दी। मेरे सामने क्लीन शेव सुनहरी रंग की चूत थी! मैंने उसके पैरों को थोड़ा फैलाकर आगे की तैयारी शुरु कर दी।

वो बोली- जल्दी करो, लोग मुझे ढूँढ़ते होंगे!

मैंने अपना तना हुआ लंड उसकी चूत के मुँह पर रखकर जोर का झटका देकर उसकी चूत में पूरा घुसा प्रिया।

वो लड़की कुंवारी तो नहीं थी लेकिन उसकी चूत काफी कसी थी। उसकी कसी चूत का मैं पूरा मजा ले रहा था।

उसके मुँह से अब जोर जोर से आहें निकल रही थी! मैंने उसे बहुत आराम से चोदा। मेरा एक हाथ उसकी चूत को बगल से रगड़ रहा था। जैसे ही मैंने अपना वीर्य उसकी चूत में छोड़ा, वो आनंद की चरमरीमा तक पहुँच गई। मुझे झड़ने में दस मिनट लगे और इस दौरान वो दो बार चरमरीमा तक पहुँची।

जब मैंने अपना लंड बाहर निकाला तो उसने झट पूछा- बाथरूम कहाँ है?

बाथरूम में गई और अपने को साफ किया, कपड़े संवारकर बाहर आई, मेरे गाल पर चुम्बन देकर मुझे धन्यवाद प्रिया और बाहर भाग निकली! मैं उसे जाते हुए देख रहा था। वो कब और कहाँ अँधेरे में भीड़ में खो गई मुझे पता नहीं लगा। मैं तो उसका नाम भी पूछना भूल गया।

मुझे नींद नहीं आ रही थी इसलिए मैंने समय बिताने के लिए अपने लैपटॉप पर गूगल और याहू पर सर्फ़ करना शुरू किया! मैंने ‘नवरात्र’ शब्द से गूगल और याहू पर सर्च करके गुजरात की संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त की। थोड़ी देर बाद मैंने देखा कि एक लड़की मेरे कमरे की तरफ दौड़ती हुई आ रही थी। मैं सोच में पड़ गया कि यह लड़की ठीक मेरे कमरे की तरफ ही कैसे आ रही है? मैं तो इसे नहीं जानता। शायद यह पहले वाले लड़की की सहेली होगी! मैं उसके स्वागत के लिए दरवाजे पर खड़ा हो गया। उसने पीने के लिए पानी माँगा तो मेरा शक यकीन में बदल गया।

मैं उसे बोला- ठीक है, अन्दर आओ !

यह लड़की भी पहली वाली लड़की की उम्र के आसपास की थी। वो दौड़कर सीधा बेड पर लेट गई। मैंने उसे ग्लास भरकर पानी प्रिया जो उसने एक घूंट में पी लिया। मैंने अपना हाथ उसके पेट के ऊपर रख प्रिया तो उसने मुझे मुस्कुरा कर देखा। मैंने उसे पूछा- क्या तुम्हारी सहेली ने तुम्हें मेरे पास पानी पीने भेजा है?

वो मुस्काराकर बोली- हाँ !

मैं बोला- ठीक है तो फिर घूम जाओ ताकि मैं तुम्हारी ब्रा का हुक खोल सकूँ!

वो घूम गई और अपनी पीठ मेरी तरफ कर दी। मैंने ब्रा का हुक खोल कर उसकी चूचियों को ब्रा के चंगुल से मुक्त कर प्रिया। उसके चुचूक पहले से ही कड़े हो चुके थे। मैंने झुक कर उनको चूसना चालू कर प्रिया। मैंने उसके लहंगे को ऊपर करके उसकी गीली चड्डी को उतार प्रिया। यह लड़की बहुत ही कामुक और कामक्रीड़ा में सहयोग देने वाली थी।

उसने मेरे लंड को पकड़कर मुझे सुझाव प्रिया कि मैं पीठ के बल लेट जाऊँ और वो मेरे ऊपर घुड़सवारी करेगी।

मैंने कहा- ठीक है !

जीवन में कभी कभी बदलाव अच्छा रहता है!

यह लड़की जिसका नाम रति था, उसने एक ही झटके में मेरा लंड अपने चूत में घुसाकर मुझे चोदना शुरू कर प्रिया। मुझे अनुभव हुआ कि वह एक तरबेज घुड़सवार है! मैंने उसकी चूचियों और चुचूकों को दबोचकर उसे प्रोसाहन प्रिया! बाहर के संगीत की लय में वो अपने बदन को हिला रही थी। उसके मुँह से जोर जोर से आहें निकल रही थी। आखिर में जब वो आनंद की चरम रीमा तक पहुँची तो उसने अपनी चूत से मेरा लंड बाहर निकाल प्रिया।

मैंने उसे दोबारा चोदने की इच्छा जताई तो उसने कहा- अभी नहीं ! लोग मुझे ढूँढ़ते होंगे ! बाद में फिर आउंगी !

वो बिस्तर से कूदी, बाथरूम में गई, अपने को साफ किया, कपड़े संवारे, मेरे गाल पर चुम्बन देकर मुझे धन्यवाद प्रिया और भाग कर भीड़ में खो गई! रात का एक बज चुका था। मुझे बाद में उस रात और कोई लड़की नहीं मिली और मुझे भी सुबह की उड़ान पकड़नी थी। इस दो लड़कियों को चोदने का भाग्य मिलने से मैं खुश था! मैं भविष्य की नवरात्र की सारी रातें फिर इसी होटल में बिताने के संकल्प करके सो गया ! शायद मेरे भाग्य में ऐसी बहुत सी रातें और आएँ !

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

संदीप राजभर

3 months ago

कहानी बहुत ही शानदार थी, अंत तो लाजवाब था।

तुषार गुप्ता

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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