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कोई मिल गया पठन समय: 9 मिनट पढ़ा गया: 598 बार

मज़ेदार नौकरी

katariya19

28 Jan 2018 को प्रकाशित

मज़ेदार नौकरी
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प्रेषक : विकास कटारिया

तीन दिन पहले मेरी नौकरी छुट गई और मैं रास्ते पर आ गया। बहुत उदास था मैं।

एक दिन चौपाटी में बैठकर सोच रहा था कि अब क्या काम करूँगा?

अचानक मेरी नजर एक लड़की पर गई जो मुझसे थोड़ी दूर बैठी थी। मैंने देखा कि वो मुझे घूर रही थी। हमारी नजरें लगभग पाँच-दस सैकंड तक चार रही। मैं शर्मा गया, मैंने नजरें हटा ली और अपने मोबाईल में ताक-झांक करने लगा।

वैसे दिखने में मैं भी बुरा नहीं हूँ पर बात यह थी कि आज तक कभी किसी खूबसूरत लड़की ने मुझे इस अदा से नहीं देखा था।

अचानक उसने मुझे एक कागज का टुकड़ा मारा। मैंने खोलकर देखा तो उसमें लिखा था- हाय, मैं नेहा हूँ ! ——— यह मेरा नंबर है, मुझे मैसेज़ करो !

उसकी हिम्मत देखकर मैं दंग रह गया। मैंने उसे तुरंत जवाब भेजा- मैं विकास हूँ !

और हम मैसेज़ से बाते करने लगे।

नेहा : क्या काम करते हो?

मैंने कहा : मेरी नौकरी छुट गई है तो अभी तो मैं कुछ भी नहीं करता।

नेहा : मेरे लिए काम करोगे?

मुझे काम चाहिए था, तो मैंने संदेश से पूछा- काम क्या है?

नेहा : मुझे खुश करना होगा !

मैंने लिखा : क्या तुम्हारा कोई दोस्त तुम्हें खुश नहीं करता ?

नेहा : मेरे बॉयफ्रेंड मुझे वो नहीं दे पाते जो मुझे चाहिए।

अब मैं समझ गया था कि उसे क्या चाहिए। तो मैंने पूछा : मुझे तनख्वाह क्या दोगी?

नेहा : वो तो काम देखने के बाद पता चलेगा।

मैंने कहा : ठीक है ! तो कब और कहाँ मिलना होगा?

उसने मुझे अपने घर का पता भेजा और कहा- आज रात को नौ बजे आ जाना।

मैं बहुत खुश था क्योंकि आज तक किसी लड़की को छुआ तक नहीं था और आज कोई मुझे चुदवाना चाहती है और मुझे इस काम के पैसे भी मिलेंगे।

ठीक नौ बजे मैं उसके बताये पते पर पहुँचा। वो दरवाजे पर ही खड़ी थी, मानो मेरा इंतजार कर रही थी।

उसने सफ़ेद रंग का टी-शर्ट और हाफ-पैंट पहनी थी जो उसे और भी ज्यादा खूबसूरत बना दे रही थी।

मुझे देखते ही आँख मारते हुए बोली : राजा तू तो बड़ा वफादार नौकर निकला !

वो मुझे घर के अन्दर ले गई जहाँ नेहा के अलावा उनकी एक दादी थी। मुझसे परिचय करवाते हुए वो बोली : दादी, यह मेरा दोस्त है, हम साथ पढ़ते हैं। अब इम्तिहान आ रहे हैं इसलिए हम साथ साथ पढ़ेंगे। उसकी दादी को इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी।

फिर वो मुझे अपने कमरे में ले गई। उसने दरवाजा अन्दर से बंद कर प्रिया। उसका घर देखकर मैं समझ गया था कि वो काफी रईस है। मेरे लिए ड्रिंक बनाते हुए वो बातें कर रही थी।

उसने कहा : मेरे माता-पिता अमरीका में रहते हैं, अरबोपति हैं, यहाँ मैं अपनी दादी के साथ रहती हूँ। मेरे एकाउंट में दो करोड़ बैलेंस है जो उनके हिसाब से अच्छी जिंदगी बिताने के लिए काफी है। मैं भारत में ही रहना चाहती हूँ।

वो अपने बारे में बता रही थी, इतने में मैं उसके पीछे पहुँच गया, पीछे से ही मैंने उनकी कमर पर हाथ लगाया। मैंने अपना पूरा शरीर उनके शरीर से चिपका प्रिया और दोनों हाथों से उनके दोनों स्तन दबाने लगा।

उसने कहा : चौपाटी में तुम्हें देखते ही मैंने तय कर लिया था कि मैं तुमसे जरुर सेक्स करुँगी।

मैंने कहा- क्या तुम वो महसूस करना चाहती हो जो आज तक कभी नहीं किया? मैंने कल ही एक इंग्लिश फिल्म देखी है और मैं उसके मुताबिक तुम्हें खुश करना चाहता हूँ।

वो बोली : तुम्हारी जो मर्जी !

मैंने कहा- ठीक है।

मैंने उनका टी-शर्ट निकाल प्रिया और अपनी थैली में से एक रस्सी निकाली और कहा- अपने हाथ मेरे हवाले कर दो !

मैंने उसके दोनों हाथ रस्सी से बांध दिए और रस्सी को दीवार के दोनों तरफ ग्रिल में बांध प्रिया जिससे उनके दोनों हाथ हवा में फ़ैले हुए थे। फिर मैंने उसकी आँखों पर मेरा रुमाल बांध प्रिया। अब उसे न कुछ दिखाई दे रहा था और वो न कुछ कर सकती थी। अब बाजी मेरे हाथ में थी.. वो पूरी तरह से मेरे वश में थी।

मैं उसके सामने गया और उसको अपनी बाहों में ले लिया, उसके होंठों को अपने होंठों में लिया और हम एक दूसरे के होंठों का रस चूसने लगे। मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में घुसा दी। वो मेरी जीभ को चूसने लगी। वो मस्त होने लगी थी। मेरे दोनों हाथ उनकी कमर को सहलाने में व्यस्त थे। वो बड़ी उत्तेजित हो रही थी, शायद इस तरह से कभी नहीं किया होगा।

मैंने उसकी पैंट उतार दी और उनके कदमो में बैठ गया। उसकी चड्डी को बगल में खींच के उसकी चूत को छूने लगा। वो गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी चड्डी उतार ली और उसकी चूत को चाटने लगा। उसके मुँह से आवाज़ आने लगी- आ……….. ऊ…..ऊ…. रा….हु…….ल…………… आ.आ.आ.आ.आ……..ऊऊऊ……..

मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा। उससे उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी- विकास….. मुझे खोल दो !

पर मैं उसकी बातों पर ध्यान नहीं दे रहा था। मैंने उसकी चूत को चोदना चालू रखा। उसके दोनों हाथ बंधे हुए थे, दोनों पैर फ़ैले हुए थे। मैंने उसकी आँखों से रुमाल हटा प्रिया। अब वो मुझे देख रही थी, उसने कहा- मेरे हाथ खोल दो ! मैं तुम्हारे लंड को चूमना चाहती हूँ !

मैंने उसके हाथ खोल दिए, उसने मेरे कपड़े उतार दिए और मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चाटने लगी। मुझसे यह ख़ुशी बर्दाश्त नहीं हो रही थी। यह मेरा पहला अनुभव था, मुझे बहुत मजा आ रहा था। हम उसके पलंग पर 69 की अवस्था में लेट गए। मैं उसकी चूत को चाट रहा था और वो मेरे लण्ड को कुल्फी की माफिक चाट रही थी। अब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ। मैं उसकी चूत को अपनी ऊँगली से चोदने लगा, धीरे धीरे ऊँगली डाली और उसे अन्दर-बाहर करने लगा। इस पर वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हुई। मेरी ऊँगली के साथ वो अपनी कमर ताल मिलाते हुए हिला रही थी।

रा…..हु….ल……….अब मेरी चूत में अपना लण्ड डालो ना. ….

मैं सीधा हो गया और उसके दोनों पैर फ़ैला लिए। उसकी चूत फ़ूल गई थी। मैंने उसकी चूत में अपना लंड डाल प्रिया और हम दोनों मस्त हो गए।

नेहा बोल रही थी- और जोर करो, और जोर करो !

मैंने अपनी पूरी ताकत से उसे चोदा। मेरा लंड चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था और में अपने हाथों से उसके स्तन दबा रहा था। उसे स्तन दबवाना बहुत अच्छा लगता था और मेरा तो काम ही यही था कि उसे खुश करना ! मैं वो ही करता गया जो उसे खुश कर सके !

लगभग बीस मिनट तक हम चोदते रहे, फिर वो झड़ गई। लड़कियाँ भी झड़ती हैं, यह मुझे उस दिन पहली बार पता चला था।

फिर वो मेरे पीछे आ गई और मेरे लंड को अपनी मुठ्ठी में ले कर मुठ मारने लगी। मैंने अपना सारा जिस्म उसके ऊपर डाल प्रिया। वो मुठ मारती गई, लगभग दो मिनट तक वो सुख भुगतने के बाद मैं झड़ गया। मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छुटी, उसकी एक किताब पर जा गिरी। उसने मेरा वीर्य चाटा और बोली- बहुत ही अच्छा है।

मैंने कहा- क्या तुम्हारे दोस्तों से ज्यादा मजा मैंने प्रिया ? या नहीं?

वो बोली- आज मुझे वो मिल गया, जो मुझे चाहिए था।

हम दोनों आधे घंटे तक नंगे ही एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे।

मैंने कहा- आगे क्या हुक्म है सरकार?

वो बोली- विकास, मैं तुम्हें हर महीने दस हजार रूपये दूँ तो क्या तुम रोज दो घंटे मेरे साथ सेक्स कर सकते हो?

मैं राजी हो गया। आज इस बात के तीन साल हो गए। हम रोज चोदते हैं। कभी नहीं भी मिलते, फिर भी नेहा मुझे हर पहली तारीख को दस हजार रूपये जरुर दे देती है। हम अच्छे दोस्त हैं। मैंने कभी भी उसका या उसके रुपयों का गलत फायदा नहीं उठाया।

आशा है कि हम हमेशा ऐसे ही दोस्त बने रहेंगे।

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

यश त्रिपाठी

3 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

मंजू जैन

3 months ago

अगला भाग जल्दी से अपलोड कर दो भाई, अब और इंतज़ार नहीं होता।

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