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विकास और नन्दिनी

राजू दरजी

28 Mar 2009 को प्रकाशित

विकास और नन्दिनी
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दोस्तो, जैसा कि आपने मेरी कहानी

मेरा दोस्त और उसकी बहन

में पढ़ा कि कैसे मैंने पहले अपने दोस्त और उसकी बहन को उसी के घर में जम कर चोदा था और फिर तो उसकी सहेली मेघा को भी बुरी तरह से चोदा था।

मेरी कहानी पढ़ने के बाद आप सभी लोगों का बहुत प्यार मिला मेल के जरिये और इन्ही मेल में मुझे मेरी अगली चुदाई के लिए चूत और गाण्ड भी मिल गई।

हाँ दोस्तो, मुझे फिर एक चुदक्कड़ भाई-बहन मिल गए अपने ही शहर के।

मैं मेल पढ़ रहा था और भाई जिसका नाम विकास है, वो मुझे ऑनलाइन मिला, हमने बातें की।

वो मुझसे पूछने लगा- क्या ये आपकी सच्ची कहानियाँ हैं?

मैं- हाँ, ये मेरी सच्ची कहानियाँ हैं।

विकास- क्या आप मुझे और मेरी बहन को चोदोगे? मुझे पता है कि आप एक कॉल बॉय हो।

मेरे मन में तो लड्डू फ़ूट ही रहे थे, तो मैंने कहा- तुम्हारी बहन कैसी दिखती है?

विकास- सर, मेरी बहन बहुत ही जालिम दिखती है। आप उसे देखोगे ना, तो आपका तो पैंट फाड़ कर ही बाहर आ जायेगा। उसका बदन एकदम गोरा है और मोटी गाण्ड है, मैं तो उसकी गाण्ड को देख कर ही झड़ जाता हूँ। उसका बदन 32-26-34 होगा।

मेरी हालत तो ख़राब होती जा रही थी।

मैं- तुम अपनी बहन को खुद क्यों नहीं चोदते?

विकास- मुझे अपनी बहन को किसी और से चुदते हुए देखना पसंद है और वो मेरी भी गाण्ड चोदे उसके साथ ! हम दोनों ही तुम्हारी राण्ड बनने को तैयार हैं।

मैं- तो बोलो कब और कहाँ पर मिलना है?

विकास- आज ही शाम को आप होटल में मिलते हैं।

उसने मुझे एक होटल का नाम बताया।

मैं शाम को वहाँ पहुँच गया और वहाँ पर एक लड़की के सिवा कोई नहीं था। मैं तो उस लड़की को देखता ही रह गया, वो तो रूप की मल्लिका थी।

यारो, मेरा लण्ड तो तन गया बुरी तरह से ! पर इतने में उसके पास एक लड़का आ गया और उसे लेकर होटल में चला गया।

मेरे तो खड़े लण्ड पर चोट वाला काम हो गया। मुझे यकीन था कि वो लड़की उस लड़के की गर्लफ़्रेन्ड होगी और वो उसए चोदने वाला है।

मैं विकास और उसकी बहन का इंतजार कर रहा था कि कुछ ही देर में मेरे मोबाइल पर एक मेसेज आया- दूसरे दरवाजे से 204 नम्बर कमरे में आ जाना।

मैं अन्दर गया और कमरे की घण्टी बजाई तो दरवाजा उसी लड़की ने खोला जिसे मैंने नीचे देखा था।

मैं अन्दर गया तो अन्दर वही लड़का था।

हमने एक दूसरे को अपना परिचय प्रिया तब पता चला उसका नाम नंदिनी है।

फिर हम सेक्स की बातें करने लगे। इतने में विकास की बहन मुझे चूमने लगी तो मैंने भी अपने दोनों होठ उसके होंठों पर रख दिए और उसे चूमता रहा, विकास सामने बैठ कर नंगा होकर अपनी बहन और मुझे देख रहा था और अपना लौड़ा पकड़ कर मुठ मार रहा था। हम एक दूसरे को लम्बे समय तक चूमते रहे, फिर मैंने उसकी बहन को और उसने मुझे नंगा किया।

क्या बदन था नन्दिनी का !

उसे देख कर तो मेरा लौड़ा काबू में नहीं रह रहा था, फिर विकास को मैंने पास बुलाया और उसको लौड़ा दे प्रिया मुँह में और उसकी बहन को लेटा कर उसकी चूत चाटने लगा, उसके दाने को चूसने लगा, वो मदमस्त हो रही थी और आवाज निकल रही थी- आआह्ह्ह्ह …. ऊओ हो होहोहोहो ….. और अच्छे स्सस्सी करओ ….ऊओहो होहोहोहो …

फिर मैंने उसे बैठाया और मैं खड़ा हो गया तो विकास लेटा हुआ उसकी चूत चाट रहा था और वो मेरा लण्ड चूस रही थी, मैं उसके चूचों के साथ खेल रहा था।

पूरे कमरे में हम तीनों की ही आवाज आ रही थी।

अब विकास की बहन नन्दिनी से रहा नहीं जा रहा था तो विकास और मैंने शुरुआत ही उसे दो लौड़ों से चोदने से की, विकास चूत चोद रहा था और मैं मेरी पसंदीदा गाण्ड चोद रहा था।

पहले विकास ने उसकी चूत में अपना टोपा डाल प्रिया और फिर मैंने भी मेरा टोपा उसकी गाण्ड में डाल प्रिया वो तो रांड कराहने लग गई और रोने लगी।

पर हम तो वासना के पुजारी थे, कहाँ सुनने वाले थे, हम दोनों ने साथ में ही धक्का मारा और हमारा लौड़ा उसकी चूत और गांड को फाड़ता हुआ घुस गया। वो अपनी चूत और गाण्ड की दुहाई दे रही थी हमसे पर हम थोड़ा रुक कर फिर धक्के मारना शुरू हो गए, वो दर्द के कारण बेहोश सी हो गई थी पर फिर भी हम तो मस्ती से चोद रहे थे।

फिर विकास ने उसकी चूत से लण्ड निकाला और उसके मुँह पर झड़ गया, पानी की पिचकारी से उसे थोड़ा होश आया और वो चिल्लाने लगी क्योंकि उसकी गाण्ड से खून निकल रहा था और उसे बहुत दर्द हो रहा था।

वो भी दो बार झड़ चुकी थी, विकास सामने बैठा हमारी चुदाई की क्लिप बना रहा था।

मैं उस रांड को इतना चोदना चाहता था कि वो उठ भी ना पाए और उसके हर गुप्त और वासना की जगह से खून निकले। मैं उसे चोदने में लगा रहा, वो चिल्लाती रही पर उसकी आवाज कौन सुनता और मैं उसे जंगलियों की तरह चोदता रहा।

वो अकड़ने लगी तो मैं समझ गया और रफ़्तार तेज कर दी और हम दोनों साथ में ही झड़ गए। मैं कुछ देर उसकी गांड में ही अपना लौड़ा रखे लेटा रहा फिर मैंने उसकी गांड से लौड़ा निकाला और उसके मुँह में दे प्रिया। वो तो मजे से चूस रही थी।

और फिर उठा तो विकास मेरा लौड़ा चूस कर फिर से उसे तैयार करने लगा, फिर कुछ ही देर में मैंने उसे भी अपने लौड़े का शिकार बना लिया और उसकी भी जम कर गाण्ड मारी, उसकी तो गाण्ड मारते समय आँसू निकाल दिए। उसकी बहन तो अपने आप उठ भी नहीं पा रही थी, मूतने भी हम दोनों ले जाते !

फिर सुबह उसकी बहन ने मुझे चूमा किया लेटे लेटे ही क्योंकि वो अच्छे से खड़ी नहीं हो पा रही थी और मैंने भी उसके मम्मों को दबा कर मजे लिए और चुम्बन लिया। फिर विकास ने मुझे मेरी फीस दी और कहा कि इतना मजा कभी नहीं आया।

आपका अपना कॉल बॉय

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पाठकों की राय

1 टिप्पणी

अमित अम्बाला

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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