मेरा नाम वंदना है, मेरी उम्र 19 साल और शरीर का साइज़ 38-36-38 है। मेरी मोटी गांड, गोल-गोल चूतड़ हैं, गुलाबी-गुलाबी होंठ.. गाल पर तिल.. और एकदम गोरा रंग है।
मेरे भाई का नाम रचित है, वो भी मेरी तरह खूबसूरत है।
बात उन दिनों की है.. जब मेरी पढ़ाई चल रही थी, मेरा भाई मुझको मेरे बाईक से कॉलेज पहुंचाने जाया करता था। मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं था.. ना मुझको ब्वॉयफ्रेंड बनाने का शौक था।
मेरी कालोनी के लड़के मुझको देखकर अपने लंड पर हाथ रख लेते थे और बोलते थे कि ये माल एक रात को मिल जाए तो पूरा चूस का चोद लें।पर मैं उन लड़कों की बात को अनसुना करते हुए चुपचाप निकल जाया करती थी।
लेकिन बाद में मैं उनकी बातों को याद करके सोचती थी और इससे मेरे मन में सेक्स की इच्छा जागृत हो जाती थी।मैं कभी-कभी सन्नी लियोनी की मूवी देखती हूँ। उस वक्त मैं सिर्फ अपने भाई के बारे में सोचती हूँ।
एक बार सन्डे के दिन में स्कूटी ले कर बाहर घूमने के लिए जा रही थी.. तो मेरा भाई बोला- कहाँ जा रही हो वंदना?मैं बोली- कहीं नहीं.. बस यहीं पास में जा रही हूँ।मेरा भाई बोला- मैं भी चलूँ?मैं बोली- आ जाओ।
मेरा भाई मेरे पीछे बैठ गया। उस दिन मैंने ब्लैक कलर की स्कर्ट पहनी थी। मेरे भाई ने लोवर और टी-शर्ट पहनी हुई थी। मैंने स्कूटी स्टार्ट की और हम दोनों चल दिए। मैं स्कूटी तेज़ चला रही थी.. ब्रेकर पर ब्रेक लगाया तो मेरा भाई मुझसे सट गया और उसके लोवर से उसका लंड मेरी मोटी गांड से अच्छी तरह सट गया।
रचित का लंड एकदम टाईट खड़ा था। इस तरह से रगड़ने से उसका लंड मुझको बहुत अच्छा लगा।फिर मेरा भाई मुझसे ऐसे ही सटा रहा। हम चलते रहे.. काफी दूर जाने के बाद भाई बोला- रूक जाओ।मैंने स्कूटी को रोका और बोली- क्या हुआ?वो बोला- कुछ नहीं.. सामने गोल-गप्पे वाला है.. चलो गोल-गप्पे खाते हैं।मैं बोली- ठीक है।
हमने गोल-गप्पे खाए, भाई बोला- और क्या खाओगी वंदना?मैं बोली- और कुछ नहीं..मैं मन-मन बोली- और तो आपका लंड खाऊंगी।
भाई बोला- चल.. अब तू बैठ, स्कूटी मैं चलाता हूँ।मैंने बोला- हाँ ठीक है।मैं भाई के पीछे बैठ गई।
भाई भी तेज़ चलाने लगा, मैंने डरते-डरते उसके कंधे पर हाथ रख प्रिया।भाई बोला- सही से पकड़ लो।मैं बोली- हां ठीक है।
मैं और कस कर पकड़ कर बैठ गई, अब मेरी चूचियाँ भाई की पीठ से अच्छे से सट गईं। फिर मैंने अपना हाथ भाई के आगे कर के उनके पेट को पकड़ लिया।
भाई ने पूछा- मज़ा आ रहा है घूमने में?मैं बोली- हां बहुत!कुछ देर बाद हम घर पर पहुंच गए।
मैंने मम्मी के साथ खाना बनाने में हेल्प की। कुछ टाईम बाद हमने खाना खाया और सो गए। मेरा भाई मेरे पास वाले कमरे में सोता था।
रात 12 बजे मुझको कुछ आवाज़ें सुनाई दीं- अहह.. अह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहह.. वंदना मेरी जान.. आ जाओ.. मेरे लंड को चूसो.. खा जाओ.. मेरा लंड..
मैं धीरे से उठी और बाहर आकर देखा तो भाई का रूम खुला हुआ था, मैं अन्दर चली गई, मैंने देखा कि भाई अपना लंड हिला रहा था और मेरा नाम ले रहा था।मेरी तो जैसे खुशी का ठिकाना नहीं रहा, मैं बोली- ये क्या कर रहे हो?
मेरा भाई चौंक सा गया.. उसका चेहरा लाल हो गया और एकदम से लोवर ऊपर को करते हुए बोला- सॉरी सॉरी.. बहन सॉरी.. मम्मी पापा से नहीं बताना प्लीज़?मैं बोली- नहीं बताऊंगी.. पर तुम ये क्या कर रहे थे?
वो जबाव देने की बजाए बोलने लगा- मैं तुमसे प्यार करता हूँ.. तुम्हारी जवानी को चूसना चाहता हूँ।मैं बोली- तुमको ज़रा सी भी लज्जा नहीं आ रही?वह चुप रहा..
मैं उसके बेड पर बैठ गई, मैं बोली- दुनिया क्या कहेगी?वो बोला- दुनिया के सामने भाई-बहन और अकेले में पति-पत्नी रहेंगे।मैं हँसने लगी तो वो भी मुस्कुरा प्रिया।
मैंने बोला- मेरे पति जी.. मुझको सोचने का टाईम दो।वो बोले- ठीक है मेरी जान..मैं बोली- अभी जान-वान कुछ नहीं..
मैं अपने कमरे में आ गई और खुशी से अपनी बुर में उंगली फेरते हुए सो गई।
सुबह जब मैं कॉलेज के लिए तैयार हुई, तो मैं बोली- रचित भाई.. मुझको कॉलेज छोड़ आओ!वो बोला- ठीक है।
जब हम घर से निकल आए तो रचित बोला- क्या सोचा मेरी पत्नी ने?मैं बोली- ठीक है.. आज रात को मैं तुम्हारी दुल्हन बनकर तुम्हारे कमरे में सुहागरात के लिए आऊंगी।वो बोला- पक्का..! मुझे विश्वास नहीं हो रहा है.. क्या तुम सच में तैयार हो?मैं बोली- मेरे पतिदेव मैं पक्का आऊँगी।
उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, वो बोला- मेरी जान अपने पति के आगे हाथ डालो.. जैसे पत्नी बैठती है।मैं बोली- ठीक है मेरे जानू!मैं आगे हाथ डालकर बैठ गई।
कुछ ही देर में मैं कॉलेज पहुंच गई।कॉलेज से जब छुट्टी हुई तो मैंने घर पर देखा कि मॉम-डैड घर पर नहीं हैं।मैं बोली- रचित मॉम-डैड किधर हैं?वो बोला- मौसी के घर पर गए हैं मेरी जान।मैं बोली- सच..!वो बोला- हाँ।
बस मैंने खाना खाया और मॉम की शादी का लहंगा-चुनरी पहन लिया।मेरे भाई ने शेरवानी पहनी और हम दोनों बेडरूम में आ गए।
रचित ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे ऊपर लेट कर किस करने लगा।मुझे मज़ा आ रहा था, मैं बोली- तुमने किसी और के साथ भी किया है?रचित बोला- हाँ, गर्लफ्रेंड के साथ बहुत बार किया है।मैं उसकी तरफ हैरानी से देखने लगी।
वो बोला- और तूने?मैं बोली- नहीं।वो बोला- अच्छा.. तो बस जैसे-जैसे मैं करूँ.. तुम करवाती रहना।मैं बोली- ठीक है.. पर कुछ होगा तो नहीं?वो बोला- कुछ भी नहीं होगा।
फिर उसने मुझे नंगी किया.. मैंने उसको नंगा किया। कुछ देर तक उसने मुझको चाटा-चूमा.. फिर अपना लंड मेरे हाथ में दे प्रिया।वो बोला- मुँह में लो।
मैंने लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। कुछ ही पलों में हम दोनों 69 की पोजीशन में हो गए थे।मैं बोली- बस भाई.. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है.. फाड़ दो मेरी बुर… चोद दो मुझको।
मेरे भाई ने अपने लंड पर तेल लगाया और अपना लंड मेरी बुर के मुँह पर रखकर हल्का सा दबाव डाला। उसका मोटा लंड मेरी बुर से फिसल गया। दोबारा में उसके लंड का सुपारा अन्दर घुस गया।
मेरी ज़ोर से चीख निकली- आहह.. आहह.. उहहह.. मर गई मॉम बचाओ..
भाई ने थोड़ा रूक कर दूसरा धक्का लगाया, मेरी बुर की झिल्ली ने खुलकर लंड को अन्दर ले लिया, मैं बहुत जोर-जोर से रो रही थी ‘निकालो.. निकालो.. दर्द हो रहा है.. आहह..’
पर भाई ने मेरी एक ना सुनी और धक्के लगाता रहा, कुछ टाईम बाद मुझे भी मजा आने लगा।अब भाई पेलता रहा.. कभी घोड़ी बनाकर, कभी लिटाकर, कभी लंड पर बैठा कर उसकी चुदाई चलती रही।
काफी देर चोदने के बाद रचित झड़ गया और उसने लंड का पूरा पानी मेरे मुँह में छोड़ प्रिया।
मैं नहीं झड़ी थी, मैं बोली- रचित मैं क्या करूँ?रचित अपनी 3 उंगलियों पर तेल लगाकर मेरी बुर में पेलने लगा।मुझे मजा आने लगा ‘फास्ट और फास्ट.. हाँ.. फाड़ दे अपनी बहन की बुर को..’
कुछ टाईम बाद मैं भी झड़ गई और हम नंगे थक कर सो गए। जब हमें होश आया तो मैं उठी। मैंने देखा कि बेड की चादर खून से पूरी खराब हो गई थी।
मैंने अपनी चिकनी बुर देखी.. मेरी बुर भी खून में लथपथ थी।मैं रो पड़ी- रचित रचित उठो.. ये देखो खून?रचित बोला- पागल.. रो क्यों रही हो मेरी जान.. पहली बार ऐसा होता है।मैं बोली- कुछ होगा तो नहीं.. पक्का!वो बोला- कुछ नहीं होगा।
शाम हो गई थी, रचित बोला- तुम थक गई हो मेरी जान.. मैं खाना होटल से लेकर आता हूँ।रचित ने हाथ साबुन से धोए और कपड़े पहन कर जाने लगा।
मैं भी कपड़े पहनने लगी तो रचित बोला- मेरी जान आज तुम कपड़े नहीं पहनो.. मेरे सामने नंगी रहो सिर्फ ब्रा-पेंटी में।मैं बोली- ओके।मैंने दूसरी नई ब्रा-पेंटी पहन ली।
भाई खाना लेने चला गया, मैंने बेड की खून से खराब वाली चादर धो दी।
तभी एकदम से मैं एक बड़े शीशे के सामने आ गई.. जो हमारे घर में लगा था। मैंने अपना चिकना बदन देखा.. एकदम गोरा भूरा रंग.. मोटी गांड ब्लैक चड्डी में और भी ज्यादा मस्त लग रही थी। मैं आईने के सामने अपने आपको और अपनी जवानी को देख रही थी। साथ ही मैं अपने मम्मों से खेल रही थी।
तभी रचित आ गया ‘मेरी जान उतावली ना हो.. अभी पूरी रात बाकी है। बस तू खाना खा.. फिर सेक्स स्टार्ट करते हैं।’ये सुनकर मैं रचित के गले से लग गई, भाई ने मुझे बांहों में ले लिया।
मैं बोली- मेरे पतिदेव.. तुम बहुत अच्छे हो.. पर अब रात को अपना लंड मेरी मोटी गांड गोल-गोल चूतड़ में भी डालना।वो- ठीक है।हम दोनों ने खाना खाया और कुछ देर बाद रचित बोला- चलो हो जाए शुरू?मैं बोली- हां, पर अबकी बार मेरी गांड यहीं शीशे के सामने चोदो।रचित बोला- ठीक है।
दोस्तो इसी तरह रचित ने मेरी ठुकाई की.. उसने पूरी रात मेरी चूत और गांड मारी और मेरा पूरा शरीर चूसा।इस घटना को विस्तार में बताऊंगी। तो काफी लंबी हो जाएगी।
आपको मेरी कहानी अच्छी लगी या नहीं, मुझे ईमेल पर जवाब देते रहना।मैं जल्दी ही दूसरी कहानी के साथ आऊंगी।ओके बाए दोस्तोsupport@mohakkisse.com