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पहली बार चुदाई पठन समय: 6 मिनट पढ़ा गया: 494 बार

लण्ड और चूत दोनों को फायदा

आशीष कुमार

11 Feb 2008 को प्रकाशित

लण्ड और चूत दोनों को फायदा
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Lund Aur Chut Dono Ko Faydaस्वाति एक 25 साल की जवान लड़की थी।

एक तो वो बहुत काली-कलूटी थी, इसलिए उसे पेरी गाँव का कोई लड़का लाइन नहीं मारता था।

दूसरी बड़ी मुसीबत की बात थी स्वाति बहुत गरीब थी।

उसका बाप मर चुका था और लड़कियों को सिलाई सिखाकर स्वाति गुजर-बसर करती थी।

इसी काम से वो अपनी माँ को हर महीने 2 हजार रुपए भी भेजती थी।

गोपाल के घर के पास ही स्वाति ने एक कमरा किराये पर लिया था।

गोपाल.. जिसे गाँव में बच्चा-बच्चा जानता था, ने ही स्वाति को कमरा दिलाया था।

गोपाल इससे पहले कुंवारा था और सोचता था कि स्वाति को पटा कर चोद दे।

सुबह से शाम तक स्वाति लड़कियों को सिलाई सिखाती।

गोपाल एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता था और स्वाति को भी कभी-कभी पढ़ा प्रिया करता था।

धीरे-धीरे गोपाल ने उसे पटा लिया।

कुछ दिनों बाद गोपाल ने अपनी बात कही- स्वाति.. आज दे दे यार..!

‘नहीं..’

‘क्यों..??’ गोपाल ने पूछा।

‘मेरी माँ बीमार है.. उसे 5 हजार भेजने हैं..’ वो बोली।

गोपाल जिस स्कूल में पढ़ाता था, वो गाँव का ही स्कूल था.. इसलिए उसे 2 हजार ही मिलते थे।

गोपाल को आज ही पगार मिली थी।गोपाल भाग कर गया और पैसे ले लाया और उसे दे दिए- ले ये 2 हजार ले ले.. मेरे पास इतने ही हैं…’ गोपाल बोला।

स्वाति की माँ को मोतियाबिन्द हो गया था, उनकी आँखों में जाला आ गया था।

‘ठीक है मैं तेरे पैसे ले लेती हूँ। मैं अपने पास ने 3 हजार लगा दूँगी.. माँ का ऑपरेशन तो हो जाएगा..’ वो बोली।

‘पर दे तो दे यार… मैंने आज तक किसी की चूत नहीं मारी है…’ गोपाल सिर खुजलाते हुए बोला।

स्वाति मान गई।

उसने शनिवार की रात को आने को कहा।

उस दिन सुबह उसने अपनी माँ को 5 हजार भेज दिए थे, उसकी फिक्र दूर हो गई थी।

शाम के 6 बजे थे… आखिरी लड़की भी चली गई।

गोपाल दाढ़ी-वाड़ी बनाकर और झांटें आदि बनाकर गया था।

उन दिनों जाड़ों के दिन थे.. चारों ओर ठण्ड और कोहरा था।

गोपाल ने बड़ी धीरे से कुण्डी खटकाई।

स्वाति ने दरवाजा खोला और गोपाल अन्दर चला गया।

कोई दोनों को पकड़ न ले, इसलिए स्वाति ने बिना देर किए किवाड़ बन्द कर दिए।

स्वाति एक तो काले रंग की थी, ऊपर से उसने गहरे लाल रंग का सलवार सूट पहल रखा था।

गोपाल को स्वाति को बाँहों में जकड़ लिया। सर्प्रियाँ शुरू होने के कारण स्वाति ने रजाई निकाल ली थी।

स्वाति बहुत काली थी.. उसे कोई भी चोदने की नजर से नहीं देखता था और यही कारण था कि वो अब तक कुंवारी थी और किसी का लौड़ा नहीं खा पाई थी।

वहीं दूसरी ओर गोपाल भी कुंवारा था और स्वाति को छोड़ कर सारी खूबसूरत लड़कियाँ किसी न किसी से फंसी थीं और चुदवाती थीं।उसको भी कोई लड़की घास नहीं डालती थी तो उसने स्वाति की चूत को ही अपने लौड़े की खुराक बनाने की ठान ली थी।

वैसे आज गोपाल की किस्मत बड़े दिनों बाद चमकी थी।स्वाति का भी चुदने का पूरा मन था।

दोनों बिस्तर की ओर गए।

गोपाल लेट गया।‘स्वाति बता… तुझे कौन सा आसन पसन्द है?’ गोपाल ने पूछा।

‘पता नहीं.. मुझे कुछ नहीं पता…’ वो बोली।

‘कोई बात नहीं.. मैं जानता हूँ.. सर्दियों में कौन सा आसन लगाना चाहिए..’ गोपाल बोला।

गोपाल लेट गया.. स्वाति ने पूरा नंगा होने से इंकार कर प्रिया था।

उसने सफेद रंग की ब्रा और चड्डी पहन रखी थी।

गोपाल ने स्वाति को अपने ऊपर लिया और पीछे से उसके ब्रा के हुक को खोल प्रिया।

स्वाति के मम्मे बहुत गोल-गोल, गुलगुले और मजेदार थे।गोपाल तो जैसे स्वर्ग में विचरण कर रहा था।

वो काली भले थी.. पर पूरी जवान थी।

काले-गोरे से क्या होता है.. लड़की बस जवान होनी चाहिए।किसी ने सच ही कहा है बिजली का बटन बन्द करो सब एक सी होती हैं।

‘आज देखो कितना जबरदस्त माल मिला है..’ गोपाल ने सोचा।

ऊपर से सिर्फ रजाई का भार था.. इसलिए स्वाति गोपाल पर ही गिर रही थी।

गोपाल ने उसकी जाँघ पर हाथ फेरा- अरे मादरचोद.. कितनी चिकनी जाँघ है.. जैसे संगमरमर..’

गोपाल सातवें आसमान पर था।

खूब जाँघ सहलाने के बाद स्वाति ने इशारा किया कि अब समय बर्बाद नहीं करना चाहिए और जो काम दोनों 5-7 सालों से नहीं कर पाए.. उसे अब करना चाहिए।

गोपाल ने इशारा समझ कर अपने सीधे हाथ को स्वाति की बुर तक ले गया। और उसने उसकी चड्डी उतार दी।

अब स्वाति नंगी थी और बहुत चिकनी थी जैसे बेकरार मछली… उसकी बुर से रस निकल रहा था।

गोपाल ने अपने 6 इंच के लौड़े को हाथ से सीधा किया।उसने एक हाथ से स्वाति की कमर उठाई और लण्ड बुर में ठेल प्रिया…

ऊपर ने मात्र 4 किलो की रजाई थी।

उस पर गोपाल ने स्वाति के चूतड़ों को दोनों हाथ से पकड़ लिए और ‘घपाघप’ चुदाई शुरू कर दी।

ये पहली बार जब दोनों चुदाई का सुख ले रहे थे।दोनों का बड़ा मजा आ रहा था।

चुदाई चीज ही ऐसी है कि दोनों पार्टी को मजा आता है।

दस मिनट की चुदाई तो इसी तरह लेटे-लेटे ही हुई।दोनों बल्लेबाज आउट हो गए।फिर दोनों रजाई के अन्दर नंगे ही सो गए।

रात में एक बजे.. फिर 3 बजे दोनों ने दो राउण्ड और बल्लेबाजी की और जी भर के खेला।

सुबह 5 बजे गोपाल चला गया।

फिर हफ्ते में एक- दो बार स्वाति और गोपाल रजाई में रासलीला करते थे।इसमें दोनों को ही फायदा मिला।

स्वाति ने पैसे जोड़ कर गोपाल को उसके दो हजार वापिस करने चाहे थे, पर गोपाल ने नहीं लिए।

उसने कहा- स्वाति तुम्हारे सामने पैसों का कोई मोल नहीं है।

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