पिछला भाग पढ़े:-संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-31
हिंदी चुदाई कहानी अब आगे-
मैंने मम्मी को थोड़ा ऊपर खींच कर उनके होंठों को चूसा और बोला: असली मज़ा देने से पहले ही यह ढीला हो गया ना?
मम्मी ने लंड को अपनी मुट्ठी में लिया और बोली: इसे अब फिर से तैयार करना मेरा काम है। तुम ज़्यादा मत सोचो। पहली बार में ऐसा अक्सर हो जाता है।
मम्मी मेरे होंठों को चूसते हुए मुझे अपने ऊपर ले लेती हैं। मैं उनके होंठों को छोड़ कर धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ता हूं। उनके दोनों बूब्स को चूसते और मसलते हुए मैं और नीचे गया। अब मैं मम्मी की दोनों टांगों के बीच पहुँच कर अपने होंठों को पेंटी के ऊपर से ही उनकी चूत पर रगड़ रहा था। मेरे ऐसा करने से मम्मी पागल हुई जा रही थी। मैंने चूत के ऊपर से ही चाट-चाट कर उनकी पेंटी को गीला कर दिया था।
फिर जैसे ही मैं मम्मी की पेंटी की इलास्टिक पर हाथ रखता हूं, मम्मी अपनी गांड़ को ऊँची कर देती हैं ताकि मैं उनकी पेंटी आराम से निकाल सकूं। पेंटी उतारते ही मैंने देखा कि उनकी चूत एक-दम साफ और बिना बालों के चमक रही थी। चूत की फांकों के बीच सफेद गाढ़ी मलाई लिए मोटे होंठ आपस में चिपके हुए थे।
मम्मी अपनी टांगें चौड़ी करके अपने पेट की तरफ मोड़ते हुए बोली: राहुल बेटा, देख लो यही वह जगह है जिसे तुम्हारे पिता ने अपने बीज से भरा था और जहाँ से मैंने तुम्हें जन्म दिया था। अब इस जगह को एक पति की तरह संभालने की बारी तुम्हारी है!
मैंने अपने दोनों हाथों से मम्मी की जांघों को और चौड़ा करते हुए अपना चेहरा चूत के करीब लाकर कहा: उफ़, क्या मस्त चूत है मम्मी आपकी! आह… सिर्फ चूत को ही नहीं, मैं आपको भी एक पति वाला पूरा प्यार दूँगा।
मैं अपनी जीभ चूत की मोटी और फूली हुई फांकों पर फेरने लगता हूं। फिर चूत की फांकों को बड़े प्यार से खोल कर अपनी जीभ उस छेद तक ले जाता हूं जहाँ से मलाई रिस रही थी। जैसे ही मैं उनके लाल दाने को होंठों के बीच दबा कर चूसने लगता हूं, मम्मी कसमसाने लगती हैं। वह अपनी कमर को हल्का-हल्का चला कर अपनी चूत को मेरे होंठों पर रगड़ रही थी।मम्मी मेरे सिर को चूत पर दबाते हुए और कामुक सिसकारियाँ भरते हुए बोली: आह… उफ़… निचोड़ दे मेरे बेटे! इस चूत में बहुत आग है, मुझसे अब यह संभाली नहीं जाती…
मैं चूत के दाने को चूसते हुए अपनी जीभ को छेद के अंदर तक डाल रहा था। उनकी चूत से निकलता रस मेरे मुँह के अंदर जाते ही एक अलग ही मज़ा दे रहा था। मम्मी की हालत अब बिना पानी की मछली जैसी हो गई थी। मेरे चूसने से उनकी चूत की फांकें अब पूरी तरह खुल चुकी थी।
मम्मी मेरे बालों को नोचते हुए बोली: आह… राहुल, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है, बस चोद दे मेरी चूत को! उफ़… आई…
मैं चूत के अंदर जीभ डाले हुए एक हाथ से दाने को रगड़ रहा था और मम्मी कसमसाते हुए चूत का रस छोड़े जा रही थी।
मम्मी गहरी सांस बाहर छोड़ते हुए बोली: उफ़… बस बेटा, अब मुझे लंड चाहिए। मैं लंड के लिए महीनों से बेचैन हूं… उफ़!
मम्मी की तड़प को देखते हुए मैंने चूत से मुँह हटाया और उनकी गांड के नीचे एक तकिया लगा दिया।
फिर मम्मी की आँखों में देखते हुए लंड के सुपाड़े को चूत के मुहाने पर रगड़ते हुए,मैंने कहा: सविता, यह लंड भी बरसों से इस चूत के लिए तरस रहा था। आज तुम्हें चोदकर ही मैं असली मर्द बनूँगा!
मम्मी अपनी टांगें फैलाए मेरी आँखों में देखकर बोली: मैं तुझे ऐसा मर्द बनाऊँगी कि हर औरत तेरे आगे मेरी तरह अपनी चूत खोलने के लिए तैयार हो जाएगी…
मम्मी ने अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर रखा और बोली: घुसा दे राहुल…
मम्मी की चूत बहुत गर्म हो रही थी। मेरे लंड का सुपाड़ा उनके रस से गीला पड़ा था, जो एक हल्के धक्के में ही अंदर प्रवेश कर गया। सुपाड़ा अंदर जाते ही मम्मी ने एक लंबी आह के साथ अपनी आँखें बंद कर ली। मैंने उनकी चिकनी कमर को पकड़ कर दूसरा धक्का दिया, जिससे आधा लंड चूत को चीरता हुआ और अंदर चला गया।
मम्मी अपने दाँतों के बीच और हाथों की मुट्ठी में चादर को समेट रही थी। वह अपनी चूत को कभी ढीला तो कभी टाइट कर रही थी। मैंने उनकी कमर को मज़बूती से पकड़ा और एक तेज़ धक्के में अपना पूरा लंड चूत के अंदर उतार दिया।
मम्मी ने एक लंबी चीख मारते हुए कहा: उई ई ई ई मां… आह ह ह!
मैं एक बार फिर अपने लंड को बाहर निकाल कर तेज़ झटके से चूत में उतार देता हूं। मां की चूत एक-दम मेरे लंड को जकड़े हुए थी। मैं मम्मी के ऊपर लेट कर उनके होंठों को लॉक कर लेता हूं और धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करके उनकी चुदाई करने लगता हूं। मम्मी मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए नीचे से अपनी गांड भी उछाल रही थी। मेरी चुदाई से मम्मी इतनी कसमसा रही थी कि वह बार-बार मेरे होंठ काट ले रही थी।
मैंने अपने धक्कों की गति तेज़ कर दी, जिससे कमरे में मां की कामुक सिसकारियाँ और थप-थप की आवाज़ें गूंज उठी। मेरे लंड का सुपाड़ा जब भी मां की बच्चे-दानी से टकराता, तो वह अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा देती थी। होंठों के साथ-साथ मैं उनके बूब्स भी मसल रहा था।
आज एक मां अपने बेटे के नीचे नंगी लेट कर उसका लंड ले रही है, यह हमारे सिवा इस होटल में कोई नहीं जान सकता था।
मम्मी अपने होंठ अलग करके हाँफते हुए बोली: राहुल बेटा, तुम चुदाई में इतने अच्छे मर्द निकलोगे पता नहीं था। वरना यह मां कब की तेरे इस लंड के नीचे आ जाती। उफ़… आह ह ह!
मैंने कहा: कोई बात नहीं मां, अब यह लंड तुम्हें खुश करने में कोई कमी नहीं छोड़ेगा।मेरा लंड मां की चूत में तेज़ी से गोते लगा रहा था और हर धक्के पर मां के बूब्स ऊपर की तरफ जंप कर रहे थे।
मम्मी सिसकारियां भरते हुए बोली: आह आह… राहुल, तुझे बचपन में मेरे ऊपर बैठ कर घोड़े की सवारी करना पसंद था। मैं आज फिर तेरे लिए घोड़ी बनना चाहती हूं…
मैंने तुरंत लंड बाहर निकाला और मम्मी की कमर के नीचे हाथ डाल कर उन्हें पलटने का इशारा देते हुए कहा: हाँ, मुझे सवारी करके बहुत खुशी मिलती थी। पर मां, आज मैं सवारी नहीं करूँगा, बल्कि आज आपको अपने लंड की सवारी कराऊँगा!
मम्मी मेरे सामने घोड़ी बन जाती हैं। उफ़… उनके बड़े चूतड़ और मोटी जांघें पीछे से देख कर मन खुश हो जाता है। मैं पहले मम्मी की गांड़ के दोनों गोलों को चूमता हूं, फिर उनकी टांगें थोड़ी फैला कर पीछे से उनकी चूत का नज़ारा लेता हूं।
उफ़… चूत के होंठ दो हिस्सों में खुले हुए थे। उस गुलाबी नज़ारे को देख मैं अपनी जीभ उनके मोटे होंठों पर फेर देता हूं। मेरी जीभ लगते ही मम्मी अपनी गांड को इधर-उधर हिला कर अपनी चूत को मेरे पूरे मुँह पर रगड़ देती हैं। मैं चूत को अच्छी तरह चाटकर अपना लंड छेद पर टिकाता हूं और अंदर पेल देता हूं।
मेरा पूरा लंड अंदर जाते ही मम्मी घोड़ी की तरह उचक जाती हैं। मैं उनके मस्त कूल्हों को पकड़ कर धक्के देना स्टार्ट कर देता हूं।
मां को घोड़ी बना कर चोदते हुए मुझे मम्मी और जुनैद की चुदाई याद आ जाती है, कि कैसे जुनैद घर के हर कोने में मम्मी को बेरहमी से चोदता था। यह याद करके मेरा जोश और बढ़ जाता है और मैं मां की ताबड़तोड़ चुदाई करने लगता हूं। मम्मी मेरे हर झटके पर आगे खिसक रही थी और उनकी भारी गोल चूचियाँ नीचे झूल रही थी।
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मम्मी तेज़ कामुक सिसकारियाँ भरते हुए बोली: आह… आह… राहुल, अचानक तुम्हें क्या हुआ? उफ़… आह… यही तो चाहिए मेरी चूत को! बेटा, रगड़ दे मुझे… आई ई ई… तुम अपने पापा से भी बड़े खिलाड़ी मर्द बनोगे। बेटा, झड़ने से पहले मुझे अपने लंड की सवारी करा देना…
मैंने मम्मी के चूतड़ों पर चार-पांच थप्पड़ रसीद दिए और बोला: चिंता मत कर मेरी रंडी, आज तुझे पूरी रात लंड की सवारी कराऊँगा।
मम्मी सिसकते हुए बोली: राहुल, मुझे इतना चोद कि मेरा रंडीपना बाहर आ जाए… उफ़… आई… बेटा, अगर असली खिलाड़ी मर्द बनना है, तो झड़ने से पहले औरत की पोजीशन बदल दिया करो, इससे तुम देर तक टिकोगे…
मैंने लंड को बाहर निकाला और बोला: अच्छा! आ फिर, तुझे लंड की सवारी कराऊँ।
मैं बगल में सीधा लेट जाता हूं। मम्मी मेरी जांघों के दोनों तरफ अपने पैर करके सीधा अपनी चूत मेरे लंड पर टिकाती हैं और धीरे-धीरे नीचे बैठ जाती हैं।
उफ़… मम्मी मेरी आँखों में देखते हुए अपने बाल खोल देती हैं, फिर अपने हाथ मेरे सीने पर रख कर गांड उछालना शुरू कर देती हैं। मां की चूचियाँ हिलती देख मेरे लंड का तनाव और बढ़ जाता है। वह मेरे खड़े लंड को चूत की पूरी गहराई तक लेकर ऊपर-नीचे हो रही थी।
थोड़ी ही देर में मम्मी का जोश सातवें आसमान पर पहुँच जाता है। वह हाँफते हुए तेज़ गति से ऊपर-नीचे होते हुए झड़ने वाली थी। उनकी चूत से हल्का रस टपककर मेरी जांघों पर गिरता है, तभी मैं मम्मी को अपने नीचे आने को कहता हूं ताकि हम साथ झड़ सकें।
मम्मी तुरंत अपनी टांगें फैला कर बोली: राहुल बेटा, जल्दी मेरी चूत में लंड डाल दे… उफ़… बेटा, आज अपनी मां की चूत अपने बीज से भर दे!
मैं मम्मी की चूत में लंड डाल कर तेज़ धक्के मारने लगता हूं। थोड़ी ही देर में मम्मी का रुका हुआ जोश फिर से आता है और हम दोनों साथ में ही झड़ जाते हैं। मेरा लंड पूरी तरह मां की चूत के अंदर खाली हो रहा था। मां मेरे गर्म वीर्य को अपनी चूत के अंदर महसूस कर रही थी। वह लंबी-लंबी आहें भर कर सिसक रही थी और उनकी चूत बार-बार टाइट होकर मेरे लंड को निचोड़ रही थी।
मैं मम्मी के ऊपर ढेर होकर लेट जाता हूं। वह मुझे अपनी बाहों में समेट कर राहत की साँस लेती हैं। कुछ देर बाद जब मेरा लंड एक फच की आवाज़ के साथ बाहर आता है, तो मैं उनके बगल में लेट जाता हूं।
मम्मी मेरे सीने और फिर होंठों को चूस कर बोली: राहुल, तुमने तो मुझे खुश ही कर दिया! ऐसी मस्त चुदाई करोगे, मुझे अंदाज़ा नहीं था। उफ़… मेरा पूरा बदन टूट गया है, तुम कमाल के मर्द बनोगे। आई लव यू राहुल…
मैंने भी उनके होंठों को चूम कर कहा: आई लव यू टू, जान! मैं आगे भी तुम्हें ऐसी ही ढेर सारी खुशियाँ देने वाला हूं।
मम्मी मेरे सीने से लग कर कुछ देर लेटी रहती हैं, फिर वह दोबारा मेरे ऊपर आकर लिप-लॉक करती हैं और मुझे दूसरे राउंड के लिए तैयार करने लगती हैं।
इस बार मैं मम्मी को बेड के किनारे लाकर, उनकी टांगें फैला कर और ज़मीन पर खड़ा होकर पीछे से चुदाई कर रहा था। थोड़ी देर बाद मैं उन्हें बेड से उतार कर झुका देता हूं और पीछे से पेलने लगता हूं। मैं हर पोज़िशन में उन्हें चोद कर उनकी चूत की गर्मी निकाल रहा था।
तीसरे राउंड में मम्मी मेरी गोद में उछल-उछल कर चुदाई करवाती हैं। उन्हें इस तरह अपनी गोद में उछाल कर मैं अपनी बॉडी की मज़बूती दिखा रहा था। इस ताबड़तोड़ चुदाई के बाद हम दोनों बेड पर ढेर हो जाते हैं और मम्मी थक कर मुझे अपनी बाहों में लेकर नंगी ही सो जाती हैं।
सुबह के करीब पाँच बजे मुझे महसूस हुआ कि मेरा लंड किसी गर्म और गीली जगह पर था, जिससे मेरी आँख खुल गई। मैंने देखा कि सुबह की ताज़गी के बीच मम्मी मेरे तने हुए लंड को चूस रही थी।
मैंने अपने एक हाथ से उनके सिर पर हल्का दबाव बना कर पूरा लंड उनके गले में उतार दिया। मम्मी हूं-हूं करके कुछ सेकेंड तक उसे मुँह में लिए रही, फिर लंड बाहर निकाल कर सीधा मेरे ऊपर आ गई। उन्होंने लंड को चूत के मुहाने पर सेट किया और उसे अंदर निगल गई। मैं नीचे से धक्के मारकर उन्हें चोद रहा था।
सुबह की इस चुदाई का मज़ा ही कुछ और था। इसके बाद मम्मी अपनी चूत को खुद साफ करके मेरे बगल में सो गई। जब 9 बजे मेरी आँख खुली, तो देखा कि मैं बेड पर अकेला नंगा लेटा हुआ था और मम्मी बाथरूम के अंदर नहाते हुए गुनगुना रही थी। मैं उठ कर सीधा बाथरूम में घुस गया। मम्मी पूरी नंगी खड़ी अपने बदन पर साबुन लगा रही थी। मैंने उन्हें पीछे से अपनी बाहों में जकड़ लिया।
मम्मी ने चेहरा घुमा कर मेरे होंठों को चूसा और बोली: गुड मॉर्निंग! उठ गए? मुझे लगा आप देर तक सोएंगे।
मैंने पीछे से उनके बूब्स मसलते हुए कहा: गुड मॉर्निंग मेरी जान!
मम्मी के बदन से लिपटने पर मेरी बॉडी पर भी साबुन लग गया। मैंने शावर चालू कर दिया और हम दोनों भीगने लगे। भीगने के बाद मम्मी का बदन चमकने लगा था। मैं नीचे बैठ गया और उनकी टांगें फैला कर चूत चाटने लगा। थोड़ी देर में मम्मी ने अपना पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया। फिर वह घुटनों के बल बैठ गई और मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। वह लंड का सारा रस पी गई, फिर हम एक-दूसरे को साफ़ करके बाहर आए और होटल से चेकआउट कर लिया।
घर निकलने से पहले हम आगरा का ताजमहल घूमने गए। मार्केट में मैंने गौर किया कि मम्मी की कलाइयां सूनी थी। मैं उन्हें एक अच्छे शोरूम में ले गया और उनकी साड़ी से मैच करती चूड़ियाँ दिलवाई। उनकी नाक भी बिना नथ के अधूरी लग रही थी, तो मैंने एक सुंदर सी नथ लेकर खुद उन्हें पहना दी। नथ पहनते ही मम्मी और भी ज़्यादा सुंदर लगने लगी थी।
मम्मी का पूरा लुक अब एक शादी-शुदा महिला जैसा लग रहा था। हम बाहर पति-पत्नी की तरह घूम रहे थे। मम्मी मेरी बाहों में हाथ डाले चल रही थी; हमें देख कर कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता था कि हम मां-बेटा हैं। हमने ताजमहल पर अपनी कुछ तस्वीरें खिंचवाई और शाम होने से पहले घर के लिए निकल पड़े।
घर आकर हमारा रिश्ता और भी मज़बूत हो गया। मम्मी ने मुझे अपने ही कमरे में सोने को कह दिया था। सुबह वह मेरा लंड चूसकर ही बिस्तर से उठती, फिर मुझे नंगा सोता छोड़ खुद नहाने चली जाती।
नहाने और घर का काम निपटाने के बाद वह नाश्ता बना कर मुझे जगाने आती। वह घर में अक्सर सिर्फ पेंटी और एक शर्ट या टी-शर्ट पहने रहतीं। फिर हम साथ बैठ कर नाश्ता करते। शॉप पर जाने से पहले मम्मी मुझसे अपनी पसंद की साड़ी के बारे में पूछती।
मम्मी मेरी पसंद की साड़ी पहन कर पूरा श्रृंगार करती। जब हम शॉप पर जाते, तो लोग उन्हें मेरी बीवी समझ लेते। यहाँ तक कि आस-पास के लोग मुझसे सवाल करने लगे थे कि मैंने शादी कर ली और किसी को बताया भी नहीं! मम्मी यह सुन कर शर्मा जातीं और फिर रात को बिस्तर पर जमकर चुदाई करवाती।
एक रात मम्मी ने चुदाई के दौरान कहा: राहुल, शॉप पर लोग जब तुम्हें मेरा पति समझते हैं, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है।
मैंने जवाब दिया: ठीक है, शॉप पर हम पति-पत्नी की तरह ही रहेंगे।
इसके बाद, हम जब भी किसी पार्टी या क्लाइंट से डील करने जाते, मैं मम्मी का परिचय अपनी बीवी के रूप में ही करवा देता। इससे हमें काफी अच्छी डील्स मिलने लगी और कुछ ही महीनों में हमने अच्छी-खासी इनकम कमा ली। मम्मी अब मेरे साथ पूरी तरह से खुश रहने लगी।
तो दोस्तों, मां-बेटे का यह अनोखा प्यार आगे भी इसी तरह जारी रहता है। समय की कमी के कारण मैं अपनी कहानी को फिलहाल के लिए यहीं समाप्त करता हूं। उम्मीद करता हूं कि आपको मेरी अभी तक की कहानी पसंद आई होगी। मैं अपने सभी पाठकों के फीडबैक का इंतज़ार करूँगा।support@mohakkisse.com