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Hindi Chudai Kahani • पठन समय: 9 मिनट • पढ़ा गया: 933 बार

माँ का दूध और दोस्त(Maa ka doodh aur dost )

hatedvillain

17 Mar 2017 को प्रकाशित

माँ का दूध और दोस्त(Maa ka doodh aur dost )
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रात के दस बज चुके थे। रवि का घर शांत था, लेकिन उसके कमरे से हल्की-हल्की बात-चीत की आवाजें आ रही थी। रवि, 19 साल का जवान लड़का, अपने तीन दोस्तों, अमित, विक्की और राज के साथ बैठा प्लान बना रहा था। वे कॉलेज के शरारती दोस्त थे और आज शाम से रवि के घर चले आए थे।

रवि की मां, सुनीता आंटी, 42 साल की सुंदर औरत थी। उनका गोरा रंग, भरी हुई छाती और पतली कमर किसी को भी ललचा सकती थी। वे हमेशा साड़ी में रहती, लाल बिंदी और मंगलसूत्र उन्हें और भी मोहक बनाते। लेकिन सुनीता आंटी सख्त मिजाज की थी। घर की इज्जत का पूरा ख्याल रखती और बच्चों की शरारतों पर सख्ती करती।

शाम को उन्होंने लड़कों के लिए चाय बनाई थी, लेकिन अब रात गहरा चुकी थी। सुनीता आंटी किचन में खड़ी थी, ट्रे में चार गिलास रखे हुए। गिलासों में ठंडा दूध भरा था, जो चमकदार लग रहा था। वे सोच रही थी, “इन बच्चों को कुछ ताकत देने वाला दें, लेकिन ज्यादा बिगड़ ना जाएं।” आंटी ने ट्रे उठाई और रवि के कमरे की ओर बढ़ी।

“बेटा, दरवाजा खोलो,” उन्होंने दस्तक दी। रवि ने जल्दी से दरवाजा खोला। आंटी की साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका हुआ था, लेकिन वे फौरन ठीक कर लिया। “मां, ये दूध?” रवि ने उत्सुकता से पूछा। आंटी ने सख्त लहजे में कहा, “हां, पी लो और सो जाओ। कल कॉलेज है। ज्यादा देर मत करना।”

दोस्तों ने एक-दूसरे को देखा। अमित ने कहा, “थैंक यू आंटी, लेकिन ये दूध तो बहुत स्पेशल लग रहा है।” आंटी ने ट्रे टेबल पर रख दी और कहा, “स्पेशल कुछ नहीं, साधारण दूध है। पी लो और चुप-चाप सो जाओ।”

लड़के गिलास बांटने लगे। अमित ने पहला घूंट लिया और बोला, “आंटी, ये तो कमाल का मीठा है। आपकी रेसिपी?” सुनीता आंटी मुस्कुराई लेकिन सतर्क रही। “बस घर का बना है। अब मैं जाती हूं।” विक्की ने कहा, “आंटी, थोड़ी देर रुकिए ना, हमारी बातें सुनिए।” आंटी ने सिर हिलाया, “नहीं बेटा, मैं थक गई हूं। अच्छे से सोना।” वे कमरे से बाहर निकल गई, लेकिन लड़के रुके नहीं। रवि ने फुसफुसाया, “दोस्तों, आज मां को मनाना है। लेकिन आसान नहीं होगा। वो सख्त हैं।”

कुछ देर बाद, अमित ने बहाना बनाया। “रवि, मुझे पानी चाहिए।” रवि ने कहा, “मां से मंगवा लो।” अमित किचन गया। सुनीता आंटी बर्तन धो रही थी। “आंटी, एक गिलास पानी?” अमित ने मुस्कुराते हुए कहा। आंटी ने गिलास दिया, लेकिन नजरें मिलाने से बची। “पी लो और कमरे में चले जाओ।”

अमित ने हिम्मत जुटाई, “आंटी, आप कितनी सुंदर लगती हैं। साड़ी में तो कमाल।” आंटी का चेहरा लाल हो गया। “अरे, ये क्या बातें कर रहे हो? मैं तुम्हारी आंटी हूं। शर्म करो।” अमित ने पीछे हट लिया, लेकिन मन में आग लग गई।

विक्की ने अगला कदम उठाया। वह कमरे से निकला और आंटी के पास गया। “आंटी, मेरी तबीयत ठीक नहीं। सिर दर्द हो रहा है।”

सुनीता आंटी चिंतित हो गई।“क्या हुआ बेटा? दवा लाऊं?” वे कमरे में आई। लड़के घेरा डाल कर बैठे थे। राज ने कहा, “आंटी, आप ही का दूध पीने से ठीक हो जाएंगे।” आंटी ने भौंहें चढ़ाई, “क्या बकवास? दूध तो पी चुके। अब आराम करो।” विक्की ने आंटी का हाथ पकड़ लिया। “आंटी, बस थोड़ी मालिश कर दो।”

आंटी ने हाथ छुड़ा लिया। “नहीं, मैं ऐसी चीजें नहीं करती। खुद संभाल लो।” वे कमरे से बाहर चली गई, लेकिन दिल की धड़कन तेज हो रही थी।

राज ने प्लान सोचा। “चलो, आंटी को मजाक से उकसाते हैं।” वे सब कमरे से निकले और लिविंग रूम में बैठ गए। सुनीता आंटी टीवी देख रही थी। रवि ने कहा, “मां, हम थोड़ा गेम खेलें?” आंटी ने सहमति दी, “ठीक है, लेकिन जल्दी खत्म करो।” गेम में सवाल-जवाब थे, लेकिन धीरे-धीरे शरारती हो गए। अमित ने पूछा, “आंटी, आपका फेवरेट ड्रिंक क्या है?”

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आंटी ने कहा, “चाय।” विक्की ने कहा, “लेकिन दूध तो स्पेशल है ना?” आंटी शरमाई, “बस पी लो जो दिया है।”

गेम आगे बढ़ा। राज ने कहा, “अब ट्रुथ या डेयर।” आंटी ने मना किया, “नहीं, ये बच्चों का खेल है।” लेकिन रवि ने जिद की, “मां, एक बार।” आंटी मान गई। पहला डेयर अमित को मिला— आंटी की साड़ी का पल्लू छूना। अमित ने कोशिश की, लेकिन आंटी ने पीछे हट गई। “ये क्या बेवकूफी है? बंद करो ये!” वे गुस्से में उठी। लड़के मायूस हो गए। “रवि, तेरी मां तो कठिन है,” अमित ने कहा। रवि ने सांत्वना दी, “चलो, धीरे-धीरे मनाएंगे।”

रात एक बजे। घर अंधेरा था। सुनीता आंटी बेडरूम में लेटी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। लड़कों की शरारतें दिमाग में घूम रही थी। तभी दरवाजा खटका। रवि अंदर आया। “मां, मुझे डर लग रहा है। साथ सो सकता हूं?” आंटी ने आश्चर्य से कहा, “बेटा, तू तो बड़ा हो गया। अकेले सो।” रवि ने जिद की, “प्लीज मां।” आंटी मान गई। रवि बिस्तर पर लेटा और धीरे से आंटी का हाथ पकड़ा। “मां, आप कितनी सॉफ्ट हो।” आंटी ने हाथ हटाया, “सो जा बेटा। कल सुबह उठना है।”

लेकिन रवि रुका नहीं। उसने आंटी की कमर पर हाथ फेरा। आंटी चौंक गई। “रवि, ये क्या कर रहा है? मैं तेरी मां हूं!” रवि ने फुसफुसाया, “मां, बस प्यार है। दोस्त भी चाहते हैं।” आंटी ने धक्का दिया, “नहीं, ये गलत है। बाहर चले जा!” रवि बाहर आया, लेकिन दोस्त इंतजार कर रहे थे। “क्या हुआ?” अमित ने पूछा। रवि ने कहा, “मुश्किल है, लेकिन कोशिश जारी।”

अगला प्लान— सुनीता आंटी को गिफ्ट। सुबह होते ही विक्की ने एक सुंदर स्कार्फ दिया। “आंटी, ये आपके लिए।” आंटी खुश हुई, लेकिन सतर्क रही। “थैंक यू, लेकिन ये सब क्यों?” राज ने कहा, “आप हमारी फेवरेट आंटी हो।” आंटी मुस्कुराई, लेकिन दूर रही। शाम को फिर वही। लड़के किचन में घुस आए। “आंटी, और दूध?” अमित ने कहा। आंटी ने मना किया, “नहीं, कल का बना लो।” लेकिन अमित ने आंटी के कंधे पर हाथ रखा। “आंटी, थोड़ा रिलैक्स हो जाओ।”

आंटी ने झटक दिया। “बस करो! मैं ऐसी नहीं हूं।” वे रोने लगी। लड़के घबरा गए। रवि ने सांत्वना दी, “मां, सॉरी। हम सिर्फ मजाक कर रहे थे।” आंटी ने कहा, “मजाक नहीं, ये शर्म की बात है। घर से चले जाओ दोस्त।” लेकिन रवि ने गले लगा लिया। “मां, प्लीज। हम सब आपको प्यार करते हैं।” आंटी का दिल पिघला। “ठीक है, लेकिन कभी मत दोहराना।”

रात फिर गहरी हो गई। लड़के कमरे में थे। अमित ने कहा, “अब आखिरी कोशिश।” वे सब आंटी के कमरे गए। दरवाजा खुला था। सुनीता आंटी साड़ी बदल रही थी। उनकी पीठ नंगी थी। लड़के अंदर घुस गए। “आंटी!” विक्की ने कहा। आंटी चादर से ढक ली। “बाहर जाओ!” लेकिन राज ने दरवाजा बंद कर दिया। “आंटी, हम जानते हैं आप भी चाहती हैं। आपकी आंखें बता रही हैं।”

आंटी हिचकिचाई। “नहीं, ये पाप है।” रवि ने आगे बढ़ा और आंटी का पल्लू खींचा। साड़ी सरक गई। आंटी की ब्लाउज दिखी। “बेटा, रुको।” लेकिन अमित ने पीछे से गले लगा लिया। “आंटी, बस एक बार।” आंटी की सांस तेज हो गई। विक्की ने ब्लाउज के हुक खोले। भारी चूचियां बाहर आ गई। निप्पल्स पर दूध की बूंदें। “आंटी, ये स्पेशल दूध।” राज ने कहा। आंटी विरोध करने लगी, लेकिन कमजोर पड़ गई।

रवि ने चूची मुंह में ली और चूसने लगा। दूध बहने लगा। “आह… नहीं बेटा।” लेकिन कराह निकल गई। अमित ने साड़ी नीचे सरकाई। आंटी की गांड नंगी। उसने थप्पड़ मारा। “आंटी, कितनी टाइट।” आंटी ने कहा, “धीरे… ये पहली बार।” विक्की ने चूत पर हाथ फेरा। गीली हो चुकी थी।“आंटी, आप तैयार हो।” राज ने लंड बाहर निकाला और आंटी के हाथ में थमा दिया।

आखिरकार, आंटी हार मान ली। “ठीक है, लेकिन जोर से मत।” रवि ने आंटी को बिस्तर पर लिटाया। लंड चूत में डाला। धक्का मारा। “उफ्फ… बेटा, दर्द हो रहा।” रवि धीरे-धीरे पेलने लगा। अमित ने मुंह में लंड ठूंस दिया। आंटी चूसने लगी। विक्की गांड में उंगली डाली, फिर लंड घुसेड़ा। राज चूचियां चूस रहा था।

आंटी कराह रही थी, “और… लेकिन धीरे।” सब ने बारी-बारी चोदा। रवि चूत में झाड़ा, अमित मुंह में, विक्की गांड में, राज चूचियों पर। आंटी थक गई, लेकिन मुस्कुराई। “बच्चो, ये आखिरी बार। लेकिन मजा आया।” लड़के हंस पड़े। मुश्किल सिडक्शन ने रात को यादगार बना दिया।

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