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माँ की चुदाई पठन समय: 17 मिनट पढ़ा गया: 949 बार

छत पर गलती, बेड पर माँ-2(Chhat par galti, bed par maa-2)

sunitamanish3

09 Sep 2014 को प्रकाशित

छत पर गलती, बेड पर माँ-2(Chhat par galti, bed par maa-2)
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पिछला भाग पढ़े:-छत पर गलती, बेड पर माँ-1मां बेटा सेक्स कहानी अब आगे-

मैंने जवाब में उनकी भारी चूचियों को पीछे से और ज़ोर से मसल लिया। उँगलियाँ उनके सख्त निप्पल्स को पिंच करते हुए, मैंने कान में गरम साँस छोड़ी —

“मां… अब निकालने का मन बिल्कुल नहीं कर रहा। आपकी चूत ने मेरे लंड को इतना कस लिया है। मैंने सोचा प्रीति है, लेकिन आप… आपकी ये गर्म, गीली और टाइट चूत। अब तो मैं आपको ही चोदना चाहता हूं,‌ अपनी मां को।”

मैंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया। पहला गहरा धक्का — पूरा लंड बाहर निकाला, सिर्फ़ सिरा अंदर छोड़ा। फिर एक ज़ोरदार झटका देकर पूरी लंबाई तक घुसा दिया।

“आआह्ह्ह्ह… विनीत… नहीं… उफ्फ़… इतना मोटा… तेरे पापा का भी इतना नहीं था।”

दूसरा धक्का… तीसरा… चौथा… हर धक्के पर मां का पूरा बदन थरथरा जाता। उनकी भारी चूचियाँ मेरे हाथों में उछल-उछल कर मेरी हथेलियों से टकरा रही थी। उनकी चूत से “चप… चप… चप…” की आवाज़ आने लगी थी।

मैंने उनकी कमर को कस कर पकड़ लिया और रफ्तार बढ़ा दी। अब धक्के छोटे-छोटे लेकिन बहुत तेज़ और गहरे हो गए थे।

“ले मां… ले अपनी बेटे का मोटा लंड…जो तुमने 24 साल पहले जन्म दिया था, वही आज तेरी चूत फाड़ रहा है। बोलो मां… कैसा लग रहा है? तेरी संस्कारी चूत में बेटे का लंड।”

मां अब विरोध नहीं कर पा रही थी। उनकी साँसें भारी हो गई थी, आँखें आधी बंद। उनकी कमर खुद-ब-खुद मेरे हर धक्के के साथ पीछे हिलने लगी थी।

“आह्ह… विनीत… बेटा… धीरे… उफ्फ़… गहरी, बहुत गहरी जा रही है। मैं… मैं तेरी मां हूं… ये गलत है… आह्ह्ह्… लेकिन… लेकिन रोक मत।”

मैंने उनकी एक चूची को और ज़ोर से मसलते हुए, दूसरे हाथ से उनकी क्लिट पर उँगली घुमानी शुरू कर दी। साथ ही लंड को और तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा। हर बार जब मैं पूरा लंड घुसाता, उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को चूसती हुई सिकुड़ जाती।

“मां… तेरी चूत तो पूरी तरह भीग चुकी है। देखो कितनी आसानी से मेरा मोटा लंड अंदर-बाहर हो रहा है। बोलो मां… अपनी बेटे से चुदवाने में मज़ा आ रहा है ना?”

मां की गर्दन पीछे झुक गई। उनकी आवाज़ अब रोने और कराहने के बीच थी —“हां… हां बेटा… आह्ह्ह… बहुत मज़ा आ रहा है। तेरा लंड… इतना मोटा… इतना गर्म… मेरी चूत फाड़ रहा है। मैं… मैं तेरी रंडी मां बन गई हूं आज… चोद… और ज़ोर से चोद अपनी मां को…”

मेरा लंड अब और भी सख्त हो गया था। मैंने उनकी दोनों चूचियों को कस कर पकड़ लिया और रफ्तार और बढ़ा दी — तेज़, गहरे और बेरहम धक्के। छत पर सिर्फ़ उनकी चूचियों के उछलने की आवाज़, चूत की चप-चप की आवाज़ और हम दोनों की भारी साँसें गूँज रही थी।

छत पर तेज़-तेज़ धक्कों के बाद मां की साँसें पूरी तरह उखड़ चुकी थी। उनकी चूत मेरे मोटे लंड को बार-बार सिकोड़ रही थी। मैंने उन्हें अपनी बाहों में उठा लिया। उनका बदन पूरी तरह नरम और गर्म हो चुका था।

“विनीत… बेटा… कोई देख लेगा,” मां ने काँपती आवाज़ में कहा, लेकिन उनकी आँखों में अब शर्म के साथ भूख भी थी।

“चलो अंदर… कमरे में…” मैंने उनके कान में फुसफुसाया और उन्हें गोद में उठा कर सीढ़ियाँ उतरने लगा।

मां ने अपना चेहरा मेरी छाती में छुपा लिया। हम दोनों चुपके से उनके बेडरूम में घुस गए। मैंने दरवाज़ा बंद किया और अंदर से लॉक कर दिया। कमरे में सिर्फ़ बेडसाइड लैंप की हल्की लाल रोशनी थी।मैंने मां को बेड पर लिटा दिया। उनकी साड़ी अब पूरी तरह अस्त-व्यस्त थी। ब्लाउज के हुक टूट चुके थे, भारी चूचियाँ बाहर लटक रही थी, निप्पल्स सख्त और लाल। साड़ी कमर तक ऊपर थी, पैंटी पहले ही फेंक दी गई थी। उनकी चूत अभी भी खुली हुई, मेरे लंड के रस से चमक रही थी।

मैंने अपनी शॉर्ट्स पूरी तरह उतार दी और उनके ऊपर चढ़ गया। “मां… अब कोई नहीं देखेगा।‌ आज रात तुम पूरी तरह मेरी हो। अपने बेटे की।”

मैंने उनके दोनों पैर फैलाए और घुटनों के बल बैठ गया। अपना मोटा लंड फिर से उनकी चूत पर रखा और एक ही जोरदार धक्के में पूरा का पूरा घुसा दिया।“आआआह्ह्ह्ह… विनीत…!” मां ने तकिए में मुंह दबा कर चीख मारी।

अब मैं उन पर लेट गया। हमारा बदन पूरी तरह चिपक गया था। मैंने उनकी चूचियों को दोनों हाथों से कस कर पकड़ लिया और धीरे-धीरे लेकिन बहुत गहरे धक्के मारने लगा। हर धक्के पर मेरा लंड उनकी चूत के सबसे गहरे हिस्से तक जा रहा था।

“मां… तुम्हारी चूत कितनी गर्म और नरम है। मेरा लंड पूरी तरह अंदर समा रहा है।बोलो मां… अपनी बेटे का लंड पसंद आ रहा है?”

मां की आँखें आधी बंद थी। उनकी कमर मेरे हर धक्के के साथ ऊपर उठ रही थी। उन्होंने अपने हाथों से मेरी पीठ पर नाखून गड़ा दिए।

“हां… हां बेटा… बहुत पसंद आ रहा है।तेरा लंड… इतना मोटा… इतना लंबा… मेरी चूत फाड़ रहा है। मैं… मैं तेरी मां हूं… फिर भी… आह्ह्ह… मुझे रोक नहीं पा रही। चोद… और ज़ोर से चोद अपनी मां को।”

मैंने रफ्तार बढ़ा दी। अब बेड जोर-जोर से हिल रहा था। “चप-चप-चप” की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। मैंने उनकी एक टाँग को अपने कंधे पर रख दिया और और भी गहराई तक घुसने लगा।

मेरे मुंह से उनकी चूचियों पर, गर्दन पर, होंठों पर बारी-बारी से काटने-चूसने लगा।“मां… तुम्हारी ये संस्कारी चूचियाँ… ये पवित्र बदन… आज मैं सब कुछ अपना बना रहा हूं। बोलो मां… तुम अब मेरी रंडी मां बन गई हो ना?”

मां ने मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया, मेरे कान में साँसें छोड़ते हुए बोली,“हां बेटा… मैं तेरी रंडी मां बन गई हूं…जितना मर्ज़ी चोद।‌ जितना मर्ज़ी अपनी मां की चूत फाड़। आज रात मैं तुझे सब कुछ दे रही हूं… मेरी चूत, मेरी गांड, मेरी चूचियाँ… सब तेरे हैं।”

मैंने उन्हें घुटनों के बल करवट दिलाई। अब वो चौथे पोजीशन में थी। मैंने पीछे से उनका कमर पकड़ा और फिर से तेज़-तेज़ धक्के मारने लगा। उनकी भारी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी। “आह्ह्ह… विनीत… गहरी… बहुत गहरी।‌ मुझे लग रहा है… मैं… मैं झड़ने वाली हूं।”

मां का पूरा बदन सख्त हो गया। उनकी चूत मेरे लंड को जोर-जोर से सिकोड़ने लगी।मैंने मां को चौथे पोजीशन में घुटनों के बल कर रखा था। उनकी मोटी गांड मेरे पेट से बार-बार टकरा रही थी। मेरा मोटा लंड उनकी चूत के अंदर तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के पर “चप्प… चप्प… चप्प…” की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।

मां का पूरा बदन पसीने से तर था। उनकी साड़ी अब पूरी तरह खुली पड़ी थी। मैंने उनकी कमर को दोनों हाथों से कस कर पकड़ रखा था और रफ्तार और बढ़ा दी।“आह्ह्ह… विनीत… बेटा… बहुत तेज… उफ्फ़… मैं… मैं कुछ होने वाला है।”

मैंने मुस्कुराते हुए उनकी एक चूची को पीछे से पकड़ कर मसलना शुरू किया और दूसरे हाथ से उनकी क्लिट पर उँगली तेज़ी से घुमाने लगा। साथ ही लंड को छोटे-छोटे लेकिन बहुत गहरे और तेज़ धक्के देने लगा।

“हां मां… छोड़ दो… अपने बेटे के सामने सब छोड़ दो। तेरी चूत मेरे लंड को चूस रही है।‌ बोलो मां… झड़ने वाली हो ना?”

मां का सिर तकिए में दब गया। उनकी कमर हिलने लगी, जैसे खुद को मेरे लंड पर और गहराई तक बिठाना चाह रही हों। उनकी चूत की दीवारें मेरे लंड को बार-बार सिकोड़ने लगी — बहुत तेज़, बहुत कस कर।

“विनीत… बेटा… आह्ह्ह्ह… नहीं… रुक… आ रहा है… आह्ह्ह्ह्ह्ह! मैं… मैं झड़ रही हूं… आआआह्ह्ह्ह!”

मां का पूरा शरीर अचानक सख्त हो गया।उनकी चूत मेरे लंड को जैसे जकड़ कर दबाने लगी — बार-बार, जोर-जोर से।एक गर्म लहर उनकी चूत से निकली और मेरे लंड को पूरी तरह भिगो दिया। उनके पैर काँपने लगे, कमर थरथराने लगी। उन्होंने तकिए को मुंह से काट लिया ताकि चीख ना निकले।

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“आह्ह्ह… मेरा बेटा… मेरा अपना बेटा… मुझे चोद रहा है। मैं… मैं तेरे लंड पर झड़ गई… उफ्फ़।”

मां का पहला ऑर्गेज्म बहुत तेज़ और लंबा था। उनकी चूत मेरे लंड को लगातार 10-12 सेकंड तक सिकोड़ती रही। उनके मुंह से सिर्फ़ दबी हुई कराह और फुसफुसाहट निकल रही थी — “बेटा… बेटा… विनीत…”

उनका पूरा गदराया बदन पसीने और उनके रस से भीग गया था। उनकी चूत अब और भी ज्यादा गीली और ढीली हो गई थी, लेकिन फिर भी मेरे मोटे लंड को अंदर खींच रही थी।

मैंने धीरे-धीरे धक्के जारी रखे, लेकिन अब बहुत नरम और गहरे। उनके ऑर्गेज्म के बाद उनकी चूत और संवेदनशील हो गई थी। मैंने उनकी गर्दन पर किस्स करते हुए कान में फुसफुसाया, “मां… तुम पहली बार बेटे के लंड पर झड़ी हो। कैसा लगा? अपनी संस्कारी चूत को बेटे ने पहली बार फाड़कर झड़वाया… बोलो मां।”

मां ने थकान और शर्म भरी आवाज़ में, साँसें लेते हुए जवाब दिया, “बहुत… बहुत ज़ोरदार… मैंने कभी इतना तेज़ नहीं झड़ा। तेरा लंड… मेरी चूत के अंदर… मुझे पागल कर दिया बेटा। अब… अब मैं तेरी हूं… जो चाहे कर।”

मां का ऑर्गेज्म इतना ज़ोरदार था कि उनके बदन की सारी ताकत खत्म हो गई। वो मेरे सीने से चिपकी हुई ही थरथराती रही। मैंने उन्हें प्यार से चूम कर चादर ओढ़ा दी। उनकी आँखें बंद हो चुकी थी। थोड़ी देर में वो गहरी नींद में सो गई — चेहरा अभी भी शर्म और संतोष से लाल।

मैंने हल्के से उनके माथे को चूमा और चुपके से उनके कमरे से निकल कर अपने कमरे में आ गया। मेरा लंड अभी भी आधा खड़ा था, मां के रस से चिपचिपा हुआ।मैं बेड पर लेटा ही था कि दरवाज़ा धीरे से खुला।

प्रीति — हमारी नौकरानी — मुस्कुराती हुई अंदर आई। उसके होंठों पर शरारती मुस्कान थी। वो सिर्फ़ एक पतली नाइटी पहने थी, जिसके अंदर से उसके भारी स्तन और कसी हुई कमर साफ़ झाँक रहे थे।

“क्या बात है राजा…?” उसने धीरे से दरवाज़ा बंद करते हुए कहा, “अपनी मां को चोद लिए आज? छत पर तो मैंने सब देख लिया था।”

मैं चौंक कर बैठ गया। “प्रीति… तू… तुझे कैसे पता?”

वो हँसते हुए मेरे बेड के पास आई और मेरी गोद में बैठ गई। उसकी गर्म जाँघें मेरी टाँगों पर दब गईं। “बाबू… मैं छत पर ही थी। तुमने मुझे समझा था ना? लेकिन जब मैंने देखा कि तुम मां जी को दबोच रहे हो… तो मैं चुप-चाप देखती रही।”

उसने मेरे लंड को अपनी उँगलियों से पकड़ लिया, जो अभी भी मां के रस से गीला था। “वाह… अभी भी मां जी की चूत का रस लगा है… कितना गाढ़ा… और कितना महक रहा है।”

वो मुस्कुराई और मेरी आँखों में देखते हुए बोली, “राजा… तुमने अपनी मां को चोदा… अब मुझे भी चोदोगे ना? मैं तीन दिन से तैयार बैठी हूं… मेरी चूत जल रही है।”

मैंने उसकी नाइटी के ऊपर से ही उसके भारी स्तनों को मसल लिया। “प्रीति… तूने सब देख लिया… अब तू भी मेरी हो गई है।” मैंने उसे झटके से बेड पर लिटा दिया। उसकी नाइटी ऊपर कर दी। उसकी चूत पहले से ही भीगी हुई थी। मैंने उसके पैर फैलाए और अपना अभी भी मोटा लंड उसकी चूत पर रख दिया।

“ले प्रीति… आज पहले मां को चोदा… अब तुझे चोदता हूं।” एक ही जोरदार धक्के में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया।“आआह्ह्ह… बाबू… कितना मोटा… मां जी की चूत फाड़ने वाला लंड। अब मेरी चूत फाड़ो।”

मैंने तेज़ी से चुदाई शुरू कर दी। प्रीति की चूत थोड़ी ढीली लेकिन बहुत गर्म और रस वाली थी। मैं हर धक्के पर उसके स्तनों को चूसता, काटता और जोर-जोर से हिलाता रहा। “बोल प्रीति… मां को चुदते देखकर तेरा मन कैसे हुआ?” “बहुत… बहुत जलन हुई बाबू…” वो कराहते हुए बोली, “मां जी की मोटी गांड हिलती देख कर मेरी चूत पसीज गई। अब मुझे भी उतना ही जोर से चोदो।”

मैंने उसकी टाँगें अपने कंधों पर रख दी और बेरहम चुदाई करने लगा। कमरा फिर से चप-चप की आवाज़ और कराहों से भर गया। प्रीति ने मेरी पीठ पर नाखून गाड़ दिए और चीखी, “बाबू… मुझे भी झड़ा दो… अपनी मां की तरह… आह्ह्ह…”

प्रीति मेरे नीचे लेटी हुई थी, उसकी टाँगें मेरे कंधों पर, कमर ऊपर उठी हुई। मेरा मोटा लंड उसकी चूत में पूरी तरह घुसा हुआ था और मैं तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था।

“आह्ह्ह… बाबू… और ज़ोर से… फाड़ दो मेरी चूत…” प्रीति कराह रही थी। उसकी आँखें बंद, मुंह खुला, साँसें उखड़ी हुईं।मैंने उसकी दोनों टाँगें और फैला दी और रफ्तार बढ़ा दी। हर धक्का अब बहुत गहरा और तेज़ था। उसकी भारी चूचियाँ जोर-जोर से उछल रही थी। मैंने एक हाथ से उसकी एक चूची को कस कर मसल लिया और दूसरे हाथ से उसकी क्लिट पर उँगली तेज़ी से घुमाने लगा।

“ले प्रीति… ले मेरी पूरी लंड। जो अभी-अभी तेरी मालकिन की चूत फाड़ कर आया है… वो अब तेरी चूत फाड़ रहा है। बोल… मज़ा आ रहा है ना?”

“हां बाबू… आ रहा है… बहुत आ रहा है…मां जी को चुदते देख कर मेरी चूत पहले ही पागल हो गई थी… अब तू… आह्ह्ह्… मुझे मार डाल।”

मैंने उसकी गर्दन चूसते हुए और तेज़ धक्के मारे। कमरा सिर्फ़ चूत की चप-चप आवाज़, उसकी चूचियों के थपथपाने की आवाज़ और हमारी भारी साँसों से भर गया था।

प्रीति का बदन अचानक सख्त होने लगा। उसकी चूत मेरे लंड को बार-बार कस कर सिकोड़ने लगी। “बाबू… बाबू… कुछ हो रहा है… आह्ह्ह्… बहुत तेज़। मैं… मैं झड़ने वाली हूं… रुक मत… ज़ोर से… ज़ोर से चोदो।”

मैंने उसकी कमर को कस कर पकड़ लिया और पूरे जोर से लगातार गहरे धक्के मारने लगा। हर धक्के पर मेरा लंड उसकी चूत के सबसे गहरे हिस्से तक जा रहा था।

“झड़ जा प्रीति… अपनी मालकिन की तरह बेटे के लंड पर झड़ जा।”

प्रीति ने अचानक अपनी आँखें पूरी तरह बंद कर लीं। उसका पूरा शरीर तन गया।“आआआह्ह्ह्ह्ह… बाबू… आ गया… आ गया। मैं झड़ रही हूं… आह्ह्ह्ह्ह्ह! विनीत… राजा… आह्ह्ह्ह।”

उसकी चूत मेरे लंड को बहुत तेज़ी से सिकोड़ने लगी — जैसे किसी मुठ्ठी की तरह दबा रही हो। एक गर्म लहर निकली और मेरे लंड को पूरी तरह भिगो दिया। प्रीति का बदन बार-बार झटके खा रहा था। उसके पैर काँप रहे थे, कमर हिल रही थी, मुंह से सिर्फ़ दबी हुई चीखें निकल रही थी।

“उफ्फ़… बाबू… इतना ज़ोरदार… मैं… मैं पहली बार इतना झड़ी हूं। तेरा लंड… मेरी चूत को पागल कर दिया।”

उसका ऑर्गेज्म लगभग सेकंड तक चला। उसकी चूत मेरे लंड को छोड़ती ही नहीं थी। पूरी चादर उसके रस से भीग गई थी।जब उसका शरीर धीरे-धीरे ढीला पड़ा, तो उसने थकी हुई लेकिन संतुष्ट आँखों से मुझे देखा और मुस्कुराते हुए बोली,“राजा… तुमने आज अपनी मां को भी चोदा… और मुझे भी। अब बोलो… तुम अभी झड़ोगे कहां?”

प्रीति मेरे लंड को मुंह मे भर ली, उसकी गर्म जीभ और गले का कसाव मुझे पागल कर रहा था।

“प्रीति… मैं आने वाला हूं…” मैंने उसके बाल पकड़ कर कहा। वो और तेज़ चूसने लगी, आँखों में भूख लेकर ऊपर देखती हुई। कुछ ही सेकंड बाद मेरा शरीर तन गया। “आह्ह्ह… ले प्रीति…!” मैंने जोर से झड़ना शुरू कर दिया।

गाढ़ा-गाढ़ा वीर्य उसके गले में फव्वारे की तरह छूटा। प्रीति ने बिना कुछ गिराए पूरा मुंह खोल कर सब निगल लिया। फिर हम दोनों थक कर अपने अपने कमरे मे सोने चले गए। अब यह मजेदार सिलसिला बन गया, नौकरानी के चक्कर मे प्यारी मां मेरी हो गयी।

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