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Group Sex Story पठन समय: 15 मिनट पढ़ा गया: 739 बार

मामी को दो मर्दों ने चोदा

यश

01 Oct 2020 को प्रकाशित

मामी को दो मर्दों ने चोदा
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मेरा नाम यश है, मैं 19 साल का हूँ और यूनिवर्सिटी में पढ़ता हूँ। मैं अपने घर से दूर अपनी मामी-मामा के पास रहता हूँ।मैं आपको अपनी मामी की एक सच्ची घटना के बारे में बताने से पहले, यह बता देता हूँ कि कैसे एक औरत सैक्स के लिए क्या क्या नहीं कर गुजरती है।आपको मैं अपनी मामी के बारे में बता देता हूँ, उनकी उमर 38 साल की है, उनका एक लड़का है, जो घर से दूर पढ़ाई के लिए हॉस्टल में रहता है, और घर कभी-कभी ही आता है, मामा जी बिजनेस मैन हैं जो कि बिजनेस के मामले में कभी दिल्ली, तो कभी जालंधर आदि दूर दूर जाते रहते हैं। अधिकतर घर में मैं और मेरी मामी ही रहते हैं।मामी देखने में इतनी सैक्सी हैं कि देखते ही मन में सम्भोग का ख्याल आ जाता है। उनका गोरा जिस्म है, उनके स्तन इतने टाईट हैं कि क्या बताऊँ, उनके चूतड़ भी उनके स्तनों की तरह बड़े बड़े और टाईट हैं। वे सलवार सूट पहनती हैं।चलो, अब मुद्दे पर आता हूँ, बात उन दिनों की है जब मेरी यूनिवर्सिटी से छुट्टियाँ हुईं थीं, तो मैंने सोचा कि चलो कहीं घूमने जाया जाये, मैंने मामी से कहा- मामी, मेरी यूनिवर्सिटी से छुट्टियाँ हो गईं हैं इसलिए मैं अपने चाचा के घर जाना चाहता हूँ, इसी बहाने घूम भी आऊँगा।मामी ने कहा- ठीक है, कल सुबह चले जाना।मैंने कहा- ठीक है।फिर मैं दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलने चला गया, शाम के सात बजे मैं घर वापस आ गया।मामी ने कहा- हाथ मुँहँ धो लो, मैं खाना लगा देती हूँ।हमने खाना खाया और टी वी देखने लगे। फ़िर मैं सुबह के लिए कपड़े आदि सामान, बैग में रखने लगा। तभी फोन की घण्टी बजी। मामी ने फोन उठाया, फोन पर कुछ देर बात की, फिर फोन रख प्रिया और कहने लगी- तुम्हारे मामा जी का फोन था, कह रहे थे कि एक हफ्ते के बाद लौटेगें। मैंने उनको बताया कि तुम कुछ दिनों के लिए अपने चाचा के घर जा रहे हो तो वह कहने लगे कि तुम घर पर अकेली क्या करोगी, तुम भी यश के साथ, उसके चाचा के घर घूम आओ इसलिए अब मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगी।मैंने कहा- ठीक है, अब जल्दी सो जाते हैं, सुबह जल्दी उठना है।मामी ने कहा- हाँ, ठीक कहा तुमने।हम सोने लगे पर मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैं ऐसे ही लेटा था लेकिन मामी पूरी तरह सो गईं थीं।मैं मामी को सोते हुए देख रहा था, कितनी सैक्सी लग रही थीं। उनकी सलवार इतनी पतली थी कि उनकी लाल पैंटी, मुझे साफ दिखाई दे रही थी, मैं उनके चूतड़ों के ऊपर पैंटी देख कर पागल सा हो रहा था, अपने आप को शांत करने के लिए, मैं मुठ मारने लगा, 5 मिनट बाद मैं शांत हो गया।मामी को बिल्कुल भी नहीं पता था कि मैं उन्हें इस नजर से देखता हूँ। वो तो मुझे अपने बेटे की तरह समझती थीं, लेकिन मैं हर रोज उन्हें देख कर ऐसे ही मुठ मारता रहता था।अब मुझे नींद आने लगी थी, मैं सोने लगा।सुबह हम, सात बजे उठे, नहाये, खाना खाया, फिर हम दस बजे दिल्ली के लिए घर से निकल गये। मैंने देखा कि सड़क पर हम दोनों को जाते हुए सभी लोग देख रहे थे, शायद वे मामी के चूतड़ों को देख रहे थे। जब वे चलती थीं तो उनके कूल्हे ऊपर नीचे होते थे जिन्हें देख किसी का भी लौड़ा खड़ा हो जाये।एक आदमी ने तो हद ही कर दी, वह मामी की तरफ देख भी रहा था और एक हाथ खुद के लौड़े पर फेर रहा था।मामी बहुत खुश लग रही थी, वो कहने लगी- मैं पहली बार तुम्हारे चाचा के घर जा रही हूँ।मैंने कहा- हाँ मामी, आप पहली बार जा रहीं हैं।फिर हम दिल्ली जाने वाली बस में बैठ गये। सात बजे हम दिल्ली पहुँच गये, हमने ऑटो किया और चाचा के घर पहुँच गये। हमने दरवाजा खटखटाया, अंदर से मेरी चाची आई।मैंने उनको नमस्ते की और बताया कि मैं अपनी मामी को साथ लाया हूँ।वो एक दूसरे को गले लगकर मिली। फिर हम अंदर चले गये, चाय पी, खाना खाया, मैं चाची के लड़के के साथ बातें करने लगा जो तब छोटा था, उसका नाम विकास है और वह दस साल का था।मैंने चाची से पूछा- चाचा कहाँ हैं?उसने बताया कि वे गाड़ी लेकर राजस्थान गये हुये हैं, 5-6 दिनों के बाद आयेंगे।मेरी चाची और उनका लड़का विकास ही घर पर रहते थे। चाचा अधिकतर बाहर ही रहते थे। मेरी चाची थोड़ा दूसरे किस्म की औरत थीं, जिसे हम चालू कहते हैं। उनके और मर्दों के साथ भी संबध थे, लेकिन यह बात चाचा को नहीं पता थी, जब चाचा घर से बाहर रहते थे तो रात को चाची किसी ना किसी को घर पर बुला लेती थीं जो उनकी खुलकर चुदाई करता था।मुझे डर था कि अगर मामी को यह सब पता चल गया तो वह क्या सोचेंगी।तभी मामी की आवाज आई- यश बेटा !मैं उनके पास गया तो उन्होंने मुझे रात को पहनने के कपड़े दे दिये और कहा- तुम साथ वाले कमरे में विकास के साथ सो जाओ, मैं और तुम्हारी चाची यहाँ सो जाते हैं।मैंने कहा- ठीक है।मैं और विकास साथ वाले कमरे में चले गये, उस कमरे में एक छोटी सी खिड़की थी। मुझे नींद नहीं आ रही थी, पर विकास सो गया था, मुझे हल्की हल्की आवाजें आ रही थीं, मैं ध्यान से सुनने लगा, मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हुआ।चाची मामी को बता रही थीं कि उसके कई मर्दों के साथ संबंध हैं, मेरे पति जब भी बाहर जाते हैं, मैं उन्हें बुला लेती हूँ, वो मेरी चूत अच्छी तरह से मारते हैं।तभी मामी बोली- यह तो अच्छी बात नहीं है।चाची बोली- भला सैक्स करना कोई बुरी बात थोड़ी ना है।मैं सब कुछ सुन रहा था, बातें सुन कर मेरा लौड़ा भी पूरी तरह से खड़ा हो गया था। मैं बाहर आकर चाची के कमरे में झांकने लगा।चाची मामी को कहने लगीं- अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारे लिए भी एक मर्द का इंतज़ाम कर सकती हूँ।मामी कुछ देर सोचने लगी, मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि मामी बिल्कुल भी गुस्सा नहीं हुईं, कुछ देर सोचने के बाद मामी ने कहा कि मैंने आज तक अपने मर्द के अलावा किसी और से कभी सैक्स नहीं किया।चाची ने मामी को कहा- तो कर लो ना, किसी को कुछ पता भी नहीं लगेगा और तुमको जो आनन्द आयेगा, वो अलग।मामी फिर सोचने लगीं, कुछ देर बाद बोलीं- चलो ठीक है, लेकिन मुझे पराये मर्द से थोड़ा डर भी लग रहा है, पता नहीं, कैसे चोदेगा? चाची- अरे तुम टेंशन मत लो, मैं दो मर्दों को बुला लेती हूँ, एक तुमको चोदेगा, एक मुझे।तभी मामी बोलीं- हाँ, यह ठीक रहेगा।फिर चाची ने फोन उठाया और कुछ देर बात की और बोलीं कि वो थोड़ी ही देर में आ जायेंगे।तभी मामी बोलीं- एक बार चैक कर लो कि यश और विकास सो गये हैं।यह सुनते ही मैं अपने कमरे में आकर सोने का नाटक करने लगा। चाची धीरे से हमारे कमरे में आकर देख कर चली गईं और मामी से जाकर बोलीं कि यश और विकास गहरी नींद में सो रहे हैं, डरने की कोई बात नहीं।मैं सब कुछ सुन रहा था।मामी बोलीं- मैं नर्वस हो रही हूँ। मुझे डर लग रहा है, कि वो मर्द पता नहीं कितनी देर तक चोदेगा?चाची बोलीं- नर्वस होने की क्या बात है? मैं हूँ ना !तभी मुझे दरवाजा खुलने की आवाज आई। मैं समझ गया कि वे लोग आ गये। वे धीरे धीरे कदमों के साथ कमरे में दाखिल हो गए। अब मैं धीरे से खड़ा हुआ और खिड़की पर जाकर चुपके से देखने की कोशिश की, मुझे खिड़की में से सब कुछ दिखाई दे रहा था।मैंने देखा कि वो दो आदमी बड़े तगड़े और सेहत में बड़े तन्दरुस्त लग रहे थे। एक की उमर 30-32 के करीब होगी और दूसरे की भी 30-35 ही लग रही थी।कमरे में वे मामी को देखते हुए आपस में बात करते हुये बोले- यार क्या माल है, इसकी गाँड तो देख।दूसरा- नहीं यार, इसकी चूचियाँ देख, कितनी टाईट हैं यार, मैं तो इसी को चोदूँगा।मैं सब कुछ देख रहा था। वे दोनों, मेरी मामी को चोदना चाहते थे।दूसरा आदमी चाची के बारे में कह रहा था- यार, इसको तो कभी भी चोद सकते हैं।चाची की तरफ कोई भी नहीं देख रहा था, वे दोनों मेरी मामी को चोदने की बात कर रहे थे, तभी चाची बोली- नहीं, तुम लोग ऐसा नहीं कर सकते, वो तो पहले ही डर रही है, तुम में से कोई एक ही इसकी मार सकता है।मामी बोली- हाँ, तुम में से कोई एक को ही मैं अपनी चूत मारने दूँगी।लेकिन वो कहाँ मानने वाले थे, चाची ने भी बहुत मना किया लेकिन वो नहीं माने, उन्होंने उसी समय कपड़े उतारे और मामी पर टूट पड़े। मैं खिड़की में से देख कर पागल हुआ जा रहा था, आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी मामी को मेरे सामने एक नहीं बल्कि दो मर्द चोदने के लिए अपने कपड़े उतार रहे हैं।कपड़े उतारते ही वे मामी पर टूट पड़े, उनके लौड़े इतने बड़े बड़े और मोटे थे कि मामी देख कर बुरी तरह से घबरा गईं थीं और चाची से बोल रही थीं- ये तो मेरी चूत फाड़ देंगे।मामी ने उनके सामने हाथ जोड़े, पर वो कहाँ रुकने वाले थे। एक तो तुरंत, मामी के होठों को चूसने लगा।मामी बार बार कह रही थी- अरे, एक एक ही करो !चाची बैठी बैठी सब कुछ अपनी आँखों से देख रहीं थीं, वे कर भी क्या सकती थी? उनको कुछ समझ में नहीं आ रहा था।एक ने धीरे से मामी की सलवार खींच दी और सलवार टांगों तक आ गई, मामी ने काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी। वो मामी की जाँघों पर हाथ फेरने लगा, दूसरा मामी को कुछ बोलने का मौका ही नहीं दे रहा था, वो लगातार मामी के होठों को चूसे जा रहा था।फिर वह होठों को छोड़ कर मामी की चूचियों को दबाने लगा, मामी ‘आह… आ..ह.ह छोड़ दो प्लीज छोड़ दो !’ बोल रही थी।फिर एक ने सलवार पूरी तरह से ही उतार दी, अब मामी पैंटी में और भी उत्तेजक लग रहीं थीं। दूसरे ने भी उनका कुरता भी उतार प्रिया। अब मामी पैंटी और ब्रा में थीं, दोनों मर्द पागलों की तरह मामी के ऊपर हाथ फेर रहे थे। अब धीरे से, एक ने पैंटी उतार दी। मामी की चूत गोरी थी, लेकिन वो झांटों की वजह से दिख नहीं रही थी, शायद मामी ने काफी दिनों से चूत के बाल नहीं काटे थे।एक ने अपना मुँह मामी की चूत पर रख प्रिया और पागलों की तरह मामी की चूत को चाटने में लग गया।तभी एक ने मामी को अपने लौड़े के ऊपर बैठाया और दूसरे ने अपना लौड़ा मामी के मुँह में डाल प्रिया और जोर के झटके मारने लगा। काफी देर तक वे लोग, ऐसे ही मामी को चोदते रहे। फिर नीचे वाला उठा और उसने मामी को खड़ा कर प्रिया। एक ने मामी के चूतड़ों पर हाथ फेरते हुये अपनी उंगली मामी की गाँड में घुसा दी। जैसे ही उंगली मामी की गाँड में घुसी, मामी के मुँह से ‘उफ़ उफ्फ आ आ ह’ की आवाजें आनी शुरू हो गईं।फिर दूसरे ने अपना लौड़ा मामी की चूत में ठेल प्रिया। मामी पूरी तरह से उनके हवाले हो चुकी थीं। वो मामी को कभी गोदी में उठा लेते थे, कभी अपने लौड़े पर बैठा लेते। उन मुस्टंडों ने मामी की गाँड मार मार कर चूत जैसी बना दी थी।चाची यह सब बैठे देख रहीं थी, चाची ने भी अपनी सलवार खोली और अपनी चूत में उंगली डालकर अपने आप को शांत करने में लग गईं।उधर मेरा लौड़ा भी पूरी तरह से खड़ा होकर टाईट हो गया था, मैं एक हाथ से मुठ मार रहा था और उधर भी देख रहा था।वो मर्द, मामी के स्तनों को बुरी तरह से मसल रहे थे। मामी के मुँह से सिर्फ ‘आ ऊ आ ऊ हा हा’ की आवाजें सुनाई दे रही थीं, उन्होंने ने अपनी आँखें बंद कर रखी थीं।दोनों मर्द जिस तरह चाहते थे, उसी तरह से मामी को चोद रहे थे।मामी पूरी तरह उनके हवाले थीं, जो चूत मार रहा था, वो पूरा दम लगा कर जोर जोर के झटके मार रहा था और पीछे वाला उससे भी अधिक जोर जोर के झटके मार रहा था।तभी पीछे वाला शांत हो गया और उसने अपना सारा माल मामी की गाँड में ही छोड़ प्रिया। उसने जैसे ही अपना लंड मामी की गाँड से निकाला तो उनकी गाँड से पानी टपकता साफ दिखाई दे रहा था।थोड़ी देर बाद आगे वाला भी शांत हो गया, उसने भी अपना सारा माल मामी की चूत में डाल प्रिया। जैसे ही उसने चूत में से लौड़ा निकाला, वैसे ही उनकी चूत में से एक पानी जैसी धारा निकली। मामी की टांगें पूरी तरह भीग गईं थीं, उधर मैंने भी मुठ मारकर अपने आपको शांत कर लिया।फिर दोनों मर्द ऐसे ही मामी साथ कुछ देर पड़े रहे। कुछ देर बाद उन दोनों ने कपड़े पहने और जैसे आये थे, वैसे ही धीरे धीरे चले गये, मामी ऐसे ही पड़ी रहीं, उनकी गाँड से पानी, अभी तक वह रहा था, फिर सोफे से चाची उठी और मामी के साथ आकर लेट गईं।मैं भी विकास के पास जाकर सो गया।आपको यह कहानी कैसी लगी, आप मुझे मेरे ईमेल आईडी पर मुझे बता सकते हैं।support@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

आर्यन कोटा

2 months ago

पड़ोसन आंटी की तो बात ही अलग है। बहुत ही गरमा-गरम कहानी!

श्रुति कौशल

2 months ago

आंटी को पटाने का तरीका बहुत ही मस्त था। मजा आ गया पढ़कर।

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