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Desi Chudai पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 1,004 बार

मेरी आंटी मेरी पड़ोसन-1(Meri aunty meri padosan-1)

dilip1780

11 Feb 2024 को प्रकाशित

मेरी आंटी मेरी पड़ोसन-1(Meri aunty meri padosan-1)
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हाय रीडर्स, मैं आपका दिलीप। वैसे तो मेरी कई स्टोरी आ चुकी है, और आप लोगों ने पसंद भी काफी किया है। और तो और मुझे कितने ही 40+ वाली औरतों के मैसेज आते है, जिनसे मैं खुल कर बात करता हूं। और डॉन्ट वरी, जो सीक्रेट हमारे बीच है, वह सीक्रेट ही रहेगा। इसलिए बिंदास्त मेल या चैट करे। तो हम चलते है अपनी स्टोरी की और-

मेरा नाम दिलीप है, और मैं जहां रहता हूं मेरे बालकनी के सामने और एक रूम की बालकनी है। उसमें एक गुजराती परिवार रहता है, जिसमें मैं उन्हें आंटी बोलता हूं। वो, उनके पति, और बेटा-बहु ऐसा चार लोगों का परिवार है। आंटी 59 इयर्स की है, अंकल 65, और बहु-बेटा 30/35 ईयर के है।

जैसे कि आप लोग जानते ही है, कि मैं बूढ़ी घोड़ियों का दीवाना हूं। तू आंटी कहां बचती मेरी नज़र से। वैसे आंटी बहुत सीधी-सादी है। जब देखो तब पूजा-पाठ करना, और मोबाइल में बिजी रहना यही सब था। अब उनकी दुनिया में अंकल ज्यादा बात नहीं करते थे। बस एक ही जगह पड़े रहते थे।

अब थोड़ा आंटी के बारे में बताता हूं। आंटी लगभग 59 इयर्स की है। ऊंचाई 5 फुट 5 इंच, हल्का मोटा शरीर, भरी हुई गांड, गोरा रंग, गुलाबी होठ, बड़ी-बड़ी काली आंखे, आधे पके आधे काले घने बड़े बाल, और उनके मम्मे कम से कम 34″ के होंगे। बाते करने में एक्सपर्ट और इसी वजह से मेरी उनकी अच्छी बनती थी।

बात गर्मियों की है, जब मेरी वाइफ मेरे बच्चों के साथ अपनी मां के पास अपने मायके गई हुए थी, और मेरी वाइफ ने आंटी से कहा था कि खाने-पीने के लिए मेरा खयाल रखे। आंटी ने मेरी वाइफ को कहा था कि बिना कोई टेंशन के तू अपने मायके जा। तेरे पति का मैं खयाल रखूंगी।

दिन बीत रहे थे आंटी मेरे खाने-पीने खयाल तो रख रही थी, लेकिन मेरे लौड़े की भूख का मैं कुछ नहीं कर पा रहा था। और जैसे-जैसे दिन निकल रहे थे, मैं चूत के लिए पागल हो रहा था। जो शायद आंटी की नजरों से छुटा नहीं था। भाई आखिर तजुर्बा भी कुछ होता है। इसलिए आंटी समझ रही होंगी मेरी हालत। तो आंटी भी बातों-बातों में थोड़ा चिड़ा देती थी मुझे।

मैंने भी सोच लिया था, अब जो होगा देखा जाएगा। अब तो आंटी की टांगे खोलने का समय आ गया है। इसलिए मैंने उनको चोदने के लिए प्लान बनाना शुरू कर दिया। प्लान के हिसाब से मैंने सुबह पांच बजे का अलार्म लगा दिया। क्यूंकि मुझे पता था आंटी रोज सुबह सूर्य की पूजा करने उठती थी, इसलिए जैसे ही सुबह अलार्म बजा, मैं बिना शर्म के अपने बेडरूम में नंगा खड़ा हुआ। लेकिन ऐसा दिखावा कर रहा था के मुझे कुछ पता नहीं और मैं यह अनजाने में कर रहा था।

टाइम आ गया। सामने वाले बेडरूम का पर्दा हिला, और आंटी बाहर आ कर सूर्य की पूजा करने लगी। लेकिन उनकी नज़र मेरे बेडरूम में पड़ी, जहां मैं पूरा नंगा खड़ा था, और मेरा 7 इंच का लौड़ा खड़े हो कर सलामी दे रहा था। लेकिन मेरा ध्यान आंटी पे नहीं था, ऐसा दिखावा कर रहा था।

जब आंटी ने मुझे उस हालत में देखा, तो वो पहले घबरा गई और अंदर चली गई। लेकिन फिर कुछ सेकंड बाद वो पर्दे के पीछे से मुझे छुप कर देख रही थी। यह मैंने देख लिया। मैं भी मौके का फायदा उठाते हुए, अपने लौड़े को सहलाते हुए हाथ घुमा रहा था। बाजू से तेल की बोतल लेकर, अपने लौड़े पे तेल लगा कर, मुठ मारने लग गया। आंटी यह सब देख रही थी।‌ शायद बहुत साल बाद उन्होंने कोई मजबूत लौड़ा देखा होगा। मैंने अगले 6-7 मिनट तक मुठ मार के अपना पानी निकाल दिया।

कुछ घंटों बाद जब आंटी किचन में खाना पका रही थी, तब मैंने अपने किचन से उनको गुड मॉर्निंग कहा। लेकिन जैसे वो इस चीज के लिए तैयार नहीं थी। मेरे गुड मॉर्निंग बोलते ही वह थोड़ा डर गई, जैसे मैंने उनकी चोरी पकड़ ली हो। लेकिन उनको जैसे यह एहसास हुआ, कि उन्होंने मुझे मुठ मारते हुए चुप-चाप देखा था, तो थोड़ा रिलेक्स हो गई। उन्होंने थोड़ा गड़बड़ा कर मुझे गुड मॉर्निंग कहा, और एक मस्त स्माइल दी।

अब तो दिन में जब भी मेरी उनसे बात होती, तो मैं जान कर अपने लौड़े पे हाथ फेर देता था, जैसे कि मैंने अनजाने में किया हो। अब तो आंटी भी मुझसे थोड़ा खुल के बात करने लगी थी, जैसे कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड है कि नहीं, अगर है, तो वो बात मैं बिना किसी झिझक के बता सकता था। वो मेरे वाइफ से यह बात कभी नहीं बताएगी।

तब मैंने बिना डरे उनसे कहा: मुझे लड़कियों से ज्यादा बड़ी उम्र की औरतें पसंद है।

आंटी: क्यूं, बड़ी उम्र की औरत पसंद है तुम्हें?

मैं: क्यूंकि बड़ी उम्र की औरतों को तर्जुबा बहुत होता है, और वो गले भी नहीं पड़ती।

और यह बोल कर मैंने एक आंख मार दी। आंटी मेरी इस हरकत पे थोड़ा शरमाई और हसने लगी। दिन ऐसे ही निकल रहे थे। अब आंटी अब भी बहुत खुल के बाते करने लगी थी। कभी बात करते-करते उनका पल्लू सरक के नीचे गिर जाता था। लेकिन उसे उठाने में कोई जल्दबाजी नहीं करती थी। उनका पसीने से भीगा हुआ ब्लाउज, तो कभी-कभार ब्लाउज के 2 हुक खुले रहते थे। लेकिन इस वजह से उनके आधे मम्मों के दर्शन हो जाते थे। लेकिन उनको ढकने के लिए कोई जल्दबाजी नहीं होती थी।

मैं समझ गया था कि जैसे मैंने अपने लौड़े का दर्शन उन्हें कराया था, वह भी अपने शरीर का दर्शन करवा रही थी। लाइन तो क्लियर थी, लेकिन मौका नहीं मिल रहा था। हम दोनों के दिल में चुदाई की आग तो लगी थी। लेकिन पहले कौन बोलेगा यहीं बात अटकी थी।

अचानक एक दिन आंटी फोन पे किसी से बात कर रही थी, कि उसका बेटा और बहु कल सुबह बाहर जाने वाले थे, और अगले 10 दिन के लिए शिमला मनाली का प्लान था। इस वजह से घर पर अब वो और उनका पति रहेगा।

मैंने भी सोच लिया अब जो होगा देखा जाएगा। कल ही आंटी की टांगे खोली जाए, नहीं तो यह मौका फिर नहीं मिलेगा। अगली सुबह आंटी का बेटा और बहु चले गए। सुबह 10 बजे जब आंटी किचन में आई, तब ही सोच लिया खुल के अब बात की जाए। क्यूंकि आंटी तो कई दिनों से सिंगनल दे रही थी, तो मौके का फायदा उठा लिया जाए। जब आंटी किचन में आई तो मुझे देख कर बड़ी अच्छी स्माइल दी। मैंने आंटी से कहा-

मैं: आंटी बहुत दिनों से आप से एक बात कहनी थी, लेकिन कैसे बोलूं यह समझ नहीं आ रहा है।

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आंटी: क्या कहना है कहो?

मैं: यह बात कैसे कहूं मुझे थोड़ा डर भी लग रहा है।

आंटी: बिना डरे कहो, मैं कौन सा तुम्हें खाने वाली हूं।

मैं: यह बात यहां से कैसे कहूं कोई सुन लेगा तो क्या सोचेगा?

आंटी: ऐसी कौन सी बात है जो कोई सुनेगा तो कुछ सोचेगा? जो कहना है वो कह दो। मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगी (और यह बोल के आंख मार दी)।

अब मैं भी समझ गया था कि आंटी भी तैयार थी। लेकिन कौन पहले बोलेगा बस उसका इंतजार था।

मैं: अंकल कहा है?

आंटी: वो तो दवा खा कर सो गए है। अगले 2-3 घंटे उठेंगे नहीं, चाहे उनके पास बम फोड़ दो।

आंटी की बातों से पता चला कि आंटी मुझे इनवाइट कर रहीं थी।

मैं: मैं आपके पास आ कर बात बताता हूं। आप को कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना?

आंटी: हां चलेगा, यही आ कर बता मुझे। मैं भी तो देखूं क्या बात है।

यह कह कर वो मुझे बड़ी अजीब नजरों से देखने लगी। मैं ज्यादा टाइम ना लगाते हुए अपने बिल्डिंग से निकल कर उनके बिल्डिंग की और चल दिया, और उनके घर के दरवाजे के सामने खड़ा हो गया। आंटी ने दरवाजा पहले ही खोल रखा था। मुझे देखते ही उन्होंने मुझे घर में लिया, और दरवाजा लगा लिया। मैं वही एक कुर्सी पे बैठ गया और अंकल कहा है यह पूछा। तब आंटी ने कहा-

आंटी: तू उनकी फिक्र मत कर। अब यहां अगर कुछ भी होगा तो उनको पता नहीं चलेगा। अगले 2-4 घंटे का दवा का असर ही कुछ ऐसा है।

और जैसे ही उन्होंने यह कह कर मेरी ओर देखा, उनकी आंखों में हवस नज़र आ रही थी। और मैं तो आंटी की चूत लेने आया था, ये उन्हें भी पता था। बस बात पहल कौन करेगा इस की थी।‌ मैंने भी सोच लिया टाइम गवाना ठीक नहीं है।

फिर उठ कर उनके पास आया, और उनसे सीधे कहा: आंटी आप मुझे अच्छी लगती हो। आपने मुझे पागल बना दिया है।

आंटी ने क्या कहा, और आगे क्या हुआ, वो अगले पार्ट में पता चलेगा। फीडबैक ज़रूर दें। मेरा ईमेल आईडी support@mohakkisse.com है।

अगला भाग पढ़े:-मेरी आंटी मेरी पड़ोसन-2

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