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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 8 मिनट पढ़ा गया: 617 बार

Meri chudai ki shuruwaat

MadhuRandi

11 Oct 2018 को प्रकाशित

Meri chudai ki shuruwaat
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हेल्लो दोस्तो मैं मधु रंडी, आज मैं आप को बताती हूँ कि कैसे मैं एक छोटी सी ब** से आज की रंडी बन गयी। आज मेरी फिगर 38डीडी-35-36 है, जो कि लगातार चुदाई की वजह से हो गया है।

हमारी एक जॉइंट फॅमिली थी, और उस वक़्त हम मेरठ में रहते थे। जहाँ मेरे मम्मी पापा और मैं अपने चाचा जी के साथ रहती थी। मेरी चाची जी अब नही हैं। मेरे चाचा जी के दोनों बेटे शादी के बाद अलग रहते थे, घर में सबसे छोटी होने की वजह से मैं सभी की दुलारी थी।

चाचा भी मुझे बहुत ही प्यार करते थे, चाचा का कमरा फर्स्ट फ्लोर पर था और बाकी सभी के कमरे नीचे थे। चाची के मरने के बाद मैं चाचा के रूम में रहती थी और वो ही मुझे पढ़ाते थे।

हमारे घर में राजू नाम का नौकर था, वो मुझे साइकल पर बिठा के स्कूल ले जाता और लाता था। मैं उसे भैया कहती थी, राजू उस समय 18 साल का था और वो देखने में बहुत ही काला और तगड़ा था।

मैं तो उसके सामने बिल्कुल सफेद गुड़िया दिखती थी, और वो मुझे गुड़िया कह कर ही बुलाता था। जब मैं 1* साल की हुई तो मेरी माहवारी शुरू हो गयी थी, तो मम्मी के कहने पर राजू मुझे स्कूटर से स्कूल ले जाने लग गया।

कुछ दिन बाद मेरे ज़िद करने पर राजू मुझे स्कूटर सिखाने लग गया, स्कूटर सिखाते वक़्त वो मुझसे चिपक जाता था और वो मुझे यहाँ वहाँ छूता रहता था। उसके छूने से मुझे गुदगुदी होती थी, और मैं हँसती हुई उसे मना करती।

ऐसे हि मैं स्कूटर सीखती रहती थी, लेकिन वो नहीं मानता था। वो मुझे कहता था, कि गुदगुदी नहीं करने दोगी तो स्कूटर नहीं सिखाऊंगा।

मैं स्कूटर सीखने के लालच में उसे सब कुछ करने देती थी, कुछ दिन बाद वो मेरे मुम्मों पर भी हाथ फेरने लग गया और कभी कभी मेरे मुम्मों को वो दबा भी देता था।

कभी कभी तो मेरी चूत पर भी मेरी स्कर्ट के ऊपर से हाथ फेर देता था, अब मुझे भी उसका छूना अच्छा लगाने लग गया था। कभी कभी तो मैं खुद उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रख लेती थी, और वो हँसता हुआ कहता कि तेरी चूत की गर्मी को किसी दिन अच्छे से मैं शांत करूँगा।

कुछ दिन बाद वो मुझे बहुत सूनसान और लंबे रास्ते से ले जाने लग गया, अब वो मेरी स्कर्ट उठा कर अपना लंबा सा लंड मेरी पेंटी में घुसा के मुझे अपने लंड पर बिठा लेता था।

मेरी स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर वो मेरी पेंटी के साइड से मेरी नंगी चूत पर हाथ फेरता रहता था। मुझे भी ये अच्छा लगता था, इसलिए मैं भी उसे कुछ नहीं कहती थी।

एक दिन वो बोला – गुड़िया तुझे ये सब अच्छा लगता है ना?

मैं – हाँ बहुत अच्छा लगता है।

राजू – अरे ये तो कुछ भी नहीं है, मैं तो तुझे और भी बहुत मज़ा दे सकता हूँ। लेकिन कसम खा कि तू किसी को बताएगी नहीं।

मैने भी मज़े के लिए कसम खा ली, और अगले दिन सुबह जब हम उस सूनसान सड़क पर पहुँचे तो वो बोला – गुड़िया और मज़े लेने हैं तो अपनी पेंटी उतार कर मुझे देदे।

मैने उसे अपनी पेंटी उसे दे दी, जो उसने अपनी जेब में रख ली। अब उसने अपने लंबे लंड को मेरे चूतड़ की दरार में फँसा कर मुझे स्कूटर पर बिठा दिया, और मैं स्कूटर चलाने लग गयी।

फिर वो मेरी स्कर्ट में हाथ डाल कर मेरी चूत के होठों को खोल कर अपनी उंगली से उसे कुरेदने लग गया। मुझे भी बहुत मज़ा आने लग गया, राजू ने मेरी चूत कुरेदते हुए अपनी आधी उंगली मेरी चूत में घुसा दी।

अब तो मुझे दर्द हुआ और मेरी हल्की सी चीख निकल गयी, लेकिन वो फिर भी उंगली आगे-पीछे करता रहा। अब मुझे मज़ा आने लग गया, थोड़ी देर बाद ही मेरा शरीर अकड़ने लगा और मेरी चूत से पानी बह गया। मैं मज़े में मदहोश हो गयी और स्कूटर रोक कर लंबी लंबी साँसें लेने लग गयी।

राजू बोला – गुड़िया मज़ा आया कि नहीं?

मैं – भैया इतना मज़ा तो मुझे कभी नहीं आया।

फिर उसने मुझे स्क** छोड़ दिया, लेकिन स्कूल में मेरा मन नहीं लगा और मैं छुट्टी होने का इंतजार करने लग गयी। मेरी छुटटी होते ही मैं राजू के पास गयी और स्कूटर लेकर उस सूनसान रास्ते पर आ कर बोली।

मैं – राजू मुझे फिर से मज़ा दो ना प्लीज।

वो बहुत तेज हंसा और मेरी चूत में उंगली चलाने लग गया, और मैं फिर मदहोश होने लग गयी। मेरी मदहोशी का फ़ायदा उठा कर राजू भैया ने अपनी पूरी उंगली मेरी चूत में घुसा दी, मैं बहुत तेज चीखी और दर्द से रोते हुए स्कूटर को मैंने रोक दिया।

राजू भैया ने अपनी उंगली निकाली तो उस पर खून देख कर, मैं और ज़ोर से रोने लग गयी। रोते हुए मैं बोली – राजू भैया बहुत दर्द हो रहा है और देखो ना खून भी आया है अब मैं शूशू कैसे करूँगी?

वो हँसते हुए मेरी पेंटी से मेरी चूत साफ करते हुए बोला – अरे पागल मज़े लेने वाली हर लड़की को एक बार थोड़ा खून ज़रूर आता है, अब तुझे कभी दर्द नहीं होगा जा झाड़ियों में जा कर पेशाब कर के आ तुझे बहुत आराम मिलेगा।

मैने पेशाब किया तो थोड़ी जलन हुई, लेकिन मझे बहुत आराम मिला। जब मैं वापस आई तो वो बोला – घर जा कर गर्म पानी से सिकाई कर लेना और किसी को कुछ मत बताना, अब तो तुझे बहुत मज़ा आया करेगा।

घर आकर मैंने अंपनी चूत की सिकाई करी, और बिना खाना खाए ही मैं सो गयी। रात को मम्मी ने मुझे जगाया और खाना खिला कर पूछा – क्या हुआ लाडो?

मैं – कुछ नहीं मम्मी थक गयी हूँ बस।

ये कह कर मैं फिर से सो गयी। मैं सुबह उठी तो मेरा सारा दर्द गायब हो चुका था और मेरी चूत फिर से उंगली माँग रही थी। मैं जल्दी से तैयार हो कर राजू भैया के साथ निकल गयी।

उस दिन मैने पेंटी भी नहीं पहनी, सूनसान सड़क पर आते ही मैने राजू भैया का हाथ अपनी चूत पर रख कर दबा दिया। वो हँसते हुए मेरी चूत में उंगली चलाते रहे और मैं मज़े लेते हुए स्कूटर चला रही थी।

थोड़ी देर बाद ही मेरी चूत ने पानी फैंक दिया, और मैं स्कूटर रोक कर मज़े लेने लग गयी। मुझे राजू भैया पर बहुत प्यार आया तो मैने उनके गाल पर चूम लिया।

फिर राजू भैया मेरे चहरे को हाथों में ले कर मेरी आँखों में देखते हुए बोले – मज़े देने वाले मर्द को ऐसे चूमते।

उन्होने अपने मोटे मोटे होंठ मेरे पतले से होठों पर रख दिए, उनके मूँह से बीड़ी की बदबू आ रही थी लेकिन मैं फिर भी उनसे चिपकी रही और वो मेरे होठों का रस पीते रहे।

फिर अलग होकर वो मेरी आँखों में झाँकने लगे, तो मैने शर्मा के मुस्कुराते हुए अपनी आँखें झुका लीं।

इसके आगे क्या क्या हुआ, ये मैं आपको अपनी इसी कहानी के अगले भाग में जरुर बताने जल्दी हि आउंगी।

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