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गे सेक्स स्टोरी पठन समय: 11 मिनट पढ़ा गया: 1,189 बार

मेरी गांड की नेहा

प्रकाश बेहेरे

30 Nov 2008 को प्रकाशित

मेरी गांड की नेहा
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मेरी आयु 20 वर्ष है, मैं एम ए प्रथम वर्ष का छात्र हूँ।यह घटना 3 वर्ष पुरानी है जिसे आज मैं आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ।बात उन दिनों की है जब मैं B.A के पहले साल में था। मेरे दो दोस्त राकेश और कमल मेरे ही साथ ही हॉस्टल में बगल वाले कमरे में रहते थे।उनके पास उनका पर्सनल कम्प्यूटर था, वे दोनों अक्सर कालेज से छूटने के बाद शाम को कम्प्यूटर पर चेटिंग करते थे और फ़िल्में देखा करते थे, मैं भी उन के साथ कभी कभी फ़िल्में देख लिया करता था।

एक दिन मुझे कुछ नोट्स की जरूरत पड़ी तो मैं नोट्स लेने उनके कमरे में गया तो वो दोनों एक दूसरे का लंड पकड़ कर एक दूसरे का मुट्ठ मार रहे थे।मैं तुरंत बाहर आकर अपने कमरे में वापिस आ गया। मैंने उनको मुट्ठ मारते देखा था तो अब मेरे अन्दर हलचल होने लगी और मेरा लिंग ठुमके मारने लगा।मैंने तुरंत बाथरूम में जाकर अपनी मुठ मारी तब जाकर मुझे राहत महसूस हुई लेकिन अन्दर ही अन्दर ‘वो क्या देखकर मुठ मार रहे थे’ जानने की इच्छा हो रही थी।

मैं फिर से उनके कमरे में गया, अब वो दोनों बिल्कुल नंगे होकर 69 के आसन में एक दूसरे का लिंग चूस रहे थे।मुझे देखते ही मुझे अन्दर आने और दरवाज़ा बंद करने के लिए कहा और वो दोनों पुनः अपने काम में लग गए।मैं उनको खड़े खड़े देख रहा था और मेरे लिंग लुंगी के अन्दर ही अन्दर उछल-कूद कर रहा था, मैं अपने लंड को लुंगी के बाहर से पकड़ कर मसल रहा था।

तभी राकेश बोला- वहाँ खड़े खड़े क्या कर रहे हो? मजा लेना है तो लुंगी उतार दो और आ जाओ।मैंने भी अपनी लुंगी खोल दी और मुठ मारने लगा।तभी वो दोनों खड़े हो गए और नीचे बैठकर बारी बारी मेरा लंड चूसने लगे।अब मुझे एसा लग रहा था कि मानो स्वर्ग का सारा सुख मिल गया हो।मैं भी अपनी कमर हिलाहिला कर उनके मुँह के अन्दर लंड पेल रहा था।

तभी कमल बोला- ऐसे मजा नही आ रहा है, सब एक दूसरे का चूसते हैं।और हम लोग गोल घेरा या त्रिभुज बनाकर एक दूसरे का लंड चूसने लगे, अब सबको एक बराबर मजा मिल रहा था।अब कमरे में ‘हुम्म्म म्म्म म्म्म्म्म् फअकक पुच्च च्च्च च्च च्च्च्च च्च्च्च सपड़ सपड़’ की आवाजें आने लगी जिससे कमरे का माहौल और सेक्सी और रूमानी हो गया।

तभी कमल अपने हाथ में थूक लेकर मेरी गांड पर लगा कर मेरी गांड में उंगली करने लगा, साथ ही साथ मेरे लंड को भी चूसते जा रहा था जिससे मुझे दर्द कम मजा अधिक आ रहा था।धीरे धीरे कमल ने अपनी दो उंगलियाँ भी मेरे गांड में डाल दी जिससे मुझे अब दर्द हो रहा था, मैंने भी सोचा कि चलो देखा जायेगा।

राकेश- क्यों संजय, मजा आया ना? कहो कैसा लगा?कमल- क्यों संजय बोलो, गांड की खुजली मिटी या नहीं?राकेश- क्यों कमल, तुमने संजय की गांड भी चोद दी, क्या मुझे पता भी नहीं चला।कमल- मैंने तो उंगली भर डाल कर ढीला किया है। क्यों है न?मैं- हाँ, मजा तो आया पर गान्ड में दर्द हो रहा है।

राकेश- होता है… होता है, पहली पहली बार होता है। अब नहीं होगा, हमारे भी हुआ था पर अब नहीं होता।मैं- मतलब तुम लोग एक दूसरे की गांड भी मारते हो? दर्द नहीं होता?राकेश- कहा न… पहली बार ही होता है। एक बार लंड का सुपारा अन्दर गया तो दर्द बाहर फिर मजा ही मजा… लगता है तुमने अभी इसका स्वाद नहीं चखा है। कमल, आज इसको मजा दिला ही देते हैं।कमल- क्यों संजय, लेना है न मजा?

मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या कहूँ, मैंने अपनी सर हिला प्रिया, वैसे तो मेरे भी इच्छा हो रही थी क्योंकि जब से कमल ने मेरी गांड में उंगली डाली थी, तब से एक अजीब प्रकार की खुजली हो रही थी।

कमल- यार राकेश, जब हम कोई काम पहली बार करते हैं तो नेहा अवश्य करते हैं। और फिर संजय के दरवाजे का दीदार होना है तो इसकी नेहा भी तो करनी होगी।राकेश- ठीक कह रहे हो, जाओ बाजार से कुछ मिठाई ले आओ।

राकेश के कहने पर कमल कपड़े पहन कर बाजार चला गया और राकेश ने अपने लैपटोप पर ब्लू दिखाने लगा।ब्लू फिल्म गे लड़कों की थी।फिल्म देखते देखते हम दोनों फिर उत्तेजित होने लगे तब हम दोनों ने एक दूसरे के लंड को पकड़ कर सहलाना चालू कर प्रिया और बाद मैं एक दूसरे का लंड चूसते चूसते एक दूसरे के मुँह में पिचकारी छोड़कर अपनी गर्मी को शांत किया।

कुछ देर बाद कमल बाजार से आ गया, वह अपने साथ एक बियर की बोतल भी लाया था।पहले बियर के तीन जाम बनाने के बाद एक जाम मुझे भी पकड़ा प्रिया।

मैंने पहले कभी बियर नहीं पी थी लेकिन उनके कहने पर मैंने जैसे ही एक घूंट पिया तो मुझे उल्टी सी होने लगी।तभी कमल ने मुझे एक ही घूंट में पीने को कहा और मैं एक ही घूंट में पी गया। थोड़ी देर बाद फिर उन्होंने मुझे एक जाम और प्रिया लेकिन अब मुझे उबकाई नहीं आ रही थी तो मैं धीरे धीरे पीने लगा।

अब मुझे बियर का नशा छाने लगा और सब घूमता सा नजर आने लगा लेकिन एक आनन्द आ रहा था।कमल- संजय ठीक तो हो न, कोई दिक्कत तो नहीं? कैसा लग रहा है?मैंने सर हिला कर उत्तर प्रिया।

तभी कमल ने अपने लंड के उपर रसगुल्ले का रस लगाकर मेरे सर को पकड़ कर अपने लंड पर झुका प्रिया और लंड को चूसने के लिए कहा।अब मैं नशे में था और उसके मीठे लंड को चूसने लगा।‘आअह खा ले मेरे लंड को आआ… आआह…’

तभी राकेश ने मेरे पिछवाड़े में जाकर रसगुल्ले के रस को लगाया और अपनी जीभ से गांड के छेद को चाटने लगा और बोला- हुम्म… बड़ी प्यारी और मीठी गांड है तुम्हारी… आआउ!चपर चपर कर जीभ रगड़ने लगा, जीभ के खुरदुरेपन से मुझे बहुत अच्छा लग रहा था।

कुछ देर चाटने के बाद राकेश ने अपना लंड मेरी गांड के छेद पर लगाकर हल्के से धक्का प्रिया तो लंड का टोप मेरे गांड के अन्दर चला गया।‘आआआ आआआआह अईईईई ईईईई…’ मुझे इतना दर्द हुआ कि मैं चिल्लाने वाला था पर मेरे मुँह में कमल का लंड घुसा हुआ था।मेरी आँखों में आँसू आ गये।

राजेश- बस बस थोड़ा और सब्र करो मेरे प्यारे, अभी मजा आने लगेगा।तभी राजेश ने एक धक्का प्रिया तो पूरा लंड मेरी गांड के अन्दर हो गया।मुझे ऐसा लग रहा था कि किसी ने मेरी गांड में लोहे का गर्म सरिया डाल प्रिया हो पर मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा था, आगे से कमल मेरा मुँह चोद रहा था और पीछे से कमल मेरी गांड… राकेश धक्का मार रहा था, तभी एक जोर से धक्का प्रिया तो मैं आगे सरक गया जिससे कमल का लंड मेरे गले तक पहुंच गया।

कुछ देर करते करते मेरी गान्ड का छेद भी फ़ैल गया था और मुझे भी मजा आने लगा था, अब मैं भी उनक साथ देने लगा और अपनी गांड आगे पीछे करने लगा।मैं – इस्स्स स्स स्स्स स्स्स्स आआआअ पुच्चपूच्च हाआअय और डाल दो… आआआआह माआजा आआअ रह्ह्ह्ह्हा है फाड़ दो आज साली को !अब कमरे में ‘फक फक आआह’ के अलावा कोई दूसरी आवाज नहीं आ रही थी। कुछ देर बाद कमल का पानी छूट गया और वो मेरे सामने आ गया और अपना लंड मेरे मुँह में डाल प्रिया।मुझे घिन आ रही थी फिर भी उसने मेरे मुंह में डाल प्रिया।

अब राजेश मेरी गांड मारने लगा, उसका लंड कमल के लंड से बड़ा और मोटा भी था, मैंने उसको मेरा छेद को चिकना करने के लिए कहा लेकिन उसने नहीं सुना और एक जोरदार झटका मार कर मेरे गांड में अपना लंड पेल प्रिया।मेरा दर्द के मारे बुरा हाल था, वह जोर जोर से झटके मारने लगा।

मैं- आआआअ… धीरे करो, लगता है न!राजेश- अबे भोंसड़ी के, कमल से मरवा रहा था तो दर्द नहीं हो रहा था मेरे से दर्द हो रहा है? आज मैं तेरी फाड़ के रहूंगा!और राजेश जोर जोर से धक्के मारने लगा।इधर कमल का भी लंड फिर से कड़क मुसल सा खड़ा हो गया और मेरे मुँह में जोर जोर से लंड डालने लगा जिससे उसका लंड मेरे गले में फंस रहा था।

तभी राजेश ने एक जोर से झटका मार कर अपना लंड का पानी मेरे अन्दर छोड़ प्रिया और अपना लंड बाहर निकाल लिया और अपने लंड को कमल से चुसवाने लगा।

काफी देर घोड़े की पोजीशन में होने के कारण मेरे पैर दुखने लगे थे।मेरा लंड अभी खड़ा था तो मैं खड़ा हो गया और कमल के पीछे आ गया और उसकी गांड में अपना लंड डाल मैं उसकी गुदा मारने लगा और उसके लंड को सहलाता भी जा रहा था।

कमल- आ जा मेरी जान, बहुत देर से तेरी गांड मर रही है, अब तू भी मजा ले ले, आ जा मेरी गांड में डाल दे अपना हथियार… देखें तुम्हारे में कितना दम है।अब मैं भी कमल के पीछे आ गया और एक ही झटके में अपना लन्ड अन्दर कर प्रिया।कमल और राजेश की एक दूसरे से गांड मरवाते मरवाते फ़ैल चुकी थी जिस कारण मेरा लंड एक ही झटके में अन्दर चला गया और झटके मारने लगा।

तभी ‘यार राजेश, अब तू घोड़ा बन जा, अब तेरी गांड मारनी है!’ कमल ने राजेश को घोड़ा बनने के लिए कहा तो राजेश घोड़ा बन गया। अब कामल ने राजेश की गांड मारनी शुरू कर दी।इस तरह से हम तीनों एक दूसरे की गांड मारते रहे। बीस मिनट करते करते मैंने अपना लंड रस उसकी गांड में छोड़ प्रिया और लंड बाहर निकाल लिया तो राजेश ने मेरे लंड को अपने मुँह से चाट कर साफ कर प्रिया।इसी तरह हम तीनों ने रात भर बारी गांड और मुँह को चोदा।

सुबह मेरी गांड में बहुत जोरों का दर्द हो रहा था लेकिन मजा आ गया था।इसी तरह हम तीनों जब कभी मिलते हैं तो एक दूसरे की गान्ड चुदाई अवश्य करते हैं।

भाई लोग बताते हैं कि कोई दर्द नहीं होता पर असली में गांड मरा कर देखो तब पता चलेगा कि दर्द होता है या नहीं।तो दोस्तो, यह थी मेरी गांड की नेहा की कहानी। कैसी लगी इसका उत्तर अवश्य दें।आपका संजयsupport@mohakkisse.com

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पाठकों की राय

2 टिप्पणियां

सागर पाठक

2 months ago

कहानियों का ये संग्रह बहुत ही अच्छा है। आपका फैन हो गया हूँ।

आदेश मौर्य

2 months ago

बहुत ही गजब का लिखा है लेखक भाई। आपका लिखने का स्टाइल बहुत बढ़िया है।

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