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भाई बहन • पठन समय: 9 मिनट • पढ़ा गया: 850 बार

मोनी दीदी की कुंवारी चूत चोदी

राहुल 8

06 May 2008 को प्रकाशित

मोनी दीदी की कुंवारी चूत चोदी
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Moni Didi Ki Kunvari Choot Chodi

मेरे घर में मेरे मां-पिताजी हैं और हमारे साथ मेरे दूर की रिश्ते की एक बड़ी दीदी भी रहती हैं.. जिनका नाम मोनी था। मैं उसे मोनी दीदी कहकर पुकारता था। वो मेरे माँ-बाप को अपना माँ-बाप ही मानती हैं।

यह कहानी आज से तीन साल पहले की है.. जब मेरे स्कूल की बोर्ड की परीक्षा शुरू होने वाली थीं और मैं परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग भी कर रहा था।

मोनी काफी सुन्दर हैं, उसके जिस्म का नाप तब 34-26-35 था। वो बहुत गोरी एवं स्मार्ट है। जब भी मैं उन्हें अपने साथ बाइक पर बैठा कर कहीं ले जाता था.. तो लोग उसे भूखे कुत्तों की नजरों से देखते थे।

मेरे द्वारा बार-बार ब्रेक लगाने से उसके बड़े-बड़े चूचे मेरी पीठ पर टकराते.. तो मुझे बड़ा मजा आता था।मैं सच कहूँ.. तो मैं उसे चोदना चाहता था.. पर मुझे डर लगता कि घर में वो कह ना दे.. ओैर मुझे उससे अपनी ये इच्छा कहने में भी झिझक होती थी।

मेरे पापा अपने बिजनेस के सिलसिले में हमेशा बाहर जाते रहते थे। घर पर बाहर का सारा काम मुझे ही करना पड़ता था।

एक दिन मेरे मामा का फोन आया और मम्मी को अपने घर नेहा पर आने का न्यौता प्रिया।

मेरी मम्मी ने मुझसे कहा- विकास.. तुम मुझे विवेक के यहाँ छोड़ दो।

मेरे मामा का नाम विवेक है। चूंकि मेरे पापा दो दिन पहले ही अपने बिजनेस के सिलसिले में नासिक गए हुए थे। तो मैं अपने बाइक पर मम्मी को मामा के यहाँ ले गया.. जो मेरे घर से मात्र 5 किलोमीटर दूर था और मैं वहाँ पहुंच कर टीवी देखने लगा।

इतने में मेरी दीदी ने मम्मी को फोन किया और कहा- मम्मी मैं कॉलेज से आ गई हूँ और घर में ताला लगा हुआ है.. आप कहाँ हो और विकास भी घर पर नहीं है।

मम्मी- बेटी.. विकास मेरे साथ विवेक मामा के यहाँ आया हुआ है.. क्योंकि यहाँ नेहा है.. मैं नहीं आ सकती.. मुझे आने में रात हो जाएगी.. मैं विकास को घर की चाबी देकर अभी घर भेजती हूँ.. तुम वहीं अपने भाई का इन्तजार कर लो।

मैं चाभी लेकर घर पहुँचा तो देखा कि दीदी मेरे आने का बेसब्री से इन्तजार कर रही थीं।

मुझे देखकर उसे कुछ राहत हुई और बोली- चल.. ‘जल्दी खोल’.. मुझे प्यास लगी है।

मैं- क्या खोलूँ?

दीदी- दरवाजा और क्या?

मैं- मैं समझा कि कुछ और कह रही हो।

वो मुस्कुराते हुए मुझे तिरछी नजरों से देखते हुए घर के अन्दर प्रवेश कर गईं।

काफी गरमी होने की वजह से वो मुझसे एक गिलास पानी लाने की कह कर.. अपने कपड़े बदलने सीधे अपने कमरे में चली गई.. और उसने जल्दबाजी के कारण अपने कमरे का दरवाजा अन्दर से बन्द नहीं किया।

मैं उसे ठंडा पानी देने जैसे ही उसके कमरे में गया.. तो मैं उसे अपलक देखता ही रह गया और वो भी मुझे देख कर भौंचक्का रह गई कि क्या करे.. क्या ना करे।

वो सिर्फ ब्रा में थी जो आधी खुली थी और आधी बंद थी और नीचे से वो बिल्कुल नंगी थी।

मेरा 7 इंच का लौड़ा एकदम खड़ा सलामी दे रहा था, मैं तो जानबूझ कर ही उसके कमरे में उसे देखने के लिए गया था।

वो मुझे देखकर शरमा सी गई थी.. लेकिन मैंने उससे ‘सॉरी’ कहकर पानी जैसे ही प्रिया.. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- खोलो।

मैंने कहा- क्या?

वो बोली- ज्यादा भोले मत बनो.. अभी थोड़ी देर पहले ही तो तुमने मुझसे पूछा था कि मैं क्या खोलूँ?

वो अब भी ब्रा में ही थी और मेरा लौड़ा एकदम टाइट होकर आगे की तरफ साफ नजर आ़ रहा था।

मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी दोनों चूचियों को पकड़ा और जोर-जोर से दबाना और चूसना शुरू कर प्रिया।

वो ‘आह.. आह..’ की आवाज निकाल रही थी.. क्योंकि उसकी चूचियां बहुत बड़ी थीं और मैं भी जन्मों से प्यासे की तरह उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूस रहा था।

थोड़ी देर बार मैं उसके होंठों को चूसने लगा और वो भी मुझे साथ देने लगी।

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अब मैं- उसके दोनों मम्मों को आजाद कर प्रिया और उसकी पैंटी को उतारने लगा।

मैंने कहा- दीदी.. मैं अब आपको चोदना चाहता हूँ।

दीदी- तो तुझे रोका किसने है? चोद दे अपनी दीदी को और उसके तन-मन की प्यास को मिटा दे।

मैं- दीदी.. मैंने कभी किसी को आज तक चोदा नहीं है.. सिर्फ ब्लू-फिल्मों में ही देखा है।

वो मेरे लण्ड को अपने गोरे-गोरे हाथों से निकाल कर सहलाने लगी और मेरा लण्ड अपनी दीदी के बुर में जाने के लिए एकदम से तैयार हो चुका था।

मैं अपनी दीदी की चिकनी की हुई बुर को अपने जीभ से चाटने लगा और अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को भी मसलने लगा।

वो अब बिल्कुल बदहवाश होने को थी।उसके मुँह से ‘सी… सी.. और आह.. आह..’ की आवाज निकल रही थी। वो उस वक्त गजब की माल लग रही थी।

दीदी- अब मत तरसा अपनी दीदी को और चोद दे मेरी प्यारी बुर को…

मैं उसके बाद 69 के आसन में अपनी अवस्था को बनाया। अब वो मेरे लंड को चूसने लगी और मैं उसकी बुर को जोर-जोर से चूसने लगा।

थोड़ी देर बाद दीदी स्खलित हो गई.. मैं उसकी बुर का सारा पानी पी गया।

मेरा भी माल गिर चुका था.. मगर अभी उसकी कुंवारी बुर को चोदने की मेरी तमन्ना तो बाकी ही थी।

मैंने फ्रिज से आइसक्रीम निकाल कर अपना सोए हुए लंड पर लगाई और दीदी को चूसने के लिए बोला।

वो भी रंडी वाली नजरों से मेरे लंड को निहार रही थी और बड़े ही कामुक तरीके से अपने मुँह से मेरे लंड पर लगी आइसक्रीम को धीरे-धीरे खाने लगी।

जैसे-जैसे आइसक्रीम खत्म हो रही थी.. मेरा लंड उठता ही जा रहा था। फिर वो मेरे लंड को अपने गले तक घुसेड़ कर चूसने लगी.. मुझे तो जैसे जन्नत मिल गई हो। मैं बहुत ही आनन्द का अनुभव कर रहा था।

फिर मैंने दीदी को पलंग पर सीधा लिटाया और उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रख कर और अपना तन्नाया हुआ लवड़ा.. उसकी लाल बुर के छेद पर रखकर एक जोरदार धक्का मारा।

‘उई मां.. मार प्रिया साला.. हरामी.. बहनचोद.. छोड़ मुझे..’

वो इतनी जोर से चीखी कि क्या बताऊँ? मैंने उसके मुँह को चूमना शुरू कर प्रिया।

उसके बाद मुझसे रहा नहीं गया और मैंने जोर-जोर से उसकी बुर के अन्दर अपने लम्बे लंड से चोटें मारने लगा। वो भी अब मेरा साथ देने लगी।

मुझे बहुत मजा आ रहा था.. वो भी अपनी आंखें मूंदकर मजे का अनुभव ले रही थी.. मानो वो कितने जन्मों से चुदवाने के लिए तरस रही हो।

आप सबको तो पता ही होगा कि लड़का का एक बार झड़ने के बाद दूसरी बार देर से झड़ता है.. इसलिए मैं इस बार उसे 25 मिनट तक जोर-जोर से चोदता रहा था।

‘आई.. मर गई.. फाड़ डाल.. चोद मेरे लाल.. चोद.. अपनी बहन की बुर का भोसड़ा बना दे.. ताकि कोई इसे दुबारा ना फाड़ सके।’

उसकी इस तरह की बातों से मुझे और जोश आता और मैं ओैर जोर से मारता। अन्त में मैंने अपना वीर्य उसकी बुर में ही गिरा प्रिया.. क्योंकि मुझे पहले से कोई अनुभव नहीं था।

हमारी चुदाई के बाद हम दोनों ने साथ में नहाया और एक-दूसरे के अंगों पर साबुन लगाया।

उस दिन की चुदाई के बाद.. अब जब भी मौका मिलता हम दोनों नए-नए स्टाइल में चुदाई का खेल खेलते।

वो एक बार गलती से प्रेगनेन्ट भी हो गई थी। उस गलती के अनुभव के बाद तो मैंने उसको और कईयों को संभल कर चोदा।

अच्छा दोस्तों.. अब अभी बस इतना ही.. मेरा लौड़ा खड़ा हो गया है..मुठ मारना पड़ेगी। अपनी चुदाई की एक नई कहानी अगली बार पेश करूँगा।

आप ईमेल करके जरूर बताना कि यह चुदाई कैसी लगी?

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