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Hindi Chudai Kahani पठन समय: 10 मिनट पढ़ा गया: 1,063 बार

संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-10(Sanskari vidhwa maa ka randipana-10)

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30 Dec 2021 को प्रकाशित

संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-10(Sanskari vidhwa maa ka randipana-10)
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फिर हम लोग घर से निकल जाते हैं। हमारे सभी पड़ोसी मम्मी और जुनैद को ही देख रहे थे। कुछ लोग तो आपस में बाते भी कर रहे थे। मेरी मां को फिर भी कोई शर्म लाज नहीं आ रही थी। वो जुनैद का हाथ पकड़े रास्ते में चल रही थी। फिर जुनैद मम्मी को एक मॉल में लेकर जाता है। मम्मी उधर जुनैद की पसन्द की कुछ फैंसी ड्रेस लेती है और कुछ ब्रा पैंटी के सेंट।

पूरे मॉल में जुनैद मम्मी की कमर में अपना हाथ डाल कर चल रहा था, जैसे वो पति-पत्नी हो। आज मुझे मम्मी के चेहरे पर जो खुशी दिख रही थी, वैसी पहले कभी नहीं देखी थी। मेरी मम्मी अपनी नंगी कमर पर जुनैद का हाथ रखवा कर मटक-मटक चल रही थी। फिर शॉपिंग करने के बाद मैं खाने के लिए होटल चॉइस करता हूं।

तभी मम्मी बोली: बेटा आज जुनैद जी को चॉइस करने दो होटल।

जुनैद बोला: यहां से थोड़ी दूर पर मेरे दोस्त का ही होटल है, हम उधर चलते हैं।

मम्मी: जुनैद जी जैसा आपको अच्छा लगे।

फिर हम जुनैद के कहने पर चल रहे थे। मेरी मम्मी एक संस्कारी औरत की तरह अपने सिर पर साड़ी का पल्लू रख कर चल रही थी। देखने वाले लोगों को लग रहा था जैसे यह पति-पत्नी घूम रहे हैं। फिर जुनैद हमे होटल के सामने लाता हैं, जिसे देख मम्मी और मैं बोल पड़ते हैं, “जुनैद हम तो यह पहले आ चुके है।”

जुनैद: यह मेरे खास दोस्त का होटल है। आज मैं उनसे अपको मिलवाता हूं।

मम्मी बोली: जुनैद जी मैं आपके दोस्त से कैसे मिलूंगी? मुझे उनके सामने शर्म आएगी।

फिर मम्मी अपनी साड़ी को नाभि से ठीक करती है, और अपने सिर का पल्लू और नीचे कर लेती हैं, जैसे एक नई नवेली दुल्हन हो। फिर हम लोग होटल के अंदर जाते हैं। अंदर मम्मी जुनैद के साथ मेरे सामने वाले सोफे पर चिपक कर बैठ गई थी। फिर जुनैद एक वेटर से पानी मांगता है, और उसे अपने दोस्त के बारे में पूछता है।

वेटर ने बताया: मालिक अभी बाहर गए है, थोड़ी देर में आ जाएंगे।

जब तक हम कुछ नाश्ता करते हैं। मैंने देखा मम्मी को जब मिर्ची लगती है, वो जुनैद का जूठा गिलास उठा कर उसका पानी पी लेती है, और गिलास पर अपने होठों की लिपस्टिक के निशान छोड़ देती है।

मेरी मम्मी जुनैद की आंखों में देखते हुए बोली: जुनैद जी आप ना होते तो यह खुशी मुझे कभी नहीं मिलती। राहुल के पापा तो कभी बाहर घूमने में दिलचस्पी नहीं रखते थे।

जुनैद: सविता जी, अब मैं आ गया हूं। आपको किसी बात की कमी नहीं होगी। आपने मुझे परिवार का हिस्सा बना दिया है।

मैं भी मम्मी की खुशी के लिए बोल दिया: हां जुनैद तुम मेरे परिवार का एक हिस्सा हो। बस तुम्हें घर के लिए थोड़ी और मेहनत करनी है।

जुनैद: मैं तो कुछ भी करने के लिए तैयार हूं। बाकी मेरी मेहनत सविता जी कल देख ही ली थी।

मम्मी जुनैद की बात से शर्मा जाती है। उन्हें पता था जुनैद कल रात की दमदार चुदाई वाली मेहनत की बात कर रहा था।

मम्मी शर्माते हुएं बोली: जुनैद जी आप राहुल के पापा से भी अच्छी मेहनत करते हो। मैं तो खुशनसीब हूं जो आप मुझे मिले।

दोनों ही डबल मीनिंग में बात कर रहे थे। मेरे सामने उन्हें लग रहा था, जैसा मैं कुछ समझा नहीं। मैं भी अंजान बनते हुए-

मैं बोला: मम्मी आप किस चीज की बात कर रही है। जुनैद ने पापा से अच्छी मेहनत कैसे?

मम्मी शर्माते हुएं बोली: कुछ नहीं बेटा, जुनैद जी ने कल वाली डील में अच्छी मेहनत की थी।

मैं: हां मम्मी वो तो है। जुनैद तारीफे काबिल है। वैसे हमे काफी समय हो गया, अब घर चलना चाहिए।

जुनैद: मेरा दोस्त आता ही होगा। हम उसे मिल कर घर चलेंगे।

फिर मैं ठीक है बोल कर वाशरूम चला जाता हूं। जब थोड़ी देर बाद मैं उनके पास जाने लगा, मैंने देखा मेरी जगह पर एक आदमी बैठा हुआ था। जो देखने में काफी गौरा और तगड़ा लग रहा था। जुनैद से भी ज़्यादा उसका बदन चौड़ा और गठीला था। मैं उनके कुछ और नजदीक गया उनकी बाते सुने के लिए। मैं उनके बगल के सोफे पर बैठ गया, जहां से मैं आराम से उन्हें देख रहा था। मैंने देखा मेरी मां उसको ही देख रही थी, और वो मम्मी की तारीफ किए जा रहा था।

जुनैद बोला: आरिफ भाई अब बस भी करो। देखो तुम्हारी भाभी शर्माने लगी है।

आरिफ: जुनैद जितना तुमने बताया था, भाभी उससे भी ज़्यादा खूबसूरत हैं।

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मम्मी शर्माते हुएं अपना सिर जुनैद के सीने में छुपा लेती हैं। जुनैद मम्मी की नंगी पीठ पर हाथ फेरने लगता हैं, जिसे देख आरिफ बोला: सच में जुनैद, तुम बहुत लकी हो, जो सविता जैसी भाभी तुम्हें मिली। वैसे आपके बीच कुछ हुआ या नहीं?

मम्मी आरिफ की बात सुनते ही जुनैद की आंखों में देखने लगती हैं, और जुनैद को एक कातिलाना मुस्कान दे देती हैं, जिससे जुनैद बोला: हां, कल ही हमारी एक खूबसूरत फर्स्ट नाइट बीती है। सविता जी को पाकर मुझे काफी खुशी हुई।

मम्मी जुनैद की बाते सुन के उससे और शर्माने लगी थी, और उसके सीने में एक-दो घूंसे मार देती है।

आरिफ: भाभी जी अब हमसे क्या शर्माना? अब बोलो भी कैसी रही आपकी जुनैद के साथ रात?

मम्मी अपनी चुदाई की बातें एक नए मर्द के सामने सुन के काफी शर्मा रही थी। और जुनैद की आंखों में अपनी नशीली आंखों से देख रही थी।

जुनैद बोला: सविता, आरिफ मेरा दोस्त ही नहीं एक भाई जैसा भी है। हम दोनों अपनी कोई बात नहीं छुपाते, तुम खोल के बोल सकती हो।

दोनों मम्मी से काफी जिद करते है बोलने के लिए। फिर मम्मी अपनी शर्म को दूर करते हुए बोली: काफी अच्छी रही जुनैद जी। ऐसा प्यार मुझे कभी नहीं मिला था। इतना बोल के मम्मी शर्माते हुवे जुनैद की बाहों में लिपट जाती हैं।

साला आरिफ मां की नंगी कमर और गांड को ही देखते हुए बोला: फिर तो जुनैद की रात काफी रंगीन रही होगी।

जुनैद: हां सविता जी की एक इच्छा है उसे हम अच्छे से पूरी करना चाहते हैं।

आरिफ: क्या इच्छा है हमें भी तो बताओ?

जुनैद मम्मी का फेस ऊपर करता है और उनके होठों पर चूम लेता है। फिर अपना एक हाथ मम्मी की गांड पर फेरते हुए बोला: इनकी इच्छा सुहागरात की हैं। तुम्हारी भाभी को गांड अभी कोरी हैं।

आरिफ: वाह क्या बात है जुनैद! तुम तो बड़े ही क़िस्मत वाले निकले। मैं तो आप लोगों के लिए अल्लाह से यही दुआ करूंगा कि आप लोगों की जोड़ी बनी रहे।

मैंने देखा मम्मी का फेस कभी कामुक और मदहोश हो गया था, उनके मुंह से अपनी चुदाई की बातें सुन कर। उन्हें देख कर लग रहा था कही ना कहीं वो अपनी बातों से गर्म हो रही थी। जुनैद मेरी मां की चुदास को देखते हुएं आरिफ के सामने ही मम्मी के होठों पर किस्स कर लेता है और बोला: मेरी जान से मुझे कोई अलग नहीं कर सकता।

आरिफ: वैसे आप लोगों ने सुहागरात प्लान किया या नहीं?

जुनैद: आरिफ भाई अभी तो हम सोच ही रहे थे।

आरिफ: मेरा मनाली में अपना रिसॉर्ट है। आप लोग चाहे तो उधर आराम से सुहागरात मना सकते। यह मेरी तरफ से भाभी जी के लिए एक तोहफ़ा है।

मम्मी खुश होती हुई बोली: थैंक्स आरिफ जी, आपने हमारे लिए इतना सोचा। मुझे आपसे मिल कर खुशी हुई।

आरिफ: भाभी जी मुझे थैंक्स नहीं बस आपके हाथों की चाय पीनी है।

जुनैद: हां आरिफ भाई, हम आपको चाय पर जरूर बुलाएंगे, क्यूं मेरी जान?

मम्मी: जी हां, और आपको मैं अपने हाथों से नाश्ता भी कराऊंगी।

आरिफ: ठीक है फिर मैं इंतज़ार करूंगा। अब काफी समय हो गया है, अब मुझे चलना चाहिए।

मम्मी: आप हमारे बेटे से एक बार मिल कर जाएं। वो आता ही होगा।

मुझे मम्मी की बात सुन कर गुस्सा और एक काफी खुशी भी हो रही थी, कि मुझे अपनी ही मां की सुहागरात देखने को मिलेगी, जो कुछ ही बेटों को नसीब होती है। यह सब सोचने के थोड़ी देर बाद मैं उनके पास गया था। फिर जुनैद ने मेरा परिचय आरिफ से कराया। मैंने मम्मी के सामने उन्हें सलाम किया और उनके काम की तारीफ करी।

मुझे याद आया जब मैं फास्ट टाइम मम्मी को लेकर यहां आया था, यही साला मेरी मां को बहुत घूर रहा था। पर यह बात अभी जुनैद को नहीं पता थी। आरिफ का मम्मी को अपने रिसॉर्ट पर सुहागरात करने इन्वाइट करना मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं सोचा वक्त आने पर इसका भी पता लग ही जाएगा। फिर थोड़ी देर बाद हम होटल से अपने घर के लिए निकल गए।।

दोस्तों इसके आगे क्या हुआ वो मैं आपको अगले भाग में बताऊंगा। आरिफ के रिसॉर्ट पर मम्मी जाती हैं या नहीं उसको जानने के लिए मेरी कहानी पर बने रहे। उम्मीद करता हूं कि आपको मेरी कहानी पसंद आ रही होगी। इस कहानी का फीडबैक ईमेल पर जरूर support@mohakkisse.com दे आप सभी पाठकों को धन्यवाद।

अगला भाग पढ़े:-संस्कारी विधवा मां का रंडीपना-11

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